Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कर्म और भाग्य

कहानी:- एक चाट वाला था, जो हमेशा ग्राहकों से घुलमिलकर बातें करता। जब भी उसके पास जाओ, तो ऐसा लगता जैसे वह हमारा ही इंतज़ार कर रहा हो। उसे हर विषय पर चर्चा करना पसंद था, चाहे राजनीति हो, समाज की बातें हों या फिर रोज़मर्रा की ज़िंदगी के मुद्दे। कई बार उससे कहा जाता कि भाई, चाट जल्दी बना दिया करो, देर हो जाती है, मगर उसकी बातचीत कभी खत्म नहीं होती। एक दिन यूँ ही बातों-बातों में कर्म और भाग्य पर चर्चा शुरू हो गई।

मुझे उसकी सोच जानने की उत्सुकता हुई, तो मैंने सीधा सवाल दाग दिया—”आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से?” उसने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और बोला, “आपका किसी बैंक में लॉकर तो होगा?” मैंने कहा, “हाँ, है।” फिर उसने जवाब दिया, जिसने मेरे दिमाग़ के सारे भ्रम दूर कर दिए। वह बोला, “लॉकर की चाबियाँ ही इस सवाल का जवाब हैं। हर लॉकर की दो चाबियाँ होती हैं—एक आपके पास और एक बैंक मैनेजर के पास। आपकी चाबी परिश्रम है और मैनेजर की चाबी भाग्य। जब तक दोनों चाबियाँ नहीं लगतीं, तब तक ताला नहीं खुलता।”

फिर वह रुका और ज़रा गंभीर होकर बोला, “आप कर्मयोगी हैं और ऊपर वाला मैनेजर। आपको अपनी चाबी घुमाते रहनी चाहिए, यानी मेहनत करते रहनी चाहिए। कौन जाने भगवान कब अपनी चाबी लगा दे! लेकिन अगर ऊपर वाला अपनी चाबी लगा रहा हो और आपने अपनी मेहनत वाली चाबी न लगाई हो, तो ताला खुलने से रह जाएगा।” उसकी यह बात मेरे मन में गहरी उतर गई। मैंने सोचा कि कितनी साधारण, लेकिन कितनी सटीक बात कही है इस चाट वाले ने।

यह उदाहरण समझाते हुए वह फिर मुस्कुराया और बोला, “इसलिए कर्म करते रहो, क्योंकि भाग्य भरोसे बैठे रहने से कुछ नहीं मिलेगा। अगर ताला खोलना है, तो अपनी चाबी भी सही समय पर लगानी होगी।” उसकी बातों में एक गहरा संदेश था, जिसे सुनकर मैं सोचने लगा कि सच में, मेहनत और भाग्य दोनों की अपनी अहमियत है, लेकिन मेहनत हमारी अपनी चाबी है, जो हमारे हाथ में है।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कर्मों का खेल

कहानी: एक समय की बात है, एक गरीब लकड़हारा जंगल में सूखी लकड़ियाँ खोज रहा था। उसके साथ उसका गधा भी था, जो बोझा ढोने में उसकी मदद करता था। लकड़ियाँ बटोरते-बटोरते उसे समय का बिल्कुल ध्यान नहीं रहा और दिन कब ढल गया, यह पता ही नहीं चला। जब वह संभला तो देखा कि शाम गहरा चुकी थी और वह अपने गाँव से बहुत दूर निकल आया था। तभी मौसम भी खराब होने लगा, जिससे उसकी चिंता और बढ़ गई। अब वापस लौटना संभव नहीं था, इसलिए वह जंगल में ही रात बिताने के लिए कोई सुरक्षित जगह ढूँढने लगा। तभी उसे जंगल में एक साधु की कुटिया नजर आई। खुशी-खुशी वह अपने गधे के साथ वहाँ पहुँचा और साधु से रात बिताने के लिए स्थान माँगा। साधु ने स्नेहपूर्वक उसका स्वागत किया और भोजन-पानी के साथ आराम करने की व्यवस्था भी कर दी।

लकड़हारा रात को सोने की तैयारी कर ही रहा था कि उसे एक समस्या ने घेर लिया। उसने लकड़ियों को बाँधने के लिए अपनी सारी रस्सी इस्तेमाल कर ली थी, जिससे अब उसके पास गधे को बाँधने के लिए कोई रस्सी नहीं बची थी। यह सोचकर वह चिंतित हो गया कि कहीं गधा रात में इधर-उधर भटक न जाए। उसकी परेशानी को देखकर साधु मुस्कुराए और उसे एक अनोखी युक्ति बताई। उन्होंने कहा, “तुम्हें गधे को बाँधने की जरूरत नहीं, बस उसके पैरों के पास बैठकर रोज की तरह रस्सी बाँधने का नाटक कर दो। गधा इसे सच मान लेगा और अपनी जगह से नहीं हिलेगा।” लकड़हारा पहले तो चकित हुआ, लेकिन कोई और उपाय न देखकर उसने साधु की बात मान ली और गधे को बाँधने का नाटक कर सो गया।

सुबह सूरज की पहली किरणें जंगल में फैलीं, पक्षियों की चहचहाहट शुरू हो गई और लकड़हारा नींद से जागा। उसकी पहली चिंता अपने गधे की थी। वह भागकर बाहर आया और देखा कि गधा उसी जगह खड़ा था जहाँ उसने उसे छोड़ा था। उसे बड़ी राहत मिली और वह साधु को धन्यवाद देकर गाँव लौटने के लिए तैयार हुआ। लेकिन जब उसने गधे को आगे बढ़ाने की कोशिश की तो गधा अपनी जगह से टस से मस होने को तैयार नहीं था। लकड़हारे ने उसे खूब खींचा, डाँटा-डपटा, लेकिन गधा टस से मस नहीं हुआ। यह देखकर साधु हँसे और बोले, “अरे भाई, पहले गधे को खोलो तो सही!” लकड़हारा चौंक गया और बोला, “महाराज, मैंने तो उसे बाँधा ही नहीं, फिर खोलूँ क्या?” साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, “रस्सी भले ही न बाँधी हो, लेकिन बन्धन तो डाला था। जैसे बाँधने का दिखावा किया था, वैसे ही खोलने का भी नाटक करना होगा।”

लकड़हारा चकित था, लेकिन उसने साधु की बात मानी और झूठ-मूठ रस्सी खोलने का अभिनय किया। आश्चर्य की बात यह थी कि जैसे ही उसने यह किया, गधा तुरंत चल पड़ा। लकड़हारा यह देखकर हैरान रह गया। तब साधु ने उसे समझाया, “यही कर्मों का खेल है। हम अपने कर्मों को भले ही भूल जाएँ, लेकिन उनके प्रभाव से बच नहीं सकते। हर कर्म का फल अवश्य मिलता है, और जब तक हम उसे स्वीकार कर उसके अनुसार नया कर्म नहीं करते, तब तक हम उससे मुक्त नहीं हो सकते।”

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक धनी किसान


एक धनी किसान

कहानी: एक समय की बात है, एक गांव में एक धनी किसान रहता था। उसे अपने पूर्वजों से अपार संपत्ति मिली थी, लेकिन अधिक धन-संपदा के कारण वह बेहद आलसी हो गया था। उसका अधिकांश समय हुक्का पीने और इधर-उधर बैठकर बातें करने में बीतता था। उसकी इस लापरवाही का फायदा उसके नौकर-चाकर और रिश्तेदार उठा रहे थे। नौकर अपना काम ढंग से नहीं करते थे और चोरी-छिपे सामान ले जाते थे, जबकि उसके अपने सगे-संबंधी भी उसकी संपत्ति को धीरे-धीरे हड़पने में लगे थे। किसान को इस सबकी कोई चिंता नहीं थी, क्योंकि उसे लगता था कि उसकी संपत्ति कभी खत्म नहीं होगी।

एक दिन किसान का एक पुराना मित्र उससे मिलने आया। उसने जब किसान के घर की हालत देखी तो बहुत दुखी हुआ। उसने किसान को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। तब मित्र ने एक तरकीब निकाली और कहा कि वह उसे एक ऐसे महात्मा के पास ले जाएगा, जो अमीर बनने का रहस्य जानते हैं। किसान यह सुनकर उत्सुक हो गया और महात्मा से मिलने चला गया। महात्मा ने उसे बताया कि हर सुबह सूर्योदय से पहले एक हंस आता है, लेकिन जैसे ही कोई उसे देखने की कोशिश करता है, वह गायब हो जाता है। जो भी उस हंस को देख लेता है, उसका धन निरंतर बढ़ने लगता है।

किसान को यह बात बड़ी रोचक लगी। अगले दिन वह सूर्योदय से पहले उठकर खलिहान पहुंचा और वहां उसने देखा कि उसका एक संबंधी चुपचाप अनाज के बोरे में हाथ साफ कर रहा है। किसान ने उसे पकड़ लिया, जिससे वह शर्मिंदा होकर क्षमा मांगने लगा। फिर वह गौशाला पहुंचा, जहां उसका एक नौकर दूध चुराते हुए पकड़ा गया। किसान ने उसे डांटा और घर की सफाई करने का आदेश दिया। इस तरह वह रोज सुबह जल्दी उठकर हंस की खोज करने लगा। धीरे-धीरे नौकर और रिश्तेदार सतर्क हो गए और चोरी-चकारी बंद कर दी। नौकर ईमानदारी से काम करने लगे और घर में पहले से अधिक स्वच्छता और अनुशासन आ गया। किसान का स्वास्थ्य भी सुधरने लगा, क्योंकि अब वह हर दिन सुबह घूमने-फिरने लगा था।

धीरे-धीरे किसान को महसूस हुआ कि उसकी संपत्ति बढ़ने लगी है, लेकिन वह हंस उसे अभी तक नहीं दिखा। वह फिर महात्मा के पास गया और शिकायत की कि उसे अब तक हंस के दर्शन नहीं हुए। महात्मा मुस्कुराए और बोले, “तुम्हें हंस के दर्शन हो चुके हैं, पर तुम उसे पहचान नहीं पाए। वह हंस कोई और नहीं, बल्कि परिश्रम है। तुमने मेहनत शुरू की, अनुशासन अपनाया और अपनी जिम्मेदारी को समझा। यही सच्चा धन है, जो हमेशा बढ़ता रहेगा।” किसान को तब समझ आया कि सच्ची समृद्धि आलस्य से नहीं, बल्कि परिश्रम और जागरूकता से ही आती है।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कर्ज💐💐*

विवाह के दो वर्ष हुए थे जब सुहानी गर्भवती होने पर अपने घर राजस्थान जा रही थी …पति शहर से बाहर थे …

जिस रिश्ते के भाई को स्टेशन से ट्रेन मे बिठाने को कहा था वो लेट होती ट्रेन की वजह से रुकने में मूड में नहीं था इसीलिए समान सहित प्लेटफॉर्म पर बनी बेंच पर बिठा कर चला गया ….

गाड़ी को पांचवे प्लेटफार्म पर आना था …

गर्भवती सुहानी को सातवाँ माह चल रहा था. सामान अधिक होने से एक कुली से बात कर ली….

बेहद दुबला पतला बुजुर्ग…पेट पालने की विवशता उसकी आँखों में थी …एक याचना के साथ  सामान उठाने को आतुर ….

सुहानी ने उसे पंद्रह रुपये में तय कर लिया और टेक लगा कर बैठ गई…. तकरीबन डेढ़ घंटे बाद गाडी आने की घोषणा हुई …लेकिन वो बुजुर्ग कुली कहीं नहीं दिखा …

कोई दूसरा कुली भी खाली नज़र नही आ रहा था…..ट्रेन छूटने पर वापस घर जाना भी संभव नही था …

रात के साढ़े बारह बज चुके थे ..सुहानी का मन घबराने लगा …

तभी वो बुजुर्ग दूर से भाग कर आता हुआ दिखाई दिया …. बोला चिंता न करो बिटिया हम चढ़ा देंगे गाडी में …भागने से उसकी साँस फूल रही थी ..उसने लपक कर सामान उठाया …और आने का इशारा किया

सीढ़ी चढ़ कर पुल से पार जाना था कयोकि अचानक ट्रेन ने प्लेटफार्म चेंज करा था जो अब नौ नम्बर पर आ रही थी

वो साँस फूलने से धीरे धीरे चल रहा था और सुहानी भी तेज चलने हालत में न थी
गाडी ने सीटी दे दी
भाग कर अपना स्लीपर कोच का डब्बा ढूंढा ….

डिब्बा प्लेटफार्म खत्म होने के बाद इंजिन के पास था। वहां प्लेटफार्म की लाईट भी नहीं थी और वहां से चढ़ना भी बहुत मुश्किल था ….

सुहानी पलटकर उसे आते हुए देख ट्रेन मे चढ़ गई…तुरंत ट्रेन रेंगने लगी …कुली अभी दौड़ ही रहा था …

हिम्मत करके उसने एक एक सामान रेलगाड़ी के पायदान के पास रख दिया ।

अब आगे बिलकुल अन्धेरा था ..

जब तक सुहानी ने हडबडाये कांपते हाथों से दस का और पांच का का नोट निकाला …
तब तक कुली की हथेली दूर हो चुकी थी…

उसकी दौड़ने की रफ़्तार तेज हुई ..
मगर साथ ही ट्रेन की रफ़्तार भी ….

वो बेबसी से उसकी दूर होती खाली हथेली देखती रही …

और फिर उसका हाथ जोड़ना नमस्ते
और आशीर्वाद की मुद्रा में ….
उसकी गरीबी …
उसका पेट ….
उसकी मेहनत …
उसका सहयोग …
सब एक साथ सुहानी की आँखों में कौंध गए ..

उस घटना के बाद सुहानी डिलीवरी के बाद दुबारा स्टेशन पर उस बुजुर्ग कुली को खोजती रही मगर वो कभी दुबारा नही मिला …

आज वो जगह जगह दान आदि करती है मगर आज तक कोई भी दान वो कर्जा नहीं उतार पाया उस रात उस बुजुर्ग की कर्मठ हथेली ने किया था …

सच है कुछ कर्ज कभी नही उतारे जा सकते……!

Posted in हिन्दू पतन

हिंदू जब मलेचछ हो जाता है तो कितना घातक होता है ?*

एक थे *राघवराम कौल* काश्मीरी ब्राह्मण, जिनको गौ मांस खिला कर मलेचछ बनाया गया था ! इनके पुत्र का नाम शेख इब्राहीम था। शेख इब्राहीम के पुत्र का नाम शेख अब्दुल्ला ! शेख अब्दूल्ला के पुत्र का नाम फारुक अब्दूल्ला, फारुक अब्दूल्ला के पुत्र है उमर अब्दूल्ला।

ये है राघव राम कौल का अब्दूल्ला परिवार।।जब तक इनकी ताकत थी काश्मीर में इन्होंने भी लोगों के साथ वही व्यवहार किया है, वही नैरेटिव चल रहा था, डोगरा सिंधी कश्मीरी पंडित बाल्मीकि समाज, सब के मांस को नोच नोच कर खाया ,पलायन हत्या से भरा काश्मीर के इतिहास का 70 साल।

एक थे चितपावन ब्राह्मण जिनका नाम *तुलसीराम* था ! उन्होंने टीपू सुल्तान से बचने के लिए इस्लाम कुबूल कर लिया था और अपने गांव ओवैस को उन्होंने अपना सरनेम ओवैसी बना लिया ! उन्ही तुलसीराम के पुत्र का नाम अब्दुल वाहिद ओवैसी था ! अब्दूल वाहिद के पुत्र का नाम सुल्तान ओवैसी था ! सुल्तान ओवैसी के पुत्र का नाम सलाहुद्दीन ओवैसी था ! सलाहुद्दीन ओवैसी के पुत्र का नाम असद्दुदीन ओवैसी और अकबरूद्दीन ओवैसी। और विडंबना देखिये कि ओवैशी ब्रदर जिस गोडसे से घृणा करते हैं ये उसी समाज से है, यानि दोनो चितपावन ब्राहम्ण।।इनका भी यही नैरेटिव दूसरे लोगों को डराना और हर साल 15 मिनट का समय मांगना।

एक थे मुहम्मद अली जिन्ना जो पाकिस्तान के बाप कहे जाते थे ! इनके भी बाप का नाम *पुंजालाल ठक्कर* था ,परदादा का नाम प्रेमी जी भाई मेग जी ठक्कर था, दादा का नाम चुन्ना भाई प्रेमजी भाई ठक्कर था ! जो एक गुजराती हिंदू थे । ये पैसे के लिए धर्म छोड़ दिए ! इनका भी वही नैरेटिव था और आज भी है ! खुद तो पैसे के लिए कटोरा पकड़  लिये दूसरों को भी पकड़ाए।

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के लगभग सभी मुसलमानों के पूर्वज वास्तव में हिन्दू ही थे जो मुग़ल शासकों के भय व उनके द्वारा लोभ वश मुस्लिम बन गए। आज उन्हीं की औलादें अनजाने में इस्लाम के नाम पर आतंक अथवा मारकाट कर रहे हैं। काश कि वे अपने पूर्वजों की गलती को सुधार, घर वापसी कर उनकी आत्मा को शांति पहुंचाने का कार्य करते।

ईश्वर एक है तो धर्म भी एक ही होगा। सत्य शास्वत और सनातन होता है, धर्म भी शास्वत और सनातन होता है।
धर्म के नाम पर कल या आज पैदा होने वाले मज़हब, मत सम्प्रदाय – शास्वत नहीं, सनातन नहीं, धर्म न हैं न ही हो सकते हैं। जो इन्हें ही धर्म मानते हैं, वे ऐसा अज्ञानवश मानते है।

*सनातन ही सत्य है वही रहेगा…*

Posted in खान्ग्रेस

जयपुर की एक जूता बनाने वाली कंपनी भारतीय सेना के लिए जूते बनाती है। लेकिन इसे सीधे बेचने के बजाय यह इसे इजराइल निर्यात करती थी। जहां से भारतीय सेना करीब 10 गुना अधिक कीमत पर खरीदती थी। यह प्रथा दशकों से चली आ रही थी। जब तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को इस बात का पता चला तो उन्होंने तुरंत उस कंपनी के सीईओ को फोन किया, जिन्होंने खुलासा किया कि पहले वे इसे सीधे सेना को बेचते थे। लेकिन टेंडरिंग, सैंपल अप्रूवल, ऑर्डर देने, गुणवत्ता जांच, भुगतान प्रक्रिया और अंतिम भुगतान से लेकर हर चरण में भारी “कटौती” मांगी जाती थी… जिसमें कई महीने लग जाते थे और भारी भ्रष्टाचार होता था। इसलिए उन्होंने इसे एक इजराइली कंपनी को निर्यात करना शुरू कर दिया। श्री पर्रिकर ने उन्हें इसे फिर से सीधे बेचने के लिए कहा और आश्वासन दिया कि अगर एक दिन की भी देरी हो या किसी भी स्तर पर कटौती की मांग हो तो बस उन्हें फोन करें… नतीजतन आज हम सैनिकों के लिए वही जूते ₹2200/- में खरीद रहे हैं, जिन्हें यूपीए सरकार ₹25000+ प्रति जोड़ी में खरीद रही थी।  कोई आश्चर्य नहीं कि हताश कांग्रेस कहेगी कि चौकीदार चोर है…

मेरी बात पर यकीन न करें… सच जानन

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

યેઝિદીસ –

યેઝીદીઓ કુર્દિશ બોલતા લોકો છે જે ઉત્તર ઇરાકમાં રહેતા.
એવો અંદાજ છે કે છેલ્લાં 800 વર્ષોમાં લગભગ 25 મિલિયન યઝીદીઓ પર ખૂબ જ   અત્યાચાર ગુજારવામાં આવ્યો હતો.   યેઝીદીઓ “શેતાન ઉપાસકો” હતા એવું માની ને તેમની કતલ કરવામાં આવી.
તેમની પાસે સમૃદ્ધ આધ્યાત્મિક પરંપરા છે જે વિશ્વના સૌથી જૂના સનાતન ધર્મની શાખા છે
યેઝિદીઓ ભારતથી અફઘાનિસ્તાન, અને અફઘાનિસ્તાનથી ઈરાનમાં સ્થળાંતર કરીને ઈરાક અને સીરિયામાં રહેતા હતા.  ઇરાકમાં તેઓએ પોતાને “યેઝીદી” કહેવાનું શરૂ કર્યું.
અહીં યેઝિદીઓ દ્વારા કરવામાં આવતી કેટલીક ધાર્મિક વિધિઓ છે જે ફક્ત હિન્દુઓ દ્વારા અનુસરવામાં આવે છે જે તેમના ભારતીય મૂળને સાબિત કરે છે:-
1. મોર (મલક તાઉસ) જેની તેઓ પૂજા કરે છે તે ફક્ત ભારતમાં જ જોવા મળે છે, અને તે ભગવાન સુબ્રમણ્યના દેવદૂત (ભગવાન શિવ અને પાર્વતીના પુત્ર) તરીકે ઓળખાય છે.
2. તેઓ હજુ પણ સૂર્ય વંદનામ (સૂર્ય દેવની પૂજા) અને અગ્નિહોત્ર વિધિ કરે છે
3. તેઓ  ઢોલકને વગાડે છે.
4. તેઓના કડક ગોત્ર નિયમો છે જેનું આજ સુધી પાલન કરવામાં આવે છે
5. તેઓ તેમના કપાળ પર પવિત્ર તિલક લગાવે છે.
6. તેઓ બહુ-સશસ્ત્ર યઝીદી દેવતાઓની પૂજા કરે છે, બહુ સશસ્ત્ર દેવતાઓ માત્ર હિન્દુ પરંપરામાં જોવા મળે છે
7. તેઓ શુભ દિવસોમાં તેમના ઘરના દરવાજા પર પાંદડાની દોરી લટકાવે છે.
8. યેઝીદી નવું વર્ષ, જેને સેરે સાલ તરીકે ઓળખવામાં આવે છે, જેનો અર્થ થાય છે “વર્ષનો મુખ્ય”, એપ્રિલના ચોક્કસ બુધવારે ઉજવવામાં આવે છે, જેને રેડ વેન્ડ્સડે તરીકે ઓળખવામાં આવે છે (દક્ષિણ ભારતીયો પણ એપ્રિલમાં નવું વર્ષ ઉજવે છે
9. પુનર્જન્મમાં યેઝીદીઓની માન્યતા એ તેમના મૂળ વતન ભારતના બાકી રહેલા અવશેષોમાંનું એક છે.  યેઝીદીઓ માને છે કે જ્યાં સુધી તેઓ આત્માની શુદ્ધતાના ચોક્કસ સ્તર (મોક્ષની વિભાવના) પ્રાપ્ત ન કરે ત્યાં સુધી તેઓ પુનર્જન્મ લેતા રહેશે.
10.તેઓ અગ્નિ ની પૂજા કરે છે.

યઝીદીઓ શુક્રાચાર્યનું સન્માન કરે છે.  જ્યારે ભગવાન વિષ્ણુ વામન અવતાર તરીકે આવ્યા ત્યારે શુક્રાચાર્ય કેરળના રાજા મહાબલિના સલાહકાર હતા.  પારસીઓ (ઝોરોસ્ટ્રિયન) પણ શુક્રાચાર્યને ભગવાન આહુરા મઝદા તરીકે પૂજે છે
યઝીદીઓ માટેનું મુખ્ય તીર્થયાત્રી તમિલનાડુ, ભારતમાં આવેલું એક પઝહાની મંદિર છે, જે ભગવાન સુબ્રમણ્ય છે

#saveyezidihindus

Posted in हिन्दू पतन

शायद नई पीढ़ी को जो सोशल मीडिया वाली है ,उन्हे न पता हो !मुझे लालू यादव का वो दौर याद है।अखबारों में भी बिहार की खबरें छपती थी आश्चर्य होता था कि क्या इस देश में SC है HC है  पुलिस है ?शिल्पी जैन हत्याकांड आप लोग गूगलपर सर्च करिये!शिल्पी जैन के कपड़ों पर मिले सीमेन के डीएनए को बदल दिया गया और बलात्कारी कौन था उसे बिल्डिंग के कई लोगों ने देखा था..!कई लोगों ने नाम बताया कि बलात्कारी लालू यादव का साला साधू यादव था..!जिस पर एक फिल्म भी बनी थी, नाम था गंगाजल।लालू यादव के पार्टी के मंत्रियों विधायकों और गुंडो को बिहार की जो लड़की पसंद आ जाती थी उसे उठा लिया जाता था।
या तो वह लड़की चुप रहे या फिर शिल्पी जैन की तरह मार दिया जाए..!
और फिर बचने के लिए किसी को उसका बॉयफ्रेंड बनाकर उसे भी मार दिया जाए..!
और यह कहानी बना दिया जाए की दोनों ने सुसाइड किया।

एक आईएएस अधिकारी बंगाल के रहने वाले थे..!
नाम था B.B. विश्वास।
उनकी पत्नी का नाम था चंपा विश्वास..!
जो बेहद खूबसूरत थी।
एक दिन वह अपने सरकारी निवास से जा रही थी।
इस परिसर में राजद की एक महिला विधायक का भी घर था।
एक दिन उनका बेटा मृत्युंजय यादव ने चंपा विश्वास को देखा..!
फिर वह उनका पीछा करते उनके घर गया और रिवाल्वर की नोक पर उनका बलात्कार किया..!
और रिवॉल्वर दिखाकर धमकी दिया कि जहां चाहे वहां चली जाओ कोई केस दर्ज नहीं करेगा।

अगले दिन फिर मृत्युंजय यादव अपने दो साथियों के साथ आया और इस बार तो हद हो गई ना सिर्फ चंपा विश्वास का बलात्कार किया गया बल्कि इस अधिकारी की बुजुर्ग मां और उनकी नौकरानी के साथ भी बलात्कार किया गया।

आईएएस अधिकारी थाने में शिकायत लेकर गए।
थाना अध्यक्ष ने हाथ जोड़ दिया कि सर जी मुझे मरना है क्या..!
मैं केस नहीं लिख पाऊंगा।
वह SP और डीजीपी के पास गए..!
सबने हाथ जोड़ लिया..!
सर जी हमें चुपचाप नौकरी करने दीजिए।

वह लालू के पास गए..!
लालू ने बेशर्मी से कहा..!
अरे क्या हो गया जो बलात्कार हो गया..!
यह तो छोटी मोटी घटना है।

2 साल तक यही सिलसिला चलता रहा..!
तीन बार चम्पा विश्वास का एबॉर्शन करवाना पड़ा।
फिर जब उत्तर प्रदेश की मीडिया में यह खबर छपी तो बिहार के राज्यपाल ने जब मामले को इसका संज्ञान लिया।
लेकिन तब तक आईएएस अधिकारी VRS लेकर बंगाल चले गए थे..!
और उन्होंने और उनकी पत्नी ने कोई गवाही देने या बिहार जाकर केस लड़ने से मना कर दिया।

उन्होंने कोर्ट में कहा
कि मुझे बार बार बिहार बुलाया जाएगा, तो मेरी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा ?

फिर लालू यादव की पहली बेटी मीसा भारती की शादी थी।
पूरे बिहार के बड़े शहरों में जितने भी मारुति सुजुकी टाटा मोटर्स के शोरूम थे उनका ताला तोड़कर शोरूम में खड़ी और उनके गोदाम में खड़ी नई गाड़ियों को उठा लिया गया।
यहां तक कि रतन टाटा कैमरे पर आकर बोले..!
कि अब वह बिहार में अपना पूरा ऑपरेशन बंद कर रहे हैं..!
और टाटा ग्रुप में बिहार में अपने सारे डीलर्स को उनका डिपाजिट वापस करके उनका शोरूम सरेंडर करवा दिया।
संजय अग्रवाल “हाईवे”
लालू की पार्टी के लोग कार लेकर प्लेटफार्म पर आते थे..!
और जिस प्लेटफार्म पर वह रुकते थे..!
स्टेशन मास्टर को रिवाल्वर दिखाकर कह दिया जाता था की राजधानी एक्सप्रेस इसी प्लेटफार्म से जाएगी।

सोचिए सीबीआई के असिस्टेंट डायरेक्टर थे यूएन विश्वास।
उन्हें जब लालू यादव को चारा घोटाले में गिरफ्तार करना था..!
तब उन्होंने पटना हाई कोर्ट में अर्जी देकर कहा..!
कि उन्हें लालू को गिरफ्तार करने के लिए भारतीय सेना की मदद चाहिए..!
क्योंकि लालू के गुंडे दो बार सीबीआई अधिकारियों पर गोलीबारी कर चुके हैं।

लालू यादव की पार्टी का एक सांसद था मोहम्मद शहाबुद्दीन..!
जो कोविड में एड़ियां रगड़ रगड़कर मरा..!
उसने डेढ़ सौ से ज्यादा हिंदुओं का कत्ल किया है।

कई कत्ल में सुप्रीम कोर्ट तक में उसे सजा हुई..!
लेकिन मरते दम तक लाल यादव ने उसे कभी पार्टी से निकला नहीं।

उसने एक मकान और दुकान कब्जा करने के लिए मां बाप के सामने उनके दो बेटों को तेजाब के ड्रम में डालकर दुनिया की सबसे दर्दनाक मौत दिया था।
खैर ईश्वर ने भी उसे ऐसी मौत दिया, उसका अंतिम वीडियो आप लोगों ने देखा ही होगा..!
जब वह अस्पताल में एरिया रगड़ रगड़ कर चिल्ला रहा था..!
वेंटिलेटर नहीं था, वह तड़प रहा था, और 1 घंटे तक तड़पते तड़पते वह मरा।

और मुझे लग रहा था कि वह उस वक्त उन दोनों भाइयों की आत्मा को देख रहा होगा, जिन्हें उसने तेजाब में डूबा कर मारा था।

कभी कलेक्टर को पीट पीट कर मार दिया जाता था..!
तो कभी पूरे परिवार को कमरे में बंद करके आग लगा दी जाती थी..!
फिर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों को मार दिया जाता था।

लालू यादव की पार्टी का एक गुंडा और बलात्कारी था..!
नाम था तस्लीमुद्दीन।
उसने चार नाबालिक लड़कियों का बलात्कार किया था..!
और लालू ने उसे एचडी देवगौड़ा की सरकार में गृह मंत्री बनवा दिया।
वह तो भारत के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें दुख है कि एक बलात्कारी को केंद्रीय मंत्री बना दिया गया।
तब जाकर उसे मंत्रिमंडल से हटाया गया।

जंगल राज और गुंडागर्दी का वह दौर ऐसा चला कि यह “जंगल राज” शब्द सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने दिया था..!
जब वह बिहार के एक मामले की सुनवाई कर रहे थे..!
और तब से लालू यादव के शासन को “जंगल राज” का कर लोग याद करके सिहर उठते हैं।
ऐसा शासन था उस समय इन लोगों का..!
और आज यह लोग जब मोदी जी के कारण मुश्किल में आ गए हैं..!
एक-एक करके सब की फाइलें खुल रही है, और सब जेल जा रहे हैं..!
तो पूरे देश में इंडिया गठबंधन (ठगबंधन) बनाकर मोदी जी पर दबाव बनाना चाहते हैं..!
और गन्दी राजनीतिक करना चाहते हैं..!
अब देश की जनता और मतदाताओं को सुनिश्चित करना होगा..!
कि ऐसे लोगों को हाथों में देश की बागडोर देना है क्या
खेर, आज के दौर में जनता सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत समझदार हो गई है..!
एवं ऐसे लोगों की गतिविधियों को जानने और समझने लग गई है..!
इसीलिए देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति भारत की जनता का विश्वास और बढ़ गया है..।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

#सुनो
यशवंत वर्मा के यहाँ आग १४ मार्च होली के दिन लगी। उस समय २७ मशीनें नोटों की गिनती कर रही थीं। है न रामलीला? अच्छा यदि मीलॉर्ड उस समय अपने बंगले पर होते तो ये पैसा पकड़ा जाता?असहाय सरकार तो वेबस थी लेकिन जनता की हाय से फिर हिरण्यकश्यप का हिरण्य अपने आप सामने आ गया। ये समाचार सबसे पहले टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा लेकिन आठ दिन बाद। कितना जबरदस्त है इकोसिस्टम!!
माननीय यशवंत वर्मा २०१२ की यूपी की अखिलेश सरकार के समय इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी सरकार के एडवोकेट जनरल थे। कमाल की बात है सुप्रीम कोर्ट का दल्ला कपिल सिब्बल जिंदगी भर कांग्रेसी रहने के बाबजूद अखिलेश की सपा से राज्यसभा सांसद है।
ये श्रीमान जी सिर्फ हाईकोर्ट के जस्टिस नहीं थे बल्कि हाईकोर्ट कोलेजियम जो हाइकोर्ट के जजों की संस्तुति करता है, के २०१६ से सदस्य थे। कितने अपने जैसे जज बनाये होंगे? कितने कमाये होंगे? दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या अन्य कोलेजियम मेंबर कितने भी घड़ियाली आंसू बहायें लेकिन वे यशवंत के पाप से अनभिज्ञ नहीं हैं बल्कि गले गले साथी हैं।
ये बीमारी सुप्रीम कोर्ट में और भयंकर है। ये सभी चोर हैं। अय्याश हैं। भ्रष्ट हैं। देशद्रोही हैं। इनकी जगह जेल है। ये जो बेल का खेल खेलते रहे हैं वाकई यदि फांसी नहीं तो ६०-७० साल की कठोर सजा के हकदार हैं।
इसे कहते हैं पाप के घड़े का भरना और फूटना। कितना भी मजबूत इकोसिस्टम हो कंस के इकोसिस्टम से मज़बूत नहीं हो सकता। जब पाप का घड़ा भरा तो बताकर कंस को मारने वाला सामने आया और मार गया। तमाम अन्यायी इसे याद रखें। उसके यहाँ देर है अंधेर नहीं।
✍️ हिन्दू बसंत राठी

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas, हिन्दू पतन

राणा सांगा  और  #इब्राहिम_लोदी की सेना के बीच कई छोटी झड़पो के बाद पहला बड़ा आमना सामना हुआ 1517 की ठण्ड के दौरान… खतौली युद्ध में….अपने से दोगुनी सेना पर राजपूतों ने सीधे हमला बोलने की रणनीति अपनाई और महज़ 4-5 घंटे की ख़ूनी लड़ाई में अफगानों को तितर बितर कर दिया अपने बेटे को सांगा के हाथों बंदी बनवा और आधी फ़ौज गवा इब्राहिम भाग खड़ा हुआ…

बेटे #गयासुद्दीन_लोदी की जान बचाने को सुल्तान ने कई इलाके और बड़ी रकम राणा को दी…
राणा ने इसी युद्ध में अपना एक हाथ गवाया…
1519 इब्राहिम ने फिर राणा को काबू करने का प्रयत्न किया… लगभग 30 हज़ार सवार और 20 हज़ार पैदल के साथ मेवाड़ का रूख किया
अबकी बार राणा के पास पहले से भी कम फ़ौज थी काहे कि मालवा की घेराबंदी राजपूतों ने की हुईं थी .. महज़ 10 हज़ार सवार और 5 हज़ार पैदल के साथ राणा ने इब्राहिम का सामना धौलपुर में किया
पुनः सीधे और पहले हमले की रणनीति अपनायी गयी… दोपहर से शाम तक राजपूतों ने 35 हज़ार से ज्यादा अफगान काट डाले…
इब्राहिम घायल हो भाग निकला… और उसकी फ़ौज के आधे से ज्यादा बड़े कमांडर इस युद्ध में राजपूतों के हाथों मारे गए…
राणा के हाथ ग्वालियर सहित बड़ा इलाक़ा लगा

तीसरी बार फिर इब्राहिम लोदी ने राणा को कुचलने को कूच किया…. फ़ौज अबके और बड़ी थी…. साल था 1521… रणथम्बोर के पास दौनो फ़ौजों का आमना सामना हुआ…. पुनः धौलपुर की कहानी दोहराई गयी…
राणा ने बुरी तरह लोदी को हराया उसने फिर भाग कर दिल्ली कूच किया..

इस युद्ध के बाद… आज का राजस्थान, गुजरात का आधा हिस्सा, मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश का बड़ा भाग हरियाणा का बड़ा भाग.. राणा सांगा के कब्ज़े में था… मेवाड़ विस्तृत हो चुका था और दिल्ली सल्तनत को कमजोर कर दिया था…

अब सवाल ये है मेरा #रामजी_लाल_सुमन व अन्य सभी से जिस राणा सांगा ने तीन तीन बार इब्राहिम को युद्ध में रगड़ा वो भला बाबर से क्यों मदद लेते…

बाबर को इब्राहिम के लिए नहीं…. राणा के लिए इब्राहिम के ही साथी सिपहसालार ने न्योता दिया … उन्हें हिन्दू राजा के विरुद्ध कमजोर इब्राहिम स्वीकार्य न था तो नये लड़ाके बाबर को लाए…

मामला तब भी मुस्लिम ब्रदरहुड का था…आज भी है  और दुश्मन तब भी हिन्दू था आज भी है …

बाबर खुद बाबरनामा में स्वीकार करता है सांगा उसके सबसे ताक़तवर काफ़िर दुश्मन थे!