इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी मोदीजी के वात्सल्यमयी व्यवहार के कारण यदि एक बेटी की तरह सहज आत्मीयता के साथ मिलती है तो यह हम भारतीयों के लिए गर्व की बात है। यह हमारे प्रधानमंत्री की सन्त प्रकृति के प्रति उनकी नैसर्गिक प्रतिक्रिया है जिसे दुनिया भर के करोड़ो लोग देखते है और भारत के उच्च नैतिक मापदण्डो के प्रति अपने विश्वास को और दृढ़ करते है। जहाँ अमेरिका डोनाल्ड ट्रम्प, बिल क्लिंटन के स्त्री प्रसंगों पर शर्मिंदगी उठाता है वहीं हम अपने निर्मल उज्ज्वल प्रधानमंत्री की सदाशयता का उपहास उड़ाते है सिर्फ अपने घटिया हास्यबोध के नाम पर। कृपया 70 के दशक के युगांडा के बर्बर राष्ट्रपति ईदी अमीन के स्त्री प्रसंगों के बारे में पढ़िए आप कलेजा दहल जाएगा । ईदी अमीन के इतने प्रेम संबंध थे कि उनकी गिनती करना मुश्किल है। कहा जाता है कि जब भी उसका मन होता था उस समय उसके लिए कम से कम 30 महिलाओं का हरम हाजिर किया जाता था इस तरह के हरम जो पूरे युगांडा में फैले होते थे । ये बेचारी मजबूर महिलाएं ज़्यादातर होटलों, दफ़्तरों और अस्पतालों में नर्सों के रूप में काम करती थीं।
हमेशा से दुनिया भर के देश अपने राष्ट्र नायकों की बाजारू लम्पटता से शर्मिंदगी झेलते रहे है खुद हमारा देश भी एक समय ऐसे दौर से गुजरा है । क्या ऐसे में अगर देश एक विलक्षण बेदाग वैश्विक छवि के नायक के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है तो क्यो हम उनके व्यक्तिगत मधुर सम्बन्धो का मजाक उड़ा रहे है।
यूं भी उनका यह परस्पर व्यवहार हम सार्वजनिक रूप से और अनेक बार राष्ट्राध्यक्षो के मध्य देखते है पर वहां खड़ा कोई व्यक्ति इस और ध्यान देता असहज दिखाई नही देता ना ही शातिर वामपंथी पश्चिमी मीडिया भी इसमें कुछ मसाला खोज पाता है पर सुदूर हमारे देश में बैठे हमारे ही अपने लोग खास कर मोदी समर्थक ऐसा करते है तो यह चिंतनीय है कि वे ऐसा कर के वे जाने अनजाने धीरे धीरे एक अप्रतिम राष्ट्र सेवक की छवि धूल धूसरित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे है।
खेद के साथ लिखना पड़ता है कि यह हमारा स्वस्थ हास्य बोध नही अपितु अंतर्मन में सैकड़ो वर्षो की गुलामी से से जमा पत्थर हो चुका आत्म हीनता बोध है जो कहता है
तुम श्रेष्ठ हो ही नही सकते
तुम नेतृत्व कर ही नही सकते
तुम पवित्र हो ही नही सकते
तुम वीर हो ही नही सकते
तुम्हारी संस्कृति जाहिल है
तुम्हारी परंपराएं सड़ चुकी है
तुम सिर्फ और सिर्फ दासत्व के लायक हो।
