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सनातन धर्म को एक सूत्र में बांधकर उन्हें एकत्रित करने और एक मजबूत राष्ट्र निर्माण में #ब्राह्मणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है:

ब्राम्हणों  ने विवाह के समय अनिवार्य किया कि #दलित स्त्री द्वारा बनाये गये चूल्हे पर ही सभी शुभ कार्य होगें। इस तरह #दलित को जोड़ा गया।

#धोबन के द्वारा दिये गये सुहाग से ही कन्या सुहागन रहेगी इस तरह #धोबी को जोड़ा।

#कुम्हार  द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओ के पुजन होगें यह कहते हुये कुम्हार को जोड़ा।

#मुसहर जाति जो वृक्ष के पत्तों से पत्तल/दोनिया बनाते है यह कहते हुये जोड़ा कि इन्हीं के बनाए गये पत्तल/दोनीयों से देवताओं का पुजन सम्पन्न होगे।

#कहार जो जल भरते थे यह कहते हुए जोड़ा कि इन्हीं के द्वारा दिये गये जल से देवताओं के पूजन होगा।
#यादव के गौशाला के दूध से बने प्रसाद को भगवान को भोग लगाया जाता है।

#विश्वकर्मा द्वारा बनाए गए हथियार को भगवान के शस्त्र के रूप में स्वीकार किया गया।

#बढ़ई जो लकड़ी के कार्य करते थे यह कहते हुये जोड़ा कि इनके द्वारा बनाये गये आसन/चौकी पर ही बैठकर वर-वधू देवताओं का पुजन करेंगे।

#मालाकार जो डाल और मौरी को दूल्हे के सर पर रख कर द्वारचार कराया जाता है, #माली को यह कहते हुये जोड़ा गया कि इनके द्वारा बनाये गये उपहारों के बिना देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल सकता।

#डोम जो गंदगी साफ और मैला ढोने का काम किया करते थे उन्हें यह कहकर जोड़ा गया कि #मरणोंपरांत इनके द्वारा ही प्रथम मुखाग्नि दिया जायेगा।
इस तरह समाज के सभी वर्ग जब आते थे तो घर कि महिलायें मंगल गीत का गायन करते हुये उनका स्वागत करती है।और पुरस्कार सहित दक्षिणा देकर बिदा करती थी।

समाज के हर वर्ग की उपस्थिति हो जाने के बाद ब्राह्मण #नाई से पुछता था कि क्या सभी वर्गो कि उपस्थिति हो गयी है…?
#नाई के हाँ कहने के बाद ही #ब्राह्मण मंगल-पाठ प्रारम्भ किया करते हैं।

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