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આ ફોટામાં બધા ચહેરા ઓળખો. ઉત્તર પ્રદેશના ભૂતપૂર્વ મુખ્યમંત્રી અખિલેશ યાદવ, પ્રિયંકા વાડ્રા, શિવસેના યુબીટીના અરવિંદ સામંત, અસદુદ્દીન ઓવૈસી, શરદ પવારની પુત્રી સુપ્રિયા સુલે અને હિન્દુ ગઠબંધનના 112 સાંસદો, જેમાં જસ્ટિસ જી.આર. સ્વામીનાથનનો સમાવેશ થાય છે, તેમણે મદ્રાસ હાઈકોર્ટના મદુરાઈ બેન્ચના ન્યાયાધીશ જસ્ટિસ જી.આર. સ્વામીનાથનને પદ પરથી હટાવવા માટે મહાભિયોગની નોટિસ ફટકારી હતી. જાણો કેમ? કારણ કે જસ્ટિસ જી.આર. સ્વામીનાથને હિન્દુઓના સદીઓ જૂના પૂજાના અધિકારને જાળવી રાખવાનો આદેશ આપ્યો હતો.

પ્રિયંકા વાડ્રા, રાહુલ ગાંધી, અસદુદ્દીન ઓવૈસી, સુપ્રિયા સુલે, અખિલેશ યાદવ, ઇકરા હસન અને ઇમરાન મસૂદ, જે મોદીને તોડી પાડવા માંગે છે, તેઓ હિન્દુઓનો પૂજાનો અધિકાર છીનવી લેવા માંગે છે.

આમાં સૌથી આશ્ચર્યજનક નામ ઉદ્ધવ ઠાકરેનું છે, કારણ કે તેમની પાર્ટીના બધા સાંસદો હિન્દુઓનો પૂજાનો અધિકાર છીનવી લેવા માંગે છે, અને તેમણે પણ તેના પર સહી કરી છે.

મદુરાઈ નજીક તિરુપરંકુન્દ્રમ ટેકરી પર સ્થિત અરુલમિઘુ સુબ્રમણ્યમ સ્વામી મંદિરમાં પરંપરાગત દીપથૂન (સ્તંભ). આ દીવા પ્રગટાવવાના આદેશ સાથે સંબંધિત છે.

દીપમ ઉત્સવ અહીં થતો હતો, એટલે કે થાંભલા પર પરંપરાગત દીવો પ્રગટાવવામાં આવતો હતો.

પછી ટેકરીની સામે એક દરગાહ બનાવવામાં આવી, અને દરગાહ મોટી થઈ. જેમ બધા જાણે છે, તમિલનાડુમાં હંમેશા મુસ્લિમ-મૈત્રીપૂર્ણ સરકારો રહી છે. તે પછી, દરગાહના અધિકારીઓએ થાંભલા પર દીવા પ્રગટાવવાનો વાંધો ઉઠાવ્યો, કહ્યું કે તે તેમની લાગણીઓને ઠેસ પહોંચાડે છે.

હવે, ભારતમાં, ભારતના લોકો હિન્દુ-મુસ્લિમ ભાઈચારાના નારા લગાવે છે, અને આ લોકોએ દરગાહના અધિકારીઓને ક્યારેય કહ્યું નહીં, “ભાઈ, જો તમારી દરગાહની સામેના થાંભલા પર દીવો પ્રગટાવવામાં આવે, ભલે તે થોડે દૂર હોય, તો તે તમારી લાગણીઓને કેવી રીતે ઠેસ પહોંચાડશે? તે ગરીબ હિન્દુઓ ગરીબ હિન્દુઓ છે. તેમને દીવો પ્રગટાવવા દો, તેમને પૂજા કરવાનો અધિકાર આપો.”

હિન્દુઓને ગંગા-જમુના સંસ્કૃતિનો ઉપદેશ આપનારા તમામ પક્ષો હવે કહી રહ્યા છે કે હિન્દુઓએ મુસ્લિમોની લાગણીઓને ઠેસ ન પહોંચે તે માટે દીવા ન પ્રગટાવવા જોઈએ.

જસ્ટિસ સ્વામિનાથને 1 ડિસેમ્બરના રોજ પોતાના આદેશમાં કહ્યું હતું કે દીવા પ્રગટાવવાની જવાબદારી મંદિર પ્રશાસનની છે. દીવા દાંડી દરગાહની નજીક આવેલી છે, અને કોર્ટે સ્પષ્ટ કર્યું હતું કે તે દરગાહ કે મુસ્લિમ સમુદાયના અધિકારોનું ઉલ્લંઘન કરશે નહીં.

હવે, તમિલનાડુ સરકારે આ આદેશ સામે સુપ્રીમ કોર્ટમાં અપીલ કરી છે.

ત્યાં તેના વકીલ કોંગ્રેસના નેતા અભિષેક મનુ સિંઘવી છે.

અને સંપર્ક વકીલને પણ ફાયદો થયો છે; સુપ્રીમ કોર્ટમાં આગામી સુનાવણી સુધી આ આદેશ પર રોક લગાવવામાં આવી છે.

પરંતુ INDI ગઠબંધન આનાથી ખુશ નથી. INDI ગઠબંધન ઇચ્છે છે કે ભારતીય ન્યાયતંત્ર સતત હિન્દુ વિરોધી રહે, અને હિન્દુઓને ટેકો આપનારા કોઈપણ ન્યાયાધીશને અન્ય ન્યાયાધીશોમાં ભય પેદા કરવા માટે સજા થવી જોઈએ.

એટલા માટે INDI ગઠબંધનના નેતાઓ મદ્રાસ હાઇકોર્ટના ન્યાયાધીશ સ્વામિનાથનને હટાવવા માટે એકઠા થયા છે. રસપ્રદ વાત એ છે કે, અસદુદ્દીન ઓવૈસી સહિત અનેક મુસ્લિમ પક્ષો, જેઓ INDI ગઠબંધનનો ભાગ નથી, તેમણે પણ દળોમાં જોડાયા છે.

એ જ કોંગ્રેસ, જે હંમેશા કહેતી આવી છે કે ઓવૈસી ભાજપની બી-ટીમ છે, તે જ હિન્દુઓનો પૂજા કરવાનો અધિકાર છીનવી લેવા માટે ઓવૈસી અને બદરુદ્દીન અજમલની મદદ પણ લઈ રહી છે.

છેલ્લે, હું મારી વાત ફરી કહીશ: જ્યારે આ લોકો હિન્દુઓ પાસેથી પૂજા કરવાનો મૂળભૂત અધિકાર પણ છીનવી લેવાનો પ્રયાસ કરી રહ્યા છે, ત્યારે તે હિન્દુઓ કોણ છે જે સમાજવાદી પાર્ટી, કોંગ્રેસ અથવા INDI ગઠબંધનને મત આપે છે?

જિતેન્દ્ર સિંહ

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

पिछले साल मुझे गर्मियों की छुट्टियों के समय कुछ बेहद पुरानी किताबें पढ़ने का समय मिला। उसी में एक पिछले सदी के महान दार्शनिक जे कृष्णमूर्ति की बुक थी।

बताते चलें जे कृष्णमूर्ति पिछले सदी के एक महान अज्ञेयवादी दार्शनिक थे, अज्ञेयवादी बहुत सारे विषय पर निश्चित निष्कर्ष नहीं निकालते क्योंकि उन्हें निश्चित रूप से सिद्ध करना कठिन होता होता है, ईश्वर भी उनके लिए एक ऐसा ही विषय है।

खैर मूल विषय पर आते हैं तो उनके बुक में एक चैप्टर था – (नास्तिक और विक्षिप्त मनोरोगी में अंतर)

कृष्णमूर्ति ने अपनी किताब में बताया कि एक बार दक्षिण भारत के कुछ लोग जो एक राजनीतिक मूवमेंट से जुड़े हुए थे संभवतः वह पेरियारवादियों की ओर ही इशारा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि एक बार उसी पॉलीटिकल मूवमेंट से जुड़े एक व्यक्ति उनके पास आया और जे कृष्णमूर्ति से पूछा कि आप ईश्वर पर  विश्वास करते हैं तो जे कृष्णमूर्ति ने कहा नहीं।

जे कृष्णमूर्ति का जवाब सुनते ही वह व्यक्ति उग्र होकर देवी देवताओं को गाली देने लगा।

अब जे कृष्णमूर्ति ने उस व्यक्ति से कहा कि वास्तव में आप नास्तिक नहीं एक  विक्षिप्त मनोरोगी हैं, क्योंकि अगर आप ईश्वर को मान ही नहीं रहे हैं, आप राम कृष्ण के अस्तित्व को मानते ही नहीं हैं तो आप राम और कृष्ण से नफरत कैसे कर सकते हैं।

मतलब कि क्या कोई व्यक्ति काल्पनिक चरित्रों से नफरत कर सकता है।

फिर इसके बाद जे कृष्णमूर्ति ने कहा कि एक तरफ तो आपको धर्म ग्रंथों पर विश्वास ही नहीं है… लेकिन अपनी मन की भड़ास निकालने के लिए उन्ही धर्म ग्रंथों का संदर्भ विशेष में प्रयोग भी करते हैं!

फिर इतना समझने के बाद मुझे वास्तव में नास्तिक और मनोरोगी के बीच में अंतर समझ में आने लगा कि कौन व्यक्ति वास्तव में नास्तिक है और कौन बस हिंदू विरोधी कुंठा का शिकार है!

संपूर्ण बातों का यह सार था कि पेरियार जैसे लोग वास्तव में नास्तिक नहीं –  यह विक्षिप्त मनोरोगी हैं!… क्योंकि अगर राम, कृष्ण का अस्तित्व ही नहीं मानते तो राम और कृष्ण से इन्हें नफरत कैसे हो सकती है!… क्योंकि काल्पनिक चरित्र से किसी को नफरत तो हो ही नहीं सकती!

किताब में आगे जे कृष्णमूर्ति ने यह भी कहा कि आप लोग जब धर्म ग्रंथों पर विश्वास ही नहीं करते तो उन्हें धर्म ग्रंथों के कुछ प्रसंगों का प्रयोग अपने मन की भड़ास निकालने के लिए कैसे कर सकते हैं!

पेरियार ने जो रामायण के नाम पर एक किताब लिखी थी उसमें भी उसने वही किया था। एक तरफ वह कहता था कि हिंदू धर्म ग्रंथ पाखंड है, मनगढ़ंत है लेकिन अपने मन की भड़ास निकालने के लिए उनके संदर्भ विशेष के प्रसंगों का प्रयोग जरूर किया!

कुल मिलाकर जे कृष्णमूर्ति की किताब पढ़ने के बाद मुझे समझ में आया कि वास्तव में हम जिन्हें कई बार नास्तिक समझते हैं वह वास्तव में मनोरोगी लोगों का समूह है!… जो अपनी कुंठा को शांत करने के लिए बस अपने को नास्तिक दिखाता है! लेकिन वह एक मनोरोगी है जिनका स्थान केवल पागलखाना है।

क्योंकि कृष्णमूर्ति के तर्क अकाट्य थे कि कोई व्यक्ति कभी काल्पनिक चरित्रों से नफरत कर ही नहीं सकता! अगर नफरत कर रहा है तो वह कोई नास्तिक नहीं बल्कि कुंठित और मनोरोगी है!

फोटो विक्षिप्त मनोरोगी पेरियार की जिसमें वह भगवान गणेश की प्रतिमा तोड़ रहा है…

वैसे इस धरती पर कई मनोरोगी आए और चले गए , अभी भी मौजूद है और आगे भी आते रहेंगे लेकिन इनके पागलपन से करोड़ आस्थावान समाज की आस्था क्षणिक भी विचलित नहीं होती है।

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#We_support_hindutava_unity

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कमलेश कुमारी याद है आपको…

जब संसद पर हमला याद होगा तो आतंकवादियों की पहली गोली खाने वाली भी याद होनी चाहिए…

हमारे इतिहास में ऐसे अनगिनत बलिदान दर्ज हैं, जिन्हें हम याद करते हैं समय समय पर ,क्योंकि ये प्रचार नहीं, राष्ट्र की चेतना को जिंदा रखना है।

साल 2001 तारीख 13 दिसंबर
दिल्ली की सर्द धुंध में संसद भवन कामकाज में व्यस्त था। भीतर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी सहित देश के शीर्ष नेता मौजूद थे। बाहर गेट पर सुरक्षा संभाल रही थीं CRPF की ब्रावो कंपनी की बहादुर सिपाही कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी

गेट नंबर 1 पर तैनात कमलेश कुमारी ने अचानक एक सफेद एंबैसडर कार को तेज़ी से सुरक्षा घेरा तोड़ते देखा नंबर था DL 3CJ 1527
उनकी चौकन्नी निगाहें तुरंत समझ गईं कि यह सामान्य हरकत नहीं है। कमलेश के हाथ में हथियार नहीं था सिर्फ़ वायरलेस था।
पर वो भांप चुकी थी खतरे को कि ये वाहन संसद के अंदर नहीं घुसने नही देना है।

उन्होंने दौड़कर गेट बंद कर दिया, बाकी शोर मचा कर और वायरलेस पर जवानों को चेताया। बस कुछ सेकेंड और सबको अलर्ट कर दिया।
गेट बंद होने की अपरातफरी में गाड़ी जाकर टकरा गई ,क्रुद्ध आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की

ग्यारह गोलियाँ ,कमलेश को लगी।
पर उन्होंने गिरने से पहले वह कर दिखाया जिसने इतिहास में वो होने से रोक दिया जो भारत के भविष्य को बदल सकता था।

उनकी सतर्कता ने आतंकियों का प्लान ध्वस्त कर दिया। एक आत्मघाती हमलावर संसद के भीतर विस्फोट करने वाला था अगर वह अंदर पहुँच जाता, तो भारत का आज शायद कुछ और होता।

1994 में CRPF जॉइन करने वाली कमलेश कुमारी ने ड्यूटी को अपने परिवार पति अवधेश कुमार और बेटियों ज्योति व श्वेता से ऊपर रखा।
उनके बलिदान के सम्मान में 2002 में उन्हें अशोक चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया। वो यह सम्मान पाने वाली वह भारत की पहली महिला कॉन्स्टेबल बनीं।

लेकिन उनकी मौत के बाद परिवार ने जाने कितने संघर्ष झेले। जब संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की फाँसी में राजनीतिक बहसें आड़े आईं, परिवार ने क्षोभ में अशोक चक्र लौटाने की घोषणा की।
उन्होंने कहा“जिस देश के लिए कमलेश ने जान दी, अगर वही उसके हत्यारे को सज़ा देने में देर करे, तो इस सम्मान को रख कर हम क्या करेंगे ?”

2013 में अफ़ज़ल गुरु के फाँसी पाए जाने के बाद परिवार ने सम्मान दोबारा स्वीकार किया।

कमलेश कुमारी सिर्फ़ एक कॉन्स्टेबल नहीं थीं ,वह भारत की वह पहली दीवार थीं, जिस पर आतंकवाद की पहली चोट टकराकर टूट गई। उन्होंने साबित किया
सबसे बड़ा हथियार बंदूक नहीं, साहस होता है। यही कुछ 26/11 में तुका राम ओंबले ने किया ।बस लाठी के दम पर उन्होने अजमल कसाब को थब तक पकड़े रहा जब तक उसकी मैगजीन खाली नही हो गई।एक जीवित आतंकवादी जिसने षड़यंत्र के वो परते खोली,जो अभी तक खुलती ही जा रही है।

यह सारी कहानियां प्रचार नहीं  हैं
यह वह सच्चाई है जो याद दिलाती है कि देश की सुरक्षा सिर्फ़ सीमाओं पर नहीं, दिलों में जली उस एक लौ से भी चलती है जिसके नाम है—कमलेश कुमारी, तुकाराम ओंबले,जाने वो कितने सिपाही जो हर पल हल क्षण बिना किसी स्वार्थ के लगे हुए हैं देश को बचाने में,जान देने तक।

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क्या आप जानते हैं नोटबंदी पी चिदंबरम और भारत तोड़ो गैंग का वो नेटवर्क जिसे आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने वर्तमान सरकार की सहायता से तोड़ा…

यही वजह रही की एक पत्रकार के सवाल का जवाब देने में असमर्थ पी चिदंबरम ने शो आधा रद्द कर दिया और बीच में से उठकर चले गए।

आपकी जानकारी के लिए प्रस्तुत है इस ऐतिहासिक साक्षात्कार के अंश जिसकी वजह से देश की करेंसी बदलनी पड़ी, और ऐन मौके पर भारत को सोमालिया बनने से बचाया जा सका!

रिपोर्टर: क्या आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने आपसे शिकायत की है कि आपने भारतीय रुपये की छपाई की मशीन पाकिस्तान को बेच दी है?

चिदंबरम यह सच है। जैसे ही मशीन का जीवन समाप्त हुआ हमने उस पर बोली लगाने के लिए निविदा दी। पाकिस्तानी कंपनी करण बोली लगाने वाली थी। हमने बेच दिया।

रिपोर्टर: क्या यह सही है कि आपने यह जानते हुए भी कि पाकिस्तान में हमारे भारतीय रुपये के नोट जाली हो रहे हैं, मशीन पाकिस्तान को बेच दी?

चिदंबरम मैं अनुमान के आधार पर प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकता। पाकिस्तान एक अच्छा देश है।

रिपोर्टर रिजर्व बैंक ने जहां कहा है कि 500, 1000 रुपये के 99 फीसदी नोट बैंक को वापस कर दिए गए हैं, वहीं आपने कहा है कि अगर कांग्रेस दोबारा सत्ता में आई तो हम पुराने रुपये के नोटों को वैध कर देंगे. तो क्या यह सच है कि आपने पाकिस्तान में 5 लाख करोड़ रुपये के 500 और रु. 1000 के नोट जमा किए हुए हैं?

चिदंबरम कांग्रेस को सत्ता में आने दो… वह उठा और गुस्से में चला गया। शो आधा हो चुका था।

तमिलनाडु से रघुराम राजन का कबूलनामा:

“मुद्रा संकट के दौरान कुल 15 लाख करोड़ 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सरकार ने घोषणा की कि वे सभी वापस आ गए हैं। लेकिन वास्तव में केवल 10 लाख करोड़ ही वापस आए।

हमने झूठ बोलने का कारण ढूंढा तो पता चला कि बाकी 5 लाख करोड़ का मालिक कौन है और उनका अगला कदम क्या है, इस पर नज़र रखना है।

जब यह तथ्य सामने आया कि केंद्र सरकार और मेरे बीच संघर्ष की प्रवृत्ति ने एक आदर्श नाटक का कारण बना और मैंने रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद से इस्तीफा दे दिया।

मुझे पता चला है कि सारा पैसा कहां है। अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वे सब कुछ वैध नोट में बदल देंगे।

इतना ही नहीं पाकिस्तानी उग्रवादियों से पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम। को 10 करोड़ रुपये का तोहफा मिला है।

इस मशीन से उन्होंने पाकिस्तान से भारत में करीब 8 लाख करोड़ रुपए की भारतीय मुद्रा की तस्करी करने की योजना बनाई थी।

मुझे गोपनीय जानकारी मिली और मैं इसे प्रधानमंत्री मोदी के पास ले गया और उन्हें बताया।

इसके तुरंत बाद… उन्होंने 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया। वह इतना तेज हैं, कि कोई और सोच भी नहीं सकता!

अगर वह 8 लाख करोड़ रुपये देश में घुस गए होते तो हमारा भारत सोमालिया बन गया होता!?

देश के बाहर कुल 13 लाख करोड़ रुपए की जाली मुद्रा तैयार है। अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो पूरा हिस्सा देश में वापस आ जाएगा। देश गिर जाएगा!?

ये है सुप्रीम कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई के दौरान आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का भारत तोड़ो गैंग के खिलाफ किया गया खुलासा!