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कल गोविंदा का एक इंटरव्यू देखा… ये तो नही पता कि इंटरव्यू कब रिकॉर्ड हुआ होगा पर उन्होंने जो बात कही वो बहुत विस्फोटक है! गोविंदा ने बिल्कुल सरल और स्पष्ट शब्दो मे और  बहुत ही मुखर अंदाज़ में कहा कि टीका (तिलक) लगाने के कारण उनको निशाना बनाया गया और उनका फिल्मी कॅरिअर खतम किया गया!

अपनी बात बाद में कहता हूँ पहले भाजपा आई टी सेल की बात कर लेते है… क्या उनमे इतनी राजनैतिक और सामाजिक समझ है कि वे इस बयान के निहितार्थ को समझ सके? भाजपा आई टी सेल निपट मूर्खो का समूह है जो अक्सर नही बल्कि हमेशा ही चूक जाता है! जिस बयान को अब तक मुख्य धारा की मीडिया की हेड लाइन होना चाहिए था जिस पर बहस होनी चाहिए थी वह बयान गुमनामी की मौत मर जायेगा! या तो भाजपा के पास आज तक कोई इको सिस्टम बन नही पाया है अथवा उसमे योग्य व्यक्तियों का भयंकर अभाव है! इतना मानकर चलता हूँ कि मोदी, शाह, राजनाथ अथवा गडकरी जी ने तो वो इंटरव्यू देखा नही होगा अतः उन्हे आलोचना के दायरे से बाहर कर देता हूँ! पर जिन लोगो को यह जिम्मेदारी दी गई है वे क्या कर रहे है? अब तक यह विषय मुख्यधारा की मीडिया मे होना चाहिए था और गोविंदा से बात करके इस विषय पर ओर जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए थी और पुरजोर तरीके से इस विषय को देश के सामने उठाया जाना चाहिए था!

अब वापस विषय पर आते हैं! कई साल पहले मैंने फिल्म इंडस्ट्री के इस्लामीकरण पर एक आर्टिकल लिखा था और वह आर्टिकल मेरे जीवन का सबसे वाइरल आर्टिकल था! मैंने उसमे बताया था कि कैसे हिंदू पहचान वाले अभिनेताओ को धीरे धीरे काम मिलना बंद हो गया, सनी देओल जैसे लोग भी निशाने पर आये क्योंकि वे देशभक्ति और राष्ट्रवाद पर फिल्म बना रहे थे! जो बात हमने इशारो मे कही थी वही बात गोविंदा ने खुलकर कह दी! पहले गोविंदा ने जहर पिया होगा प्रतीक्षा करी होगी कि चलो आज नही तो कल कोई न कोई काम मिल जायेगा पर आज जबकि सारी संभावनाएं समाप्त हो गई है तो उनका दर्द छलक रहा है! उनको भी इसी बात का पश्चताप हो रहा होगा कि काश पहले ही बोल दिये होते! सनी देओल हालांकि हैरान जरूर रहे और उनकी हैरानी उस दौर के उनके इंटरव्यू में झलकती भी है जब कि उनको बेरोजगार कर दिया गया था पर इन्होंने इस विषय पर सदा ही एक गरिमामयी चुप्पी साधे रखी! सनी देओल का दौर गदर 2 से वापस लौट आया है पर उनका वो समय जिहाद की भेंट चढ़ गया है जब वे शिखर पर हुआ करते थे!

बॉलीवुड पर इस्लामी कब्जा एक बहुत बड़ा षड्यंत्र था! यही से इस्लामिक ताकतो का काले सफेद हर काम पर और पैसे पर कब्जा हुआ! फिल्म इंडस्ट्री की अकूत धन सम्पदा पर तो जिहादी बैठे ही बैठे … यही से इस्लामीकरण का नया रास्ता निकला! बॉलीवुड समय के साथ इस्लाम और पाकिस्तान की सॉफ्ट पॉवर बन कर उभरा! लव जिहाद का बीज यही से बोया जाने लगा! हर दूसरी फिल्म में हिंदू लड़की का प्रेमी मुसलमान लड़का दिखाया जाने लगा… हिंदू प्रतीको का निरंतर अपमान किया जाने लगा! और यह इतना आम इतना सहज इतना सरल कर दिया गया कि आम आदमी को पता है नही चला कि कब देश का मानसिक इस्लामीकरण हो गया! हिंदू लड़को को काम मिलना बंद हो गया और हर छोटे बड़े काम मे जिहादियो को जगह मिलने लगी! जी हाँ… एक्टर ही नही… तमाम अलग तरह के तकनीकी कामो मे भी हिंदू कलाकारों की संख्या सीमित हो गई! सही समय पर दक्षिण से “बाहुबली” आया और उसने लोगो की तंद्रा भंग की नही तो अब तक पता नही क्या बन रहा होता!

गोविंदा इसी इंटरव्यू में कहते हैं कि साउथ नही आया होता तो अब तक हम समुंदर किनारे कच्छे मे ही नाच रहे होते! उनका सीधा इशारा बॉलीवुड की गिरती क्वालिटी पर करारा तंज है! उनको अंतर्मन मे कहीं न कहीं इस बात को लेकर खुशी भी है कि साउथ सिनेमा ने इस षड्यंत्र को तोड़ा! पर मेरा मानना है कि बॉलीवुड के जिहादिकरण को साउथ सिनेमा के आगमन ने नही बल्कि हिंदू युवाओ द्वारा बॉलीवुड के बॉयकॉट के आह्वान ने तोड़ा और मुझे भी खुशी होती हैं कि मैंने भी सही समय पर इस विषय पर जब जब जितना जितना लिख पाया लिखा! यह हमारी आपकी और सारे सोशल मीडिया पे सनातनियो की सामूहिक जीत है कि 300 करोड़ की फिल्म लागत भी नही निकाल पा रही, बड़े बड़े इस्लामिक सुपरस्टार धराशाई हो रहे हैं!

ये बॉलीवुड के भांड हमारे ही पैसे से हमको ही बर्बाद करने निकले थे इनको सोशल मीडिया के हिंदू समाज ने उसी बिल मे घुसेड़ दिया है जहाँ से ये निकले थे! सनी देओल की वापसी कोई ऐसे ही नही हुई… जब से हिंदू युवको ने जिहादियो की फ़िल्मे देखना बंद कर दी है तो सनी बॉबी और गोविंदा जैसे कलाकारों के लिए फिर से रास्ते खुले है!

पिछले 20 सालों में बॉलीवुड से केवल जिहादी वोक ही निकले है लेकिन अब यह दुकान धीरे धीरे बंद हो रही है! मैं अपने सारे साथियो से फिर से अपील करता हूँ कि “बॉयकॉट बॉलीवुड” केवल एक अभियान अथवा एक नारा नही है यह एक युद्धघोष है इसका पालन करना केवल अनिवार्य ही नही बल्कि धर्म है! ये नौटंकीबाज़ लोग फिर भेष बदलकर आयेंगे फिर कोई नौटंकी करेंगे प्रपंच करेंगे लुभायेंगे पर आपको अपनी भीष्म प्रतिज्ञा पर अटल रहना है! बहिष्कार मतलब बहिष्कार … 99% सिनेमा का बहिष्कार करना है! इतना बहिष्कार करना है कि फिल्म बनाना घाटे का सौदा हो जाए और जिहादी मंडली यहाँ से बोरिया बिस्तर समेटकर पतली गली से निकल जाए! उस हिंदू एक्टर का भी बहिष्कार हो जो वोक् मानसिकता का है! जहाँ जिहादियो का पैसा लगा है उसे बर्बाद कर दो और इसके लिए आपको कही नही जाना है कोई जंग नही लड़नी है… बस चतुराई से बॉयकॉट करना है… नेगेटिव फीडबैक देना है!आज हमारी जनसंख्या ज्यादा है अतः हम यह कर सकते है… उन्होंने आज ही समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी कर ली है जब वे 35-40% हो जायेंगे तुम्हारे हाथ में कुछ नहीं रहेगा! एक ऐसी लडाई जिसमे कुछ करना ही नही घर पे शांति से बैठना है ये भी नही लड़ सकते तो क्या करेंगे अतः “बॉयकॉट बॉलीवुड”!

(पुराने पोस्ट का लिंक कॉमेंट बॉक्स में दे रहा हूँ)

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