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वृक्षारोपण की महिमा। भविष्य पुराण मध्यमपर्व प्रथम भाग अध्याय ग्यारह अनुसार शास्त्रोक्त विधि विधान से वृक्षारोपण करने से उसके पत्र, पुष्प तथा फल के रज रेणुओं आदि का समागम उसके पितरों को प्रतिदिन तृप्त करता है । जो व्यक्ति छाया ,फूल और फल देनेवाले वृक्षों को लगाता है ,वह अपने पितरों को बड़े बड़े पापों से तारता है और रोपणकर्ता इस मनुष्य लोक में महती कीर्ति तथा शुभ परिणाम को प्राप्त करता है और अतीत तथा अनागत पितरों को स्वर्ग में जाकर भी तारता रहता है। वृक्षारोपण कर्ता के लौकिक पारलोकिक कर्म वृक्ष ही करते रहते हैं तथा स्वर्ग प्रदान करते रहते हैं। ‌‌ 1 अश्वत्थ/पीपल वृक्ष का यदि कोई आरोपण करता है तो वही उसके लिये एक लाख पुत्रों से भी बढ़कर है। अपनी सद्गति के लिये कम से कम तीन पीपल के वृक्ष को लगाना ही चाहिये । हजार,लाख, करोड़ जो भी मुक्ति के साधन है, उनमें एक अश्वत्थ , पीपल वृक्ष लगाने की बराबरी नहीं कर सकते । 2 अशोक वृक्ष लगाने से कभी शोक नहीं होता । 3 प्लक्ष/ पीपली वृक्ष उत्तम स्त्री प्रदान करवाता है। ज्ञान रूपी फल भी देता है । 4 बिल्व वृक्ष दीर्घ आयुष्य प्रदान करता है । 5 जामुन का वृक्ष धन देता है । 6 तेंदू / टिमुरवा का वृक्ष कुल वृद्धि कराता है । 7 दाडिम / अनार का वृक्ष स्त्री सुख प्राप्त कराता है । 8 बकुल / मौलश्री का वृक्ष पाप नाशक है । 9 धातकी/ धव स्वर्ग प्रदान करता है । 10 वट वृक्ष मोक्ष प्रदान करता है । 11 आम्र वृक्ष अभीष्ट कामनाप्रद सिद्धिदात्री हैं । 12 सुपारी/ गुवाक का वृक्ष सिद्धि प्रदान करता है । 13 मधूक / महुआ का वृक्ष तथा अर्जुन वृक्ष सब प्रकार का अन्न प्रदान करता है । 14 कदम्ब वृक्ष से विपुल लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । 15 शमी / हागरी/खेजड़ी का वृक्ष रोग नाशक , आरोग्यता प्राप्ति होती है । 16 शीशम,करवीर/ कनेर ,पलाश / खाकरों वृक्षों के आरोपण से स्वर्ग की प्राप्ति होती है । 17 सौ वृक्षों का रोपण करने वाला ब्रह्मारूप और हजार वृक्षों का रोपण करने वाला श्रीविष्णुरूप बन जाता है । 18 अश्वत्थ ,वट वृक्ष और बिल्व वृक्ष को काटने वाला व्यक्ति ब्रह्मघाती कहलाता है । 19 अश्वत्थ , पीपल वृक्ष के मूल से दस हाथ चारों ओर का क्षैत्र पवित्र पुरूषोत्तम क्षैत्र माना गया है और उसकी छाया जहां तक पंहुचती है तथा अश्वत्थ वृक्ष के संसर्गसे बहनेवाला जल जहां तक पंहुचता है,वह क्षैत्र गंगा के समान पवित्र माना गया है । पुरूषोत्तम क्षैत्र जगन्नाथपुरी का क्षैत्र कहलाता है । 20 तुलसी वृक्ष का रोपण नदी के किनारे,श्मशान तथा अपने घर से दक्षिण की ओर रोपण न करे ,अन्यथा यम यातना भोगनी पड़ती है ।
जय महादेव जी मंगलमय हो ll

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