महाभारत काल में पहली दिव्य दृष्टि “ संजय “ को मिली जो कि सूत पुत्र थे और उन्हें गीता का उपदेश भी सुनने को मिला तथा सुनाने को भी मिला जो कि श्रुति सम्मत शास्त्र है ।
ध्यान दें , संजय ने गीता सुनी भी और सुनायी भी ।
राजा धृतराष्ट्र को तत्व ज्ञान का उपदेश दासी पुत्र “ विदुर “ ने किया और स्वयम् भगवान उनके घर गये और उनके घर भोजन किया ।
यदि हम शूद्र वर्ण का बराबर सम्मान नहीं कर सकते तो हमारे धर्म ज्ञान में ही कमी है ..
सांख्य दर्शन के आचार्य कपिल मुनि ने अपने पहले तत्व ज्ञान का उपदेश ही एक स्त्री को दिया । देवहूति को दिया ।
जो भी धर्माचार्य सनातनी हिंदू धर्म के सभी अंगों का कल्याण नहीं कर सकता उसे स्वयम् के आत्मावलोकन की आवश्यकता है ।
धर्म शुक और काक के लिये भी है । गिद्ध और गजराज का भी उद्धार करता है । और गजराज ( भक्त ) के पैर पकड़ने वाले ग्राह का भी ।
हम यदि सनातन हिन्दू धर्म के किसी भी अंग को पीछे छोड़ रहे हैं तो आने वाली पीढ़ियाँ हमारी भर्त्सना ही करेंगी ।यदि वह अंग हमारी निंदा भी कर रहा है तो भी उसको उठाना ( चाहे जिस कारण से वह गिर गया हो ) हमारा धर्म होना चाहिये ।
सर्वे भवन्तु सुखिनः केवल गाने के लिये नहीं बल्कि हमारे व्यवहार का अंग बने के लिये हो ।
नारायण नारायण नारायण नारायण
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Dharam devji
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