Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

इतिहास बदलने वाली महत्त्वपूर्ण पोस्ट ।
आज इस इतिहास को कौन जानता है?

मेरा प्रश्न था :-
15 शताब्दी में (25 जनवरी 1565 ) शक्तिशाली विजय नगर की सेना जीत रही थी कि अचानक जीतते हुए पराजित कैसे हो गयी ?

उत्तर है :-

कृष्ण देवराय की मृत्यु के बाद अंत में केवल एक बिरार की मुस्लिम रियासत को छोड़कर बीजापुर, बीदर, गोलकोण्‍डा तथा अहमदनगर के क्रूर मुस्लिम शासकों ने एक साथ विजयनगर पर आक्रमण कर दिया। तब राजा सदाशिव राय गद्दी पर था ।

विजय नगर साम्राज्य की अजेय शक्तिशाली सेना में एक मुस्लिम टुकड़ी थी जिसका संचालन दो गिलानी भाई करते थे । युद्ध प्रारम्भ हुआ ।यह युद्ध तालिकोट में हुआ था। इस युद्ध में सेनापति राय ने इस संयुक्त मुस्लिम आक्रमण में विजयनगर की सेना का नेतृत्व किया। घमासान युद्ध के दौरान विजयनगर की सेना जीतने ही वाली थी कि उसके यह दोनो मुस्लिम कमांडरो ने अपनी ही सेना को पीछे से मारना आरम्भ कर दिया । अपनी ही सेना द्वारा हुए इस अचानक हमले से विजय नगर की सेना संभल नही पायी ।अपने-अपने सैनिक जत्थे लेकर गिलानी भाई हमलावर सेना के साथ जा मिले।

इससे युद्ध का परिदृश्य ही बदल गया। सेनापति आलिया राय कुछ सोच पाते उससे पूर्व ही उन्हें पकड़ लिया गया। आलिया राय को पकड़कर तत्काल मार दिया गया। सदाशिव जानता था कि जीत हमारी सेना की ही होनी है, लेकिन जब उसको विजयनगर की सेना की पराजय का समाचार मिला तो उसे हम्पी नगर से पलायन करना पढा ।
हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा, यही कारण है कि हमारी विजय भी पराजय में बदल जाती है ।
इस नकारखाने में इतिहास की तूती को कोई सुनने वाला नहीं है , बल्कि मेरा विरोध करने वाले अधिक है तो fb से सन्यास लो , जिनसे मैं हताश तो प्रायः हो जाता हूँ लेकिन निराश नहीं होता हूँ, पर मन में वेदना तो रहती है ।
ओम प्रकाश त्रेहन

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