कालका मंदिर का दान कोष सरकार के नियंत्रण में है किन्तु जामा मस्जिद नहीं।
पुष्कर मंदिर का दानकोष भी सरकार के नियंत्रण में लेकिन अजमेर शरीफ नहीं।
वैष्णो देवी मंदिर का भी सरकारी नियंत्रण में लेकिन हजरत बल की दरगाह नहीं।
सिद्धिविनायक मंदिर भी सरकार के नियंत्रण में लेकिन हाजी अली की दरगाह नहीं।
4 लाख मठ-मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं किन्तु मस्जिद, मज़ार, दरगाह व् चर्च दरगाह एक भी नहीं हैं।
मठों मंदिरों के संपूर्ण दान कोष के साथ साथ करोड़ों के टैक्स सरकार लेती है किन्तु दूसरों से एक रुपैया भी नहीं लेती।
क्या ऐसी होती हैं धर्मनिरपेक्ष सरकारें?
तनिक सोचिए।
