एक प्रसिद्ध किस्सा है । एक अमेरिकन एक यहूदी और एक म्लेच्छ को अपने पास बुलाकर कहता है कि मैं दोनों को मिलकर दस लाख डॉलर दूँगा, मगर एक शर्त है कि 30 मिनटों में आप दोनों उन दस लाख डॉलर में अपनी अपनी हिस्सेदारी पर सहमति बना लें ।
दोनों तैयार हो जाते हैं और दोनों को एक रूम में 30 मिनट के लिए रखा जाता है।
“चलो,50:50 करते हैं ” यहूदी कहता है ।
“मैं 90% लूँगा, तुम 10% ले जा सकते हो” म्लेच्छ उत्तर देता है ।
यहूदी चौंक जाता है, कहता है कि यह अन्याय है, चलो, 45 :55 करते हैं ।
10:90, म्लेच्छ कहता है ।
40:60……
10:90,
35:65…….
10:90
…….
…….
समय निकला जा रहा है । 29 मिनट ऐसे ही बीत जाते हैं और म्लेच्छ 10:90 से हटने को तैयार नहीं । कहता है यही मेरी फ़ाइनल ऑफर है । यहूदी हताश होकर मान लेता है । वो खुद को ही समझाता है कि एक लाख डॉलर भी तो मुफ्त के ही हैं, मैंने कौनसा खून पसीना बहाया है इनके लिए ?
म्लेच्छ केवल अपनी बात पर अड़े रहने के कारण नौ लाख डॉलर ले जाता हैं।
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काफिर ‘रीजनेबल’ दिखना चाहते हैं । सब के साथ न्यायी दिखना चाहते हैं और खुद से ही नहीं, अपने वंशजों पर भी अन्याय कर बैठते हैं । केवल इनकी सोच को ठीक से न समझने से ।
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अब बस सोच लीजिये कि पचीसवे मिनट पर यहूदी उठता और कह देता कि “बहुत हो गया तेरा अड़ियलपन, अब मेरे 70 तेरे 30 !! नहीं तो मैं दरवाजा खोल रहा हूँ !
तेरे साथ रीजनेबल होना नामुमकिन है ! कोई सहमति नहीं हो रही। वैसे भी ये पैसे मुफ्त के ही तो मिल रहे हैं । ना मिले तो कोई बात नहीं, लेकिन तू समझ लेना तूने तीन लाख डॉलर अपने अड़ियल रहने से गँवाए हैं ।”
क्या होता ?
क्या फिर भी अडा राहत 90 % के लिए जब पूरा ही जाता दिखता ?
वैसे यहूदी अब हिसाब ले रहे हैं बराबर, सदियों के दोयम नागरिकता का । और यह अवश्य कहना चाहूँगा कि यह किस्सा किसी गैर यहूदी ने लिखा होगा, यहूदी इतने कच्चे होते नहीं।
लेकिन हिन्दू तो अभी भी ‘रीज़नेबल’ दिखने के चक्कर में म्लेच्छ को रिझाने में लगा रहता है और अपना ही लगातार नुकसान करवा रहा है ।
चेतन का __यापा इससे कितना अलग है ?
अंत में एक शब्द पर विचार करने की बिनती है – DETERRENCE. लगता है हम इसका अर्थ समझने से भी डरने लगे हैं।