कहानी का शीर्षक: “एक किताब की तलाश”
राधा, एक पढ़ाई की शौकीन महिला, पिछले कई दिनों से एक खास किताब की तलाश में भटक रही थी। उसने अपने शहर के हर बड़े बुक स्टोर, ऑनलाइन वेबसाइट्स, और यहाँ तक कि लाइब्रेरीज़ भी छान मारीं… लेकिन वह किताब जैसे गुम हो गई हो।
थकी-हारी राधा अब मायूस होने लगी थी।
एक दिन रास्ते में उसकी मुलाकात उसकी बचपन की सहेली, पूजा से हुई। पूजा ने राधा का चेहरा देखा और पूछा,
“राधा, सब ठीक है ना? इतनी परेशान क्यों लग रही हो?”
राधा ने सारी बात बताई —
“मैं एक ज़रूरी किताब ढूंढ रही हूं, पर कहीं नहीं मिल रही। जैसे सब जगह से गायब हो गई हो।”
पूजा मुस्कराई और बोली,
“अरे तो तुमने देवान्सी बुक स्टोर में कोशिश की क्या? वहां अक्सर वो किताबें भी मिल जाती हैं, जो बड़े-बड़े स्टोर्स में नहीं मिलतीं।”
राधा चौंकी,
“देवान्सी बुक स्टोर? मैंने नाम भी नहीं सुना।”
पूजा ने तुरंत अपना फोन निकाला और एक नंबर दिखाया —
“9173274397 — ये सुरेश चौहान जी का नंबर है। उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज करो, बहुत मददगार इंसान हैं।”
राधा ने तुरंत नंबर सेव किया और लिखा:
“नमस्ते सुरेश जी, मुझे एक किताब चाहिए, क्या आप मदद कर सकते हैं?”
कुछ ही मिनटों में जवाब आया —
“बिलकुल, आप किताब का नाम भेजिए, हम चेक करके बताएंगे।”
कुछ घंटों बाद वही किताब राधा के हाथों में थी, जिसे वो हफ्तों से ढूंढ रही थी।
उस दिन राधा को सिर्फ किताब ही नहीं मिली, बल्कि ये एहसास भी हुआ कि
“जहाँ उम्मीद ख़त्म हो जाती है, वहाँ से नए रास्ते शुरू होते हैं।”