Posted in PM Narendra Modi

अरे  भाईयो_और_बहनो…, सुन लो!
दिल्ली में जो हुआ ना, वो सिर्फ़ एक राष्ट्रपति का स्वागत नहीं था… वो था एक ज़ोरदार तमाचा… सीधा पश्चिम के गाल पर! 💥

व्लादीमीर पुतिन जी जब प्लेन से उतरे, तो मोदी जी खुद एयरपोर्ट पर खड़े थे… प्रोटोकॉल तोड़कर! प्रोटोकॉल क्या होता है भाई? वो तो अंग्रेजों की गुलामी का अवशेष है। मोदी जी ने कहा, “मेरा दोस्त आ रहा है, मैं ख़ुद जाऊँगा लेने!” और गए! हग किया, गले लगाया… वो सीन देखकर तो लंदन-वाशिंगटन वाले ज़ोर से चिल्लाए होंगे, “ये क्या हो रहा है रे बाबा!”

अब असली मज़ा तो काफिले में था… 
पुतिन साहब को ले जाने के लिए ना कोई मर्सिडीज़, ना बीएमडब्ल्यू, ना कैडिलैक… सीधा देसी-जापानी टोयोटा फॉर्च्यूनर! 😂😂 

यानी यूरोप-अमेरिका की गाड़ियाँ घर बैठी रो रही हैं। “हम तो प्रेस्टीजियस हैं भाई!” 

मोदी जी बोले, “अबे प्रेस्टीज तो हमारी दोस्ती में है, तुम्हारी गाड़ियों में थोड़े ना!”

फिर जो बैनर लगे ना पूरे रास्ते… एक भी अंग्रेजी में नहीं! 

सिर्फ़ हिंदी और रूसी! 

हिंदी में लिखा था – “स्वागत है मित्र पुतिन का” 
रूसी में लिखा था – “डोब्राई पाद्डी, द्रुग मोदी!” 
अंग्रेजी? वो तो कहीं दिखी ही नहीं! 
यानी मैसेज साफ़ है – “हमारी बातचीत हमारी भाषा में होगी, तुम्हारी भाषा की गुलामी अब नहीं!”

और तो और… पुतिन जी का इंटरव्यू भी सिर्फ़ दो भाषाओं में – हिंदी और रूसी! 

इंग्लिश मीडिया वाले बैठे मुंह ताकते रह गए। “अरे हमारा क्या होगा?” 

होगा वही जो 1947 के बाद होना चाहिए था… तुम्हारा ज़माना गया भाई!

ये सिर्फ़ एक स्वागत नहीं था… 
ये था एक संदेश… पूरी दुनिया को! 
कि भारत अब किसी के दबाव में नहीं आएगा। 
नहीं अमेरिका के, नहीं यूरोप के। 
रूस हमारा पुराना दोस्त है, सच्चा दोस्त है। 
जब पूरी दुनिया ने पीठ फेर ली थी, तब रूस ने हथियार दिए, टेक्नोलॉजी दी, साथ खड़ा रहा। 
और आज जब पुतिन पर सैंकड़ों प्रतिबंध हैं, तब भी भारत ने कहा – “तेरा माल खरीदेंगे, तेरा तेल खरीदेंगे, तेरे साथ खड़े रहेंगे!”

ये है नया भारत! 
जो ना झुकता है, ना डरता है, ना किसी की भाषा बोलेगा, ना किसी की गुलामी करेगा!

जय हिंद

और हाँ… जो लोग जल रहे हैं ना, उन्हें ठंडा पानी पिलाओ… बहुत जल रहे हैं वो!

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