Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

राजा और तीन पोटलियाँ


राजा और तीन पोटलियाँ

बहुत पुरानी बात है, एक राजा के मन में यही प्रश्न उठा कि मनुष्य के जीवन में अचानक सुख और दुःख क्यों आते हैं? उसने अपने राज्य के सबसे विद्वान मंत्री से इसका उत्तर माँगा। मंत्री उसे एक एकांत बगीचे में ले गया जहाँ तीन अलग-अलग पोटलियाँ रखी थीं।
मंत्री ने राजा से कहा, “महाराज, इन तीन पोटलियों में आपके प्रश्न का उत्तर छिपा है।”

  1. पहली पोटली: मीठे फल (संचित कर्म)
    मंत्री ने पहली पोटली खोली, जिसमें बहुत ही स्वादिष्ट और मीठे फल थे। मंत्री ने कहा, “महाराज, यह वह पोटली है जिसमें व्यक्ति के अच्छे कर्म जमा होते हैं। जब हम अनजाने में या जानबूझकर किसी की मदद करते हैं, तो वह ‘सुख’ के रूप में जमा हो जाता है। जब यह पोटली खुलती है, तो जीवन में अचानक ‘आकस्मिक सुख’ आता है, जिसका कारण हमें उस समय समझ नहीं आता।”
  2. दूसरी पोटली: कड़वे नीम के पत्ते (बुरे कर्म)
    दूसरी पोटली में सूखे और कड़वे नीम के पत्ते थे। मंत्री बोला, “यह हमारे गलत कार्यों का परिणाम है। कभी-कभी हम स्वार्थ में किसी का दिल दुखाते हैं। वे कड़वाहट बनकर इस पोटली में जमा होते रहते हैं। जब समय का चक्र घूमता है और यह पोटली खुलती है, तो जीवन में ‘आकस्मिक दुःख’ आता है। हमें लगता है कि हमने तो कुछ बुरा नहीं किया, फिर यह दुःख क्यों? पर यह हमारे ही पुराने कर्मों का फल होता है।”
  3. तीसरी पोटली: बीज और मिट्टी (मिश्रित कर्म)
    तीसरी पोटली में कुछ बीज और मिट्टी थी। मंत्री ने समझाया, “यह हमारा वर्तमान है। इसमें हम जो बोएंगे, वही भविष्य की पोटली में सुख या दुःख बनकर जमा होगा। सुख और दुःख कोई बाहरी शक्ति नहीं भेजती, बल्कि यह हमारे ही द्वारा बोए गए बीजों की फसल है जो समय आने पर पकती है।”
    आकस्मिक सुख-दुःख आने के मुख्य कारण
    कहानी के माध्यम से हमें ये तीन बातें समझ आती हैं:
  • प्रारब्ध (Destiny): हमारे वे कर्म जो हमने अतीत में किए थे, उनका फल आज मिल रहा है। चूँकि हमें पिछला समय याद नहीं रहता, इसलिए हमें वह सुख या दुःख ‘आकस्मिक’ लगता है।
  • प्रकृति का संतुलन: जैसे दिन के बाद रात और ऋतुओं का बदलना तय है, वैसे ही जीवन में द्वंद्व (सुख-दुःख) का आना अनिवार्य है ताकि मनुष्य का अहंकार कम हो और उसे धैर्य की सीख मिले।
  • दृष्टिकोण: अक्सर सुख और दुःख हमारी सोच पर निर्भर करते हैं। कभी-कभी जिसे हम अचानक आया ‘दुःख’ समझते हैं, वह भविष्य में किसी बड़े लाभ का मार्ग होता है।
    निष्कर्ष
    जैसे समुद्र में लहरें आती-जाती रहती हैं, वैसे ही जीवन में सुख-दुःख आते हैं। विद्वान व्यक्ति सुख में बहुत अधिक उत्साहित नहीं होता और दुःख में टूटता नहीं है, क्योंकि वह जानता है कि “यह समय भी गुजर जाएगा।”
Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“जीवन में एक साथी होना जरूरी है”
किसी नगर में एक ब्राह्मण रहता था। उसका नाम था ब्रह्मदत्त।

एक बार उसे किसी दूसरे गांव में कोई काम आ पड़ा। वह चलने लगा तो उसकी मां ने कहा- बेटा अकेले न जाओ। किसी को साथ ले लो।

लड़के ने कहा- “तुम इतना क्यों घबराती हो मां। इस रास्ते में कोई विघ्न-बाधा नहीं है। किसी को साथ लेने की क्या जरूरत है।

” मां ने देखा, लड़का टस से मस नहीं हो रहा है तो उसने उसे एक केकड़ा देते हुए कहा- अच्‍छा, कोई और साथी नहीं है तो तुम इस केकड़े को ही साथ ले लो। हो सकता है यहीं तुम्हारे किसी काम आ जाए।
मां का मन रखने के लिए लड़के ने उस केकड़े को पकड़कर कपूर की एक डिबिया में रख लिया और उसे एक झोले में डालकर चल पड़ा। गर्मी के दिन थे। कड़ाके की धूप थी। वह कुछ दूर जाने के बाद एक पेड़ के नीचे आराम करने को रुका और वहीं सो गया।

इसी बीच उस पेड़ के कोटर से एक सांप निकला और रेंगता हुआ ब्राह्मण के पास चला आया। सांपों को कपूर की गंध बहुत भाती है इसलिए वह पोटली फाड़कर उसमें रखी डिबिया को ही निगलने लगा।

इसी बीच डिबिया खुल गई और डिबिया में रखे केकड़े ने निकलकर सांप का गला पकड़ लिया और उसकी जान ले ली।

ब्राह्मण  की नींद खुली तो वह हैरान हो गया। देखता क्या है कि कपूर की डिबिया से सिर टिकाए सांप मरा पड़ा है।

उसे समझते देर नहीं लगी कि यह डिबिया में रखे केकड़े का ही काम है।
अब उसे अपनी मां की कही बात याद आई कि अकेले नहीं जाना चाहिए। रास्ते के लिए कोई न कोई साथी जरूर ढूंढ लेना चाहिए।

उसने सोचा, मैंने अपनी मां की बात मान ली, सो ठीक ही किया।

सीख : जीवन में अकेले रहने से अच्छा एक साथी होना लाभदायी होता है।

#worshipservice #sermon

Posted in खान्ग्रेस

स्वतंत्रता के पश्चात भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद थे,जिनको नेहरू ने रखा।

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कोई फॉर्मल स्कूलिंग नहीं की थी। वे भारत के नागरिक भी नहीं थे; उनके दादा मक्का में बस गए थे, जबकि वे मक्का में पैदा हुए थे और मक्का और मिस्र में इस्लामिक अज़हर मदरसे में पढ़े थे। फिर भी, पंडित नेहरू ने उन्हें भारत का एजुकेशन मिनिस्टर बनाया।

शिक्षा मंत्री बनने के बाद, मौलाना आज़ाद ने अपनी ही सोच वाले एक पक्के मुस्लिम इंसान को ढूंढा, ताकि उन्हें भारत का एजुकेशन सेक्रेटरी बनाया जा सके।

अपनी इस तलाश के बाद, उन्हें एक पक्के मुस्लिम अधिकारी, ख्वाजा गुलाम सैय्यदीन मिले।

कांग्रेस ने मौलाना आज़ाद को ‘भारत रत्न’ अवॉर्ड दिया, और उनके एजुकेशन सेक्रेटरी, ख्वाजा गुलाम सैय्यदीन को ‘पद्म भूषण’ अवॉर्ड से भी सम्मानित किया

इसी ख्वाजा गुलाम सैय्यदीन की बेटी का नाम सैयदा हामिद है। भले ही सैयदा हामिद एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS/एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) में नहीं थीं, लेकिन इंदिरा गांधी ने उन्हें प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) में सेक्रेटरी बना दिया था, क्योंकि वह एक कट्टर मुस्लिम परिवार से थीं।

इसी सैयदा हामिद को ‘पद्म श्री’ अवॉर्ड भी दिया गया था, (कांग्रेस के ज़माने में पद्म श्री, पद्म भूषण जैसे अवॉर्ड किलो के हिसाब से बांटे जाते थे, और उनमें भी मुसलमानों को बहुत पसंद किया जाता था)

बाद में मनमोहन सिंह प्राइम मिनिस्टर बने और सोनिया गांधी और राहुल गांधी ‘सुपर प्राइम मिनिस्टर’ बने, फिर इसी कट्टर मुस्लिम सैयदा हामिद को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा दिया गया और प्लानिंग कमीशन का मेंबर बनाया गया।

यही सैयदा हामिद कहती हैं कि यह धरती अल्लाह ने बनाई है, इसलिए बांग्लादेशी मुसलमानों को भी भारत में रहने का हक है और आप उन्हें देश से बाहर नहीं निकाल सकते।

जो लोग अब भी सोचते हैं कि राहुल गांधी को प्राइम मिनिस्टर बनना चाहिए, उन्हें अभी से आगे के हालात के लिए खुद को मेंटली तैयार कर लेना

सर है आपका..तो फैसला भी आपका,,,

Posted in भारतीय नदियाँ

ब्रह्मापुत्र


ब्रह्मापुत्र ……..
भारत का पिता कहलाती है यह इकलौती नदी, गहराई इतनी की आसानी से डूब जाए कुतुब मीनार*

भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी रूप में पूजा जाता है। भारत में गंगा, सरस्वती, नर्मदा जैसी कई नदियां हैं, जिन्हें लोग माता मानते हैं लेकिन भारत में एकमात्र ऐसी नदी है, जिसे पुरुष नदी यानि भारत का पिता कहा जाता है।

*ब्रह्मापुत्र के नाम से है पहचान*

ब्रह्मपुत्र नदी पर कई पौराणिक कथाएं हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार,ब्रह्मपुत्र नदी सृष्टि के हिंदू देवता ब्रह्मा और ऋषि शांतनु की पत्नी अमोघा के पुत्र है। ब्रह्मादेव अमोघा की सुंदरता से प्रभावित हुए और उन्होंने उसे विवाह का प्रस्ताव दिया। विवाह के बाद उनके घर एक बालक का जन्म हुआ, जो पानी के रूप में नीचे की ओर बहता रहा। ऋषि शांतनु ने बालक को चार पर्वतों कैलाश, गंधमादन, जारुधि और संवर्तक के बीच में रखा। लड़का बड़ा होकर ब्रह्म कुंड नामक एक बड़ी झील में बदल गया।*

*परशुराम ने पाई थी मुक्ति*

*’कालिका पुराण’ की एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार , भगवान विष्णु के दस अवतारों में से एक भगवान परशुराम ने बालक को मुक्त करने के लिए अपनी कुल्हाड़ी से ब्रह्म कुंड के किनारों को तोड़ दिया, जिससे ब्रह्मपुत्र नदी बन गई। इसके बाद उन्होंने इस पवित्र नदी में स्नान किया, ताकि वह अपनी ही मां का सिर कुल्हाड़ी से काटने के पाप से मुक्ति पा सके।*

*भारत की सबसे गहरी नदी……

*अन्य नदियों के विपरीत जिन्हें मां के रूप में पूजा जाता है वहीं, ब्रह्मपुत्र को एक पुरुष नदी माना जाता है। पूर्वोत्तर राज्य असम में बहने वाली इस नदी की पूजा हिंदुओं के अलावा, बौद्ध और जैन धर्म के लोग भी करते हैं। तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को सांपो, अरुणाचल प्रदेश में डिहं और बांग्लादेश में जमुना के नाम से पहचाना जाता है।भारत की सबसे गहरी और चौड़ी इस नदी की गहराई 140 मीटर है, जो मानसरोवर झील के पास कैलाश श्रेणी के चेमायुंगडुंग हिमनद से निकलती है।2900 किलोमीटर लंबी इस नदी का सबसे गहरा प्वाइंट असम के तिनसुकिया में पड़ता है जबकि इसका उद्गम स्थल हिमालय के उत्तर में तिब्बत के पुरंग जिले में स्थित मानसरोवर झील है।

Posted in खान्ग्रेस, हिन्दू पतन

वेनेजुएला


वेनेजुएला मामले पर एक पहलू की बात तो सब लोग कर रहे हैं कि अमेरिका ने गलत किया

जी हां अमेरिका ने बिल्कुल गलत किया

लेकिन वेनेजुएला के घटनाक्रम को भी जानना जरूरी है

वेनेजुएला लैटिन अमेरिका में सबसे तेजी से तरक्की करता हुआ देश था

दुनिया को सबसे ज्यादा मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स वेनेजुएला ने दिए

यहां के समुद्र तटों पर सैलानियों की भीड़ रहती थी वेनेजुएला की जीडीपी दुनिया के टॉप 10 जीडीपी में थी लोगों का सपना होता था कि वेनेजुएला में जाकर नौकरी करना वहां रहना

फिर वहां एक राहुल गांधी की तरह सोच का एक नेता हुआ जिसका नाम था ह्युगो सावेज

उसने वेनेजुएला के लोगों को भड़काना शुरू किया यह उद्योगपति देश को लूट रहे हैं ठीक ऐसे ही जैसे राहुल गांधी अंबानी और अडानी का नाम लेकर भारतीयों को भड़कते हैं

तो ह्युगो सावेज  ने भी वेनेजुएला के बड़े आठ तेल कंपनियों के मालिकों का नाम लेकर अपने देश के लोगों को भड़काना शुरू किया यह सभी तेल के कुएं इनको ही क्यों दिए जा रहे हैं धीरे-धीरे वेनेजुएला के लोगों के अंदर यह सोच आ गई कि हमारी सरकार खराब है ये ह्युगो सावेज बड़ा अच्छा आदमी है

क्योंकि ह्युगो सावेज  बार-बार कहता था कि वेनेजुएला के पास इतना तेल है कि हम यदि तेल का निर्यात कम करके अपने ही देश में बेचे तो हम आधे सेंट प्रति लीटर तेल बेच सकते हैं और तेल की कमाई से हम हर परिवार को 10000 बोलिवर (वेनेजुएला की करेंसी)  महीना तक दे सकते हैं

वेनेजुएला के लोग बड़े खुश हो गए की यार अगर ह्युगो सावेज सत्ता में आएगा तो बैठे-बैठे 10000 बोलिवर  हर महीने आएंगे

ठीक वही पैटर्न जो राहुल गांधी कहते थे  याद है ना डेढ़ लाख रुपए हर साल खटाखट खटाखट खटाखट

फिर वेनेजुएला के लोगों ने ह्युगो सावेज  को चुन लिया सावेज राष्ट्रपति बन गया वह कम्युनिस्ट विचारधारा का था शुरू में खूब सब्सिडी लागू किया प्राइवेट कंपनियों को सरकारी बना दिया उद्योगपति वेनेजुएला छोड़कर चले गए उसके बाद उसने देश की जनता को खुश करने के लिए जनता को पैसे देना शुरू कर दिया फिर घर बैठे पैसा मिलने पर वेनेजुएला के लोगों ने काम करना बंद कर दिया

जैसे आज मुफ्त राशन की वजह से गांव में मजदूर मिलने है मुश्किल हो गए हैं वही हालत वेनेजुएला  में हुआ

फिर जब देश की जीडीपी गिरने लगी मुद्रा कमजोर होने लगी निर्यात कम होने लगा तब मुद्रा स्फीति  तेजी से बड़ी

फिर आपको याद होगा राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि हम ज्यादा करेंसी नोट छाप कर और उसे देश के लोगों में बांटकर भारत को अमीर बना  सकते हैं  ठीक यही बात एक बार रवीश कुमार ने भी कहा था

ठीक वही ह्यूगो सावेज  ने किया

कभी-कभी मुझे लगता है कि राहुल गांधी और ह्युगो सावेज  किसी जन्म में कोई रिश्ता था क्योंकि दोनों की सोच बिल्कुल समान है

धीरे-धीरे वेनेजुएला की हालत ऐसी हो गई कि वहां 50 करोड़ बोलिवर के करेंसी नोट जारी करने पड़े फिर 10 अरब बोलिवर  के करेंसी नोट

क्योंकि लोगों को एक ब्रेड खरीदने के लिए जाने के लिए दो बोरों में पैसे भरकर लेकर जाने पड़ते थे

सड़कों पर करेंसी नोट यूं ही बिखरे रहते थे

आप वीडियो में देखी उनको ऐसे सफाई कर्मी ट्रकों में लाद कर ले जाते थे क्योंकि नोट छापना यह गरीबी मिटाने का हल नहीं है

यह केवल ह्युगो सावेज रवीश कुमार  और राहुल गांधी ही सोच सकते हैं

नोट तो एक कागज का टुकड़ा होता है

उसके बाद  सावेज दुनिया भर के देशों से दुश्मनी लेना शुरू कर दिए तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा देश में धीरे-धीरे सारी फैक्ट्रियां बंद हो गई बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई सब कुछ बर्बाद हो गया

आज 80% वेनेज़ुएला के नागरिक कोलंबिया अर्जेंटीना या ब्राजील में शरणार्थी बनकर रहते हैं

और सबसे बड़ा दुख की बात यह की तानाशाह सावेज मरने के पहले  अपना उत्तराधिकारी तय करके गया और वह उत्तराधिकारी था निकोलस मदुरई

ठीक ऐसे ही जैसे नेहरू इंदिरा को तय करके गए इंदिरा राजीव को तय करके गई राजीव राहुल गांधी को तय करके गए यानी योग्यता नहीं बस एक खानदान में पैदा होना ही सत्ता चलाने की सबसे बड़ी योग्यता बन जाती है तो देश बर्बाद होता है

और वह मदुरो ह्युगो सावेज का भी बाप निकला उसने भी देश में खूब अव्यवस्था फैलाई भ्रष्टाचार चरम पर फैल गया लोग दाने-दाने को मोहताज थे ब्रेड खरीदने के लिए पांच-पांच घंटे की लाइन लगती थी

जो मदुरै खुद को कम्युनिस्ट कहता था तो उसने चर्च जाना शुरू किया ताकि वह देश की जनता को धर्म के नाम पर बरगला सके जैसे ठीक राहुल गांधी करते हैं जिंदगी भर हिंदुओं से नफरत और घृणा  करते हैं चुनाव आने के समय में मंदिर मंदिर का भ्रमण करते हैं

ठीक यही काम मदुरै ने किया हर रोज चर्च  जाता था वहां उसका मीडिया उसे वीडियो को वायरल करता था लेकिन देश की भूखी जनता को यह और पसंद नहीं आया

फिर उसने देश में कभी चुनाव होने ही नहीं दिया चुनाव की घोषणा करता था विपक्ष के लोगों को चुनाव लड़ने नहीं देता था और खुद को राष्ट्रपति घोषित कर देता था

जाहिर सी बात है अगर अमेरिका की गलती है कि वह एक देश में घुसकर राष्ट्रपति को अगवा किया तो उसे मदुरई की भी गलती है कि उसने अपने देश को इस कदर बर्बाद किया अपने लोगों को इस कदर बर्बाद किया कि उसके देश की 80% जनता विदेश में दर-दर की ठोकरे खाने पर मजबूर हो गई है

उम्मीद है वेनेजुएला में चुनाव होंगे देश की जनता जिसे अपना राष्ट्रपति चुनेगी वह राष्ट्रपति बनेगा और वेनेजुएला फिर पहले की तरह तरक्की करेगा

लेकिन आप लोग याद रखिएगा राहुल गांधी जैसी सोच वाला व्यक्ति अगर भारत की सत्ता में आया तो भारत भी वेनेजुएला बन जाएगा🤔

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

दान मैत्री और प्रेम से निकलता है तो आपको पता भी नहीं चलता है कि आपने दान किया। यह आपको स्मरण नहीं आती कि आपने दान किया। बल्कि जिस आदमी दान स्वीकार किया, आप उसके प्रति अनुगृहीत होते हैं कि उसने स्वीकार कर लिया। लेकिन अब दान का मैं विरोध करता हूं,जब वह दान दिया जाता है तो अनुगृहीत वह होता है जिसने लिया। और देने वाला ऊपर होता है। और देने वाले को पूरा बोध है कि मैंने दिया, और देने का पूरा रस है और आनंद। लेकिन प्रेम से जो दान प्रकट होता है वह इतना सहज है कि पता नहीं चलता कि दान मैंने किया। और जिसने लिया है, वह नीचा नहीं होता, वह ऊंचा हो जाता है। बल्कि अनुगृहीत देने वाला होता है, लेने वाला नहीं। इन दोनों में बुनियादी फर्क है। दान हम दोनों के लिए शब्द का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन दान उपयोग होता रहा है उसी तरह के दान के लिए, जिसका मैंने विरोध किया। प्रेम से जो दान प्रकट होगा, वह तो दान है ही।

प्रश्नः अगर कोई आदमी भूखा मरता हो और उसको खाना खिला दिया तो यह कैसा रहा?

अगर आपको ऐसा खयाल आए कि मैंने खाना खिला दिया तो कोई बड़ा काम कर लिया, तो यह दान पाप होगा। खयाल तो यह आना चाहिए कि कितनी मजबूरी है, कितनी कठिनाई है! अकाल पड़ जाता है, हम कुछ भी नहीं कर पाते। हम दो रोटी दे पाते हैं। तो दुखी होना चाहिए कि दो रोटी देने से कुछ हो गया है क्या? अगर प्रेम से आप जाएंगे अकाल में काम करने तो आप पीड़ित अनुभव करेंगे कि कितना काम हम कर पा रहे हैं, जो कुछ भी नहीं है। होना तो यह चाहिए कि अकाल संभव न हो, एक आदमी भूखा न मरे। हम कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। आपकी पीड़ा यह होगी कि सब कुछ करते हुए हम कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन वह जो दान देने वाला है वह वहां से अकड़ कर लौटेगा कि मैंने इतने लोगों को खाना खिलाया था।

तो दान का बोध ही गलत है। प्रेम से दान निकलता है, वह बात ही अलग है। वह इतना ही सहज है कि उसका कभी भी नहीं चलता। उसकी कोई रेखा ही नहीं छूट जाती कुछ। बल्कि प्रेम से दान निकलता है, हमेशा प्रेमी को लगता है कि कुछ कर पाया।

एक मां से पूछें कि उसने अपने बेटे के लिए क्या किया। वह कहेगी मैं कुछ भी नहीं कर पाई। जहां पढ़ाना था, पढ़ा नहीं पाई, जो खाना खिलाना था वह खिला नहीं पाई, जो कपड़ा पहनाना था वह मैं नहीं पहना पाई। मैं लड़के के लिए कुछ भी नहीं कर पाई। और एक संस्था के सेक्रेटरी से पूछें कि उसने संस्था के लिए क्या-क्या किया? तो वह हजार फेहरिस्त बनाए हुए खड़ा है कि हमने यह किया, हमने यह किया, हमने यह किया। जो उसने नहीं किया उसका भी दावा है कि हमने किया। और मां ने जो किया भी, उसकी भी वह दावेदार नहीं है। वह कहेगी कि मैं कुछ भी नहीं कर पाई।

तो प्रेम के पीछे कभी भी यह भाव नहीं छूट जाएगा कि मैंने कुछ किया। और जिस दान में यह भाव रहता है कि मैंने कुछ किया, उसको मैं पाप कहता हूं। वह अहंकार का ही पोषण है।

तो प्रेम से जो दान निकलेगा, उसकी तो बात ही और है। उसको तो दान कहने की जरूरत ही नहीं है। तो वह निकलता ही रहेगा। प्रेम तो स्वयं ही दान है। लेकिन बिलकुल ही अन्यथा बात है। और यह दान-धर्म की हम इतनी प्रशंसा करते हैं कि दान दो तो पुण्य होगा, दान दो तो स्वर्ग मिलेगा,दान दो तो भगवान तक पहुंच जाओगे, यह शरारत की बात है। इससे कोई मतलब नहीं है। यह उस आदमी के अहंकार का शोषण है। और इस भांति जो दान दे रहा है वह दान-वान कुछ नहीं दे रहा है। वह फिर शोषण कर रहा है, वह अपने स्वार्थ का फिर इंतजाम कर रहा है। आपकी दीनता-दरिद्रता उसे कहीं भी नहीं छू रही है। बल्कि आप दीन और दरिद्र हैं, इससे वह खुश है। क्योंकि उसे दानी बनने का एक अवसर आप जुटा रहे हैं। सड़क पर एक भिखारी आपसे दो पैसे मांगे, अगर आप अकेले हैं तो आप इनकार कर देंगे, अगर चार आदमी हैं तो आप दे देंगे। क्योंकि चार आदमी देखते हैं कि दो पैसा दिया। चार आदमी के सामने भिखारी को इनकार करना कि नहीं देंगे आपके अहंकार को चोट लगती है। अकेले में आप दुत्कार देंगे। इसलिए भिखारी प्रतीक्षा करता है, अकेले आदमी से नहीं मांगता है, चार आदमी हों तो पकड़ लेता है। क्योंकि इन तीन के सामने आपके अहंकार का उपयोग करता है। अब जरा मुश्किल है,इनकार करना।

मुश्किल यह है कि जब आप दे रहे हैं तब आप इसलिए दे रहे हैं कि चार लोग देख लें, चार लोगों को पता चल जाए और अगर यह आपकी कंडीशन नहीं है तो उसको मैं दान नहीं कह रहा हूं, उसको मैं प्रेम कह रहा हूं। फिर तो आप यह चाहेंगे कि कोई देख न ले। कोई क्या कहेगा कि दो पैसे भी नहीं हैं एक आदमी के पास? कोई कहेगा क्या? कि एक आदमी ने भीख मांगी और इस आदमी ने दो पैसे दिए। तब आप डरेंगे कि कोई देख न ले, अकेले में चुप-चाप दे देंगे। किसी को कहना मत। पता न चल जाए किसी को। मैं तो कुछ कर ही नहीं पाया, तुम मांग रहे हो। दो पैसे मैं देता हूं यह देना हुआ। और जनरल कंडीशन यह है कि आप प्रतीक्षा कर रहे हैं कि चार लोग जान लें, या अखबार में खबर छप जाए कि इस आदमी ने इतना दिया है। यह मंदिर का पत्थर लग जाए कि इस आदमी ने इतना दिया है, यह नाम खुद जाए। नहीं, यह बिलकुल जनरल कंडीशन है। दान देने वाले के माइंड की यह स्थिति है। तब तो दान चल रहा है हजारों साल से और दुनिया जरा भी कुछ अच्छी नहीं बन पाती।

तो मेरा कहना यह है कि प्रेम बढ़ाना चाहिए, दान इसलिए की बकवास बंद होनी चाहिए। उस प्रेम से जो दान फलित होगा, वह बात ही और है। उसमें फर्क इतना ही है कि जैसे एक नकली फूल आप ले आए बाजार से और असली फल पैदा हुए। उतना ही फर्क है उन दोनों दान में। तो एक की मैं प्रशंसा करता हूं और एक की निंदा करता हूं। तो उनके बीच का फासला बहुत है, फासला बहुत है।

जीवन अलोक

ओशो

Posted in हिन्दू पतन

વેનેઝુએલા


વેનેઝુએલાના મુદ્દે દરેક વ્યક્તિ એક પાસા પર વાત કરી રહી છે કે અમેરિકાએ ખોટું કર્યું. હા, અમેરિકાએ બિલકુલ ખોટું કર્યું. પરંતુ વેનેઝુએલાના ઘટનાક્રમને જાણવો પણ જરૂરી છે.
વેનેઝુએલા લેટિન અમેરિકામાં સૌથી ઝડપથી પ્રગતિ કરી રહેલો દેશ હતો. દુનિયાને સૌથી વધુ મિસ વર્લ્ડ અને મિસ યુનિવર્સ વેનેઝુએલાએ આપ્યા છે. અહીંના દરિયાકિનારા પર પ્રવાસીઓની ભીડ રહેતી હતી. વેનેઝુએલાની જીડીપી (GDP) વિશ્વની ટોપ 10 જીડીપીમાં હતી. લોકોનું સપનું હતું કે વેનેઝુએલા જઈને નોકરી કરવી અને ત્યાં રહેવું.
પછી ત્યાં રાહુલ ગાંધી જેવી વિચારધારા ધરાવતો એક નેતા આવ્યો જેનું નામ હતું હ્યુગો સાવેઝ. તેણે વેનેઝુએલાના લોકોને ભડકાવવાનું શરૂ કર્યું કે આ ઉદ્યોગપતિઓ દેશને લૂંટી રહ્યા છે – બરાબર એવી જ રીતે જેમ રાહુલ ગાંધી અંબાણી અને અદાણીનું નામ લઈને ભારતીયોને ભડકાવે છે.
હ્યુગો સાવેઝે પણ વેનેઝુએલાની આઠ મોટી તેલ કંપનીઓના માલિકોના નામ લઈને પોતાના દેશના લોકોને ભડકાવવાનું શરૂ કર્યું કે આ તમામ તેલના કૂવાઓ ફક્ત તેમને જ કેમ આપવામાં આવે છે? ધીરે ધીરે વેનેઝુએલાના લોકોમાં એવી વિચારધારા આવી ગઈ કે આપણી સરકાર ખરાબ છે અને આ હ્યુગો સાવેઝ બહુ સારો માણસ છે. કારણ કે હ્યુગો સાવેઝ વારંવાર કહેતો હતો કે વેનેઝુએલા પાસે એટલું તેલ છે કે જો આપણે તેલની નિકાસ ઓછી કરીને પોતાના જ દેશમાં વેચીએ, તો આપણે અડધા સેન્ટ પ્રતિ લિટર તેલ વેચી શકીએ છીએ અને તેલની કમાણીથી આપણે દરેક પરિવારને દર મહિને 10,000 બોલિવર (વેનેઝુએલાનું ચલણ) આપી શકીએ છીએ.
વેનેઝુએલાના લોકો ખૂબ ખુશ થઈ ગયા કે જો હ્યુગો સાવેઝ સત્તામાં આવશે તો બેઠા-બેઠા દર મહિને 10,000 બોલિવર આવશે. બરાબર એ જ પેટર્ન જે રાહુલ ગાંધી કહેતા હતા, યાદ છે ને? દોઢ લાખ રૂપિયા દર વર્ષે ‘ખટાખટ ખટાખટ ખટાખટ’.
પછી વેનેઝુએલાના લોકોએ હ્યુગો સાવેઝને ચૂંટી કાઢ્યો. સાવેઝ રાષ્ટ્રપતિ બન્યો. તે સામ્યવાદી (કમ્યુનિસ્ટ) વિચારધારાનો હતો. શરૂઆતમાં તેણે ઘણી સબસિડી લાગુ કરી, ખાનગી કંપનીઓને સરકારી બનાવી દીધી. ઉદ્યોગપતિઓ વેનેઝુએલા છોડીને ચાલ્યા ગયા. ત્યારબાદ તેણે જનતાને ખુશ કરવા માટે પૈસા વહેંચવાનું શરૂ કર્યું. ઘરે બેઠા પૈસા મળવાને કારણે વેનેઝુએલાના લોકોએ કામ કરવાનું બંધ કરી દીધું. જેમ આજે મફત રાશનને કારણે ગામડાઓમાં મજૂરો મળવા મુશ્કેલ થઈ ગયા છે, તેવી જ હાલત વેનેઝુએલામાં થઈ.
જ્યારે દેશની જીડીપી પડવા લાગી, કરન્સી નબળી પડી અને નિકાસ ઓછી થઈ, ત્યારે મોંઘવારી (ફુગાવો) ઝડપથી વધી. તમને યાદ હશે, રાહુલ ગાંધીએ એકવાર કહ્યું હતું કે આપણે વધુ કરન્સી નોટો છાપીને અને તેને દેશના લોકોમાં વહેંચીને ભારતને અમીર બનાવી શકીએ છીએ. બરાબર આવી જ વાત એકવાર રવીશ કુમારે પણ કહી હતી. હ્યુગો સાવેઝે પણ એ જ કર્યું.
ક્યારેક મને લાગે છે કે રાહુલ ગાંધી અને હ્યુગો સાવેઝ વચ્ચે કોઈ જન્મોજન્મનો સંબંધ હશે કારણ કે બંનેની વિચારધારા બિલકુલ સમાન છે. ધીરે ધીરે વેનેઝુએલાની હાલત એવી થઈ ગઈ કે ત્યાં 50 કરોડ બોલિવરની ચલણી નોટો બહાર પાડવી પડી, પછી 10 અબજ બોલિવરની નોટો. કારણ કે લોકોને એક બ્રેડ ખરીદવા માટે બે કોથળા ભરીને પૈસા લઈ જવા પડતા હતા. રસ્તાઓ પર ચલણી નોટો એમ જ વેરાયેલી રહેતી હતી. તમે વીડિયોમાં જોયું હશે, સફાઈ કામદારો તેને ટ્રકોમાં ભરીને લઈ જતા હતા કારણ કે નોટો છાપવી એ ગરીબી દૂર કરવાનો ઉકેલ નથી. આ માત્ર હ્યુગો સાવેઝ, રવીશ કુમાર અને રાહુલ ગાંધી જ વિચારી શકે છે. નોટ તો માત્ર કાગળનો ટુકડો છે.
ત્યારબાદ સાવેઝે દુનિયાભરના દેશો સાથે દુશ્મની વહોરી લીધી. તેલની નિકાસ પર પ્રતિબંધો લાગ્યા, દેશમાં ધીરે ધીરે બધી ફેક્ટરીઓ બંધ થઈ ગઈ. બેરોજગારી ચરમસીમાએ પહોંચી ગઈ અને બધું બરબાદ થઈ ગયું. આજે 80% વેનેઝુએલાના નાગરિકો કોલંબિયા, આર્જેન્ટિના કે બ્રાઝિલમાં શરણાર્થી તરીકે રહે છે.
સૌથી દુખની વાત એ છે કે સરમુખત્યાર સાવેઝ મરતા પહેલા પોતાનો વારસદાર નક્કી કરીને ગયો અને તે વારસદાર હતો નિકોલસ મદુરો. બરાબર એવી જ રીતે જેમ નેહરુએ ઈન્દિરાને, ઈન્દિરાએ રાજીવને અને રાજીવે રાહુલ ગાંધીને નક્કી કર્યા – એટલે કે યોગ્યતા નહીં પણ એક ખાનદાનમાં જન્મ લેવો જ સત્તા ચલાવવાની સૌથી મોટી લાયકાત બની જાય, ત્યારે દેશ બરબાદ થાય છે.
અને તે મદુરો તો હ્યુગો સાવેઝનો પણ બાપ નીકળ્યો. તેણે પણ દેશમાં ભારે અરાજકતા ફેલાવી, ભ્રષ્ટાચાર ચરમસીમાએ પહોંચ્યો. લોકો દાણે-દાણે મોહતાજ થઈ ગયા, બ્રેડ ખરીદવા માટે પાંચ-પાંચ કલાકની લાઈનો લાગતી હતી. જે મદુરો પોતાને કમ્યુનિસ્ટ કહેતો હતો, તેણે ચર્ચ જવાનું શરૂ કર્યું જેથી તે દેશની જનતાને ધર્મના નામે ભરમાવી શકે. બરાબર જેવું રાહુલ ગાંધી કરે છે – આખી જિંદગી હિંદુઓ પ્રત્યે નફરત અને ઘૃણા, અને ચૂંટણી સમયે મંદિરોની મુલાકાત.
મદુરોએ પણ બરાબર આ જ કામ કર્યું. તે રોજ ચર્ચ જતો અને તેનું મીડિયા તે વીડિયો વાયરલ કરતું, પરંતુ દેશની ભૂખી જનતાને આ બધું પસંદ ન આવ્યું. પછી તેણે દેશમાં ક્યારેય ચૂંટણી થવા જ ન દીધી. તે ચૂંટણીની જાહેરાત કરતો, વિપક્ષના લોકોને લડવા ન દેતો અને પોતાને રાષ્ટ્રપતિ જાહેર કરી દેતો.
સીધી વાત છે, જો અમેરિકાની ભૂલ છે કે તેણે એક દેશમાં ઘૂસીને રાષ્ટ્રપતિનું અપહરણ કર્યું, તો તે મદુરોની પણ ભૂલ છે કે તેણે પોતાના દેશને આ હદે બરબાદ કર્યો. પોતાના લોકોને એટલા પાયમાલ કર્યા કે દેશની 80% જનતા વિદેશમાં દર-દર ભટકાવા મજબૂર થઈ ગઈ છે. આશા છે કે વેનેઝુએલામાં ચૂંટણી થશે, દેશની જનતા જેને પોતાના રાષ્ટ્રપતિ તરીકે પસંદ કરશે તે રાષ્ટ્રપતિ બનશે અને વેનેઝુએલા ફરી પહેલાની જેમ પ્રગતિ કરશે.
પરંતુ તમે લોકો યાદ રાખજો, રાહુલ ગાંધી જેવી વિચારધારા ધરાવતી વ્યક્તિ જો ભારતની સત્તામાં આવશે, તો ભારત પણ વેનેઝુએલા બની જશે.
– જિતેન્દ્ર સિંહ

Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

ઇમરાન ખાન કોઈ કારણ વગર પાકિસ્તાનની જેલમાં સડે છે, જ્યારે અમેરિકા ને તેના માનવાધિકારો ની ચિંતા  નથી.

આઠ અમેરિકન સાંસદો ને ભારત સરકારને પત્ર લખીને ઉમર ખાલિદને જામીન આપવા અથવા આંતરરાષ્ટ્રીય કાયદા અનુસાર કેસ ચલાવવાની વિનંતી કરી છે.

ઉમર ખાલિદના માતાપિતાએ અગાઉ ડિસેમ્બરમાં કેટલાક અમેરિકન નેતાઓ સાથે મુલાકાત કરી હતી. ઉમર ખાલિદના પિતા સિમી સભ્ય હતા.

અમેરિકન સાંસદ આવા સોદા ડોલર વગર નથી કરતા એ પણ જગ જાહેર છે.એ પણ ખુબ મોટી રકમ.

ન્યૂ યોર્કના મેયર ઝોહરાન મમદાની મુખ્ય ભૂમિકા ભજવે છે. ઉમર ખાલિદના માતાપિતાએ અમેરિકાનો પ્રવાસ કર્યો હતો. તેમને મુસાફરી માટે પૈસા ક્યાંથી મળ્યા તેની તપાસ થવી જોઈએ. આ લોકો મેયર મમદાની સાથે મળ્યા હતા. મમદાનીએ ઉમર ખાલિદ માટે પત્ર લખ્યો હતો.

ઓસામા બિન લાદેનના કેસમાં અમેરિકનો આંતરરાષ્ટ્રીય કાયદાને યાદ રાખવામાં નિષ્ફળ ગયા; તેમણે તેની ધરપકડ કરીને કેસ ચલાવવો જોઈતો હતો.

રાજદ્રોહના આરોપમાં ભારતમાં અટકાયતમાં લેવાયેલા આરોપી અંગે અમેરિકન સાંસદો નો પત્ર ભારતના આંતરિક બાબતોમાં દખલગીરી ગણવો જોઈએ. ભારત સરકારે આનો સખત વિરોધ કરવો જોઈએ.

કોઈએ અમેરિકાને વિશ્વનો નેતા જાહેર કર્યો નથી. ટ્રમ્પ પોતે પોતાના પદનો દુરુપયોગ કરી રહ્યા છે, પાકિસ્તાનમાં તેમના પુત્ર માટે ક્રિપ્ટો એક્સચેન્જ ખોલવામાં મદદ કરી રહ્યા છે, જ્યાં તેના ડઝનબંધ નાગરિકોને આંતરરાષ્ટ્રીય આતંકવાદી જાહેર કરવામાં આવ્યા છે અને લાખો ડોલરના ઇનામ જાહેર કરવામાં આવ્યા છે.

ડીપ સ્પેસ અમેરિકામાંથી આ માહિતી મેળવવા અને તેનો ઉપયોગ સમગ્ર દેશમાં નાગરિક અશાંતિ ભડકાવવા માટે કરવાનો પ્રયાસ કરી રહ્યું છે.

આ આઠ ડેમોક્રેટિક ડાબેરી ધારાસભ્યો છે જેમણે પત્ર લખ્યો હતો:

જેમ્સ મેકગોવર્ન
ક્રિસ વેન હોલેન
જેમી રાસ્કિન
પીટર વેલ્ચ
પ્રમિલા જયપાલ
જાન શાકોવસ્કી
રાશિદા તલાઈબ
લોયડ ડોગેટ

ખરેખર આતંકવાદીઓને જેલમાંથી કોણ બહાર કાઢવા માંગે છે? ઐતિહાસિક રીતે, કોંગ્રેસ હંમેશા આતંકવાદીઓ સાથે ઉભી રહી છે.