Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

ये राम के पुत्र लव द्वारा बसाये गये लाहौर नगर के रतनचन्द मंदिर के दो चित्र हैं एक आजादी के पहले का और एक अभी का ………..
भारत के महान व्याकरण विद पाणिनि की जन्मस्थली है लाहौर राजा रणजीत सिंह की राजधानी रही है
लाहौर में कभी  Akbari Mandi Temple
Arya Samaj Temple
Bhairav ka Asthan, Ichhra
Bal Mata Temple at Shah Almi
Chand Raat Temple, Ichhra
Doodhwali Mata Tample (between Shah Almi and Lohari gate)
Lava Temple (son of Ram– According to Hindu legend, Lahore is named after him)
Mahadev, there is a Bhairav temple also
Mandir Wachhowali
Mela Ram Talao Temple
Model Town B Block Temple
Model Town D Block Temple
Ramgali Temple
Old Basuli Hanuman Temple, Old Anarkali
Devi ka Asthan, Lohari Gate
Lala Nihal Chand Temple (Abandoned)
Rattan Chand Temple, Old Anarkali and its former temple tank currently a grassy field known as Azad Park.
Sheetla Temple, Mohalla Chiri Marian, Shah Almi
Tulsi Mandir, Mohalla Chiri Marian, Shah Almi
Aitchison College Temple
Bhadrakali Temple, Gulzar Colony (Now a School)
**Jain Temples**
All of Jain temples in Lahore are either abandoned or destroyed.
Jain Shwetambar Temple with Shikhar, Thari Bhabrian
Jain Digambar Temple with Shikhar, Thari Bhabrian
Jain Shwetambar Dada Wadi (Mini Temple), Guru Mangat in Lahore Cantt
Jain Digambar Temple
**Gurudwaras**
The following gurdwaras are abandoned:
Gurudwara Baoli Sahib
Gurudwara Chaumala
Gurudwara Chhevin Patshahi, Mozang
Gurdwara Lal Khoohi
Gurudwara Janamsathan Bebe Nanki

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“Once in a village, a woman saw three old men sitting outside her house. They were sitting there for quite a while.

The woman went outside and said,
‘I don’t know you, but I saw that you are sitting here for long, you must be hungry. Please come in and have something to eat.’

One of them asked,
‘Is the man of the house at home ?’

She replied, ‘No.’

‘Then we cannot come in.’, said the men.

The woman went inside. In the evening when her husband came, she told him about the people sitting outside and all that had happened.

He  told his wife to go and ask those men to come in and have some food.

She went out and told them,
‘My husband is home. He is inviting you all. Please come inside and have some food with us .’

They replied,
‘We do not go inside a house together.’

When she asked why, one of the old men explained,
pointing to one of his friends, he said :
‘His name is Wealth.
If he goes with you, your home will be filled with wealth always.’
Then pointing to another old man he said :
‘He is Success.
If he goes with you, you will always be successful in any endeavor you start.’

He then introduced himself as Love.
‘If I go with you, then your home will be filled with love always.’

Then he told her to go in and discuss with her husband which one of them they want in their home.

Her husband was overjoyed hearing about it and said,
‘Let’s invite Wealth.
Let him come and fill our home with wealth.’

His wife disagreed and said, ‘Why don’t we invite Success?’

Their daughter-in-law was listening to this.
She came to them and suggested,
‘Wouldn’t it be better if we invite Love in our home ?
Then our home will be filled with love forever.’

The husband and wife agreed.

The woman again went out and said,
‘Which one of you is Love ? Please come in and be our guest.’

Love got up and started walking toward the house. Just then the other two also got up and started following him.

The  woman asked,
‘You said you can not all can come together.
I invited only Love.
Why are you all coming in?’

The old men replied,
‘If you had invited Wealth or Success then the other two would have stayed outside, but since you invite Love, wherever he goes, we go with him.’

Wherever there is Love, Wealth and Success will follow.”

Posted in सुभाषित - Subhasit

डार्विन ने कहा : दूसरों को खाकर जियो।
हक्सले ने कहा : जियो और
जीने दो।
परन्तु मेरे वेदों ने कहा : सबको सुखी बनाने के लिये
जियो ।सर्वे भवन्तु सुखिन: ।
😊😊😊😊😊😊😊
बाइबिल ने कहा : जिसका काम उसी का दाम।
कुरान ने कहा : जहान खुदा का और जिहाद इन्सान करे ।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : मेहनत इन्सान की, सम्पत्ति
भगवान की यानी (तेन त्यक्तेन
भुजींथा) ।
😊😊😊😊😊😊😊
बाइबिल ने कहा : ईसाई बनो
कुरान ने कहा : मुसलमान बनो (कुरान म.सि.2)।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : मनुष्य बन जाओ (मनुर्भव)।
😊😊😊😊😊😊😊
बाइबिल ने कहा : पढाई नौकरी के लिये
कुरान ने कहा : पढाई कुरान के लिये ।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : पढाई केवल नैतिकता , ज्ञान और नम्रता
के लिये ।
😊😊😊😊😊😊😊
अरस्तू ने कहा : राजनीति शासन के लिये ।
कुरान ने कहा : शासन इस्लाम के प्रचार के लिये ।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा:राजनीति की अपेक्षा
लोकनीति , शासन की अपेक्षा अनुशासन ,
तानाशाही की जगह संयम और अधिकार के
स्थान पर कर्तव्य पालन करें ।
😊😊😊😊😊😊😊
ईसाइयों ने कहा परमाणु हथियार नागासाकी और हिरोशिमा
जैसे शहरों को नष्ट करने के लिये ।
मुस्लिम आतंकियों ने कहा :
परमाणु हथियार मिल जायें तो काफिरों को मिटाने के लिये ।
किन्तु मेरे वेदों ने कहा : सम्पूर्ण विज्ञान ही
जनकल्याण के लिये (यथेमा वाचंकल्याण).
देवभूमि भारत माता की जय।।
😊😊😊🙏🏻🙏🏻😊😊

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

યાન્કેલ નામનો એક યહૂદી હતો જેની જર્મનીના એક શહેરમાં બેકરી હતી. તે કાયમ કહેતો ફરતો…”શું તમને ખબર છે કે હું આજે કેમ જીવતો છું?”

તે કહેતો, તે જયારે કિશોર અવસ્થામાં હતો ત્યારે જર્મનીમાં યહૂદી પ્રત્યે ધિક્કારનું વાતાવરણ પ્રવર્તતું હતું. નાઝિઓ યહૂદીઓને બેરહેમીથી મારી નાખતા હતા. એક કાતિલ ઠંડી રાત્રીએ, નાઝિઓ તેના શહેરમાંથી યહુદીઓને ટ્રેનમાં બેસાડી પોલેન્ડના કોન્સર્ટ્રેશન કેમ્પ (યાતનાં શિબિર) માં લઈ જતા હતા. ભયાનક ઠંડી હતી.

“જર્મનોએ અમને રેલવે ટ્રેકના પડખે, દિવસોના દિવસો સુધી છોડી દીધા હતા. રાતના સમયે કાતીલ ઠંડી હતી પણ અમારી પાસેકોઈ બ્લેન્કેટ ન હતા કે ન તો કોઈ ખાવા પીવાની સુવિધા! સતત બરફ વર્ષા થઇ રહી હતી. પ્રત્યેક પળે કાતિલ ઠંડી હવા અમારા ચહેરાને વાગી રહી હતી. આવી કાતિલ રાત્રીમાં અમે સેંકડો લોકો કોઈ ભોજન વિના, પાની વિના, ધાબળા વિના હતા! અમારા શરીરોમાં લોહી થીજી રહ્યું હતું.

મારી સાથે મારા જ વતનનો એક ઉંમરલાયક, વૃદ્ધ પુરુષ પણ હતો. તે માથાથી પગ સુધી ભયાનક ધ્રુજી રહ્યો હતો. મેં તેણે ગરમાવો આપવાના હેતુથી મારાં હાથ તેના શરીરને વિટાળ્યા અને તેને આલિંગન આપ્યું. મેં તેના હાથ, પગ અને ચહેરાને હળવા હાથે માલીશ કરતા કરતા તેને જીવતા રહેવા માટે પ્રયત્ન કરવા આજીજી કરી. તેને હિંમત આપવા પ્રયાસ કર્યો. આખી રાત મેં તે વ્યક્તિને આ રીતે સતત ગરમાવો આપવાનો પ્રયાસ કર્યો.

હું પણ હવે થાક્યો હતો, સખત ઠડીને લીધે મારાં આંગળા ખોટા પડી રહ્યા હતા છતાંય હું અટક્યો નહિ અને સતત તે વૃદ્ધ માણસના શરીરને ઉષ્મા આપતો રહ્યો.

આ રીતે કલાકો વિતી ગયા, રાત્રી પુરી થઇ, આસમાનમાં સૂર્ય દેખાવા લાગ્યો, ઉજાસ થયો. મેં અમારી આસપાસના અન્ય લોકોને જોવાનો પ્રયાસ કર્યો….પણ, દ્રશ્ય ભયાનક હતું. ચારે તરફ થીજી ગયેલા શરીરો પડ્યા હતા અને ભયકંર સન્નાટો હતો. અમારી આસપાસના કોઈ બીજું જીવતું નહોતું. રાત્રીની કાતિલ ઠંડીએ બધાનો જીવ લીધો હતો.

માત્ર, બે વ્યક્તિ જીવિત હતા… એક હું અને બીજો પેલો વૃદ્ધ માણસ!

તે વૃદ્ધ મારાં શરીરની હૂંફને કારણે જીવિત રહી શક્યો હતો અને હું તે વૃદ્ધના શરીરની હૂંફ થકી જીવિત રહી શક્યો હતો!!

આ વાત કર્યા પછી યાંકેલ કહેતો… ‘ શું હું તમને તકલીફો અને મુશ્કેલીઓથી ભરેલા વિશ્વમાં ટકી રહેવાનું રહસ્ય સમજાવું?’

*”જયારે પણ આપણે અન્ય લોકોના હૃદયોને ઉષ્માથી સભર કરીએ છીએ ત્યારે આપણે પણ તે જ હૂંફ અને પ્રેમ પામીએ છીએ! જયારે જયારે તમે અન્યોને મદદ કરો છો, હિંમત આપો છો, પ્રોત્સાહિત કરો છો કે પ્રેરિત કરો છો, ત્યારે ત્યારે તમે પોતે પણ જીવનમાં તે જ પ્રેમ, હૂંફ , હિંમત, પ્રોત્સાહન અને પ્રેરણા પામો છો.*
💐💐💐💐
*સૂચન – ડો ધીરેન ગંજવાલા*
*મૂળ અંગ્રેજી વાર્તાનો અનુવાદ – મેહુલ ભટ્ટ .*

Posted in Love Jihad

वामपंथी न्यूज वेबसाइट The Wire के पत्रकार उमर रशीद द्वारा अपनी सहयोगी वामपंथी हिंदू महिला का यौन शोषण किया गया । वह सालों तक अपना यौन शोषण करवाती रही क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसके मामले का प्रचार कर हिंदूवादी लोग फायदा उठा सकें । आखिरकार इस हिंदू वामपंथी महिला ने अपनी झिझक तोड़ी और अंग्रेजी में एक सार्वजनिक चिट्ठी लिखकर अपनी आपबीती बयान की जिसका पूरा हिंदी अनुवाद नीचे दिया गया है.

पत्रकार: The Wire का उमर राशिद (The Hindu और Outlook में भी काम कर चुका है)

पीड़िता का आरोप: ‘प्रगतिशील पत्रकारिता’ की आड़ में महिलाओं को फँसाकर यौन हिंसा करना उसका धंधा है

पीड़िता ने खुलासा किया है कि ये उसका पैटर्न है, जिसके तहत वो कई महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है। पीड़िता ने लिखा, “ये लिखते हुए मैं काँप रही हूँ और रो रही हूँ। वो एक सीरियल यौन शोषक और बलात्कारी है। वो ख़ुद को जानवरों से प्यार करने वाला बताता है।”

अपनी मरी हुई माँ का सहारा लेकर भी वो महिलाओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है। जब पीड़िता की इससे पहली बार बात हुई तो ‘प्रगतिशील राजनीति’ पर जमकर चर्चा हुई। इस गिरोह की नज़र में ‘प्रगतिशील राजनीति’ क्या है, समझ जाइए – मोदी को गाली देना, रोहिंग्या घुसपैठियों की पैरवी और राम मंदिर का विरोध। साथ ही ‘साहित्य में रोमांस’ पर भी चर्चा हुई।

पीड़िता को ऐसा लगा कि उमर राशिद उसे ‘दिल्ली के प्रगतिशील सर्कल’ में आगे बढ़ने में मदद करेगा।

“वो अपने खेल की शुरुआत महिलाओं को लोधी गार्डन में टहलने के लिए बुलाकर करता है।”

“वो प्रेस क्लब की बैठकों में मुझे बतौर ‘ट्रॉफी फ्रेंड’ ले जाता था। मैं शहर में नई थी, उससे बहुत छोटी थी – मुझे लगाए वो मुझे आगे बढ़ाएगा।”

“मुझे बार-बार शारीरिक रूप से धक्का दिया गया, मारा गया, थप्पड़ मारा गया, गला दबाकर लगभग मार ही डाला गया, और ऐसे तरीकों से शोषण किया गया जिन्हें शब्दों में बयान करना मुश्किल है। शारीरिक और यौन – दोनों ही स्तर पर। मुझे बार-बार असुरक्षित और जबरन से*क्स के लिए मजबूर किया गया।”

“उम्र राशिद ने मेरे साथ बार-बार रे*प किया — एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि उस पूरे समय में जब मैं उसके साथ थी।”

“मुझे आज भी याद है कि मैं बार-बार से*स से इनकार करती थी, उसे साफ़-साफ़ ‘ना’ कहती थी, उससे भीख माँगती थी कि वह न करे, क्योंकि मैं हमेशा उसकी गुस्से की प्रतिक्रिया से डरी हुई थी। मैं बार-बार सोचती और इस चिंता में जीती रही कि कहीं वह फिर से मुझे पीट न दे, और वह बार-बार ऐसा करता भी था।”

“कई बार उसने मुझे जबरदस्ती से*स के लिए मजबूर किया, और उस दौरान मैं बीमार और पूरी तरह से अनिच्छुक होती थी। हर बार ओमर मुझे माफ़ी माँगने के लिए मजबूर करता था, जबकि वह सामने बैठकर हँसता और खाना खाता, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। और इसी बीच वह अपने फ़ोन पर दूसरी लड़कियों से चैट करता रहता था। हर बार वह जानबूझकर कं*म का इस्तेमाल नहीं करता था ताकि मुझ पर अपना दबदबा दिखा सके। इसके चलते मुझे कई बार अनचाही प्रेगनेंसी का डर सताता रहा, और मुझे चोरी-छिपे गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाना पड़ता था क्योंकि वह मुझे इलाज के लिए जाने नहीं देता था।”

“प्रेगनेंसी के डर से अलग, वह लगातार दूसरी महिलाओं के साथ सोता था (जबकि वह कहता था कि हम रिलेशनशिप में नहीं हैं), और मुझे हमेशा एसटीडी (STD) का डर बना रहता था। मेरे शरीर में रैशेज, यीस्ट इन्फेक्शन और हार्मोनल असंतुलन हो गए थे क्योंकि मैं नियमित रूप से i-pill लेती रहती थी। मुझे अपने स्वास्थ्य के लिए चुपचाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता था, क्योंकि उमर राशिद मुझे यही यकीन दिलाता रहता था कि मेरी सारी प्रेगनेंसी और एसटीडी की चिंताएँ सिर्फ़ एक भ्रम हैं।”

“सबसे बुरा और क्रूर वाकया तब होता था जब वह मुझे बुरी तरह पीटता था और उसी वक्त वह अपना फोन निकालकर मेरे अस्त-व्यस्त कपड़े और बाल रिकॉर्ड करता था, ताकि वह मुझे ‘पागल औरत’ साबित कर सके। इस पूरे समय वह मेरी जासूसी करता रहता था – मैं कहाँ जाती हूँ, किससे बात करती हूँ, मेरे सोशल मीडिया को सेंसर करता, मेरी ज़िंदगी और खाने-पीने तक पर कंट्रोल रखता था, और हर वक्त मुझे बताता रहता था कि मैं कितनी ‘भयानक’ दिखती हूँ।”

वह मेरी ज़िंदगी के हर पहलू को नियंत्रित करता था मुझे नीचा दिखाने के लिए। उसे मेरी डाइट से, मैं क्या खाती हूँ और क्या नहीं – हर चीज़ से दिक्कत थी। वह मुझे जबरदस्ती बीफ खाने के लिए मजबूर करता था – जैसे किसी ‘सेक्युलरिज़्म’ की अजीब सी परीक्षा हो। हर बार जब मुझे बीफ खाने के लिए मजबूर किया जाता था, मैं उल्टी कर देती थी और उसे इस पर मज़ा आता था। उसे इस बात में भी मज़ा आता था कि मैं उसके पैरों पर गिरकर उससे माफ़ी माँगूँ, ताकि वह मुझे यह धमकी न दे कि वह मेरी माँ के साथ से*क्स की कल्पना करेगा।”

वह मुझे बार-बार यह कल्पना करने के लिए मजबूर करता था कि मैं अपने पुरुष दोस्तों और सहकर्मियों (खासकर उम्रदराज़ लोगों) के साथ से*क्स कर रही हूँ। यह और भी भयावह था, क्योंकि वे पुरुष मेरे दादा की उम्र के थे। उसने मेरी सबसे कीमती चीज़ें तोड़ीं, जिनमें से कुछ मेरे पिता और क़रीबी दोस्तों द्वारा दिए गए उपहार थे, यह जानते हुए कि मैं बेहद सीमित साधनों में, मुश्किल से जी रही थी।”

वह मुझे जबरदस्ती बीफ खाने के लिए मजबूर करता था – जैसे किसी ‘सेक्युलरिज़्म’ की अजीब सी परीक्षा हो। हर बार जब मुझे बीफ खाने के लिए मजबूर किया जाता था, मैं उल्टी कर देती थी और उसे इस पर मज़ा आता था।”

– इस लाइन पर गौर कीजिए

“वो मेरी जाँघों को दीवार और फर्श से ज़ोर-ज़ोर से टकरा-टकरा कर मजे लेता था। मैं उसके पाँव पकड़ कर गिड़गिड़ाती थी। ‘हिन्दू राष्ट्र’ में वो मुझे मेरी हिन्दू पहचान की बार-बार याद दिलाता रहता था।”

सोचिए, बीफ खिला-खिलाकर एक ‘कश्मीरियत’ वाला मुसलमान पत्रकार एक हिन्दू लड़की को अपने पाँव पर गिरवाता था, लेकिन ये लड़की कह रही है कि इसमें कहीं मजहब न देखा जाए।

इसी को कहते हैं ‘सेक्युलरिज्म’ – जो ब*लात्कार-ब*लात्कार चिल्लाकर रोने के लिए तो कहता है, लेकिन साथ ही अपने ही ब*लात्कारी का बचाव करने के लिए भी कहता है।

कितना सुकून मिलता होगा उमर राशिद को, जब एक हिन्दू लड़की उसके पाँव पर गिरकर गिड़गिड़ाती होगी! 650 वर्षों के दिल्ली में शासन के दिन याद आ जाते होंगे।

Posted in PM Narendra Modi

*मै पहले भी मुंबई का इस्लामीकरण नामक लेख लिख चुका हूँ।*

*आज जो दिल्ली में हिन्दुओं की हालत है उससे भी बत्तर हालत मुंबई के रहने वाले हिन्दुओं की होगी , तब शिवसेना को समझ में आएगा कि हम क्या गलती कर बैठे।*

*आज हालत ये है कि मुंबई के भिंवडी से लेकर मुंब्रा, मस्जिद, भायखाला, धरावी, माहीम , जोगेश्वरी , बांद्रा, कुर्ला, मलाड, मीरा रोड आदि जगहों में चारो तरफ से मुसलमानों की भंयकर आबादी बढ चुकी है।*

*रेलवे किनारे छोटे छोटे झुग्गी झोपड़ियाँ सिर्फ कठमुल्लों की है।*

*रेल्वे प्लेटफार्म के किनारे और रोड फुटपाथों के किनारे, कपडों के ठेले से लेकर ज्यूस फल, बेल्ट, चस्में रूमाल, जुते चप्पल, सब में मुसलमान लडकों का कब्जा है, वहीं आजकल रिक्शा ऑटो टेक्शी मुल्ले चलाते हैं, एक टाईम था जब युपी बिहार के लोग चलाया करते थे, हर भंगार कबाडी वाले व्यापारी सिर्फ मुसलमान होते हैं।*

*1992-1993 में मुंबई में हिन्दू मुसलमान दंगा हुआ था तब बाला साहब ठाकरे ने संभाल लिया था उस टाईम मुसलमानों की आबादी भी कम थी लेकिन आज चारों तरफ चौगुना मुसलमानों की आबादी भरे पडे हैं ,यदि अब मुसलमान मारकाट में उतर आते हैं तो उद्भव ठाकरे और शिवसेना को अपनी नानी याद आ जाऐगी, सारा भाईचारा का भूत उतर जाएगा……!!*

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*मुसलमान मोदी से क्यों नफरत करते है ?*

सबसे पहले भारत मे इस्लाम और मुसलमानों की कार्यप्रणाली पर बात करते हैं।

मुसलमानों का कंट्रोल मस्जिदों से होता है, जिसका मुखिया एक मौलाना होता है। देश की सभी मस्जिदों का कंट्रोल दिल्ली की जामा मस्जिद से होता है जिसके मुखिया को शाही इमाम कहा जाता है।

कोई भी सूचना देश के मुसलमानों तक पहुंचनी हो तो जामा मस्जिद का शाही इमाम उसे सभी राज्यों की मुख्य मस्जिद तक पहुंचाता है, राज्यों की मुख्य मस्जिद से जिलों की मुख्य मस्जिदों तक और फिर बाकी की सभी मस्जिदों तक वो सन्देश पहुचता है और वहाँ से शुक्रवार को जुम्मे की नमाज़ के बाद वो सन्देश सभी मुसलमानों तक पहुंचाया जाता है।

इसका एक ताजा उदाहरण अभी आपने देखा होगा कि दिल्ली में मुसलमानों का 100 प्रतिशत वोट केजरीवाल को पड़ा।

इसी तरह CAA का विरोध हो या भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की रणनीति हो या लव जिहाद में हिन्दू लड़कियों को फंसाकर उन्हें मुसलमान बनाने जैसी सभी योजनाएं जामा मस्जिद से ही संचालित होती हैं।

मतलब भारत मे इस्लामिक जिहाद की राजधानी है दिल्ली की ‘जामा मस्जिद’

अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर कि मुसलमान मोदी से नफरत क्यों करते हैं ?

ये जानना है तो आपको 1984 में जाना पड़ेगा :—

1984 मैं #लोकसभा चुनाव में #भाजपा की करारी हार हुई और सिर्फ 2 सीट ही आयी,एक गुजरात मे #महेसाणा और दूसरी #आंध्रप्रदेश में।

तब के #भाजपा अध्यक्ष अडवाणीजी ने #भाजपा संघठन को दुरुस्त करने के लिए #संघ से मदद मांगी,जिसके तहत संघ ने अपने खांटी प्रचारक #नरेंद्र मोदी को #गुजरात भाजपा को सौप दिया।

भाजपा अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की जुगत में थी,नरेंद्र मोदी उस समय अहमदाबाद शहर भाजपा के संघठन मंत्री थे,और उसी समय 1985 मे #अनामत आंदोलन ,भीषण #हिन्दू मुसलमान दंगे में तब्दील हो गया।यही समय था ,जब गुजरात #हिंदुत्व के प्रयोग की लेबोरेट्री बना,और #मोदीजी लेब के संचालक।

निकट भविष्य में अहमदाबाद नगरनिगम का चुनाव आया,जो कि #हिन्दू मुस्लिम के मुद्दे पर लड़ा गया।
परिणाम उस दिन से लेकर आजतक अहमदाबाद #नगरनिगम के चूनाव कांग्रेस 35 साल में सिर्फ एक बार जीत पाई।इस सफलता ने #गुजरात मे राजनीति की दिशा बदल दी।अगले 10 साल में यह हालत हो गयी कि गुजरात मे मुस्लिम एम पी अहमद पटेल का जितना तक नामुमकिन हो गया,#मुस्लिम शब्द गुजरात की राजनीति में एक बोझ बन गया।नरेन्द्रभाई ने #हिन्दुओ के मन मे #धर्म के प्रति आस्था बढ़ाई।

इस बात के तकरीबन 16 साल बाद ,2001 में #मोदीजी भाजपा की तरफ से गुजरात के मुख्यमंत्री बने,और 2002 के 26 फरवरी को #गोधरा में कारसेवकों को ट्रेन में जिंदा भून दिया गया,इसका जो बदला लिया गया?….अभी तक #हिन्दुओ के मन में जो #मुस्लिमो का खौफ था,इस घटना के बाद मुसलमान खौफ में जीने लगे।यह घटना औऱ उसके बाद हुए दंगे ने गुजरात के लोगो की #मानसिकता एवम #भारत की राजनीति बदल कर रख दी।

इस घटना के बाद #मुख्यमंत्री बने #मोदीजी ने गुजरात में मुस्लिमो की दादागीरी,अवैध वसूली,बिजली चोरी,अवैध धंधे पर लगाम लगा दी।

2014 मैं #प्रधाननमंत्री बने #मोदी जी ने ,#सेक्युलरिजम का दिखावा ,#मुस्लिमो की मान्यता जैसे कि #गज़वा ए हिन्द या #भारत को #इस्लामिक राज्य बनाना,या #भारत बनेगा #दूसरा पाकिस्तान की #मूल अवधारणा की जड़ो में कुछ इस प्रकार मठ्ठा दाल ढिया

1–भारतीय राजनीति में #मुसलमान होना एक बोझ बन गया,अगर भाजपा के प्रत्याशी के खिलाफ विपक्ष का प्रत्याशी मुस्लिम ही तो समझो मुस्लिम प्रत्याशी की हार पक्की।

2–राजकीय पार्टियों को #मुस्लिम तुष्टीकरण पर लगाम लगने से मुस्लिमो का बार्गेनिंग पावर कम हो गया।

3–#नोटबन्दी कर के पाकिस्तान की अर्थव्यबस्था चौपट कर दी।#अमरीका एवम #सऊदी अरब को भारत के साथ कर के भारतीय #मुसलमानों को सप्पोर्ट करने वाले #इको सिस्टम को तोड़ना शुरू कर दिया।

4–पाकिस्तान में #सर्जिकल स्ट्राइक कर के पाकिस्तान को समझा दिया कि #कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे।जिससे भारत मे #पाक प्रेमी मुस्लिमो की अंतड़ियों मैं ऐंठन आ गयी।

5–मोदी सरकार ने किसी भी प्रकार के #मुस्लिम ब्लैकमेल के सामने ज़ुकबे से इनकार कर दिया.#मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भी छानबीन चालू कर दी,#अतंकवाद पर नकेल कस दी,

6–CAA ला कर पाकिस्तान ,बांग्लादेश में फंसे हिन्दुओ को #इस्लाम के जुल्म की चंगुल से छुड़ाया।

7–तीन तलाक खत्म करने से #मौलवियो की मुफ्त में #हलाला के माध्यम से सेक्स एवम धन की उगाही पर रोक लग गई।

8–अगर #NRC ठीक से लागू किया गया,तो भारतीय मतदान प्रणाली से 3–4 करोड़ #घुसपैठिये दूर हो जाएंगे, जो #मुस्लिम् परस्त राजनीतिज्ञ की ताबूत में आखरी कील होंगी।

9–#मुस्लिमो को भारत को# इस्लामिक राष्ट्र बनांने का सपना टूटता नज़र आ रहा है,उनका #कश्मीर से #एकाधिकार खत्म हो गया और कोई चु तक ना कर सका।

यही सब वजह है कि #मुसलमान #मोदी को पसंद नही करते।#मोदीजी भी यह जानते है।
###काश हर भारतीय यह समझ जाता.!!
🙏🏻🙏🏻 🙏🏻🙏🏻

Posted in हिन्दू पतन

2013 को  पनडुब्बी INS सिंधु रक्षक डूब गयी और उसमे हमारे 18 नौजवान नाविक डूब के शहीद हो गये।

कारण क्या था?

जिस पनडुब्बी को 2010-13 मे 80 मिलियन डॉलर के खर्चे से अपग्रेड करवाया गया था उसकी बैट्री 70 करोड़ में  चेंज करनी थी l नौसेना ने तीन बार भारत सरकार से बैटरी चेंज करने को कहा लेकिन किसी ने नौसेना के पत्र पर ध्यान नहीं दिय

पैसे की कमी की वजह से समय पर नहीं हुई, सिंधु रक्षक मे धमाका हुआ और वो 18 नौजवानो की कब्रगाह बन गयी, देश विचलित हुआ मगर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

देश को शायद याद भी नहीं है l

जबकि वो बड़ा गुनाह था हमने खुद अपने सैनिकों को मारा था वहां क्योंकि पैसा नहीं था जिस सरकार की ये जिम्मेदारी थी उसको कोई फर्क नहीं पड़ा।

पूर्व रक्षा मंत्री एंथनी ने फरवरी 2014 मे साफ कहा की राफेल खरीदने की बात मत करो पैसा कहां है।

मनमोहन सिंह जी साफ कह चुके थे पैसा पेड़ो पर नहीं लगता, मतलब साफ था ऐसी कोई बात मत करो जिसमे पैसा लगता हो, पैसा नहीं है।

गिरते हुए रूपये को संभालने के लिए चिदंबरम ने दिवालिये लोगों वाला ही तरीका अपनाया, दो लाख करोड़ के विदेशी भारतीयों के डॉलर 7.50% पे डीपोजीट लेके उसको 2.50% पे अमेरिकी बॉन्ड्स मे डाल दिया।
देश को 10000 करोड़ रुपए का ब्याज के अन्तर का भार हर साल लगा दिया।

इस दो लाख करोड़ का भुगतान मोदी सरकार ने चुपचाप किया क्योंकि ख़बर बाहर जाने से भारत के रूपये पे दबाव बढ़ सकता था।

इसके अलावा ईरान से उधारी पे तेल लिया 32000 करोड़ का जिसका चुकाना भी इसी सरकार के जिम्मे आया और इस सरकार ने उसको भी किया।

ईस तरह से चारों तरफ़ से कर्जे लेकर भी सरकार पैसा नहीं हे कहती थी।

वहीं मोदी सरकार ने काम संभाला तो बैंकों की हालत इतनी खराब थी की सही हालत बाहर आने पर देश पर बहुत बड़ा संकट आ सकता था
मोदी सरकार ने बैंकों को पैसा दिया, ईरान का कर्ज़ चुकाया और आज तक प्रधान मंत्री या किसी भी मंत्री को मैंने कहते हुऐ नहीं सुना की कोई भी योजना पैसा नहीं हे इस लिए रुकी हुई हे।

जो काम सबने सोचा की कितनी भी बात करो असल मे होगा कभी नहीं और इस काम मे पैसा लगाना फालतू हे वो हे गंगा की सफाई का प्रोजेक्ट. आखि़र करोड़ो लोगों ने इस बार असम्भव को संभव होता हुआ देखा। गंगा साफ होते कुंभ मे लोगों ने अपनी आंखों से देखा और देश को बताया।

ये ना आसान था ना बिना 20-30000 करोड़ खर्च किए बिना हो सकता था इसके अलावा भी भव्य कुंभ हो रहा था और हर आदमी चकित था की इस देश मे इतना बड़ा आयोजन इतनी अच्छी तरह हो सकता है!

बोगीबील का पुल हो या उत्तर पूर्व मे रेल्वे लाइन बिछाने का काम हो या जोजिला पास के बजाए आल वेदर 9000 करोड़ रुपए की टनल हो या लद्दाख को नेशनल ग्रिड से जोड़ने का काम हो या 6 करोड़ घरों को मुफ्त मे गैस देने का काम हो या सब गरीब को मुफ्त मे घर देने का काम हो सब तीव्र गति से हो रहा है।

इसके बाद भी जैसे कुबेर का खज़ाना हाथ लग गया हो तो 12 करोड़ किसानो को 72000 करोड़ रुपए हर साल सहायता देने का काम चालू कर दिया।

दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य बीमा का 50 करोड़ लोगों की जिम्मेदारी का काम शुरू हो गया हे लाखों लोगों ने फायदा उठा लिया हे कहीं कोई गड़बड़ी या हास्पिटल को पैसा नहीं मिलने की शिकायत नहीं दिखी आज तक।
20000 से 40000 करोड़ का खर्च आएगा, पैसे की दिक्कत का नामो निशान नहीं है।

सबसे बड़ी बात की प्रोजेक्ट पे प्रोजेक्ट कंप्लीट हो रहे हैं और नए प्रोजेक्ट चालू हो रहे हैं। सब सही वक़्त पे चल रहा है मतलब सरकार के कांट्रेक्टर को भी पैसा टाईम पे मिल रहा है।

गिनती करते हुए एक के बाद एक ऐसी चीज़ आएगी जिससे लगेगा की जैसे देश को पैसे की कोई दिक्कत नहीं है S 400 डिफेंस सिस्टम, राफेल, ड्रोन, मिसाइल का कमाल तो आपसे छिपा नहीं होगा।

इस समय पर दुनिया का सबसे ज्यादा मेट्रो का काम भारत मे हो रहा है कुछ ही दिन पहले पटना मेट्रो के 13000 करोड़ के प्रोजेक्ट को हरि झंडी दी गयी। पटना मे मेट्रो होगी ये दस साल पहले कोई सोच नहीं सकता था ऐसी हालत हो गयी की रोज प्रधान मंत्री को कोसने वाले शत्रुघ्न सिन्हा को भी तारीफ करनी पड़ी।

सबसे बड़ा वित्तीय प्रबंधन तो GST मे हुआ है अब सब राज्यों का पैसा GST के माध्यम से केन्द्र की जवाबदेही है किसी भी राज्य चाहे वो ममता बनर्जी का बंगाल हो कोई शिकायत नहीं की है की उनका पैसा एक दिन भी लेट हो रहा हैं।

ये सब कैसे हो रहा हे अस्त व्यस्त रहने वाला भारत एकदम चुस्त दुरुस्त कैसे हो गया।

ऐसा इसलिए हो रहा हे क्योंकि

चोकीदार प्योर है।
मोदी है तो मुमकिन है ___

Jitendra Singh

Posted in हिन्दू पतन

Jyoti malhotra


अपने मादरे वतन के खिलाफ नमकहरामी करने वाली ज्योति मल्होत्रा का, एक आश्चर्यजनक विडियो सामने आई है.. जिसे आप लोग देख कर समझ सकते हैं कि, पाकिस्तान में वह किसी VVIP से कम नहीं थी.

मित्रों..! एक (UK) स्कॉटिश यूट्यूबर कैलम मिल जब पाकिस्तान के लाहौर में घुम घुम कर विडियो बना रहा था, तब वहां पर उसका सामना पाकिस्तान के जासूस ज्योति मल्होत्रा के साथ हो गया और तब यह चौंकाने वाली वीडियो उसके कैमरे कैप्चर कर लिया. स्कॉटिश यूट्यूबर कैलम मिल ने यह #वीडियो मार्च 2025 में बनाया था.

वह एक अभूतपूर्व दृश्य था, जब पाकिस्तान के लाहौर की अनारकली बाजार में ज्योति मल्होत्रा को AK-47 से लैस कम से कम छह जवान सुरक्षा प्रदान कर रहे थे. तब स्कॉटिश यूट्यूबर कैलम मिल इसे देख हैरान होकर अपने यूट्यूब दर्शकों से कह रहा है कि, इतने सारी बंदूकों के साथ यह जवान उसे इतनी सुरक्षा क्यों दे रहे हैं. उसको इतनी सुरक्षा की क्या जरुरत है और यह भारतीय है कौन..!?

रं* ज्योति मल्होत्रा को जब पता चला कि भारतीय एजेंसियाँ धीरे-धीरे पाकिस्तानी जासूसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, इसके चलते पाकिस्तानी दूतावास में काम कर रहे ISI जासूसों के खिलाफ Persona Non Grata के तहत भारत में अवांछित व्यक्ति घोषित कर बाहर निकलने की आदेश दिया जा रहा है, तब ज्योति मल्होत्रा ने खुद पर कोई कार्रवाई होने से पहले तुरंत सभी जासूसी के सबूतों को फ़ॉर्मेट कर दिया, ताकि एजेंसियों को किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण सबूत न मिल पाए. परंतु यह औरत भुल गई थी, की उसका पाला भारतीय एजेंसियों से पड़ा है. हमारे एजेंसियों ने डिलीट किए गये डेटा को रिकवर कर चुके हैं, पूछताछ के बाद ओर कर भी रहे हैं.

भारत के अंदर से और बाहर के कट्टरपंथी समर्थक सोचते हैं कि वे अपने झूठ से हमें धोखा दे सकते हैं ! लेकिन हम उनकी चाल को अच्छी तरह से समझते हैं, और हर सच्चा देशभक्त जानता है कि इन जैसों को कैसे उत्तर दिया जाता है. अब समय आ गया है कि इन परछाइयों को उजागर किया जाए, इन जैसों के पाखंड पर प्रकाश डाला जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत के खिलाफ द्वेष रखने वालों को पता चले कि ईमानदारी और सम्मान पर बने देश में उनके लिए कोई जगह नहीं है. में इस पर आज तक कोई एक भी पोस्ट नहीं किया था, क्योंकि इस वा-हियात और गद्दार औरत को देख कर मेरे खुन खौल उठता है. क्योंकि इसने पूरी दुनिया को यह भर भर कर प्रमाण दे दिया है कि, इस पावन धरती से जन्मा एक हि-न्दू, जो इस मिट्टी से उसका अस्तित्व है, उसके खिलाफ भी गद्दारी कर सकता है…..

✍️ Jiban Anand Mishra

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

એક વખત એક સેવાભાવી સંસ્થાની અંદર કુદરતી આફત વખતે સેવા કાર્ય ચાલી રહ્યું હતું.

     આ દરમ્યાન એક દાદા જૂની ધોતી ઉપર બંડી પહેરી રીક્ષામાંથી નીચે ઉતર્યા. એ કાર્યાલય તરફ આગળ વધતા હતા . એક હાથમાં લાકડી , બીજા હાથમાં ઝોળી , આંખે ચશ્મા , પગમાં જૂનાં ચંપલ છતાં ચાલમાં ખુમારી હતી.

     એ કાર્યાલય તરફ આગળ વધ્યા એટલે ત્યાંની ઓફિસના કર્મચારીએ દાદાને રોક્યા….
”દાદા લાઈનમાં ઊભા રહો, અથવા અહીં બેસો તમારો વારો આવે એટલે બોલાવશું….”

   દાદા બાંકડા ઉપર બેસી લાઈનમાં ઉભેલા વ્યક્તિઓનું નિરીક્ષણ કરી રહ્યાં હતાં….!!
    લોકો મોઢા ઉપર પોતાની ઓળખ છુપાવવા માટે રૂમાલ કે ઓઢણી ઢાંકી ટિફિન પકડી લાઈનમાં ઊભા હતા. કોઈ મોબાઈલથી વીડિયો ઉતારતા હતા તો કોઈ ફોટા પાડી રહ્યા હતા….
      આવા સંકટ સમયે સંજોગોના શિકાર બનેલ વ્યક્તિઓના  પણ ફોટા અને વીડિયો ઉતારી અમુક લોકો નીચ  હરકતો કરી વિકૃત આનંદ મેળવી રહ્યા હતા….!

અચાનક કોઈએ બુમ પાડી. દાદા આવી જાવ તમારૂ ટિફિન લઇને.
દાદા નજીક ગયા, ઓફિસમાંથી અવાજ આવ્યો દાદા વાસણ ઘરેથી લાવવાનું.

દાદા બોલ્યા , ‘બેટા હું એ માટે નથી આવ્યો મારે અગત્યની વાત કરવી છે.’

‘..પણ અત્યારે દાદા,  અમારી પાસે સમય નથી…’ ઓફિસમાંથી અવાજ આવ્યો.

અરે બેટા, ડોનેશન માટે વાત કરવી છે.  ઓફિસના કર્મચારી દાદાને ઉપરથી નીચે સુધી જોવા લાગ્યા પછી બોલ્યા સારું આવો.

દાદા ઓફિસમાં ગયા, બોલ્યા ડોનેશન લ્યો છો ?

હા દાદા , અત્યારે તો ખૂબ જરૂર છે. બોલો , કેટલા રૂપિયાની રિસિપ્ટ ફાડું. 

દાદાએ ઝોળીમાં હાથ નાખી ચેકબુક કાઢી ચેક લખ્યો.
ચેક હાથમાં પકડતાં જ સંસ્થાનો કર્મચારી ઊભો થઇ ગયો . બે વખત મીંડાઓ  ગણવા લાગ્યો. દાદા સામે જોઈ બોલ્યો ,
“દાદા, આ રકમ તમે તમારી જાગૃત અવસ્થામાં લખો છો ?
તમારા પરિવારને  આ બાબતની જાણ છે ?
આ ચેકની રકમ બે કરોડ રૂપિયા છે , એ આપ જાણો છો ?”

“હા બેટા , મારા પરિવાર ને ખબર છે. અને  ચેકની રકમ બે કરોડ રૂપિયા છે એ પણ હું જાણું છું. વધારે ખાતરી કરવી છે?

પણ આ ચેક સામે તમારે મને એક વચન આપવું પડશે.”

‘બોલો દાદા….’

    આ સંસ્થા માં આવતી દરેક વ્યક્તિ પીડિત હોય છે. તે કોઈ પણ ખરાબ સંજોગોના શિકાર બનેલ હોય છે….
    આવી વ્યક્તિઓના ફોટા પાડવા વિડિયો  ઉતારવા યોગ્ય લાગે છે ? 

“ના દાદા…”

આ કોઈ કીર્તિદાન નથી બેટા તેથી….
બસ , મારી એક નાની શરત છે. આ સંસ્થામાં ફોટો તથા વીડિયો ઉતારવાની સંદતાર મનાઈ છે.. આટલું બોર્ડ મારી દેજો…..!!

     કાર્યાલયનો સ્ટાફ દાદાને હાથ જોડી બોલ્યા , “દાદા કોઈના પહેરવેશ ઉપર થી વ્યક્તિ વિશે અનુમાન ન બાંધવું જોઈએ . અમે તમને ઓળખવામાં ભૂલ કરી …..!!”

દાદા , દાનની રીસીપ્ટ કોના નામે બનાવીએ…..?

દાદા બોલ્યા…દાન નહીં બેટા ભેટ બોલ
રીસીપ્ટની તો મારે જરૂર નથી  છતાં પણ આપવી હોય તો મારા નામની જગ્યા એ લખ…..

“કૃષ્ણ અર્પણમ્…”

બેટા ધરતીકંપ વખતે તારી સંસ્થાનું ઘણું અમારા પરિવારે ખાધું હતું ,  ત્યારે જ મેં નિર્ણય લીધો હતો . સમય આવે એક એક દાણાનો વ્યાજ સાથે હિસાબ અહીં હું પરત કરીશ.

    થોડા સંમય પહેલા મારો બંગલો વેચાયો , તેની રકમની વ્યવસ્થા માટે મેં જયારે મારા  પુત્ર  કુણાલને USA  ફોન કર્યો ત્યારે તેણે માત્ર એટલું જ કીધું…..

પપ્પા આપણો પરિવાર ધરતીકંપ વખતે બચી ગયો હતો , એ કોઈ કુદરતી સંકેત સમજી લ્યો. આપણે ન બચ્યા હોત તો આ મિલ્કત લાવારીસ જ પડી રહી હોત…જેણે બચાવ્યા તેને અર્પણ કરી દ્યો..

જે સંસ્થાનું આપણે ખાધું હતું , તે સંસ્થાને પાછું આપી તમારું ઋણ ઉતારો પપ્પા…..!!! અહીં ભગવાને મને ઘણું આપ્યું છે. પુણ્યનું ભાથું ભરી લ્યો મોડું ન કરતા..

જ્યોત સે જ્યોત જલે .
સેવાભાવી સંસ્થાઓને  કોઈ આપશે તો સંસ્થા ચાલશે .

બેટા , હવે જાત ચાલતી નથી. કાયમ માટે હું USA જાઉં છું. આજે આ સંસ્થાને આપેલ વચન  પૂરું કરી હું હળવો થઈ  ગયો છું…..!!
       અહીં  આવતા દરેક વ્યક્તિ દુઃખી લાચાર અથવા કુદરતી આપત્તિનો ભોગ બનેલ હોય છે. આવી વ્યક્તિઓ સાથે માનવતાભર્યું વર્તન અને વ્યવહાર કરજો . કુદરત રૂઠી હોય ત્યારે આવી વ્યક્તિઓ સાથે મજાક ન કરાય…

ચલ બેટા , 🙏🏼જય શ્રી કૃષ્ણ….!!
દાદા ઉભા થયા… સાથે આખો સ્ટાફ હાથ જોડી ઊભો થયો.

મિત્રો….,

મોત માટે તો કોઈ કારણ નિમિત્ત બને છે. એ તો કોઈ પણ સ્વરૂપે આવે છે. મારનાર સાથે તારણહાર ઉપર પણ વિશ્વાસ  મુકવો જોઈએ .
આપણી નજર હંમેશા કોઈ પણ ઘટના વખતે કેટલા મર્યા એ સંખ્યા ઉપર જ હોય  છે. પણ કેટલા બચ્યાં તેની ઉપર જતી નથી.જો મારનાર માટે ઈશ્વર જવાબદાર હોય તો બચાવનાર માટે કેમ નહીં ?

પરમાર્થ કરવા નીકળ્યા હો,
કોઈ ભૂખ્યાનું પેટ ઠારવા નીકળ્યા હોવ ત્યારે  તમારા મોબાઈલ થી ફોટા ન પાડતા નહિતર તમારા કપડાં જયારે ખેંચાશે  ત્યારે પ્રભુ ફોટા પાડતો હશે…

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

महापंडित कौत्स यमुना नदी में स्नान करके ईश्वर की आराधना कर रहे थे। एक मगर (घड़ियाल) उन्हें काफी देर से देख रहा था। लेकिन कौत्स ऊंची शिला पर बैठे हुए थे। जहां तक मगर का जाना संभव नहीं था।
तब मगर ने यमुना की तलहटी से सोने-चांदी के रत्नों को लाकर यमुना किनारे पर बिखेर दिया। कौत्स जब नहाकर लौटे तो उन्होंने वह रत्न देखे। रत्न देखकर उनके मन में लोभ जाग गया। वह सभी रत्न एकत्रित करने लगे।
तब वह मगर महापंडित कौत्स के नजदीक आया और बोला, आप जैसे महान विचारशील पुरुष के दर्शन करके मैं धन्य हो गया। आपसे यह गुजारिश है कि यदि आपके पास समय हो तो मुझे त्रिवेणी तक का रास्ता बता सकते हैं। मैं यहां नया हूं और रास्ता भूल गया हूं।
लोभ में वशीभूत कौत्स उस मगर के साथ चल दिए। उस समय उन्होंने अपने विवेक का जरा भी उपयोग नहीं किया। रास्ते में जाते समय मगर जोर से हंसा और कौत्स से बोला, आप जीवन भर लोगों को उपदेश देते रहे कि विनाश सांसारिक आकर्षण के रूप में आता है, क्षणिक तुष्टि देकर नष्ट कर देता है।
लेकिन इसके बावजूद आप इस तथ्य को न समझ सके और आज एक लालच ने आपका सर्वनाश के कगार पर पहुंचा दिया। इतना कहकर मगर, महापंडित कौत्स के ऊपस उछाला और अगले ही पल उसने कौत्स को निगल लिया। इस तरह कौत्स की जीवन लीला का अंत हो गया।
जो व्यक्ति सांसरिक आकर्षण में विवेक का उपयोग नहीं करता। उसे वासनाएं पूरी तरह आसक्त कर देती हैं। और उसका अंत कौत्स की तरह होता है।