इस धरती पर वामपंथ से बड़ा पाखंड, धूर्तता कोई दूसरा नही होगा ..वामपंथ को समझना है तो ज्यादा पुरानी नही सिर्फ 1989 में चीन में tianaman square, Beijing की घटना को याद कर लीजिये …
भारत में ये वामी पिल्ले लोकतंत्र, बोलने की आजादी, गरीबी से आजादी जैसी बड़ी बड़ी बाते करते है … लेकिन जब चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार ने छात्रों का दमन करते हुए करीब 3,000 छात्रों को मारा था तब भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों ने चीन के इस दमन का समर्थन किया था ..
चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ने जब mao tse tung के नेतृत्व में सत्ता हथियाई थी तब से चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का तानाशाही का राज चलता है .. कभी चुनाव नही होते ..लोगो को कोई भी नागरिक अधिकार हासिल नही है ..हलांकि जब चीन की अर्थव्यवस्था चौपट होने लगी तब चीन ने कम्युनिज्म की आड़ में साम्राज्यवादी निति अपना लिया और जिसका नतीजा हुआ की चीन में कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोग और सेना से रिटायर जनरलों ने हजारो करोड़ डालर का साम्राज्य खड़ा कर लिया .. चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के ये उद्योगपति बड़े पैमाने पर मजदूरों का शोषण करने लगे .. और चीन में मजदूरों को कोई भी हक या कोई भी labour law नही है ..
कम्युनिस्ट यानी वामपंथ से खिलाफ चीन में लोगो का रोष खूब बढने लगा ..क्योकि वामपंथी नीतिओ से चीन में आमिर खूब आमिर होने लगे और गरीब और गरीब होने लगे .. बीजिंग युनिवर्सिटी के छात्रों ने जबरजस्त आन्दोलन किया ..जो धीरे धीरे चीन के 400 से अधिक शहरों में फ़ैल गया .. छात्रों के साथ मजदूर और आम आदमी भी वामपंथी सुअरों के खिलाफ बगावत पर सड़को पर उतर गये …
चीनी सरकार ने छात्रों के आन्दोलन को बड़ी सख्ती से दबाया .. उनके उपर टैंक चढ़ा दिए ..छात्रों पर अत्याधुनिक राइफलो से फायरिंग की गयी ..करीब ३००० से ज्यादा छात्र मारे गये .. बीस हजार लोगो को जेल में ठूंस दिया गया जो आज भी चीनी जेलों में बंद है …यूनाईटेड नेशंस में चीन में अपना प्रतिनिधि मंडल भेजकर ये जानना चाहता था की आखिर कितने छात्र मारे गये है तो चीन के साथ साथ उस समय भारत में गठबंधन से सत्ता में आये वामपंथी दलों ने यूएन का ये कहकर विरोध किया की किसी भी देश को ये अधिकार हासिल है की वो अपने विरुद्ध बगावत पर कारवाई करे ..चीन से जो छात्रों पर कारवाई की है वो बिलकुल उचित है .. यहाँ तक भी वामपंथी छात्र संगठनो जैसे आआईसा, एसऍफ़आई, डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन आदि ने चीनी सेना द्वारा छात्रों पर टैंक चढ़ाने का समर्थन किया था |
इस आन्दोलन का चीन के विभिन्न शहरों में नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओ Wu’er kaixi, Chai Ling, Kong Qing dong, Wang Dan, Shen Tong, Liu Gang, Feng Congde,Wang Hui, Li Lu, etc को चीनी सेना ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें सार्वजिनक रूप से जनता के सामने बिना कोई मुकदमा चलाये गोली मार दी गयी ..इस आन्दोलन को समर्थन देने वाले चीन के चार बड़े लेखको को भी गोली मार दी गयी .. 20,000 से ज्यादा लोगो को जेलों में ठूंस दिया गया …
इस आदोलन में एक अनाम छात्र की तश्वीर पूरी दुनिया में बहुत प्रसिद्ध हुई ..जिसका नाम कोई नही जानता था ..जिसे “टैंक मैंन” का नाम दिया गया ..चीनी सेना के ३०० टैंको के आगे ये छात्र बिना किसी डर के खड़ा हो गया ..टैंक के चालक को विश्वास था की टैंक पास जाते ही ये छात्र भाग जायेगा लेकिन ये छात्र टस से मस तक नही हुआ .. और टैंक के चालक ने उस छात्र की बहादुरी से प्रभावित होकर खुद ही टैंक बिल्कुल उसके पास रोक दी … बाद में उस छात्र और उस टैंक चालक सैनिक को भी गोली मार दी गयी ..क्योकि उस सैनिक टैंक चालक ने उस छात्र की बहादुरी से प्रभावित होकर उसे कुचला नही था …
सोचिये … भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ये वामपंथी सूअर कितनी आजादी से “भारत तेरे टुकड़े होंगे ..इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह” का नारा लगाते है .. और करवाई होने पर कहते है देश में कोई आजादी ही नही है .. लेकिन यही वामपंथी सूअर चीन में अपनी पार्टी के दमन को जायज ठहराते है …..!!!