Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अमेरिका में एक बहुत बड़ा अरबपति था, रथचाइल्ड।
एक दिन एक भिखारी भीतर घुस गया उसके मकान में और जोर-शोर से शोरगुल करने लगा कि मुझे कुछ मिलना ही चाहिए। बिना लिए मैं जाऊंगा नहीं।

जितना दरबानों ने अलग करने की कोशिश की, उतनी उछलकूद मचा दी। आवाज उसकी इतनी थी कि रथचाइल्ड के कमरे तक पहुंच गई। वह निकलकर बाहर आया। उसने उसे पांच डालर भेंट किए और कहा कि सुन, अगर तूने शोरगुल न मचाया होता, तो मैं तुझे बीस डालर देने वाला था।

मालूम है उस भिखमंगे ने क्या कहा?

उसने कहा, महानुभाव, अपनी सलाह अपने पास रखिए। आप बैंकर हो, मैं आपको बैंकिंग की सलाह नहीं देता।

मैं जन्मजात भिखारी हूं, कृपा करके भिक्षा के संबंध में मुझे कोई सलाह मत दीजिए।

रथचाइल्ड ने अपनी आत्मकथा में लिखवाया है कि उस दिन मैंने पहली दफा देखा कि भिखारी का भी अपना चेहरा है। वह कहता है, जन्मजात भिखारी हूं! मैं कोई छोटा साधारण भिखारी नहीं हूं ऐसा ऐरा-गैरा, कि अभी-अभी सीख गया हूं। जन्मजात हूं। और तुम बड़े बैंकर हो, मैं तुम्हें सलाह नहीं देता बैंकिंग के बाबत। कृपा करके तुम भी मुझे भीख मांगने के बाबत सलाह मत दो। मैं अपनी कला अच्छी तरह जानता हूं।

रथचाइल्ड ने लिखा है अपनी आत्मकथा में कि उस दिन मैंने उस भिखारी को गौर से देखा और मैंने पाया कि सम्राटों के ही चेहरे नहीं होते; भिखारियों के भी अपने चेहरे हैं।

लेकिन भिखारी भी एक ही चेहरा लेकर नहीं चलता।

जब वह अपनी पत्नी के पास पहुंचता है, तो चेहरा बदलता है। जब अपने बेटे के पास जाता है, तो चेहरा बदल लेता है। जब पैसे वाले के पास से निकलता है, तो चेहरा और होता है। जब गरीब के पास से निकलता है, तो चेहरा और होता है। जिससे मिल सकता है, उसके पास चेहरा और होता है। जिससे नहीं मिल सकता है, उसके पास चेहरा और होता है। उसके पास भी एक फ्लेक्सिबल, एक लोचपूर्ण व्यक्तित्व है, जिसमें वह चेहरे अपने बदलता रहता है।

ये चेहरे हमें बदलने इसलिए पड़ते हैं, क्योंकि हमारे भीतर अपना कोई चेहरा नहीं है, कोई ओरिजिनल फेस नहीं है।

कृष्ण कहते हैं, युक्त आत्मा, स्थिर बुद्धि हुई जिसकी, ऐसा व्यक्ति ही मुझे जान पाता है।

परमात्मा के पास झूठे चेहरे लेकर नहीं जाया जा सकता। हां, कोई चाहे तो बिना चेहरे के भला पहुंच जाए; लेकिन झूठे चेहरों के साथ नहीं जा सकता। पर बिना चेहरे के वही जा सकता है, जिसके पास भीतर एक युक्त आत्मा हो। तब शरीर के चेहरों की जरूरत नहीं रह जाती।

लेकिन बड़े मजे की बात है कि हम सब झूठे चेहरे लगाकर जीते हैं। हमें अच्छी तरह पता है कि हम झूठे चेहरे लगाकर जिंदगी में जीते हैं। और हमारे पास कई चेहरे हैं, हमारे पास एक व्यक्तित्व नहीं, एक आत्मा नहीं।

महावीर ने कहा है, मल्टी-साइकिक, बहुचित्तवान है आदमी। बहुत चित्त हैं उसके भीतर। यह मल्टी-साइकिक शब्द तो अभी जुंग ने विकसित किया, लेकिन महावीर ने पच्चीस सौ साल पहले जो शब्द उपयोग किया है, वह ठीक यही है।

वह शब्द है, बहुचित्तवान। बहुत चित्त वाला है आदमी।

कृष्ण भी वही कह रहे हैं कि जब वह एक चित्त वाला हो जाए, तभी मुझ तक आ सकता है; उसके पहले मुझे न जान पाएगा।

हम दूसरे को तो धोखा देते हैं, लेकिन बड़ा मजा तो यह है कि हमें कभी यह खयाल नहीं आता है कि दूसरे भी ऐसे ही चेहरे लगाकर हमें धोखे दे रहे हैं। और हम चेहरों के एक बाजार में हैं, जहां आदमी को खोजना बहुत मुश्किल है। जब हम हाथ बढ़ाते हैं, तो हमारा एक चेहरा हाथ बढ़ाता है; दूसरी तरफ से भी जो हाथ आता है, वह भी एक चेहरे का हाथ है। सिर्फ इमेजेज, प्रतिमाएं मिलती हैं; आदमी नहीं मिलते। मुलाकात अभिनय में होती है; मुलाकात प्राणों की नहीं होती। बातचीत दो यंत्रों में होती है–सधे-सधाए, रटे-रटाए जवाब-सवालों में। भीतर की आत्मा का सहज आविर्भाव नहीं होता। लेकिन हम खुद अपने को धोखा देते-देते इतने धोखे में डूब गए होते हैं कि यह खयाल ही नहीं होता कि दूसरे लोग भी ऐसा ही धोखा दे रहे हैं। -OSHO

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#सुनो
हिंदुओं याद करिए कि
यूपी की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने होली शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण होली केवल दिन में 11 बजे तक खेलने का औरंगजेबी आदेश जारी कर दिया था।😡👊

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भारत का मध्यकालीन इतिहास इसी फ्रॉड इरफान हबीब ने लिखा है जो किताबों में पढ़ाया जाता है। 

जबकि अकबर ने अपनी सगी फुफेरी बहन को भी नहीं छोड़ा

अकबर की सगी फुफेरी बड़ी बहन सलीमा सुल्तान जो उससे उम्र में लगभग 20 साल बड़ी थी लेकिन बेहद खूबसूरत थी दरअसल सलीमा सुल्तान का भी बापदादा तुर्कमेनिस्तान से आए थे उनके अंदर भी तुर्क नस्ल था इसलिए वह बेहद खूबसूरत थी

बाद में सलीमा सुल्ताना की शादी बैरम खां से हो गई जो मुगल राज का सबसे सफल सेनानायक था उसने कई लड़ाइयों में अकबर की मदद की थी और बैरम खां की वजह से मुगल साम्राज्य गुजरात से लेकर औरंगाबाद तक फैला यहां तक कि कंधार विजय में भी बैरम खान ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी

एक दिन अकबर बैरम खान के घर गया…. बैरम खान की पत्नी जो अकबर के मां की उम्र की थी उसने सोचा कि मेरा छोटा भाई आया है इसलिए वह बिना पर्दे में अकबर के सामने आई अकबर ने जब अपनी बहन और बैरम खान के पत्नी सलीमा सुल्तान के सौंदर्य को देखा तब वह उसके ऊपर लट्टू हो गया वह बैरम खां को किसी भी तरह मारने की साजिश रचने लगा सबसे पहले उसने बैरम खां को सभी पदों से मुक्त कर दिया उसके बाद उसे वह अचानक गुजरात  के शहर अहमदाबाद भेजा और फिर उसे अचानक हुक्म दिया कि तुम मक्का मदीना जाओ और अहमदाबाद से मक्का के लिए निकलते पाटन शहर में अकबर ने कुछ हत्यारों को लगा रखा था जिन्होंने धोखे से बैरम खान की हत्या कर दिया

अपने जीजा बैरम खान की हत्या करवाने के बाद अकबर ने अपनी फुफेरी बहन सलीमा सुल्तान से जबरन शादी कर ली

इसी बैरम खान और सलीमा सुल्तान का पुत्र अब्दुल रहीम था जिस के दोहे यानी रहीम के दोहे हम सब बचपन में पढ़ते हैं

उन्होंने लिखा है कि अकबर का बाप हुंमायूं पूरी जिंदगी लड़ाईयो में फंसा रहा शेरशाह सूरी से लेकर हेमू जैसे वीर उसे कभी चैन से बैठने नहीं दिए उसका पुत्र अकबर जब बहुत छोटा था तभी हिमायू मारा गया था और मरते मरते उसने अपने सेनापति बैरम खान को जो उसका फूफेरा दामाद भी था उसे अकबर की कस्टडी दी थी यानी उसे अकबर का संरक्षक बनाया था

बैरम खान और उसकी पत्नी सलीमा सुल्ताना (अकबर की सगी फुफेरी बहन) ने अकबर को पूरा संरक्षण में रखा उसे पाला पोसा 

इस तरह से सलीमा सुल्तान अकबर की फुफेरी बहन के साथ-साथ एक तरह से उसकी मां भी हुई लेकिन इसके बावजूद भी अकबर ने अपनी मां समान फुफेरी बहन जिसने उसे पाला पोसा बड़ा किया उस पर बुरी नजर रखा और अकबर ने बैरम खान का धोखे से  कत्ल करवा कर अपनी फुफेरी बहन सलीमा सुल्तान से निकाह कर लिया

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આપણામાંથી કેટલા લોકો જાણે છે કે ઔરંગઝેબે મૂળ ત્ર્યંબકેશ્વર મંદિરનો નાશ કર્યો, તેની ઉપર મસ્જિદ બનાવી અને નાસિકનું નામ બદલીને ગુલછનાબાદ રાખ્યું.

1751માં મરાઠાઓએ નાસિક પર ફરીથી કબજો કર્યો અને મસ્જિદ તોડી પાડી અને ત્ર્યંબકેશ્વરનું પુનર્નિર્માણ કર્યું –

12 જ્યોતિર્લિંગોમાંનું એક.
હર હર મહાદેવ 🚩

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एक बार की बात है, एक गांव में शेर आ गया, अब शेर तो शेर है,
सब उससे बचने के लिए इधर-उधर छुपने लगे, धीरे-धीरे शाम हो गई और बारिश शुरू हो गई,

बारिश भी ऐसी मुसलाधार कि पिछले दो-तीन साल में कभी हुई ना हो…

एक तो शेर की अफवाह और दूसरी बारिश, सभी हड़बड़ी में छुपते-छुपाते अपने घरों में दुबक गए…

इसी भागदौड़ में किसी का गधा रस्सी तुड़वा कर भाग गया !! 😳

अब तीन-तीन समस्याएं पैदा हो गई,
एक तो गांव में शेर आया हुआ है, तेज बारिश हो रही है, और गधा खो गया है और शेर ने उसे पकड़ लिया तो रोजगार की समस्या !!😔

तो उस आदमी ने अपनी पत्नी से कहा मैं गधे को ढूंढ कर लाता हूं,

पत्नी कहती है अरे गांव में शेर आया हुआ है अभी मत जाइए,

तब आदमी कहता है कि शेर तो कुछ नहीं शेर से ज्यादा डर तो “टपके” का है!

अब इतनी मूसलाधार बारिश में उनको डर था कि कहीं उनका घर टपकने से ढह न जाए,

वह शेर से भी बड़ी समस्या थी !!

संयोग से शेर भी बारिश के कारण उससे बचने के लिए उनके घर की दीवार के साथ पीठ लगाकर खड़ा था,

उसने इस बात को सुन लिया कि टपका ऐसा कौन सा प्राणी है जो मुझसे भी खतरनाक है 🤔,
इस जीव का तो पहली बार नाम सुना है और जब इंसान ही इससे डरता है तो मेरी तो पहुंच ही क्या!

शेर के लिए तो यह टपका ना हुआ डायनासोर हो गया!😟

अब थोड़ी देर विश्राम करने के बाद लगभग सुबह-सुबह 4:00 बजे के लगभग बारिश रुकी और वो आदमी मोटा लट्ठ लेकर अपने गधे को ढूंढने निकला…

तभी वह देखता है कि उसके घर की दीवार की ओट में एक जानवर पीठ टिकाए खड़ा है, अंधेरे में ज्यादा तो समझ में उसे आया नहीं तो पीछे की ओर से चल पड़ा उसे पकड़ने…

उसका गधा थोड़ा जंगली प्रकार का था, जब काम करवाता था तो बड़े लठ मारने पड़ते थे गधे को,

और इस समय रस्सी से भी बंधा हुआ नहीं था, तो उस आदमी ने डिसाइड किया कि चुपचाप जाता हूं और इसके ऊपर बैठ जाता हूं जिससे इसे भागने का मौका ही ना मिले !!

अब जो शेर था वह पूरी रात इसी चिंता में वहां खड़ा रहा कि गांव में शेर के साथ-साथ एक टपका भी घूम रहा है,
जो उससे भी ज्यादा खतरनाक है और इसी घबराहट में वह वहां से पूरी रात हिला नहीं!😁

तो आदमी चुपचाप जाता है और धप्प से उछलकर शेर के ऊपर बैठ जाता है, और जिस स्पीड से बैठा था, उसी स्पीड से लहराता हुआ लठ शेर के पिछवाड़े पर टिकाता है कि…
अच्छा पूरी रात से यही छुपा हुआ था और हम तेरे लिए परेशान होते रहे!

इस दोहरे आक्रमण से शेर बेचारा घबरा गया उसे लगा कि आज तो टपके ने पकड़ लिया और अब बचने की कोई संभावना नहीं…

बेचारा टपके से बचने के लिए चारों पैरों पर जंगल की ओर भागने लगा…

अब शेर के लिए टपके मतलब आदमी को बैठते ही समझ आ गया कि यह गधा नहीं है, लेकिन अब उतरे तो जान गई हाथ से..😳

तो उसने और जोर से चिल्ला चिल्ला कर शेर पर लठ बरसाना चालू रखा !!

शेर को बस इतना समझ में आ रहा था कि इस अनोखे आक्रमणकारी से इस समय भागना ही उचित है,
लेकिन जैसे शेर किसी जानवर को अपनी गिरफ्त में ले लेता है उसी तरह से टपके ने शेर को पकड़ा हुआ था ऊपर से लठ बरस रहे थे !!

धीरे-धीरे जंगल की ओर जाते-जाते सुबह होने लगी, पेड़ पौधे दिखाई देने लगे, एक बरगद का पेड़ भी जिसकी लंबी लंबी जटाएं लटक रही थी, आदमी को दिखाई दिया जो रास्ते में आ रहा था !!

जैसे ही आदमी बरगद के पेड़ के पास पहुंचा तो उसकी लटक रही जटाय पकड़कर वह पेड़ पर चढ़ गया और इस तरह…

शेर ने टपके से और आदमी ने शेर से मुक्ति पाई !! 🙏

तो बताओ शेर से ज्यादा डर टपके का है या नहीं 😎