Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे…

2022 में तुर्की ने भारत को 56 हजार टन गेहूं का ऑर्डर दिया.. भारत ने शिपमेंट भेज दी.. वह भी एक्सपोर्ट क्वॉलिटी के गेहूं.. जब शिपमेंट तुर्की के बंदर पर पहुंचा तो तुर्की ने बहाना बनाया कि भारत के गेहूं में इबोला वायरस है.. इस लिए हम इस शिपमेंट को नहीं लेंगे.. पूरे विश्व में भारत की शाख पर धब्बा लगा दिया तुर्की ने.. यह सोच समझ कर किया गया षडयंत्र था.. भारत ने अपनी लैब में उस गेहूं के सैंपल टेस्ट किए और बताया कि कोई वायरस नहीं है उस गेहूं में..पर तुर्की नहीं माना.. शिपमेंट कुछ दिन वही पर खड़ा रहा.. और फिर शिपमेंट वापस आना शुरू हुआ.. और रस्ते में पड़ता है भारत का मित्र इजराइल… जिसने पूरा शिपमेंट खरीद लिया… और भारत की शाख विश्वभर में बचा ली…

अब इस समय तुर्की में अकाल चल रहा है… जो गेहूं वहां उत्पन्न होता है वह उसकी आवश्यकता का 50% ही है.. अब बाकी का 50% बाहर से खरीदना है… यूक्रेन और रूस गेहूं के बड़े उत्पादक देश है, पर वह अभी युद्ध में है, तो संभव नहीं.. दूसरी और उसके पालतू टॉमी लोग है पाकिस्तान और अज़रबैजान.. वह भी इस विषय में भीखमंगे ही है.. तो अंत में वह भारत के पास आया…

इस बार भारत 2022 का वह धोखा भुला नहीं है… भारत ने विश्वगुरु बनने वाले विचार को थोड़ी देर कोने में रखा और तुर्की को 2022 वाला कांड याद दिलाया.. और मना कर दिया… बोला भाग BSD K…
#NationFirst