सांपों को दूध पिलाने का परिणाम है डसे😭 जाना ।
आज मिलिए इस शख्स से!
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इनका नाम है डॉ नाकामुरा तेत्सु!
जापानी डॉक्टर….!
ये जापान से पाकिस्तान 1984 में आये थे कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए। पाकिस्तान के साथ-साथ ये अफगानिस्तान में भी इलाज करते थे। इनकी एक संस्था चलती थी जिसका नाम ‘पेशावर-काई’ था।
सन 2000 में अफगानिस्तान में भयंकर सूखा और अकाल पड़ा। जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि इस अकाल से 40 लाख लोग प्रभावित होंगे और करीब 10 लाख लोग केवल भूख प्यास से मर जायेंगे। पानी की अनुपलब्धता के चलते लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हुए जिसके चलते वहाँ डिसेंट्री और डायरिया तेजी से फैलने लगा। हजारों बच्चे डायरिया के चलते प्राण त्याग रहे थे।
ऐसे में नाकामुरा ने सोचा कि इनका इलाज तो हम बाद में भी कर लेंगे लेकिन ये पहले सर्वाइव तो कर ले.. जिंदा रहेंगे तभी तो इलाज कर पाएंगे.. और जिंदा रहने के लिए पानी सबसे पहले जरूरी है। और जब तक इसका कोई परमानेंट हल नहीं निकल जाता तब तक कुछ नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि, “दवाइयां भूखे और प्यासों का इलाज नहीं कर सकती.. अतः मैं दवाइयों के संकीर्ण फील्ड से आगे बढ़ कर कुछ करना चाहता हूँ जिससे ये लोग भूखे प्यासे न रहे। कुछ ऐसा करूँ जिससे इन्हें रोटी और पानी मिल सके।”
इसके बाद इन्होंने पूर्वी अफगानिस्तान में नहर प्रॉजेक्ट की नींव रखी.. कुनार नदी से सूखे ग्रस्त इलाके में पानी पहुंचाना.. 25 किलोमीटर का नहर..!
डॉ नाकामुरा के पास कोई सिविल इंजीनियर नहीं था या पूरे अफगानिस्तान में ऐसा कोई कैपेबल इंजीनियर नहीं था जो इस प्रोजेक्ट को कर सकते थे। डॉ नाकामुरा इंजीनियरिंग फील्ड से नहीं थे इसके बाद भी वो इस फील्ड में कूदे.. वो बार-बार जापान जाते और स्वयं ही स्टडी करते.. वहाँ के इंजीनियर्स से मिलते उनसे सलाह लेते.. प्राचीन जापानी इरीगेशन टेक्नोलॉजी का अध्ययन करते और उसको अफगानिस्तान में आ के इम्प्लीमेंट करते।
इस नहर के बदौलत 16,000 हेक्टेयर बंजर बन चुकी भूमि पुनर्जीवित हो उठी.. इससे 6 लाख लोगों के लिए फूड सिक्योरिटी प्रदान हुआ।
बीस वर्ष इन्होंने अफगानिस्तान के बेहतरी के लिए दिया.. भूख प्यास से बचाने के लिए दिया.. बंजर भूमि को हरियाली से भर दिया.. पानी से भर दिया… ! लोग इन्हें प्यार से ‘काका मुराद’ कहते थे।
लेकिन… लेकिन.. लेकिन… इन्हें बदले में क्या मिला ?
वही अफगानिस्तान की गोली!
दिसंबर 2019 में ये जब नहर के ही एक साइट में निरीक्षण के लिए जा रहे थे तो रास्ते में में ही तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान के आतंकियों ने इन्हें गोलियों से भून दिया.. जिसमें इसके साथ इनका बॉडीगार्ड और ड्राइवर भी मारा गया।
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इससे क्या सीख मिलती है… ये आप सब स्वयं ही विचार करें?
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