Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family, PM Narendra Modi

आजादी के बाद वायसराय हाउस को राष्ट्रपति आवास बना दिया गया ओर तीन मूर्ति भवन को जवाहरलाल नेहरू ने इसे अपना प्रधानमंत्री आवास बना दिया।
नेहरू के मृत्यु के उपरांत जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री के तौर पर तीन मूर्ति भवन में रहने के लिए जाने लगे तो इंदिरा गांधी ने रोक दिया!! कहा कि आपकी हैसियत नेहरू के भवन में रहने लायक नहीं है!?
कहते हैं कि भगवान की लाठी बेआवाज होती है!!
कुछ इसी तरह मोदी जी की लाठी भी बेआवाज होती है पर बहुत गहरी चोट पहुंचाती है। वैसे तो यह खबर आप लोगों में पहले ही दे चुका हूं, इस खबर को आप फिर से एक बार अंबेडकर जयंती 15 अप्रैल को सुनेंगे पर इसकी पृष्टभूमि के बारे में आप लोगों को बताने जा रहा हूं!! हुआ यह था कि 1947 में आजादी के बाद तत्कालीन वायसराय हाउस को राष्ट्रपति आवास तब्दील कर दिया गया। उसके बाद क्षेत्रफल व साज सज्जा के अनुसार दूसरे नंबर पर तीन मूर्ति भवन आता था। नेहरू ने इसे अपना आवास बना लिया। अगले 17 वर्षों तक सारे कर्म कुंडली इसी भवन में करते रहे। उनकी मृत्यु होने के बाद दूसरे पूर्व स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बनकर जब तीन मूर्ति भवन में रहने के लिए आए तो तब इंदिरा गांधी ने उन्हें रोक ओर कहा कि आपकी इतनी हैसियत नहीं है कि आप नेहरू के भवन में रह सको!! सीधे सादे शास्त्री जी इस बात को मान गए और बह अपने लिए एक बहुत छोटा सा बंगला चुना और वहीं रहने लगे।
!”
रूस की ताशकंद में उनकी रहस्यमय असामयिक मृत्यु के बाद उस तीन मूर्ति भवन को इंदिरा गांधी ने नेहरू संग्रहालय बना दिया। इसमें उनका गद्दा तकिया रजाई चश्मा घड़ी और उनकी सारे सामान जिसमें एडविना की फोटो भी रख दिया गया और उसके बाद भारतवर्ष में जितने भी प्रधानमंत्री आए किसी एक का भी कोई संग्रहालय नहीं बना!! पी. वी. नरसिम्हा राव जी को इतना बेइज्जती किया गया कि उनका अंतिम संस्कार तक दिल्ली में नहीं करने दिया गया!? क्यों कि वे गांधी परिवार के गुलाम नहीं थे!! समय बीतता गया!! इसी समय राजनीति के फलक पर एक सितारे का उदय हुआ जिसे सब नरेंद्र मोदी के नाम से जानते हैं!! मोदी ने बिना हल्ला गुल्ला मचाए खामोशी से अपना काम करना शुरू कर दिया
मोदी ने तीन मूर्ति भवन के एक एक कर 18 कमरे खुलवाए, उन सभी कमरों में भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की स्मरणीय वस्तुओं को रख कर उनके नाम से अलग अलग संग्रहालय बनवा दिया…

अब बारी थी नेहरू का नाम मिटाने की। अब तक इसका नाम केवल “जवाहरलाल नेहरू संग्रहालय तीन मूर्ति भवन दिल्ली” था!! मोदी जी ने अब नेहरू शब्द को हटाकर इसका नाम कर दिया “प्रधानमंत्री संग्रहालय” इसका विधिवत उद्घाटन किया। नेहरू संग्रहालय अब कहलाएगा “पीएम म्यूजियम”।
यहां सभी प्रधानमंत्रीयों की यादों को जगह मिलेगी। भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित नेहरू गांधी परिवार की विरासत नेहरू मेमोरियल म्यूजियम अब “प्रधानमंत्री संग्रहालय” होगा। इस ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 14 अप्रैल को डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के जन्मदिन के मौके पर किया गया।
इसे प्रधानमंत्री संग्रहालय नाम देने के बाद भारत के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों से जुड़ी यादों को अब इस म्यूजियम में जगह दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, ‘हमारे तो एक ही हैं, बाकी सब उनके हैं’!!
वह किसी भी दल के रहे हों, फिर भी हमने पूर्व प्रधानमंत्रियों के योगदान को सम्मान दिया है!! हमें दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी प्रधानमंत्रियों का सम्मान करना चाहिए। आप सभी को यहां जाना चाहिए।
बीजेपी अक्सर यह आरोप लगाता रहा है कि आजादी के बाद अधिकांश समय कांग्रेस ने भारत पर शासन किया है और वह सिर्फ गांधी नेहरू परिवार के प्रधानमंत्रियों का गुणगान करती रही, जबकि अन्य प्रधानमंत्रीयो के साथ उसका व्यवहार ठीक नहीं रहा!!

इस संग्रहालय को 271 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट को 2018 में मंजूरी दी गई। इस संग्रहालय में पूर्व प्रधानमंत्रीयो से संबंधित दुर्लभ तस्वीरें, भाषण, वीडियो क्लिप, समाचार पत्रों की कतरन, साक्षात्कार और उनके मूल लेखन प्रदर्शन होंगे।
कांग्रेस में इसीलिए पीड़ा बढ़ गई है, रो भी नहीं सकती, हंसने का तो सवाल ही नहीं उठता!! हां इस गहरी पीड़ा को कांग्रेसी प्रवक्ताओं ने मिडिया के सामने जरुर व्यक्त की, और कहा कि भारतीय जनमानस की पटल से नेहरू को कोई भी मिटा नहीं सकता।

भारतीय जनमानस ने अपने पटल से नेहरू को मिटाया या नहीं मिटाया पता नहीं, परंतु गांधी नेहरू परिवार के गुला म इसे कभी अपनी मानस पटल से नहीं मिटने देंगे…!!

“राष्ट्रहित सर्वोपरि”

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