आज से सिर्फ 200 साल पहले केरल में कोई मुस्लिम न था।इस राज्य के किसान मसालों की खेती करते थे जिनको विदेशी व्यापारी अपने देश ले जा कर ऊँचे दाम में बेचते थे। अब वहां के लोगों ने विचार किया कि क्यों न हम ही विदेश ले जाकर मसाले बेचें तो वो सब लाभ अपना होगा। लोगों ने वहां के राजा से आग्रह किया ,राजा ने दरबार में चर्चा की तो ब्राह्मणों ने कहा कि यहां के लोग विदेश जाएंगे तो वहां मांस आदि खाना पड़ेगा तो अपवित्र हो जायेंगे इसलिए किसी को विदेश जाने की इजाजत नही मिलेगी।
बहुत सोच विचार कर इसका ये समाधान निकाला कि निम्न जातियों के 500 युवाओं को मुसलमान बना देते हैं तब ये विदेश जा सकते हैं।वे ये काम करने लगे जब वापिस आते तो अपने आस पड़ोस के परिवार में जा कर बैठते तो ब्राह्मणों द्वारा इन परिवारों को भी धर्म भृष्ट घोषित कर दिया जाता ।
इस सब का ये परिणाम है कि आज वहां सिर्फ 43 % ही हिन्दू बचे हैं।
हमारे धर्म के ठेकेदारों ने धर्म के पैरों में कुल्हाड़ी मारी है।
और आज भी ये ठेकेदार सुधरे नही ।