जलिया वाला बाग हत्याकांड में जितने लोग मारे गए थे लगभग उतने ही लोग मानगढ़ की पहाड़ियों में भी मारे गए थे।
लेकिन मानगढ़ से उठने वाली चीखे आज किसी को नही सुनाई दी क्योंकि वहां पर मरने वाले आदिवाशी हिन्दू थे।
जलियांवाला बाग हत्याकांड के लगभग लगभग 6 साल पहले सन 17 नवंबर 1913 को ब्रिटिश आर्मी ने मानगढ़ की पहाड़ियों को घेर लिया था और फिर उठा था वहाँ गोलियों का प्रचंड तूफान जिसमे 1500 से ज्यादा मासूम आदिवाशी हिन्दू भून दिए गए थे।।
देश के लिए ये बलिदान उन भील और आदिवाशी हिन्दुओ का था जिनके पास ना तो बंदूकें थी ना ही तोपें और ना ही तलवार उनके पास थी तो सिर्फ गुरु गोविंद जी का नेतृत्व और उनका आत्मसम्मान!!!
गुरु गोबिंद जी ने उन भील और बंजारा आदिवाशी हिन्दुओ को उनपर अंग्रेजो द्वारा हो रहे अत्यचार के खिलाफ एकजुट किया था और यही एकता अंग्रेजो को उनकी आंखों में चुभने लगी थी।।। इसीलिए हजारो को मारा गया और गुरु गोविंद जी को पकड़ कर कारागार में डाल दिया गया।।
और इस घटना पर ना कोई अखबार चीखा ना कोई कोंग्रेसी नेता बोला ना ही चारखासुर ने कोई आंदोलन ही किया और ना ही किसी सिनेमा में ये कहानी चलाई गई।।
सिर्फ इन चीखों को मानगढ़ की पहाड़ियां ही आज भी दबाए हुए बैठी है!!
ऐसे में यह सवाल उठता है की हमे क्यों 110 साल लग गए जब हमने 2022 में मानगढ़ की पहाड़ियों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया!!!
आखिर हमारे आदिवाशी हिन्दुओ के इतने महान इतिहास को हमसे वामपंथी इतिहासकारों द्वारा छिपाया क्यों गया आप कमेंट में बताइए क्या ये हमारे आदिवाशी हिन्दू भाइयो द्वारा लड़ी गयी अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई स्वतंत्रता की लड़ाई नही रही??
और अगर थी तो इतने महान इतिहास को कांग्रेस और वामपंथियो ने हमसे छिपाया क्यों?
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