पान से गंधलाये दाँत… चेहरे पर उतर आयी झुर्रियाँ… ढली जवानी का क्वारापन और अपने ही भाई कामबख्स के साथ अवैध सम्बन्ध…
उस समय की बादशाह बेग़म #ज़ीनत_उन_निसा जो औरंगजेब की तीसरी संतान और बड़ी लाड़ली भी…
ज़ीनत अपनी जवानी में बड़ी ही खूबसूरत थी पर घर के अमरुद घर में खाने की रवायत ने उसका ब्याह न होने दिया….
और जब औरंगजेब दक्कन में मराठों के विरुद्ध अभियान पर निकला तो उसके खेमे में उसकी जवान रखैल उदयपुरी महल और अधेड़ बेटी ज़ीनत भी साथ थे
ज़ीनत के सामने तो मुग़लिया दरबारी खौफ खाते पर पीठ पीछे उसकी उम्र और हरकतों को बूढी घोड़ी लाल लगाम का तमगा भी देते…. और खुद से 24 साल छोटे सौतेले भाई मोहम्मद कामबख्स मिर्ज़ा से सम्बन्ध पर खूब कानाफूसी भी करते… कामबख्स पर ज़ीनत ने बड़ी छोटी उम्र का रहते ही कब्ज़ा ज़मा लिया था… और इसी के चलते सगा भाई अकबर उससे सख्त ख़फ़ा रहता था..
खैर जब #छत्रपति_शम्भूराजे धोखे से गिरफ्तार हुए और उसके बाद उनपर हुए अत्याचार में इस यौन कुंठित ज़ीनत का भी बड़ा हाथ था…
46 की उम्र की बिन ब्याही ज़ीनत औरंगजेब के साथ वहाँ मौजूद थी जब औरंगजेब ने शम्भूराजे को इस्लाम कुबूलने का प्रस्ताव दिया और इसके बदले 50 हज़ार सवार की मनसबदारी व सारे किले वापस करने का वादा भी किया…
शम्भूराजे हँस पड़े और पास खड़े कवी कलश से बोले “कलश औरंगज़ेब अगर अपनी ये बेटी भी मुझसे ब्याह दे तो भी मेरा ज़वाब न होगा”
ज़ीनत अपनी पूरी फ़ौज़ के आगे की इस बेज्जती से तिलमिला उठी….. और शम्भूराजे भी जानते थे कि इसका परिणाम क्या होगा…. पर छावा औरंगजेब और उसकी बेटी के दिल पर कभी न ठीक होने वाली चोट कर चुका था….
और अगले 30 साल में मराठों ने छत्रपति शम्भूराजे के दिए इस घाव को नासूर बना दिया जिसने मुग़ल सत्ता को तिल तिल ख़त्म किया….
