किसान की मेहनत
एक छोटे से गाँव में रामलाल नाम का किसान रहता था। उसके पास थोड़ी सी ज़मीन थी, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था। वह सुबह सूरज उगने से पहले खेत में पहुँच जाता और देर शाम तक मेहनत करता।
एक साल गाँव में सूखा पड़ गया। कई किसानों ने हार मान ली, लेकिन रामलाल ने हार नहीं मानी। उसने गाँव के लोगों को इकट्ठा किया और कहा –
“अगर हम सब मिलकर तालाब खोदें, तो बरसात का पानी उसमें जमा कर सकते हैं। यह पानी पूरे साल काम आएगा।”
गाँव वालों ने पहले तो शक किया, लेकिन रामलाल की लगन देखकर सब साथ आ गए। सबने मिलकर तालाब बनाया। कुछ ही दिनों में बारिश हुई और तालाब लबालब भर गया। अब खेती के लिए पानी की कोई कमी नहीं रही।
गाँव वाले खुश हुए और सबने माना कि असली ताक़त मेहनत और एकता में है।
रामलाल बोला – “किसान अगर हार मान ले, तो अनाज कौन उगाएगा? मेहनत और साथ से हर कठिनाई आसान हो जाती है।”