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नोटबंदी


#नोटबंदी एक ऐसा निर्णय था…जिसे लागू करना आसान नहीं था…मोदी जी को अंदाजा था कि हो सकता है जनता साथ न दे…सरकार जा सकती थी….विपक्ष ने जोर भी बहुत लगाया…लेकिन कुछ फैसलों में भारत की जनता के साथ ईश्वर भी साथ थे….क्योंकि इतना बड़ा निर्णय जनता का स्वीकार करना किसी चमत्कार से कम भी नहीं था….क्योंकि हम कुछ बातों से अनभिज्ञ नहीं है कि कैसे कल्याण सिंह की सरकार गिर गई थी…लेकिन अति का अंत होता है….

#धुरंधर_फिल्म में “खनानी ब्रदर्स” की कहानी दिखाई गई है…ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है…बल्कि 100% सच है…

* ये कराची के 2 जुड़वाँ भाई थे…जावेद खनानी और अल्ताफ खनानी.

* दोनों भाइयों ने 1993 में कराची मे “Khanani & Kalia International” के नाम से “money exchange” का बिजनेस शुरू किया….जो धीरे धीरे पाकिस्तान की सबसे बड़ी “money exchange” कम्पनी बन गई…इनके हाथ मे पाकिस्तान की 40% करेंसी बिजनेस थी…..लेकिन इनका असली काम “हवाला” का था.

* ये दोनों भाई दाऊद इब्राहिम…अल कायदा और लश्कर ए तैयबा का काला धन सफेद करते थे और इन्होंने ही ISI के साथ मिलकर भारत मे नकली नोटों का पूरा नेटवर्क खड़ा किया.

* बाद मे ये अमेरिकी एजेंसियों के रेडार पर आए और…अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने इनकी कम्पनी को “Transnational Criminal Organization” घोषित कर दिया…2015 मे एक भाई अल्ताफ खनानी को अमेरिका मे गिरफ्तार कर लिया गया…जो आज भी अमेरिका की जेल मे है.

* भारत मे 2004 मे कॉंग्रेस के नेतृत्व मे केंद्र मे UPA की सरकार बनी…और पी चिदंबरम भारत के वित्त मंत्री बने.

* 2006 मे चिदंबरम ने एक नई कम्पनी बनाई  “Security Printing And Minting Corporation Of India Limited”….जिसने इंग्लैंड की कम्पनी “De La Rue” से भारत की करेंसी के लिए “Security Printing Paper” और “Security Thread” खरीदना शुरू किया…..कमाल की बात ये थी कि यही कम्पनी पाकिस्तान को भी same paper और Security Thread सप्लाय करती थी.

* अब ISI के लिए क्या दिक्कत थी…उनके पास पेपर भी था और Security Thread भी…जरूरत उन्हें “Die” की थी…वो भी उन तक उन्हीं लोगों ने पहुंचा दिया….जिन्होंने बाकि चीजें पहुंचाने मे मदद की थी.

* ISI ने धड़ाधड़ भारतीय 1000/- और 500/- के नोट छापने शुरू किए…और खनानी उन नोटों को कतर और नेपाल के रास्ते भारत पहुंचाता था.

* इसकी पोल 2010 मे खुली…जब भारतीय एजेंसियों को इसकी भनक लगी और उन्होंने नेपाल बॉर्डर से सटे 70 बैंकों पर रेड डाली. ..उसके बाद जो सच्चाई सामने आई…उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. ….ये पता चला कि RBI के लॉकर मे ही हजारों करोड़ के नकली नोट भरे पड़े हैं…जिन्हें पहचानना नामुमकिन था…देश की जनता के घरों मे जो नोट थे…उनकी तो बात ही छोड़ दीजिये.

* आनन फानन मे देश के वित्त मंत्री को बदल दिया जाता है और चिदंबरम की जगह प्रणव मुखर्जी देश के वित्त मंत्री बनते हैं…बनते ही उन्होंने De La Rue को ब्लैक लिस्ट कर दिया.

* लेकिन 2012 मे चिदंबरम फिर से वित्त मंत्री बनते हैं….और उनके सचिव बनते हैं अरविंद मायाराम…और वो फिर से ब्लैक लिस्टेड कम्पनी De La Rue से Paper खरीदना शुरू कए देते हैं.

* पाकिस्तान की फिर से चांदी हो जाती है….वो भारतीय नोट छापता…उन्हीं पैसों से हथियार खरीदता. …उन्हीं पैसों से आतंकवादियो की भर्ती करता….उन्हें ट्रेनिंग देता और भारत मे 26/11…जैसे हमले करवाता….हमारे शहरों मे धमाके करवाता…और भारत के अंदर भारत विरोधी गतिविधियों को आर्थिक मदद देता…..हमे ही खत्म करने के लिए………..आप समझ रहे हैं………..किस लेवल का चूTया काटा गया है हमारा…..!!….और किस लेवल के चूTये हैं हिंदू…!!

* फिर आया 2014….जब इस देश के जागरूक हिन्दुओं ने अपना जी जान लगा दिया. …और मोदीजी को देश का प्रधानमन्त्री बनाया…..उन्होंने सबसे पहले De La Rue को दोबारा ब्लैक लिस्ट किया और….चिदंबरम के सचिव अरविंद मायाराम के खिलाफ FIR दर्ज हुई..

* फिर आई 8 नवंबर 2016 की वो रात….जब 8 बजे मोदीजी TV पर आए….और सिर्फ 4 घंटे की मोहलत देकर…एक झटके मे “जाली नोटों” के इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म कर दिया.

* पूरा पाकिस्तान अर्श से फर्श पर आ गया….जावेद खनानी के 40 हजार करोड़ के नकली नोट सिर्फ 4 घंटे मे रद्दी हो गए….उसने अपनी बिल्डिंग से कूद के जान दे दी. …..पाकिस्तान के भीख मांगने के दिन शुरू हो गए….जो आज तक चल रहे हैं….और यकीन मानिए.  …..जब तक मोदी हैं….पाकिस्तान अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाएगा….टुकड़ों मे बंट जाएगा.

* ऐसा नहीं है कि सिर्फ पाकिस्तान को नुकसान हुआ….यहां जो उनके हमदर्द थे…2 नंबरी थे…उनका हाल भी पाकिस्तान जैसा ही हुआ….सब बर्बाद हो गए….सब मोदी के खिलाफ हो गए…आप इसी मंच पर देख लीजिए. …आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे…जो 2016 से पहले कट्टर मोदी समर्थक बने घूमते थे….वो आज क्या कर रहे हैं……नोटबंदी का जो दर्द मोदीजी ने इन्हें दिया था….वो आज इनका बवासीर बन चुका है….जो उठते बैठते इनकी चीखें निकल ही देता है. …..खैर  …..इनकी समझ मे ये बात नहीं आती की इनके पास जो 2 नंबर का पैसा था….वो वैसे भी नकली ही था. ….

* नोटबंदी एक बहुत ही खतरनाक फैसला था. ….वो भी इस तरह लागू करना…सिर्फ 4 घंटे की मोहलत में. …ये सिर्फ मोदीजी ही कर सकते थे. …..उन्होंने एक झटके मे उधर वाले और इधर वाले…1.5 फ्रंट को अपनी जान का दुश्मन बना लिया था. …..मुझे आज भी याद है कि…उन्होंने किस तरह हाथ फैला कर देश से इस फैसले के लिए समर्थन माँगा था…..और देश ने क्या किया. …..

*  देश ने पूरी ताकत से उनका समर्थन किया…..उनका साथ दिया….क्यूंकि देश को सब पता है….देश को सारा सच पता था. ….क्यूंकि. …

“…..भारत कोई भूमि का बेजान टुकड़ा नहीं है. …..एक जीता जागता राष्ट्रपुरुष है. …..”…

जयहिंद 🇮🇳🚩
वन्देमातरम 🚩

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जय भारत🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
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साभार– अमरकांत त्रिपाठी जी की वॉल से

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अब जरा जमीनी सच देख लें….
ये तश्वीर है तमिलनाडु के S. A. बाशा की…. ये व्यक्ति 58 लोगों का हत्यारा और 239 लोगों को गंभीर रूप से जख़्मी कर उन्हें अस्पताल पहुँचा देने वाला है… जिनमें से कई स्थाई अपंगता का शिकार हो गए….
बाशा 14 फरवरी 1998 को हुए Coimbatore बम ब्लास्ट का मुख्य आरोपी था….. इस ब्लास्ट का मुख्य टार्गेट थे पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी….. आडवाणी जी की रैली से बस कुछ मिनट पहले पूरा शहर धामकों से दहल उठा…

जाँच में इसमें #अल_उम्मा नाम के संगठन का हाथ सामने आया जिसका मुखिया था ये “#एस_ए_बाशा”..
लम्बा कोर्ट टॉयल चला और इसमें बाशा को आजीवन कारावास का दण्ड मिला…. जिसे पर्याप्त सबूतों के चलते पहले मद्रास हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने कायम रखा…
बाशा लम्बे समय जेल में रहा और ख़राब सेहत के चलते 24 अप्रैल 2024 को पैरोल पर पर रिहा हो अस्पताल पहुँच गया…. जहाँ दो दिन पहले ये एडियां रगड़ता मर गया….

इस आतंकी हत्यारे के मरने के बाद तमिलनाडु के मुसलमानों ने इसके जनाजे में इस तरह उपस्थिति दिखाई जैसे कोई हीरो मरा हो…. हज़ारों की भीड़ इसके जनाजे में जुटी….
सिर्फ इतना ही नहीं इंड़ी गठजोड़ के कई बड़े नेता तमिलनाडु के इसके जनाजे में कंधा देने पहुंच गए…
जिनमें NTK का नेता सीमन , तमिलनाडु सरकार का दर्ज़ाप्राप्त मंत्री वन्नी अरसु , MLA P. अब्दुल समद , राहुल गाँधी का करीबी U. थानियारासु सहित कई बड़े नाम थे….

एक हत्यारे आतंकी जिसकी लाश को समंदर में फैकना चाहिए था उसे कांग्रेस DMK सरकार ने हीरो के जैसे दफ़न करवाया… बाकायदा अपने विधायक और मंत्री वहाँ भेज….. शहर भर में जुलूस निकाल…

आखिर क्यूँ ये न मानें हिन्दू के हर मज़हबी एक आतंकी और कांग्रेस पार्टी उन आतंकियों की असल पैरोकार है…

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अधिकांश लोग यही मानते आये हैं कि 1947 में बटवारे के बाद गांधी ने नेहरू से पाकिस्तान को अपना भरण पोषण ( Alimony ) के लिए 50 करोड़ रुपये दिलवाए थे . लेकिन यह बात अर्ध सत्य है . प्रसिद्ध किताब ” फ्रीडम एट मिड नाइट ( Freedom at midnight ) लेखक “लेरी कोलिन्स डोमिनिक ला पियरे (Larry Collins and Dominique LaPierre ) के अनुसार देश की चल अचल संपत्ति का बटवारा 20 – 80 के अनुपात से किया गया था .जिसमे रेलवे के इंजन ,डिब्बे , सरकारी गाड़ियां,टेबल कुर्सियां ,स्टेशनरी, फर्नीचर यहाँ तक झाड़ू भी शामिल थे . साथ में 50 करोड़ नकद राशि भी थी .लेकिन जब इतना लेने के बाद भी पाक सेना ने कश्मीर पर हमला कर दिया तो पाकिस्तान को खुश करने के लिए नेहरू ने पाकिस्तान को 25 करोड़ रुपये और दे दिए . जिसके कारन बटवारे का अनुपात बदल गया था . अर्थात 17.5% पाकिस्तान को और 82.5 % भारत को . इसका यही मतलब निकलता है कि गांधी और नेहरू ने 1947 में पाकिस्तान को मजबूत और पुष्ट करने के लिए 50 करोड़ रुपये नहीं बल्कि75 करोड़ रूपये दिए थे . ताकि वह भारत पर हमले करता रहे

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જ્યારે આઈ.કે. ગુજરાલ ભારતના વડા પ્રધાન બન્યા, ત્યારે તેમણે ભારતીય જાસૂસોની સંપૂર્ણ યાદી પાકિસ્તાનને સોંપી દીધી, અને આપણા ઘણા જાસૂસોને નિર્દયતાથી મારી નાખવામાં આવ્યા. તેમણે RAW કામગીરી પણ બંધ કરી દીધી, જેના કારણે 1998 પછી આતંકવાદી હુમલાઓમાં અચાનક વધારો થયો.

પરંતુ પ્રશ્ન એ છે કે ગુજરાલે આ બધું કરીને શું પ્રાપ્ત કર્યું? જવાબ શોધવા મુશ્કેલ છે, પરંતુ જ્યારે દેશભક્તિ ઓછી હોય ત્યારે આવા પગલાં લેવામાં આવે છે. આવા સમયે, દેશની આર્થિક સ્વતંત્રતા અપ્રસ્તુત છે; એકમાત્ર વિચાર એ છે કે પૈસા કેવી રીતે કમાવવા.

ચિદમ્બરમને કારણે, દેશની આર્થિક સ્વતંત્રતા પાકિસ્તાનના હાથમાં આવી ગઈ છે, પરંતુ પાકિસ્તાનને તેનો સહેજ પણ અફસોસ નહીં થાય કારણ કે તેને કોઈ પરવા નથી કે તે કયો દેશ છે કે કેવા પ્રકારનો દેશ છે.

હવે પૃથ્વીરાજ ચવ્હાણે કહ્યું છે કે ઓપરેશન સિંદૂરના પહેલા જ દિવસે ભારત યુદ્ધ હારી ગયું, એક એવો દાવો જે પાકિસ્તાને હજુ સુધી કર્યો નથી. કલ્પના કરો કે કોંગ્રેસ સત્તા માટે કેવી રીતે દોડી રહી છે, જાણે કે તે પાકિસ્તાનીઓ કરતાં પાકિસ્તાન પ્રત્યે વધુ વફાદાર બની ગઈ છે.

શું વાયુસેના ભાજપની રાજકીય પાંખ છે? તે રાષ્ટ્રીય સુરક્ષાનો મામલો છે, અને તેથી જ કોંગ્રેસ હવે દેશની ગુપ્તતા અને અખંડિતતા અંગે આક્રમક બનતી જોવા મળશે, કારણ કે ભાજપ સામે ભ્રષ્ટાચાર કે ગેરશાસનના કોઈ આરોપ નથી.

મત ચોરીના મુદ્દા પર પણ, તેમનું લક્ષ્ય ભાજપ કરતાં જ્ઞાનેશ કુમાર વધુ છે કારણ કે તે બંધારણીય પદ ધરાવે છે. હાલમાં, અદાણી તેમનું લક્ષ્ય છે કારણ કે અદાણી વિદેશમાં ભારતીય કોર્પોરેશનોને સપ્લાયર છે. સેનાને પણ નિશાન બનાવવામાં આવી છે; આસામમાં, તેઓ બાંગ્લાદેશનું રાષ્ટ્રગીત ગાય છે જેથી જો બાંગ્લાદેશ હુમલો કરવાની યોજના બનાવે છે, તો તેઓ તેમને સાથે લઈ જાય.

જો હાફિઝ સઈદ જેવો કોઈ વ્યક્તિ કોઈની પ્રશંસા કરે છે, તો તે વ્યક્તિ પહેલા પોતાનો બચાવ કરશે, પરંતુ રાહુલ ગાંધી હસ્યા. તમે પૂછી શકો છો કે ભાજપ તેમને જેલમાં કેમ નથી નાખતો?

જવાબ એ છે કે તેઓ આ જ ઇચ્છે છે. જ્યારે કોર્ટે અરવિંદ કેજરીવાલને જેલમાં મોકલ્યા, ત્યારે તેમણે એમ ન કહ્યું કે તેઓ જેલમાં જઈ રહ્યા છે કારણ કે તેમણે દારૂ કૌભાંડ કર્યું છે, પરંતુ તેમણે જનતાને ઉશ્કેરવાનો પ્રયાસ કર્યો. જો તમે કોઈપણ વિકસિત દેશ પર નજર નાખો, તો તમને રાહુલ ગાંધી, અરવિંદ કેજરીવાલ કે પૃથ્વીરાજ ચવ્હાણ જેવા નેતાઓ ક્યારેય નહીં મળે.

તમે યુક્રેનની પરિસ્થિતિ જોઈ હશે, અને ભારત પણ બારદાનના ડબ્બા પર બેઠેલું છે. ઉકેલ એ છે કે જનતા જાગૃત થાય અને આ સત્તા ભૂખ્યા રાક્ષસોને ઓળખે જેમના માટે સત્તા જ બધું છે. કોંગ્રેસ તેના અંતની નજીક છે, હવે ફક્ત ત્રણ રાજ્યોમાં અસ્તિત્વ ધરાવે છે. કેરળ સ્થાનિક સ્વરાજ્યની ચૂંટણીમાં તેનો સારો સંકેત નથી.

કોંગ્રેસ 2026 માં કેરળમાં પુનરાગમન કરતી દેખાય છે, અને ભાજપ ખુશ થશે કારણ કે 2031 ની કેરળની ચૂંટણીમાં, તે કોમ્યુનિસ્ટ પાર્ટી સામે નહીં, પરંતુ કોંગ્રેસ સામે લડશે. એક મૂર્ખ દુશ્મન એક બુદ્ધિશાળી કરતાં સારો છે.

આપણે તેલંગાણા અને કર્ણાટકમાંથી તેમને ઉખેડી નાખવા જોઈએ, પરંતુ આપણે એ પણ સુનિશ્ચિત કરવાની જરૂર છે કે પંજાબ અને રાજસ્થાનના લોકો પૃથ્વીરાજ ચવ્હાણના નિવેદન પર ધ્યાન આપે. આ ફક્ત અડધો ડઝન રાજ્યો છે જે સમયાંતરે કોંગ્રેસને ટેકો આપે છે, જોકે તે અપ્રસ્તુત રહે છે. જો કે, રાજ્ય સ્તરે પણ કોંગ્રેસને ખતમ કરવાની જરૂર છે.

ભાજપ કોંગ્રેસને જીવંત રાખવા અને કોઈપણ રીતે તેનું નંબર બે સ્થાન જાળવી રાખવાનો પ્રયાસ કરશે, કારણ કે સ્થિર વિપક્ષ કોઈપણ શાસક પક્ષ માટે વરદાન છે. જોકે, જનતાએ આ જવાબદારી જાતે લેવી પડશે, કારણ કે કોંગ્રેસનું લક્ષ્ય સ્પષ્ટ છે: તે સત્તા ઇચ્છે છે, ભલે તેના માટે રાષ્ટ્રના જીવનનું બલિદાન આપવું પડે.

✍️પરખ સક્સેના✍️