लुटियंस के वफादार: वे परिवार जिन्होंने #जलियांवाला का साथ दिया और भगत सिंह के विरुद्ध खड़े हुए!
भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल विदेशी अत्याचार के विरुद्ध नहीं था—यह उन भारतीयों के विरुद्ध भी था, जिन्होंने सत्ता के लोभ में अपने ही देश की पीड़ा को भुला दिया। इतिहास में ऐसे कई नाम दर्ज हैं जिन्होंने अंग्रेज़ों की नीतियों का खुलकर समर्थन किया, चाहे उनकी नीतियाँ कितनी भी क्रूर और अमानवीय क्यों न हों।
इन्हीं घटनाओं में से एक थी जलियांवाला बाग हत्याकांड, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जनरल रेजीनाल्ड डायर के आदेश पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी में 1000 से अधिक लोग मारे गए और 1500 से अधिक घायल हुए। दुनिया भर में इस घटना की निंदा हुई—विंस्टन चर्चिल ने इसे “एक भयावह और अमानवीय घटना” कहा।
लेकिन दूसरी तरफ कुछ ब्रिटिश बुद्धिजीवी और भारत के कुछ धनाढ्य परिवारों ने डायर को नायक के रूप में पेश किया। कवि रुडयार्ड किपलिंग ने तो “जनरल डायर फंड” भी चलाया, जिसके लिए कई भारतीयों ने भी पैसा दिया।
जब भारतीय ही बने डायर के समर्थक
ब्रिटिश शासन की नीतियों का समर्थन करने वालों में प्रमुख नाम था—
दीवान बहादुर कुंज बिहारी ठाकुर (थापर)
लाहौर के रहने वाले कुंज बिहारी थापर उस समय नई दौलत कमाने वाले व्यापारी परिवारों में से थे। वे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने और धीरे-धीरे ब्रिटिश प्रशासन के विश्वस्त बन गए।
डायर द्वारा किए गए नरसंहार के बाद भी थापर ने उसका समर्थन किया। इतना ही नहीं, स्वर्ण मंदिर के तत्कालीन प्रबंधकों ने डायर को kirpan और siropa भेंट किया, और इस सम्मान समारोह में लगने वाले 1.75 लाख रुपये में प्रमुख योगदान कुंज बिहारी थापर और उनके कुछ सहयोगियों का था।
ब्रिटिश सरकार ने उनकी ‘निष्ठा’ के पुरस्कार स्वरूप 1920 में उन्हें Order of the British Empire सम्मान से नवाज़ा।
थापर परिवार: राजनीति, अकादमिक और सत्ता से गहरा संबंध
कुंज बिहारी थापर के तीन बेटे थे —
दयाराम थापर
प्रेमनाथ थापर
प्रणनाथ थापर
इन तीनों की आने वाली पीढ़ियाँ बाद में भारत के मीडिया, राजनीति, सेना और शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण पदों तक पहुँचीं।
दयाराम थापर की वंश परंपरा
दयाराम थापर ब्रिटिश शासनकाल में भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में ऊँचे पद पर पहुँचे।
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