एक ख़ामोश सीख… जैकी श्रॉफ की जुबानी ।।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने एक इंटरव्यू में दिल को छू लेने वाली बात कही…
जब मैं छोटा था, हम एक छोटे से घर में एक ही कमरे में रहते थे – माँ, पिताजी और मैं। अगर मुझे खाँसी होती या कोई डरावना सपना आता, तो माँ-बाप मुझसे पहले जाग जाते और पूछते –
क्या हुआ बेटा,,,,?
फिर मुझे दवा देकर, थपकी देकर सुला देते थे…”
फिर ज़िंदगी बदली… ग्लैमर, शोहरत, पैसा — सब कुछ आया। जैकी दा ने अपने लिए और माँ के लिए एक बड़ा घर बनवाया। माँ को उन्होंने सबसे बड़ा कमरा दिया, और खुद अपने कमरे में रहने लगे।
“उस दिन मुझे लगा था कि मैंने माँ के लिए कुछ बड़ा किया है,
लेकिन अब समझ आया… मैंने हमारे बीच एक दीवार खड़ी कर दी थी।”
एक रात उनकी माँ को दिल का दौरा पड़ा… और वो हमेशा के लिए खामोश हो गईं।
सुबह जब जैकी श्रॉफ माँ के कमरे में पहुँचे, तो सब खत्म हो चुका था।
“अब सोचता हूँ, अगर हमारे बीच वो दीवार न होती…
अगर हम आज भी एक ही कमरे में रहते…
तो शायद माँ मुझे पुकार पातीं,
और मैं उन्हें बचा लेता।”
इस इंटरव्यू के ज़रिए जैकी श्रॉफ ने आज की पीढ़ी को एक बिना बोले वाली गहरी सीख दी है।
हम दौलत, बड़ा घर, अलग कमरा तो बना लेते हैं… लेकिन क्या हमारे रिश्ते भी उतने ही मजबूत रह जाते हैं?
कभी-कभी ज़रूरत होती है साथ बैठने की, साथ सोने की, साथ रोने और हँसने की…
क्योंकि… 👉 रिश्ते “स्पेस” नहीं चाहते, वो सिर्फ “मोहब्बत और नज़दीकी” चाहते हैं।
माँ–बाप को कमरे नहीं, आपके पास रहना चाहिए।
आज भी वक़्त है… वापस पास आ जाइए…
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