Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir, हिन्दू पतन

यहूदी और हिंदू का अंतर
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लगभग 1 किलोमीटर चलने के बाद… रिक्शा वाले ने रिक्शा रोका….

सामने बोर्ड दिखाई पड़ रहा था बांग्ला में… ढाकेश्वरी मंदिर… नेशनल टेंपल ऑफ बांग्लादेश… एक पुलिस वाला खड़ा था गेट पर… मैंने पुलिस वाले को नमस्कार किया… और पूछा… मुझे अंदर जाने के लिए कोई टिकट लेना होगा… उसने भी मुझे सलाम किया और कहा… नहीं… आप जा सकते हैं…  चंद कदम चलते ही मैंने खुद को मंदिर के प्रांगण में पाया… साफ सुथरा मंदिर… लेकिन बहुत कम ऊँचाई वाली मंदिर… अधिकतम ऊँचाई 15 फुट गई होगी…

मंदिर में एक पुजारी जी थे…. जिन्हें मैंने हाथ जोड़कर नमस्कार किया… उन्होंने भी प्रत्युत्तर में मुझे नमस्कार किया… मंदिर में और कोई भी नहीं था… थोड़ी देर मंदिर में बैठा,  चारों तरफ तीन चार मंजिली इमारतें थी… और उन इमारतों की तुलना में मंदिर बहुत ही छोटा लग रहा था… मैंने पुजारी जी से बातचीत शुरू की….
उन्होंने टूटी-फूटी हिंदी में मुझे बताना शुरू किया…

पुजारी जी की हिंदी कमजोर थी…
और मेरी बांग्ला… वे टूटी फूटी बांग्ला मिश्रित हिंदी में… मुझसे बातें कर रहे थे…
उन्होंने मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए बताया… सेन वंश के राजा बल्लाल सेन के द्वारा… 12वीं शताब्दी में यह मंदिर बनाया गया था… माँ ढाकेश्वरी की मूर्ति जमीन में दबी हुई मिली थी… और इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण… मूर्ति मिलने के पश्चात किया गया था… पार्टीशन के बाद असली मूर्ति यहाँ से कोलकाता ले जाया गया था… और मूर्ति के साथ लाखों हिंदू यहाँ से हिंदुस्तान चले गए…

आजाद होने के बाद और पूर्वी पाकिस्तान बनने के बाद… कुछ दिन तो स्थिति ठीक थी…
लेकिन उसके बाद हिंदुओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही थी…

हमारे पड़ोसी मुस्लिम हम पर धौंस जमाते रहते थे… उनकी जो मर्जी होती थी… वह हमसे छीन लेते थे… हमें सरेआम बेज्जती करते थे… और हमारे महिलाओं के साथ छेड़छाड़… सरकार भी हमारे लिए उदासीन थी… और कानून व्यवस्था में हम तो दोयम दर्जे के नागरिक थे…

खैर, किसी तरह से दिन गुजर रहा था… लेकिन 1971 में हमारा में हमारा सर्वनाश हो गया… 30 लाख से अधिक हिंदुओं की… बेरहमी से हत्या… 5 लाख से अधिक महिलाओं का अपहरण और बलात्कार… हमारे पास मरने के सिवा कोई उपाय नहीं था… हिंदुओं की पतलून उतारकर उनकी हत्या कर दी जाती थी… और महिलाओं को सड़कों पर बलात्कार… यही हमारी नियति हो गई थी… 1971 में भी एक करोड़ से अधिक लोग हिंदुस्तान चले गए… 3 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए… हजारों हिंदू छात्रों की निर्मम हत्या ढाका यूनिवर्सिटी में की गई… और छात्राओं का अपहरण और बलात्कार… सेना ने रमना काली मंदिर का विध्वंस कर दिया… ढाकेश्वरी मंदिर भी आधा से ज्यादा टूट चुका था.. और सेना ने इस पर कब्जा करके यहाँ अपना आयुध भंडार बना लिया.. बलात्कार के डर से हजारों महिलाओं ने आत्महत्या कर लिया… सड़कों पर हजारों की संख्या में लाशें पडी हुई रहती थी… हिंदुओं की लाश नोचते कुत्ते बहुतायत में दिखाई पड़ते थे… हजारों महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार… और उसके बाद हत्या उनके परिवार वालों के सामने की गई… चुन-चुन कर हिंदुओं को मारा गया…

मैंने उनसे पूछा…
यह हत्याकांड सेना ने किया या यहाँ के नागरिको ने… उनका कहना था…
हमारे पड़ोसी मुस्लिम … सेना को जाकर खबर करते थे कि… यह परिवार हिंदुओं का है… और इस परिवार में लड़कियाँ हैं… सैनिकों की गाड़ी आती थी… लड़कियों को उठाकर गाड़ी में डाल देती थी… और परिवार वाले को गोली से उड़ा देते थे… हिंदूओं के थोड़ी भी प्रतिकार पर… परिवार के सामने महिलाओं की सामूहिक बलात्कार होती थी… और पुरे परिवार को मार दिया जाता था…. बाद में मृतक परिवार की संपत्ति पर… सूचना देने वाले मुस्लिम परिवार का कब्जा हो जाता था… मुस्लिमों में यह होड़ लग गई थी… कि कौन अधिक से अधिक हिंदू परिवारों की सूचना दे… जिससे उनकी संपत्ति उन्हें मिल जाए…

अबे अपनी रौ में बोलते जा रहे थे…
हिंदुस्तान के सहायता से बांग्लादेश एक इंडिपेंडेंट कंट्री बना…
भले ही बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र हो गया… लेकिन हिंदुओं की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ… हम दोयम दर्जे के नागरिक बने रहे…
1992 में ढाकेश्वरी मंदिर को गिरा दिया गया…
और फिर हजारों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ…
कहाँ मैं ढाकेश्वरी मंदिर घूमने आया था…
हिंदू जनसंहार सुनकर मन व्यथित हो उठा…
मैंने उनसे पूछा आप भी असुरक्षित महसूस करते हैं…
उनका कहना था… हम सुरक्षा असुरक्षा से ऊपर उठ चुके हैं… मेरा परिवार पीढ़ियों से इस मंदिर का पुजारी रहा है… और जब तक माँ ढाकेश्वरी चाहेंगी… मैं पूजा करता रहूँगा… जिस दिन चाहेंगी उस दिन माँ के चरणों में  मैं मर जाऊँगा…

मेरे लिए बेहद दु:खद आश्चर्य था…
60 लाख यहूदियों की हत्या एक मानव त्रासदी के रूप में पूरा विश्व जानता है… 30 लाख हिंदुओं की हत्या…
5 लाख से अधिक हिंदू महिलाओं का बलात्कार… लाखों करोड़ की संपत्तियों का लूट….
और तीन करोड़ विस्थापन के बारे में… किसी को भी कोई जानकारी नहीं है…. पूरी दुनिया चुप थी… पूर्वी पाकिस्तान के हिंदू अपने ही देश में मारे जा रहे थे… उनकी महिलाएं बल्तकृत हो रही थी… और उनकी संपत्तियाँ लूटी जा रही थी… मौत का यह तांडव 9 महीने तक चला…
यह सिलसिला रुका… जब भारतीय सेना के सामने 135000 पाकिस्तानी सैनिकों ने सरेंडर कर दिया… 
ना तो हम दोषियों को सजा दे पाये और ना हीं पीड़ितों  को न्याय…

पता नहीं बांग्लादेश विजय में हमें क्या मिला…?
साभार Sanjay Kumar
Yashwant Pandey

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