एक बार एक साधु बाबा ने अपने कुटिया में कुछ तोते पाल रखे थे और उन सभी तोते को अपनी सुरक्षा हेतु एक गीत सिखा रखा था “शिकारी आएगा जाल बिछाएगा पर हम नहीं जाएँगे |” एक दिन साधु बाबा भिक्षा मांगने हेतु पास ही के एक गाँव में गए | इसी बीच एक बहेलिया वाय उसने देखा एक पेड़ पर अनेक तोते बैठे हैं उसे उन पक्षियों को देख उसे लालच हुआ उसने उन सभी तोते को पकड़ने की योजना बनाने लगा कि तभी तोते एक साथ गाने लगे “शिकारी आएगा जाल बिछाएगा पर हम नहीं जाएँगे |” बहेलिया ने जब यह सुना तो आश्चर्यचकित रह गया !! उसने इतने समझदार तोते कहीं देखें ही नहीं थे उसने सोचा इन्हे पकड़ना असंभव हैं ये तो प्रशिक्षित तोते लगते हैं | बहेलिया को नींद आ रही थी उसने उसी पेड़ के नीचे अपनी जाल में कुछ अमरूद के टुकड़े डालसो गया , सोचा कि संभवतः कोई लालची और बुद्धू तोता फंस जाये | एक घंटे उपरांत जब वह सोकर उठा तो देखा कि सारे तोते एक साथ गा रहे थे “शिकारी आएगा जाल बिछाएगा पर हम नहीं जाएँगे |” पर कहाँ गा रहे थे जाल के अंदर !! शिकारी उन सब बुद्धू तोते की हाल देख हंस पड़ा और सब को पकड़ कर ले गया | आज हम सबकी स्थिति भी इन रट्टू तोते समान है , प्रतिदिन खूब अच्छी बाते सुनते समझते हैं पर उस पर आचरण नहीं करते माया मोह ममता के जाले हमारे चारो तरफ होते हैं हम कहते रहते हैं कि इनसे बचना चाहिए सनते भी हैं कि बचना चाहिए पर जब भी इनका जाल सामने आता है हम फँसते जाते हैं।