#कांग्रेस_सरकार ने कैसे #पाकिस्तान को भारतीय #नकली_करंसी बनाने में मदद की…..!
2006 में, पी #चिदंबरम फाइनेंस मिनिस्टर थे, अरविंद मायाराम जॉइंट सेक्रेटरी थे, अशोक चावला एडिशनल सेक्रेटरी थे,
उन्होंने सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्प ऑफ इंडिया (SPMCIL) नाम की एक कंपनी बनाई और एक ब्रिटिश फर्म #डेलारू से भारतीय करेंसी का सिक्योरिटी प्रिंटिंग पेपर (SPP) खरीदना शुरू कर दिया, यह एक ब्रिटिश कंपनी है जो दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों के लिए बैंकनॉट छापनेमें माहिर है
उन्हें अच्छी तरह पता था कि पाकिस्तान भी उसी फर्म से SPP खरीद रहा है। इससे पाकिस्तान को आसानी से नकली भारतीय करेंसी बनाने में मदद मिली और पाकिस्तान ने भारतीय बाज़ारमें नकली करेंसी की बाढ़ ला दी।
जब 2010 में #प्रणव_मुखर्जी FM बने तो उन्होंने इस कंपनी को #ब्लैकलिस्ट कर दिया, लेकिन जैसे ही 2012 में चिदंबरम फिर से FM बने, उन्होंने फिर से इस कंपनी से खरीदना शुरू कर दिया।
भारतीय नकली करेंसी ने #पाकिस्तान_की_इकॉनमी को बहुत मदद की और पाकिस्तान ने इससे बहुत फ़ायदा कमाया।
जब 2014 में मोदी PM बने, तो उन्होंने तुरंत इसे रोक दिया और अरविंद मायाराम के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई।
2016 में #नॉट_बदली सिर्फ़ इसी के लिए लाई गई थी।
क्या आपने ध्यान दिया है कि #नॉटबदली के बाद पाकिस्तान की इकॉनमी मरने लगी, कश्मीर में पत्थरबाज़ी बंद हो गई, भारत में बम धमाके बंद हो गए।
गूगल में “डी ला रू और चिदंबरम” सर्च करें।
यह घटना फ़िल्म #धुरंधर की रिलीज़ के बाद फिर से चर्चामें आ गई है।
लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या यह सचमें हुआ था और इसका जवाब है हाँ।
फ़िल्म में दिखाई गई घटनाएँ वास्तविक घटना क्रम पर आधारित है।
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