यही कोई 8 – 10 साल पहले की बात है…!
जाड़े का ही मौसम था….
और… मेरे ताऊ जो कि गाँव में रहते हैं… अपनी ड्योढ़ी पर धूप सेंकते हुए … बैठ के हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे.
उतने में ही कुछ लोग मिशनरीज से गले के लम्बे धागे में क्रॉस-उरोस लटका कर आए और ताऊ से बात करने लगे.
ताऊ ने भी उन सबों को प्रेम से बिठाया और उनसे आने का प्रयोजन पूछा…!
पहले तो उन्होंने हाल समाचार पूछा और इधर-उधर की बातें की…. मुद्दे की बात पर आए.
चूँकि, मेरे ताऊ की कट्टरता पूरे इलाके में विख्यात थी इसीलिए उन्होंने हिन्दू सनातन धर्म की बुराई नहीं की…..
बल्कि, अपनी योजनानुसार उन्होंने यीशु की प्रशंसा शुरू की.
और…. बताना शुरू किया कि…. यीशु साक्षात ईश्वर के पुत्र हैं .. और, इनकी शरण में आने से आपका मोक्ष पक्का है… वगैरह.. वगैरह.
ताऊ जी…. हुक्का गुड़गुड़ाते हुए पूरे धैर्य से उनकी सब बातें सुनी.
जब उन मिशनरीज वालों का सारा बोला हो गया तो… उन्होंने ताऊ से पूछा कि…
फिर ताऊ , क्या बोलते हो आप ???
ये सुनकर ताऊ ने कहा…. मैं तुमलोगों की सब बात समझ गया… लेकिन, मुझे एक बात पूछनी है.
ताऊ जी की ऐसी पोजेटिव बातें सुनकर मिशनरी वालों की बाछें खिल गई…
और, उन्होंने पूरे उत्साह से बोला कि…. पूछें ताऊ .
ताऊ ने पूछा कि…. तुम सब ने जो इतना कुछ कहा … वो, तुम सबने मेरे बेटे को क्यों नहीं कहा ???
इस पर मिशनरीज वालों ने कहा कि…. ये कैसी बात करते हैं ताऊ ??
आपके रहते … आपके बेटे को हम भला आपके बेटे को कुछ कैसे बोल सकते हैं ???
मालिक तो आप ही हुए… जब तक आप हैं.
इस पर ताऊ बोले…. तुमने बिल्कुल सही कहा.
हमारे यहाँ बाप के रहते… बेटे को ज्यादा भाव नहीं दिया जाता है.
और… तुमने बताया ही तुम्हारे यीशु ईश्वर के बेटे हैं.
तो, जब हमारे पास यीशु के बाप अर्थात साक्षात ईश्वर ही हैं तो… हम उनके बेटे को क्यों भाव दें ???
इसीलिए… मेरी मानो तो तुम लोग भी बेटे को छोड़कर…. उनके बाप प्रभु भोलेनाथ की आराधना शुरू कर दो.
ये सुनकर ही उन मिशनरी वालों का मुँह लटक गया…
और, वे ताऊ जी प्रणाम करके चलते बने..!!
जय महाकाल…!!!