किलिंगफील्ड में अंदर जाने के लिए टिकट लिया..
टिकट काउंटर पर बैठी महिला ने कहा, आपके पास सिर्फ डेढ़ घंटे का समय है, उसके बाद यह बंद हो जाएगा इसलिए आप 6:00 बजे के पहले वापस आ जाइएगा।
उसने कहा, ओके
उनका दूसरा सवाल था, क्या आपको कोई गाइड की जरूरत है ?
उसके हाँ कहने पर, एक दुबले-पतले नाटे कद के सज्जन ने खुद को गाइड के रूप में प्रस्तुत किया।
वे उसके साथ चल दिये, सबसे पहले वह लेकर पहुँचे एक टावर में
जो देखा, उसे देखकर सर घूम गया।
वह टावर मानव खोपड़ियों की मीनार थी, लगभग 5000 से अधिक मानव खोपड़ी, शीशे की एक टावर में रखी हुई थी।
उसकी आँखें फटी की फटी रह गई, अपने आपको संयत करते हुए गाइड से पूछा
यह क्या है भाई?
गाइड ने धीरे-धीरे बताना शुरू किया
यह उन अभागे कंबोडियनस के सर हैं, जिन्हे पोलपोट ने 1975 से 1979 के बीच यहाँ लाकर हत्या कर दी
वे अवाक हो गए
मुँह से निकला, “लेकिन क्यों?”
गाइड का कहना था “कम्युनिस्ट सरकार कंबोडिया को वापस एक एग्रीकल्चरल कंट्री बनाना चाहते थी, इसलिए शहरों को समाप्त करके आबादी को गाँव में शिफ्ट करने का निर्देश जारी किया गया। जिन्होंने भी आज्ञा का उल्लंघन किया, ना नुकर की उन्हें किलींगफील्ड में ले जाकर समाप्त कर दिया गया।
जहाँ आप लोग खड़े हैं यहाँ 30000 से अधिक लोगों की हत्या हुई, जिसमें अधिकतर लोगों की हत्या गोली मारकर नहीं की गई बल्कि कुदाल से उनके सर के पीछे मार कर अधमरा कर दिया गया और फिर उन्हें जीते जी गड्ढों में दफना दिया गया।
ये सुनकर वे तुरन्त वहाँ से बाहर निकल आये!
गाइड ईस बार लेकर उस बगीचे में चल पड़ा, उसने आगे बताया, “यह एक आम के पेड़ का बगीचा हुआ करता था जिससे पोलपोट ने किलींगफील्ड के तौर पर विकसित किया।
वहाँ जगह-जगह गड्ढे थे।
उन गड्ढों की ओर इशारा करके गाइड ने बताया यह सामूहिक कब्र हैं। सैनिकों की गाड़ियों में लोगों को लाया जाता था, बच्चे, बुड्ढे, जवान, स्त्री, पुरुष सभी को यहाँ क्यू में खड़ा किया जाता था।
जो खुश किस्मत होते थे उन्हें गोली मार दी जाती थी और जो बदकिस्मत होते थे, उनके सर पर कुदाल का प्रहार किया जाता था। सर पे चोट लगते ही वे गिर कर तड़पते रहते थे, उन्हे मारने का भी समय नहीं होता था और फिर उन्हें जीते जी सामूहिक रूप से गड्ढे में दफना दिया जाता था।
अधिकांश केस में गड्ढे उन बदनसीब लोगों के द्वारा ही तैयार किया जाता था, एक जगह पर कुछ पुराने कपड़े भी पड़े हुए थे
गाइड का कहना था, यह कपड़े उन बदनसीबों के है जिनकी हत्या यहाँ की गई।
सैनिक उन लाशों से जो भी वैल्युएबल चीज होती थी उसे निकाल लेते थे, हर रोज सैनिक गाड़ियों में लोग भर भर कर लाए जाते थे और यही प्रक्रिया को दोहराया जाता था।
इस बगीचे में 30000 लोगों की हत्या की गई, तीन सौ से अधिक किलिंग फील्ड्स पूरे कंबोडिया में मौजूद हैं, जिसमें 15 लाख से ज्यादा लोगों की हत्या हुई।
अब उसकी टाँगे थरथरा रही थी, मुँह से आवाज आनी बंद हो गई थी, आँखें फटी की फटी रह रही थी, उसे चक्कर आने को हो रहे थे।
गाइड फिर लेकर ऐसी जगह पर पहुँचा जहाँ उसने बताया, यहाँ पर कुछ ऐसी हड्डियाँ मिली, जिससे पता चलता है कि मरने वाले की उम्र 6 महीने से भी कम थी, मतलब 6 महीने से कम उम्र के बच्चों की भी हत्या कर दी गई थी।
उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी, गाइड के साथ सब बाहर आ गए, बाहर निकलने पर थोड़ी चैन आई।
गहरी साँस लेने के बाद, लोगो ने गाइड से कहा अजीब शैतान था, वह पोलपोट
गाइड ने कहा ऐसे शैतान धरती पर हमेशा से होते हैं।
उसने कहा मुझे संदेह है, उसके जैसा शैतान और भी कोई हुआ होगा।
ठीक उसी पल गाइड ने जो कहा वो सुनकर सब स्तब्ध हो गए, उसका कहना था…
ऐसे शैतान तो आपके देश में भी बहुत हुए हैं पानीपत की दूसरी लड़ाई में अकबर ने 55000 लोगों का सर काट कर एक मीनार बनाया था। जिसको आपकी कंट्री में अकबर द ग्रेट माना जाता है।
लेकिन हमारे देश में शैतान को शैतान ही कहते हैं, वे सोच रहे थे उनके देश में ताजमहल से लेकर लालकिले तक कितने सर कटे होंगे?
700 सालो तक हम नरपिशाचो से युद्धरत रहे और हमारे रहनुमावो ने उनकी औलादो को खुश करने के लिए उन हत्यारों के नाम पर #सड़कें, #शहर, #पार्क और #युनिवेर्सिटी बना डाली!
कब और कैसे शैतान हमारे देश में बादशाह हो गये? उनके निर्मम वंशज हमारे भाई हो गये?
क्या इसके जिम्मेदार हमारे पुरखें हैं जिन्होंने सत्य को समझने की कोशिश नही की और जो हो रहा था होने दिया?
हमारी इतिहास की पुस्तकें हमारे मुँह पर थप्पड़ हैं। जिनमे बर्बर आतयायी लुटेरों का महिमा मंडन किया गया है।

