दारा शिकोह के पास एक अंगुठी थी जिसमें एक तरफ अल्लाह और एक तरफ राम लिखा हुआ था।
जब यह तय हो गया कि शाहज़हां के बाद दारा शिकोह नया बादशाह बनेगा तो औरंगजेब ने उस अंगुठी को अल्लाह की शान मे गुस्ताखी (ईशनिंदा) करार देकर दारा शिकोह के खिलाफ फतवा जारी करवा दिया। सारे बड़े मुगल सरदार औरंगजेब की तरफ मिल गए। बाद में दारा शिकोह को पागल हाथी पर बैठा कर घुमाया गया और फिर उसकी गर्दन काटकर खाने की थाली में कैद में रहा रहे शाहजहां के पास भेजी गई।
इधर 300 साल के बाद ‘सभी धर्म बराबर हैं, भगवान एक है” इतना कहने पर दीपू चंद्र दास को पीट पीटकर मार दिया गया और उसकी शव को पेड़ से बांधकर जलाया गया।
“सभी धर्म बराबर है, ईश्वर एक है नाम अलग अलग हैँ” ऐसा मानना भी एक privilege है जिसे आप केवल तभी तक मान सकते हैं या बोल सकते हैं जब तक हिन्दू बहुसंख्यक हैं। उसके बाद आपको मानना पड़ेगा कि सच्चा ईश्वर एक है वो उनका वाला है। आपके बुत झूठे खुदा है अपने ईश्वर को उनके ईश्वर के बराबर मानना भी ईशनिंदा कहा जाएगा। फिर जो बांग्लादेश में हुआ है, दारा शिकोह के साथ हुआ है। हम जानते ही हैं।
तो जब तक अगले कुछ दशक आप सेकुलर रहना अफोर्ड कर सकते हैं आपको रहना चाहिए और खूब सेक्युलर रहते हुए यह कहना चाहिए सभी धर्म बराबर है। “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना।”
रह गए वो जो…पांच वक्त लाउडस्पीकर से अब भी चिल्लाते ही हैं कि ईश्वर एक ही है और वो सिर्फ उनका वाला है
जब समय आएगा तब आप भी चाहे कितने भी सेक्युलर हों यह ही बोलेंगे चाहे कन्वर्ट होकर खुशी से बोले या डर से कि सच्चा ईश्वर एक है वो उनका वाला है
अभी तो दीपू चंद्र दास की दूसरी-तीसरी पीढ़ी यह भी बोलती दिखेगी, दीन में जहर की मनाही है
तलवार के दम पर थोड़ी फैला है हमारा दीन..
#singhsingh 🚩 जय श्री राम जी की 🚩🙏
