Archaeology : “Bhagwan Krishna And Radha Rani Ji.
श्रावण में संपूर्ण हिंदू समाज भगवान कृष्ण और राधारानी जी को झूले में झुलाते हैं । धारणा यह भी है कि राधारानी जी के साथ भगवान कृष्ण को भगवान शिव स्वयं झूला झुलाते हैं । कालीबंगा की यह मुद्रा महत्वपूर्ण और मनमोहक है । भगवान कृष्ण राधारानी जी को कभी नहीं छोड़ते। विष्णु सहस्त्रनाम में “नरसिंह वपु श्रीमान” का पद पाठ मिलती है जिसमें भगवान कृष्ण आधे सिंह और आधे मनुष्य की आकृति में है । उनकी शक्ति राधारानी जी हैं । इस मुद्रा में भगवान कृष्ण के साथ भगवती हैं तो वह राधारानी जी ही हैं। जो स्त्री अंगरक्षकों द्वारा सुरक्षित हैं । भारत के संकेत चित्र ( Symbolism) को समझने के लिए भारत के मूल संस्कृति ग्रंथों को टटोलना आवश्यक है। कालीबंगन में राधारानी जी के साथ भगवान कृष्ण का होना न केवल रोमांचित करती है अपितु यह स्पष्टता के साथ कहती है कि कालीबंगन के पहले द्वारका डूब चुकी है। भगवान और राधारानी जी अब केवल स्मृति में है । इस मुद्रा को समझना तब तक संभव नहीं जब तक राधारानी जी और भगवान स्वयं आशीर्वाद न दें । सरस्वती सिंधु सभ्यता पर अनेक ऐसे धुन्ध है जो परिष्कृत होनी है । मार्क्सवादियों ने इस चिन्ह को बलि हत्या से जोड़ कर देखा था। जैसा भोजन वैसी बुद्धि।
