#मुल्लानसरुद्दीन: “हमारे पास कितने गुर्दे हैं?”
#जाटबुद्धि: “चार!”।
#मुल्लानसरुद्दीन: “चार? हाहा,😁😁😁
“मुल्ला उन लोगों में से एक थे, जिन्हे अपने साथियों की गलतियों को उठाकर और उनका मनोबल गिराने में आनंद आता है।
#मुल्लानसरुद्दीन: (जाट बुद्धि को target करके, दूसरे साथी से बोला) “घास का एक बंडल लाओ, क्योंकि हमारे पास कमरे में एक गधा है,”
#जाटबुद्धि: “और मेरे लिए एक कॉफी!”,
जाटबुद्धि ने कहकर मानो थप्पड़ मार दिया। ….मुल्ला गुस्से से उबल पड़ा….
कक्ष से बाहर निकलते समय, जाट बुद्धि में अभी भी अहंकारी मुल्ला को ठीक करने का पर्याप्त दुस्साहस था:…वह समझाते हुए बोला
#जाटबुद्धि: “तुमने मुझसे पूछा, कि हमारे पास कितने गुर्दे हैं। हमारे पास चार हैं: दो मेरे और दो तेरे। ‘”हमारे पास” यह वाक्यांश ही बहुवचन के लिए प्रयुक्त होता है। पर तेरी समझ दाढ़ी के बोझ में दब गई….इसलिए घास का आनंद लें।”
जीवन ज्ञान से कहीं अधिक समझ की मांग करता है। कभी-कभी अहंकारी लोग, थोड़ा अधिक पढ़ लिखकर मद में फूल जाते हैं। क्योंकि उनके पास थोड़ा अधिक डाटा और इनफॉर्मेशन है, तो उन्हें लगता है, कि उन्हें दूसरों को कम आंकने का अधिकार है।
मनुष्य का सबसे उत्तम मित्र तर्क है। इसे हमेशा जिंदा रखें।
(उपरोक्त कहानी में उपयोग किए गए किरदारों के नाम की संप्रदाय के द्योतक नहीं हैं, अपितु कथानक मात्र हैं।)