एक महिला जो जर्मनी में भारतीय दूतावास में कार्यरत है ने एक पोस्ट में लिखा। जिसका अनुवाद हिंदी में…..
इन्होंने लिखा है कि, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब जर्मनी आये थे तो वे अपने साथ अपने रिश्तेदार लगभग 40 लोग लेकर आये थे।
उन सबके निवास हेतू कुल 5 होटल (सभी फाईव स्टार) बुक किये थे ।
सारे के सारे रिश्तेदार रोज महंगे मौल्स में खरीदी करते लाखों की खरीदी होती थैली पकड़ने को विदेश विभाग का स्टाफ।
बिल सारे विदेश विभाग के नाम फाडे़ जाते।
जब तक मनमोहन का दौरा चला, यह रोज होता था।
सारा विदेश विभाग का भारतीय-स्टाफ नौकर बना उन सबके आगे पीछे नाचते रहे । एक बार भी दूतावास न आये या हम से मिले ।
फिर मोदीजी प्रधानमंत्री बनकर दो बार जर्मनी आये तो, सारा स्टाफ पुनः उसी पुनरावृति की अपेक्षा में हाथ जोडे़ खड़ा था।
पर अचरज हुवा कि ,वे तो अकेले आये।
रिश्तेदारों की कोई फ़ौज नहीं।
तो केवल एक होटेल की एक मंजिल सेफ्टी हेतू सम्पूर्ण बुक हुवी।
कोई मॉल वॉल में खरीददारी नही।
वे पूरे समय कार्य में व्यस्त। स्टाफ को चमचागिरी नही करने दी गयी।
बल्कि स्टाफ स्वयम् अपने ऑफिस के रोजमर्रा के कार्य यथावत करता रहा । बल्की सब के सब आंकडे इकट्ठा कर के फाइल फोल्डर मे डालने मे इतना व्यस्त हो गये की तीन दिन तक घर जा नहीं पाये । अपनी व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद मोदी जी कुछ समय निकाल के दूतावास आये और सब को यात्रा सफल करने का श्रेय सब को दी और एक कप चाय का साथ दिये । यह है एक महानुभाव व्यक्ती का परिचय।
साथियों,
वर्षों बाद एक ईमानदार प्रधान मंत्री मिला है , उसकी इज्जत करो….
उन्हें नीचा दिखाने वाले विपक्ष को हर बार हराकर सबक सिखाओ और देश बचाओ …
🙏🙏🙏🙏🙏