सैयद सालार मसूद गाजी का विजय अभियान श्रावस्ती के राजा सुहलदेव ने नानपारा में रोक दिया. उनके नेतृत्व में हिन्दु सेना ने गाजी को भयंकर रूप से घायल किया. गाजी के विश्वासपात्र सैनिक उसे लेकर भाग खडे हुए किन्तु सतरिख बाराबंकी में वह 72 हूरों के पास चला गया. वहीं उसे दफन कर दिया गया. लगभग 300 वर्ष बाद फिरोज तुगलक उसकी कब्र खोदकर उसे बहराइच में बालार्क सूर्य मंदिर को ध्वस्तकर गर्भगृह में दफना दिया और बालार्क को बालेमियां बना दिया गया. गाजी के नाम पर उ. प्र. में सतरिख, नानपारा बहराइच के अतिरिक्त सिकन्दरा और सोहबतिया बाग प्रयागराज में भी उसकी कब्र परवर्ती काल में बना दी गयी. पूछने पर पता चला कि उसकी मूल कब्र की एक एक ईंट लाकर इन स्थानों पर कब्र बनायी गयी थी. सम्भल में नेजा मेला और वाराणसी में गाजी मियां की शादी का मेला कब से लगता है पता नहीं. उसकी शादी न हुई थी न वह वाराणसी पहुचा ही था. वह विजय अभियान में गायों के झुंड को आगे रखता था. इसलिए पंजाब से श्रावस्ती पहुचने तक वह सफल हो सका था. किन्तु सुहलदेव ने इस दुष्ट को मारने के लिए गायों की चिन्ता छोड दी इसलिए सफल हुआ. इसके नाम पर बनी कब्रें समाप्त की जायें और मेलें बन्द हों. 1 लाख हिन्दुओ का कत्ल करने वाला गाजी कहलाता था, यह ध्यान में रखा जाये और इस्लाम में कब्र की इबारत हराम है. अरब में कहीं भी न पक्की कब्र है न उसकी इबारत.