Posted in हिन्दू पतन

सोंचता हूँ कि जिस दिन गांधी ने नेहरू को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनवाया था तो उसी दिन यह निश्चित हो गया था, की इस देश मे हिन्दुओं और हिंदुनिष्ठों को भारत के तृतीय दर्जे का नागरिक बन कर रहना होगा….!!

जवाहर लाल नेहरू अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखते हैं कि अहमदनगर के किले में जैसे-जैसे मैं बाबर के संस्मरण बाबरनामा इत्यादि को पढ़ता गया, वैसे-वैसे मेरी श्रद्धा बाबर में बढ़ती गई, वह एक प्रकृति प्रेमी और कला प्रेमी था बाबर बहुत ही शिक्षित और सम्भ्रांत व्यक्ति था उस समय मैं खुद बाबर को अपने अंदर महसूस करने लगा था…!!

और बाबर खुद अपने बारे मे जो लिखता है उसे भी देख लीजिए बाबर लिखता है कि मै इस्लाम का सच्चा सिपाही हूँ, और एक ऐसा गाज़ी हूँ जो मारे गए काफिरों के सिरों की मीनारें बनाते है ऐसे जल्लाद और दुराचारी बाबर के प्रति नेहरू का ये सम्मान और श्रद्धा बताती है कि वो भी खुद को भी एक गाज़ी ही मानते थे जबकी नेहरू ने ये बात भी लिखी थी की आचरण से वो एक मुसलमान हैं…!!

आप इस बात का खुद अंदाजा लगा सकते है, की अपने समय मे खुद नेहरू, राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, और राहुल बाबर की जो अफगानिस्तान मे मौजूद है वहां पर क्यों जाते रहे है और हर इस्लामिक मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी मुसलमानों के साथ ही क्यों खड़ी रहती है हिन्दुओं के मुद्दों पर हिन्दुओं के साथ क्यों नही खड़ी होती और कांग्रेस पार्टी 90 % मुस्लिम बाहुल्य इलाके वायनाड से ही चुनाव लड़ना क्यों पसंद करती है….!!

जवाहर लाल ने स्वयं को ब्राम्हण लिखकर हिन्दुओं के साथ कितना बड़ा विश्वासघात किया है उसका हिन्दुओं को एहसास तक नहीं है…!!

सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुत्री मणिबेन का लेख है कि जवाहर लाल सरकारी धन से 1947 में ही भव्य बाबरी मस्जिद का निर्माण कराना चाहते थे, जवाहर लाल ने उस समय यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को आदेश भी दिया था की बाबरी ढांचे में अभी नई नई स्थापित की गई राम की प्रतिमा को तुरंत हटवाएं तब फैजाबाद के तत्कालीन जिला कलेक्टर ने ला एंड ऑर्डर का हवाला देकर मूर्तियां हटाने से इनकार कर दिया था तो परिणाम स्वरूप जवाहर लाल ने उस जिला कलेक्टर को सस्पेंड करके तुरंत अरेस्ट करने का मौखिक आदेश भी दिया था, लेकिन महंत अवैधनाथ के दवाब ने गोविंद बल्लभ पंत को ऐसा नहीं करने दिया दंगो में बिहार राज्य मे तमिल राज्य की पुलिस लगाकर हिंदुओं पर ताबड़तोड़ गोली चलवाई जिसमे हजारों हिन्दू मारे गए हवाई जहाज़ से हिन्दू इलाकों को चिन्हित कर उस पर बम गिराने का उल्लेख भी मिलता है….!!

अब महत्मा गांधी पर लौटते है महत्मा गांधी ने 1946 में मोहम्मद अली जिन्ना से भारत का प्रधानमंत्री बनने का अनुरोध भी किया था लेकिन जिन्ना ने गांधी का यह अनुरोध स्वीकार नही किया था क्योकि जिन्ना को भारत के टुकड़े करके एक टुकड़ा इस्लामिक राष्ट्र बनाना ज़्यादा इस्लाम सम्मत और गौरवमयी लगता था लेकिन जिन्ना की यह बहुत बड़ी गलती थी….!!

जब नेहरू जैसा खुद को ब्राम्हण लिखने वाले शख्स ने Temple Endowment Act, वक्फबोर्ड, हिन्दू कोड बिल, भूमि सुधार जमीदारी उन्मूलन, के नाम पर हिंदुओं का सारा सत्यानाश कर गया तो सोचो अगर जिन्ना भारत का प्रधानमंत्री बनता तब तो वह भारत को 1947 में ही इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ इंडिया अथवा पाकिस्तान घोषित करके निजाम ए मुस्तफा बना देता और आज भारत मे हिन्दू उसी हाल मे रहते  जैसे पाकिस्तान या बंगलादेश में रहते है….!!

वैसे बंगाल, केरल, कश्मीर, राजस्थान, बिहार, नार्थईस्ट पंजाब, में आज भी हमारी स्थिति पाकिस्तान में रह रहे हिन्दूजन से थोड़ी ही बेहतर है लेकिन कब तक बेहतर रहे कुछ कह नही सकते….!!

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दोस्तों ये बही विनोद दुआ हैँ जिन्होंने 2002 के करीब गुजरात मे मोदी जी कि सरकार को गिराने मे कोई कसर नही छोडी थी…

खैर मुझे याद है टीवी सीरियल रामायण जब अपने चर्मोत्कर्ष पर था तो स्वर्गीय विनोद दुआ जो उस समय एनडीटीवी में एंकर थे, राम का किरदार निभा रहे अरुण गोविल का इंटरव्यू लेने पहुंचे। उन्होंने अरुण गोविल से कहा आप जनता को राम के काल्पनिक चरित्र में फंसा कर अंधविश्वासी बना रहे हैं, जब राम का अस्तित्व ही कभी नहीं रहा तो उसका किरदार निभा कर आप क्या हासिल करना चाहते हैं ? इस पर अरुण गोविल ने कहा तब तो मोहम्मद का प्रमाण आपके पास जरूर होगा ? दोनों के बीच ये तीखा युद्ध फिर अपशब्दों में बदल गया और अरुण गोविल ने उन्हें लगभग धक्का मारकर भगाया।

सुनते हैं इन्हीं विनोद दुआ की मृत्यु पर इनकी शव यात्रा में लगभग 800 लोगों की भीड़ रामनाम सत्य है का नारा लगाते हुए चल रही थी। विनोद दुआ की इकलौती बेटी मल्लिका ने पूरे सनातनी पद्वति से इनका दाह संस्कार कराया था। जो वामपंथी विनोद दुआ पूरी जिंदगी राम पर और सनातन धर्म पर प्रश्न चिन्ह लगाता रहा वो भी मृत्योपरांत सनातन की शरण मे ही आया।

असल मे कितना भी बड़ा वामपंथी कोई क्यों न हो, मृत्यु का भय उसे अपनी वास्तविकता से रूबरू करा ही देता है। बड़े से बड़ा पापी भी सदगति पाना चाहता है। जवाहरलाल नेहरू खुद को एक्सिडेंटल हिन्दू कहकर हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाते रहे और जब कभी हिंदुओं ने इनसे प्राणरक्षा की गुहार लगायी उनकी अनसुनी कर हमेशा मुस्लिमों का ही साथ दिया । खुद को एक्सिडेंटल हिन्दू कहने वाले नेहरू ने मृत्यु से पहले सदगति पाने की इच्छा में अच्छा बहाना ढूंढा, उन्होंने कहा मैं बचपन से गंगा नदी को देखकर बड़ा हुआ हूँ, इससे मुझे अगाध प्यार है। हिन्दू धर्म के नाते नहीं पर इस गंगा नदी से लगाव के चलते मैं चाहता हूँ मेरी अस्थियां इसमे प्रवाहित की जाएं। ऐसे वामपंथियों की भारत मे कमी नहीं है जो नाम रखेंगे कन्हैया कुमार और सीताराम येचुरी, हिन्दू धर्म का मजाक भी बनाएंगे और मृत्यु के समय चाहेंगे कि गंगा मैया इन्हें शरण मे ले ले। इनकी मृत्योपरांत रामनाम सत्य है का नारा अवश्य सुनाई देगा। कमी हमारे पंडितों में भी है जो ऐसे वामपन्थियों के कर्मकांड के लिए तैयार हो जाते हैं। अगर मुस्लिमों के पैगम्बर को कोई अपशब्द कहे तो मेरा दावा है दुनिया का कोई भी हाजी, मौलाना ऐसे व्यक्ति का मर्सिया नहीं पढ़ेगा चाहे आप कितना भी लालच क्यों न दें।
रघुवंशी आकाश जाटव