नोआखली 1947 (अब बंगलादेश) का कत्लेआम कोलकाता के डायरेक्ट एक्शन डे से भी कहीं ज़्यादा बर्बर था, सारे हिन्दू कन्वर्ट कर दिये गए…जिन्होंने कन्वर्ट नहीं किया…वह मार दिए गए… कोई जीवित हिन्दू स्त्री बलात्कार से नहीं बची ! हज़ारों को तो बलात्कार के बाद भी मार दिया गया… पति,पिता और बेटों के सामने हिन्दू स्त्रियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया… छोटे बच्चों पर वह अप्रतिम अत्याचार किये गए… जिन्हें लिखा नही जा सकता…
नोआखली के बर्बर हत्याकांड का नायक था,गुलाम सरबर नाम का 5 वक्ती नमाज़ी ! गुलाम सरबर को मुस्लिम नेशनल गार्ड के हत्यारे… मार दिए हिंदुओं के कटे सिरों को भेंट करते थे !… कुएं… नाले-नालियां…. हिंदुओं के कटे और सड़े हुए अंगों से चोक हो गए थे…पूरे नोआखली में सड़े मानव शरीरों की बदबू महीनों तक व्याप्त थी….चील गिद्ध और कुत्तों ने सड़े हुए हिन्दू शरीरों से महीनों दावत उड़ाई !
नोआखली में मोहनदास गांधी भी पहुंचें,4 महीने रहे… वहां उनके उनके दो बयान बहुत कुख्यात हुए… उन्होंने हिन्दू स्त्रियों को दंगाइयों के बलात्कार झेलने और नोआखली के सभी हिंदुओं को दंगाइयों के हाथ खुशी खुशी …मृत्यु वरण करने की सलाह दी थी ! दंगाइयों ने गांधी की बकरी उठा कर खा डाली… गांधी के साथ शांति की अपील करने के लिए दौरा कर रहीं सुचेता कृपलानी के साथ दुराचार करने की सुपारी दी गई ! बेशक दंगाई सफल नहीं हुए,मगर इस कुकृत्य में सफल होने वाले दंगाई को इनाम की घोषणा की थी,गुलाम सरबर नामक राक्षस ने ! नोआखली में गांधी और सुचेता कृपलानी व अन्य को बचाने में आरएसएस के स्वयंसेवकों का गांधी ने खुद धन्यवाद किया था….
ऐसे ही माहौल में नाथूराम गोडसे और आप्टे ने नोआखली में हिंदुओं के कष्टों को महसूस करने के लिए वाकायदा दौरा किया…. शेष कहानी आप जानते हैं…