नेहरू संसद में बैठे होते थे, सामने की पंक्ति में PMO कार्यालय का एक ख़ास अधिकारी बैठा होता था, नेहरू की तरफ से एक ख़ास इशारा मिलते ही वो तेजी से उठता और प्रधानमंत्री के लिए आरक्षित पार्किंग से अपनी बुलेटप्रूफ अम्बेसडर कार निकलवाता, उसके साथ 2 सुरक्षाकर्मी तेजी से आगे की सीट पर बैठ जाते । ड्राइवर इशारा समझ कर गाड़ी तेजी से ITO जाने वाले मार्ग पर दौड़ा देता ।
गाड़ी बंगाली मार्किट पहुंचती और वहां बैठे फूल वालों में से एक खास फूलवाले की दुकान पर रुकती । एक डॉक्टर टाइप व्यक्ति तेजी से PMO अधिकारी के पास आता और एक छोटी नक्काशीदार टोकरी जिसमें अंदर गुलाब की पंखुड़ियों के ऊपर गुलाब का एक सुंदर फूल रखा होता था थमा देता था ।
PMO अधिकारी उस डॉक्टर टाइप व्यक्ति से पूछता ” चैक” और वो कहता “यस” । इसके बाद गाड़ी तेजी से संसद भवन को निकल जाती ।
संसद भवन में गाड़ी मुख्य द्वार पर रुकती अधिकारी तेजी से निकल कर नेहरू के पास पहुंच जाता और नेहरू अपनी अचकन से हल्का मुरझाया हुआ गुलाब निकाल कर नया गुलाब टोकरी से निकाल कर अपनी अचकन में लगा लेते । नेहरू का यह गुलाब भी 1 से डेढ़ घण्टे में अपनी चमक खोने लगता नेहरू का पुनः इशारा अधिकारी को मिलता और पुनः प्रक्रिया आरम्भ हो जाती देश के प्रथम प्रधानमंत्री की अचकन में गुलाब लगाने के लिए जनता के खून पसीने से कमाए गए पैसे के दुरुप्रयोग की ।
जानकार बताते है कि सिर्फ गुलाब बदलने में नेहरू के सुबह उठने से रात को सोने तक प्रति दिन उस समय मे 18 से 20 हज़ार प्रतिदिन खर्च होता था । जिसमे गुलाब अधिकतम 100 रुपये के होते थे । सोचिये अपने प्रधानमंत्री काल के दौरान नेहरू ने देश की जनता का देश की संपत्ति का कितना दुरुपयोग किया ।
साभार
