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देश का सबसे भ्रष्ट, बेईमान और क्रिप्टो क्रिश्चियन चुनाव आयुक्त।
(नवीन G&MRA चावला।)

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे नवीन चावला को, सरकार ने नहीं बल्कि सोनिया गांधी ने नियुक्त किया था।
सोनिया गांधी के लिए नवीन चावला उनकी पहली पसंद इसलिए थे क्योंकि नवीन चावला मदर टेरेसा के संपर्क में आकर क्रिप्टो क्रिश्चियन बन चुके थे।
उन्होंने मदर टेरेसा पर काफी किताबें लिखी…
इतना ही नहीं पद पर रहते हुए भी वह एक अपनी निजी एनजीओ चलाते थे।
और जब
वह मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने 8 एकड़ जमीन जयपुर में उन्हें मुफ्त में दी थी।
नवीन चावला को इटली की सर्वोच्च कैथोलिक क्रिश्चियन संस्था ने अपना सर्वोच्च पुरस्कार दिया था।
31 जनवरी 2009 को तब के मुख्य चुनाव आयुक्त गोपाल स्वामी ने खुद राष्ट्रपति के पास जाकर शिकायत की थी कि उनके जूनियर चुनाव आयुक्त नवीन चावला कांग्रेस के एजेंट हैं और वह मीटिंगों की जानकारी बीच मीटिंग में ही कांग्रेस को लीक करते है।
बीच मीटिंग में वह बाहर आकर बार-बार कांग्रेस नेताओं को मीटिंग की जानकारी देते रहते हैं और उनके निर्देश पर मीटिंग में उनका पक्ष रखते हैं।
लेकिन इसके बावजूद भी ना तो नवीन चावला को हटाया गया बल्कि गोपाल स्वामी के बाद अगला मुख्य चुनाव आयुक्त भी उसे ही बना दिया गया, जबकि उसका नंबर तीसरा था बीच में एक चुनाव आयुक्त ओर था जो दूसरे नंबर पर था और उसे बनाया जाना था।
और नवीन चावला ने इस नमक का हक अदा किया। उसने 2009 के चुनाव में खुलकर बेईमानी करवाई।
ऐसे कई केसेस हुए थे । नवीन चावला के ही जमाने में कांग्रेस पार्टी ने सपा से ज्यादा लोकसभा सांसद हासिल किए थे उत्तर प्रदेश में।
यहां तक की सपा के गढ़ कन्नौज में हुए उपचुनाव में भी राज बब्बर ने डिंपल को हरा दिया था जबकि राज बब्बर खुद चुनाव लड़ने को इच्छुक नहीं थे।
चिदंबरम को शिवगंगा से जयललिता की उम्मीदवार ने हरा दिया था, मगर तभी टीवी पर खबर आने लगी कि सोनिया गांधी चिदंबरम को ही गृहमंत्री बनाएंगी और उसके बाद दोबारा मतगणना हुई और उसमें चिदंबरम को जीता दिखा दिया गया।
पूरे 5 साल तक वह केस अदालत में चला और बाद में वह केस आया-गया हो गया और जयललिता इन 5 सालों में कहती रही कि हमारे साथ बेईमानी हुई है, चिदंबरम बेईमानी से जीते हैं।
मेनका गांधी को भी पहले हरा दिया गया था लेकिन मेनका गांधी दोबारा काउंटिंग पर अड गई और काफी बवाल के बाद जब दोबारा से वोटो की गिनती हुई तो उसमें मेनका गांधी जीत गई।
यह नवीन चावला ही था जिसने उस दौरान परिसीमन किया था और परिसीमन का उद्देश्य यह था कि संघर्ष वाली सीटों पर भाजपा के वोट कम कर दिए जाएं और कांग्रेस के वोटरों को उस सीट में शामिल कर लिया जाए खासकर मुसलमानों को।
सोचिए कांग्रेस ने इस देश में कितने कुकर्म किए हैं और हमारी याददाश्त इतनी छोटी होती है कि हम उसे भूल जाते हैं !

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