जब हम छोटे थे तब माँ रोज रात में सोते समय एक कहानी सुनाती थी
उन्हीं कहानियों में एक कहानी थी..किसी राजा के शयन कक्ष में एक चिड़िया ने घोंसला बना लिया
एक दिन चिड़िया को कहीं से एक कौड़ी मिल गई…अब जब राजा सोने आये चिड़िया बोलने लगती…राजा से अधिक धन मेरे पास है
कुछ दिनों तक इग्नोर करते करते एक दिन राजा ने अपने सेवकों से कहा कि देखो तो जरा…ऐसा क्या है इसके घोंसले में कि रोज सुनाती है
सेवकों ने देखा तो पता चला कि एक कौड़ी है…सेवक उठा लाए
शाम में चिड़िया आई तो उसका कौड़ी गायब था…राजा जब सोने आये तब चिड़िया ने बोलना शुरू किया राजा ने डर कर कौड़ी चुरा लिया
एक दो दिन यही चलता रहा तो चिढ़ कर राजा ने कहा कि चिड़िया की कौड़ी उसके घोंसले में रख दो
कौड़ी रख दी गई
अब चिड़िया ने कहना शुरू किया राजा मुझसे डर गए कौड़ी लौटाए
अंत में क्रोध में आ कर राजा ने घोंसला ही फिंकवा दिया
और हां, वो राजा भाजपा का नहीं था 😃😃