रेलवे में यात्रा के दौरान बगल के कंपार्टमेंट से सहयात्री और टीटी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी ..
टी टी – हां सर। अपना टिकट दिखाइए !
यात्री – मेरे पास टिकट है ।
टी टी – वह अच्छी बात है पर टिकट दिखाइए !
यात्री – जब मैंने कह दिया है कि टिकट है, तो बस इतना ही पर्याप्त है।
टी टी – नहीं! नहीं। टिकट तो दिखाना पड़ेगा!
यात्री – इसका क्या मतलब हुआ? जब मैं कह रहा हूं टिकट है तो है। पर टिकट चोरी हो चुका है।
टी टी -क्या मतलब हुवा ईसका भला टिकट केसे चोरी हो सकता है
यात्री – राज की बात बताई ईस रेल के पायलट ने ही मेरा टिकट चुराया है। वरना मैं ईस रेल का पायलट होता।
टी टी – यार तुम किसे पागलखाने से तो नहीं छुट रखे टिकट बतावो या फाईन भरो।
यात्री – वाह मैं फाइन क्यों दूं ? ऐक तो मेरा टिकट चोरी हो गया ये आप लोगो की जिम्मेदारी है। मैं आप सब पर केस करूगा।
टिटी… अच्छा जो तुम कह रहे हो ईसे लिख कर दो
यात्री – वाह भला मै क्यो लिख कर दू मेरा टिकट चोरी के पिछे आप लोगो कि साजीश है। मैं किसी को भी नहीं छोढूगा।
बाद में ट्रेन के अन्य यात्रियों ने टी.टी. को समझाया कि पहले इस यात्री के खानदान के लोग ईस ट्रेन के पायलट हुवा करते थे। उन लोगो ने जम कर लुटपाट मचाई जिस कारण ये ट्रेन बंद होने के कगार पर आ गई थी। तब से ईसके खानदान के लोगो के लाख हाथ पांव मारने पर भी ईस ट्रेन मे झाड़ू मारने कि पोस्ट भी नही मिल रही है। अब ईस खानदान का ये आखरी चिराग़ भांग के नशे में ऐसे ही बखेड़े करता रहता। और ट्रेन में बैठकर ऐसे ही लोगों का मनोरंजन करता है। अब ईसके मुंह मत लगीये वरना सारे परिवार को इकट्ठा कर ट्रेन ही रूकवा देगा अभी अगले स्टेशन में यह पगलेट कोई दूसरा नाटक करने की सोचेगा आप अपना काम कीजिए।
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