अष्टौ गुणा पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च ।
पराक्रमश्चाबहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च ॥
आठ गुण (लक्षण) पुरुष को अन्यों से विलक्षण (दीप्तिमान) वनाते हैं । वह है –
1). प्रज्ञा (धी शक्ति),
2). सुशीलता (सेवानुभावन प्रवृत्ति, राग-द्वेष वर्जन, ब्रह्म विषयिणी भावना, सौम्यता – अन्य लोगों के सुखप्रद होना, अपरोपतापिता – दुष्टजनों के लिये भयप्रद होना, अनसूयता – अन्य के गुण में दोष नहीं देखना, मृदुता – कोमलता, अपारुष्यता – अप्रियभाषण न करना, प्रियवादिता – प्रियभाषण करना, कृतव्रत – किसी कार्य को आरम्भ करने के पश्चात उसे शेष कर के ही छोडना, शरण्यता – आश्रित का रक्षा करना, कारुण्य – दीन जनों के प्रति दया भाव रखना),
3). दम (इन्द्रियसंयम),
4). शिक्षा (उपयुक्त विद्याग्रहण),
5). पराक्रम (शरीर सम्पति बल, इन्द्रिय सम्पति वीर्य, मन सम्पति पराक्रम),
6). उपयुक्त सीमित वचन (प्रयोजन से अधिक न वोलना),
7). योग्यपात्र को शक्ति के अनुसार देश-काल-विहित दान, तथा
. उपकार करनेवाले के प्रति कृतज्ञता ।
Eight qualities adorn a man: Intellect, integrity, self-control, knowledge, valor, controlled speech, charitability and gratitude.