एक वकील साहब थे,काँग्रेस मे आ गए, काँग्रेस संगठन मे उनको बहुत सारे पद मिले…इँदिरा गाँधी के करीबी हो गए।
इँदिरा गाँधी ने उनको राज्यसभा भेज दिया। दो बार राज्यसभा मे पहुँचे फिर अचानक एक दिन राज्यसभा से इँदिरा जी के कहने पर इस्तीफा दे दिया।
इँदिरा जी ने कहा बेटा तुम जहाज पकड़ो और अब असम पहुँचो। इँदिरा जी से वकील साहब ने पुछा क्या? इँदिरा जी ने वकील साहब कहा तुम असम पहुँचो वह सब पता चल जायेगा, जो एयरपोर्ट पर लेने आयेगा वही बतायेगा।
वकील साहब झोरी झंडी लेकर असम पहुँचे वहा उनको पता चला की उन्हे हाईकोर्ट का जज बनना है। अब काँग्रेसी वकील साहब जज हो गए उसके बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश होकर रिटायर भी हो गए।
अब मजे की बात अभी और सुनिए इससे पहले जान लिजिए की देश मे यह इकलौता केस है जहा रिटायर्ड होने के बाद किसी उच्च न्यायालय के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया हो। तो वकील साहब सुप्रीम कोर्ट के जज भी इँदिरा जी की कृपा से बन गए।
रि-अपाईंटमेंट आफ जजेट नही होता है, सो न इससे पहले कभी हुआ न इसके बाद कभी हुआ, एक मात्र डिक्टेटर केस है। कोई भी जज सर्विस के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट मे जज बनाये जा सकते है और उनकी नियुक्ति कार्यकाल के दौरान ही हो सकती है लेकिन वकील साहब तो महान थे, खास थे। सो कृपा बरस पड़ी।
उनकी महानता का किस्सा नही जानेंगे तो न तो बात पुरी होगी और नही तो इस देश के एक महापुरुष की कहानी अधूरी रहेगी, यह देश गाँधी परिवार का कर्जदार रह जायेगा, आजादी की लड़ाई की भूमिका मे नेहरू गाँधी परिवार के साथ न्याय नही हो पायेगा। तो इसलिए वह किस्सा जानना निहायत ही जरूरी है।
तो किस्सा कुछ यु है की एक काँग्रेस के नेता थे उनका मामला सुप्रीम कोर्ट मे था। नेता जी का नाम जगन्नाथ मिश्रा था और मामला भ्रष्टाचार का था।यह काँग्रेस के मुख्यमंत्री ललित नारायण मिश्र के भाई थे। जो बिहार मे काँग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री थे।
उनके मामले को लेकर वकील साहब जज बनकर फैसला दिये और सुबह उठकर चाय पी और सुप्रीम कोर्ट से इस्थिपा दे दिया।फैसला बताने की जरूरत नही पड़नी चाहिए। इँदिरा जी ने कहा इधर आ जा गुड्ड, वकील साहब ने कहा जी मैडम। अगली सुबह हुई फिर वकील साहब राज्यसभा चले गये।
आप सोचिए फैसले दिलाने के लिए जजो की नियुक्ति होती थी आज उसी इँदिरा गाँधी का पोता मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन पर ज्ञान बाँटते हुए इमान की बात करके जब नियुक्ति पर अपने राजनैतिक हिस्सेदारी की बात करके सत्ता के बराबर हिस्सेदारी की बात कर रहा है। तो कहावत याद आ रही है।
“बाप मरे अंधेरे मे बेटा का नाम पावर हाउस”
अब वकील साहब का नाम नही जानेंगे तो काम नही चलेगा बात कांग्रेस नेता बहरूल इस्लाम की हो रही है और अपने मुख्यमंत्री को बचाने के लिए इँदिरा गाँधी आजादी की यह लड़ाई लड़ रही थी और फिर शहीद भी हो गई तो इस आजादी के संघर्ष की इस कहानी को भी इतिहास याद रखे।
‘मैं खून से नहाता हूं या नकद देखे बिना मैं दांत नहीं मांजता।’ जगन्नाथ मिश्रा






