Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

@highlight क्या आपने अमीर अली का नाम सुना है, राजस्थान के इतिहास में यह वह व्यक्ति है जिसके धोखे के कारण महिलाएं जोहर नहीं कर पाई और उन्हें तलवारो से काटना पड़ा, तो चलिए आज जैसलमेर के राजा लूणकरण को याद करते है, जो मित्रता के नाम पर राजस्थान के सबसे बड़े धोखे का शिकार हुए।

अमीर अली कंधार का नवाब था, तथा उसकी उसके भाई के साथ लड़ाई हो गयी और उसके भाई ने उसे हरा दिया, अपने भाई से हारने के बाद आमिर अली जैसलमेर के राजा लूणकरण के पास शरण लेता है, और चूँकि शरणागत की रक्षा करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, महाराज लूणकरण अमीर अली को शरण दे देते है, व दोनों अपनी मित्रता को दर्शाने के लिए पगड़िया बदलते है। लूणकरण अमीर अली को जैसलमेर में जागीर देकर उसके रहने का प्रबंध करते है,

दिन बीतते है, राजा का अमीर अली पर विश्वास बढ़ता जाता है, और राजा अमीर अली पर बहुत ज्यादा विश्वास करने लगते है, अमीर अली एक बार राजा से कहता है की, उसकी बेगमें रानीवास की महिलाओ से मिलना चाहती है, पर वह नहीं चाहता की कोई और उसकी महिलाओं को देखे, इस पर राजा लूणकरण कहते है की कुछ दिनों में, राजमहल के अधिकांश व्यक्ति एक विवाह समारोह में सम्मिलित होने जायेगे, तब किले में कोई पुरुष नहीं होगा, उस दिन उनकी बेगमें, उनकी रानियों से मिल सकती है।

इस पर अमीर अली हामी भर देता है, कुछ दिनों बाद वह दिन आता है जब महल के अधिकांश पुरुष, राजकुमार मालदेव भाटी के साथ विवाह समारोह में भाग लेने चले जाते है, राजा अमीर अली को संदेसा भिजवाते है, की उनकी बेगमें किले में आ सकती है, पर अमीर अली के मनसूबे कुछ और ही थे, वह जैसलमेर पर कब्ज़ा करना चाहता था और वो उसके लिए एक अच्छे मोके का इन्तजार कर रहा था, और उसे वह अवसर मिल गया, वह महिलाओं की पालकियों में अपने सैनिकों को बिठा देता है, और उनमे हथियार रखवा देता है, और प्रत्येक पालकी को उठाने वालो की जगह भी सैनिक लगा देता है।

जब अमिर अली की पालकिया किले के प्रथम द्वार को पार कर रही होती है तो, वहा उपस्थित एक सैनिक को उन पर शक हो जाता है, और वह पालकियों की तलाशी लेने को कहता है, अमीर अली उन्हें समझाता है पर वह सैनिक नहीं मानते, जब अमीर अली को लग जाता की है यदि पालकियों की तलाशी हुई तो वे पकडे जायेंगे, और किले के बाकी दरवाजे बंद हो जाएंगे तो वह वही से अपने सिपाहियों को हमला कर देने का आदेश देता है, अचानक हुए इस हमले से सिपाही भी कुछ समझ नहीं पाते है, व जैसे तैसे किले के अंदर ख़बर पहुँचती है की अमीर अली ने विश्वास घात कर दिया है, और किले पर हमला हो चूका है, पर किले में उस वक्त बहुत कम ही पुरुष थे,
इसीलिए हमेशा की तरह, जब सिपाही कम और हार निश्चित थी तो साका किया गया, पर एक समस्या सम्मुख आ खड़ी हुई, साके में सबसे पहले जौहर किया जाता है, जिसमे महिलाये अग्नि स्नान कर लेती है, जोहर पुरे विधि विधान द्वारा किया जाता है, पर अब जौहर करने का समय नहीं बचा था, दुश्मन किसी भी वक्त किले में प्रवेश कर सकते थे, तब महिलाएं कहती है की उन्हें तलवारो से काट दिया जाए, इस पर महिलाओं को तलवार से काट दिया जाता है और इस युद्ध में महिलाएं अग्नि स्नान नहीं कर पाती इसलिए इस युद्ध में जौहर नहीं हो पाता, वरना इसमें धारा स्नान होता है, चूँकि महिलाये जोहर नहीं कर पायी थी, और सिर्फ पुरुषो ने केसरिया किया था इसलिए इस साके को जैसलमेर का अर्धसाका कहा जाता है।

अमीर अली किले पर कब्ज़ा कर लेता है, पर जब यह खबर राजकुमार मालदेव भाटी तक पहुँचती है तो मालदेव भाटी अपनी सेना लेकर आते है व अमीर अली को मारकर किले पर पुनः कब्ज़ा कर लेते है,

यह घटना समस्त भारतवासीयों से छुपाने के कृत्य किए गये, जिससे एक समुदाय को किसी भी कीमत पर धोखेबाज न समझने पाए, ऐसे कुत्सित प्रयास भारत भूमि पर सदैव पोषित इतिहासकारों द्वारा आज तक जारी है, जो कौम इतिहास से सबक नही सीखती वह सिर्फ मूर्ख ही नहीं, कुल द्रोही है, धर्मद्रोही समुदाय की कठपुतली है मात्र,

इसके बाद भी अगर कोई हिंदू  एकता वाले रोग से संक्रमित है या सेकुलर  का सपोर्टर है तो उसे अपना  🧬 परीक्षण करवाना चाहिए।

Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family

अभी राजनाथ सिंह जी ने जब कहा कि जवाहरलाल नेहरू सरकारी पैसे से बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाना चाहते थे

तब कांग्रेसी कुत्ते बिलबिला उठे

आप सभी लोगों से अपील है कि आप लोग सरदार पटेल जी की बेटी मणिबेन की लिखी किताब इनसाइड स्टोरी ऑफ सरदार पटेल द डायरी ऑफ  मणिबेन  पटेल पढ़िए
इसमें कई दस्तावेजी सबूत के साथ यह बताया गया है कि नेहरू हिंदू धर्म और हिंदुओं से कितना नफरत करते थे
मणिबेन  ने अपनी किताब इनसाइड स्टोरी ऑफ़ सरदार पटेल द डायरी ऑफ  मनीबेन पटेल  में लिखा है की जब सरदार पटेल सोमनाथ मंदिर के निर्माण पर अड़ गए जो नेहरू नहीं चाहते थे तब नेहरू  ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण सरकारी पैसे से नहीं होना चाहिए
तब सरदार पटेल जी ने पत्र लिखा है कि आप चिंता मत करिए सोमनाथ ट्रस्ट बनेगा और वह ट्रस्ट लोगों से पैसे इकट्ठा करेगा
और उस जमाने में सोमनाथ ट्रस्ट में सिर्फ एक महीने में 45 लाख रुपए इकट्ठे हो गए थे
मणिबेन पटेल की इसी किताब के पेज नंबर 24 पर दस्तावेजी  सबूत के साथ लिखा है उसके बाद नेहरू ने सरदार पटेल से कहा कि बाबरी मस्जिद का भी भव्य निर्माण होना चाहिए और उसके लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया जाए
तो सरदार पटेल अड़  गए की बाबरी मस्जिद का दोबारा निर्माण नहीं होगा किसी कीमत पर नहीं होगा
फिर जब बाबरी मस्जिद के अंदर मूर्ति देखी गई तब  नेहरू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत को पत्र लिखा की अभिलंब मूर्तियां हटा दिया जाए
फिर जब गोविंद बल्लभ पंत जी ने  उस वक्त के फैजाबाद के कलेक्टर नैयर साहब को मूर्तियां हटाने के लिए पत्र लिखा  तब नैयर साहब ने जवाब दिया की मूर्तियां हटाने से दंगा भड़केगा मुझे लिखित में चाहिए कि उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा क्या नेहरू लेंगे या पंत जी आप लेंगे ? मूर्तियां नहीं हटेंगे
फिर जवाहरलाल नेहरू ने सरदार पटेल को पत्र लिखा की अयोध्या के डीएम ने मूर्तियां नहीं हटाई है क्योंकि गृह विभाग आपके पास है तो डीएम को बर्खास्त करके उनको गिरफ्तार करिए
फिर सरदार पटेल ने जवाब दिया की मूर्तियां नहीं हट सकती क्योंकि उससे दंगे  भड़केंगे
सोचिए नेहरू हिंदुओं से और हिंदू धर्म से कितना नफरत करते थे वैसे भी नेहरू ने कई बार कहा है कि मैं एक्सीडेंटली हिंदू हूं…

Posted in PM Narendra Modi

नरेंद्र मोदी , जयललिता और हत्या के षडयंत्र का खुलासा :

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री लोकप्रिय नेत्री जयललिता जी की कल 5 दिसंबर को पुण्यतिथि थी । आपकी जानकारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जयललिता के बीच परस्पर आदर का रिश्ता था । आज उसके पीछे के तथ्य को जानिए ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे । उस समय गुजरात के गृह विभाग में एक स्पेशल जासूसी टीम बनायी गयी थी , जिसमे गुजरात के सबसे काबिल पुलिस ऑफिसर शामिल थे । इस टीम का मुख्य उद्देश्य था मोदी की जान के खिलाफ देश विदेश में हो रहे किसी भी प्रकार के षड्यंत्र को समय रहते नेस्तनाबूद कर देना । यह टीम अति आधुनिक उपकरणो से लेस थी । इस टीम को ट्रेनिंग भी विश्व की आलतारीन ख़ुफ़िया एजेंसी जैसे मोसाद , सी आई ए आदि समय समय पे दिया करती थीं ।

इस टीम ने उस समय एक वौइस् कॉल पकड़ा जिसमे भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ धीमा जहर दे कर मार डालने की साजिश रची जा रही थी । पहले लगा शायद नरेंद्र मोदी के खिलाफ षडयंत्र हो । लेकिन जो सच निकल कर सामने आया उसने सबको हैरान कर दिया । असल में जिस मुख्यमंत्री के खिलाफ मारने का षडयंत्र हो रहा था वो थी जयललिता और तथाकथित षडयंत्रकर्ता के तौर पर शामिल थी उनकी सबसे विश्वस्त शशिकला ।

इस बात को तुरंत मोदी को बताया गया । मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर पूरे मामले को समझने के बाद सीधे जयललिता को फोन पर सूचना दी । जयललिता को मामले की सचाई तक पहुँचने के लिए रणनीति भी समझायी । जयललिता के लिए ये बहुत भारी झटका था।

जयललिता स्वयं बहुत चतुर थी । उन्होंने जब मामले की तस्दीक अपने स्तर पर करवाई तो स्पष्ट हो गया की गुजरात के मुख्यमंत्री की सूचना सटीक थी । इस मामले का खुलासा खुलासा होने पर शशिकला जो जयललिता के साथ उनके घर में रहती थी, भाग गयी । उसे बंगलूर से पकड़ा गया  । फिर कतिपय कारणों के चलते जयललिता ने उसे माफ़ कर दिया और उसे दुबारा अपने घर में ले लाइ । लेकिन उसके बाद शशिकला को नियंत्रित कर लिया गया ।

इसके बाद जयललिता और मोदी के सम्बन्ध बेहद मजबूत हो गए । जयललिता ने इस वाकये के बाद ता उम्र  मोदी को बेहद सम्मान दिया । मोदी ने भी उन्हें हमेशा विशिषट् राजनेता माना । जयललिता जी की पुण्यतिथि पर कल यह घटना याद आई थी जिसे आज आपके साथ शेयर कर रहा हूं

जयललिता की पुनीत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि ।

सादर

सुधांशु

#नरेंद्र_मोदी #जयललिता #षडयंत्र #शशिकला

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

ઓડિશામાંથી ૧૭મી સદીમાં લખાયેલ ખજૂરના પાન પર  લખાયેલ હસ્તપ્રત કોણાર્ક સૂર્ય મંદિરની સંપૂર્ણ રચનાની એક દુર્લભ ઝલક આપે છે.

૧૬૧૦માં લખાયેલ એક દુર્લભ ખજૂરના પાન પર  લખાયેલ હસ્તપ્રત, કોણાર્ક સૂર્ય મંદિરનું એકમાત્ર સંપૂર્ણ ચિત્ર છે. ખુર્દા રાજવંશના રાજા પુરુષોત્તમ દેવ દ્વારા તૈયાર કરાયેલ, જૂના ઓડિયામાં કરણી લિપિમાં લખાયેલ ૨૩ પાંદડાઓનો દસ્તાવેજ, મંદિરના વિગતવાર વર્ણન અને ચિત્રો ધરાવે છે.

આ હસ્તપ્રત ૧૭મી સદીની શરૂઆતમાં મંદિરની ભવ્યતાને કેદ કરે છે, જેમાં અરુણા સ્તંભનો પણ સમાવેશ થાય છે, જે એક સમયે મંદિરના કેન્દ્રમાં રહેતો સ્તંભ હતો. આ સ્તંભ પાછળથી ખંડેરમાંથી મળી આવ્યો હતો અને હવે તે પુરીના જગન્નાથ મંદિરમાં છે.

ખજૂરના પાનથી લખાયેલ દસ્તાવેજ પુષ્કળ ઐતિહાસિક મૂલ્ય ધરાવે છે, જે ભારતના સૌથી પ્રતિષ્ઠિત સ્મારકોમાંના એકની ખોવાયેલી સ્થાપત્યની સમજ આપે છે.
જય જગન્નાથ 🙏🚩
જયતુ સનાતન સંસ્કૃતિ 🚩

Posted in रामायण - Ramayan

શ્રી રામ જન્મભૂમિના તાળા ખોલવાનો આદેશ આપનાર ન્યાયાધીશ કે.એમ. પાંડેજી સાથે શું થયું?
જાણો છો તમે?
એક દિલ અને દિમાગને હચમચાવી દેનારી એક કડવી હકીકત 👇
ન્યાયમૂર્તિ કે.એમ. પાંડેને મળી શ્રી રામ જન્મભૂમિનું તાળું ખોલાવવાની સજા… હિન્દુ દ્રોહી સેક્યુલર કોંગ્રેસી જૂઠું બોલે છે કે શ્રી રામ જન્મભૂમિનું તાળું રાજીવ ગાંધીએ ખોલાવ્યું.
આ માત્ર એક સંયોગ હતો કે જ્યારે રામ જન્મભૂમિનું તાળું ખોલવાનો આદેશ ફૈઝાબાદના જિલ્લા ન્યાયાધીશ કે.એમ. પાંડેજીએ આપ્યો, તે સમયે રાજીવ ગાંધી દેશના વડાપ્રધાન હતા. રાજીવ ગાંધીએ તે સમયે ઈલાહાબાદ હાઈકોર્ટના તત્કાલીન મુખ્ય ન્યાયાધીશ દ્વારા ન્યાયમૂર્તિ કે.એમ. પાંડેજીને સંદેશ મોકલાવ્યો હતો કે તમે તાળું ખોલવાનો આદેશ ન આપશો.
અને શ્રી રામ જન્મભૂમિનું તાળું ખોલવાનો આદેશ આપનાર ન્યાયમૂર્તિ કે.એમ. પાંડેજીનું ભવિષ્ય બરબાદ કરી દેવામાં આવ્યું.
અયોધ્યાના ઇતિહાસને જોઈએ તો સ્વતંત્રતા પછી ત્રણ મહત્વપૂર્ણ પડાવ છે:
* 1949: જ્યારે વિવાદિત સ્થળ પર મૂર્તિઓ મૂકવામાં આવી.
* 1986: જ્યારે વિવાદિત સ્થળનું તાળું ખોલવામાં આવ્યું.
* 1992: જ્યારે વિવાદિત સ્થળ તોડી પાડવામાં આવ્યું.
1992 પછીની વાર્તા તો બધાને ખબર છે, પરંતુ 1949 થી લઈને અત્યાર સુધી ઘણું એવું થયું છે જે તમારે જાણવું જોઈએ.
એક ઉદાસ વાંદરાને જોઈને કે.એમ. પાંડેજીને દુઃખ થયું અને તેમણે રામ જન્મભૂમિનું તાળું ખોલવાનો આદેશ આપવાનો નિર્ણય કર્યો.
થયું એવું કે, વર્ષ 1986માં ફૈઝાબાદ જિલ્લા ન્યાયાલયના ન્યાયમૂર્તિ કે.એમ. પાંડે અયોધ્યામાં ફરી રહ્યા હતા. તેમણે એક વાંદરાને એક ધ્વજ  પકડીને ઊભેલો જોયો. લોકો વાંદરાને મગફળી અને ફળ આપી રહ્યા હતા. ન્યાયમૂર્તિ પાંડેજીએ વિચાર્યું કે આ વિચિત્ર વાત છે કે વાંદરો આ વસ્તુઓ ખાવાની ના પાડી રહ્યો છે. તેમણે પૂજારીને તેનું કારણ પૂછ્યું તો પૂજારીએ કહ્યું, “સાહેબ, જેનો ભગવાન તાળાઓના કેદખાનામાં બંધ હોય, તેને કંઈ ખાવાની ઇચ્છા કેવી રીતે થાય?”
આ પછી તેઓ પોતાના ચેમ્બરમાં ગયા જ્યાં તેમને બાબરી મસ્જિદનું તાળું ખોલાવવાની અરજી પર સુનાવણી કરવાની હતી. કેન્દ્ર અને રાજ્યની કોંગ્રેસ સરકારના બે અધિકારીઓએ જિલ્લા ન્યાયાલયને કહ્યું કે જો બાબરી મસ્જિદના તાળા ખોલી દેવામાં આવશે તો કાયદો અને વ્યવસ્થાની સ્થિતિ બગડશે. કેન્દ્રમાં રાજીવ ગાંધી વડાપ્રધાન હતા અને ઉત્તર પ્રદેશમાં નારાયણ દત્ત તિવારી મુખ્યમંત્રી હતા. એટલે કે, કોંગ્રેસ અને રાજીવ ગાંધી નહોતા ઇચ્છતા કે શ્રી રામ જન્મભૂમિનું તાળું ખુલે.
પરંતુ ન્યાયમૂર્તિ પાંડેજીએ પોતાના નિર્ણયમાં કહ્યું કે જો હિન્દુ શ્રદ્ધાળુઓને પરિસરની અંદર રાખેલી મૂર્તિઓને જોવા અને પૂજવાની પરવાનગી આપવામાં આવે તો તેનાથી મુસ્લિમ સમુદાયને ઠેસ નહીં પહોંચે, અને ન તો આકાશ તૂટી પડશે.
અયોધ્યામાં વિવાદિત સ્થળનો નિર્ણય આપ્યાના લગભગ છ મહિના પછી ફૈઝાબાદના તત્કાલીન જિલ્લા ન્યાયાધીશ કે.એમ. પાંડેજીને આ અનુભૂતિ થવા લાગી હતી કે આખરે શા માટે છેલ્લા ઘણા જિલ્લા ન્યાયાધીશો આ મામલા પર નિર્ણય આપવાથી બચતા રહ્યા હતા.
પાંડેજીની હાઈકોર્ટના ન્યાયાધીશ તરીકે બઢતીની ફાઈલ અહીંથી ત્યાં ધૂળ ખાવા લાગી. કોઈ પણ એ જણાવવા તૈયાર નહોતું કે આખરે તેમની બઢતી ક્યારે થશે અને શા માટે નથી થઈ રહી. ફાઈલ તત્કાલીન મુખ્યમંત્રી નારાયણ દત્ત તિવારીના કાર્યાલયમાં વર્ષો સુધી ધૂળ ખાતી રહી. પોતાની પુસ્તક VOICE OF CONSCIENCE માં ન્યાયમૂર્તિ પાંડેજીએ લખ્યું છે કે 1987માં ઘણા ન્યાયાધીશોના નામની સાથે તેમના નામની પણ હાઈકોર્ટના ન્યાયાધીશ બનાવવાની ભલામણ ઈલાહાબાદ હાઈકોર્ટે કરી, પરંતુ 5 ડિસેમ્બર 1989 સુધી મુખ્યમંત્રી રહેલા નારાયણ દત્ત તિવારીએ તેમના નામની ભલામણ કેન્દ્ર સરકાર અને સુપ્રીમ કોર્ટને મોકલી નહીં.
લગભગ ત્રણ વર્ષ સુધી જિલ્લા ન્યાયાધીશ કે.એમ. પાંડેની ફાઈલ રાજ્ય સરકારના કાયદા વિભાગ અને મુખ્યમંત્રી કાર્યાલયમાં ધૂળ ખાતી રહી અને તેના પર કોઈ નિર્ણય લેવામાં આવ્યો નહીં. જિલ્લા ન્યાયાધીશ કે.એમ. પાંડેજીની સાથે કામ કરનારા તત્કાલીન CJM સી.ડી. રાય જણાવે છે કે આટલા વર્ષો સુધી ફાઈલ દબાયેલી રહ્યા પછી પાંડેજી પરેશાન રહેવા લાગ્યા, તેમને લાગવા માંડ્યું કે તેમનું ભવિષ્ય સમાપ્ત થઈ ગયું.
5 ડિસેમ્બર 1989ના રોજ મુલાયમ સિંહ યાદવના મુખ્યમંત્રી બન્યા પછી ન્યાયમૂર્તિ પાંડેજીને લાગ્યું કે હવે કદાચ તેમની ફાઈલ આગળ વધી જશે, પરંતુ તેનાથી બિલકુલ ઊલટું થયું. થોડા દિવસો પછી તેમની ફાઈલને અસ્વીકાર કરી દેવામાં આવી. એટલે કે, જે આશા બચી હતી તે પણ સમાપ્ત થઈ ગઈ. ન્યાયમૂર્તિ સી.ડી. રાયજી જણાવે છે કે તત્કાલીન મુખ્યમંત્રી મુલાયમ સિંહ યાદવે વિવાદિત સ્થળનું તાળું ખોલાવવાની સજા જિલ્લા ન્યાયાધીશ પાંડેને આપી.
ન્યાયમૂર્તિ કે.એમ. પાંડેએ પોતાની પુસ્તકમાં તે સમયના સમાચાર પત્રોના હવાલાથી લખ્યું છે કે મુલાયમ સિંહ યાદવે તેમની ફાઈલને અસ્વીકાર કરતાં લખ્યું કે, “શ્રી પાંડે એક સુલઝેલા, કર્મઠ, યોગ્ય અને ઈમાનદાર ન્યાયાધીશ છે, પરંતુ 1986માં બાબરી મસ્જિદનું તાળું ખોલાવીને તેમણે એક સાંપ્રદાયિક તણાવ પેદા કરી દીધો. એટલે હું નથી ઇચ્છતો કે તેમને હાઈકોર્ટના જજ બનાવવામાં આવે.”
કેન્દ્ર સરકાર અને સુપ્રીમ કોર્ટને તત્કાલીન મુખ્યમંત્રી મુલાયમ સિંહની મોકલેલી આ ટિપ્પણી પછી ફાઈલ પાછી ફરી આવી અને જિલ્લા ન્યાયાધીશ કે.એમ. પાંડેજીની હાઈકોર્ટના જજ બનવાની આશા સમાપ્ત થઈ ગઈ અને તેઓ જિલ્લા ન્યાયાધીશના પદ પરથી જ નિવૃત્ત થયા.
જય શ્રી રામ 🚩

Posted in सुभाषित - Subhasit

अष्टौ गुणा पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च ।

पराक्रमश्चाबहुभाषिता  च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च ॥

आठ गुण (लक्षण) पुरुष को अन्यों से विलक्षण (दीप्तिमान) वनाते हैं । वह है –

1). प्रज्ञा (धी शक्ति),

2). सुशीलता (सेवानुभावन प्रवृत्ति, राग-द्वेष वर्जन, ब्रह्म विषयिणी भावना, सौम्यता – अन्य लोगों के सुखप्रद होना, अपरोपतापिता – दुष्टजनों के लिये भयप्रद होना, अनसूयता – अन्य के गुण में दोष नहीं देखना, मृदुता – कोमलता, अपारुष्यता – अप्रियभाषण न करना, प्रियवादिता – प्रियभाषण करना, कृतव्रत – किसी कार्य को आरम्भ करने के पश्चात उसे शेष कर के ही छोडना, शरण्यता – आश्रित का रक्षा करना, कारुण्य – दीन जनों के प्रति दया भाव रखना),

3). दम (इन्द्रियसंयम),

4). शिक्षा (उपयुक्त विद्याग्रहण),

5). पराक्रम (शरीर सम्पति बल, इन्द्रिय सम्पति वीर्य, मन सम्पति पराक्रम),

6). उपयुक्त सीमित वचन (प्रयोजन से अधिक न वोलना),

7). योग्यपात्र को शक्ति के अनुसार देश-काल-विहित दान, तथा

. उपकार करनेवाले के प्रति कृतज्ञता ।

Eight qualities adorn a man: Intellect, integrity, self-control, knowledge, valor, controlled speech, charitability and gratitude.

Posted in PM Narendra Modi

अरे  भाईयो_और_बहनो…, सुन लो!
दिल्ली में जो हुआ ना, वो सिर्फ़ एक राष्ट्रपति का स्वागत नहीं था… वो था एक ज़ोरदार तमाचा… सीधा पश्चिम के गाल पर! 💥

व्लादीमीर पुतिन जी जब प्लेन से उतरे, तो मोदी जी खुद एयरपोर्ट पर खड़े थे… प्रोटोकॉल तोड़कर! प्रोटोकॉल क्या होता है भाई? वो तो अंग्रेजों की गुलामी का अवशेष है। मोदी जी ने कहा, “मेरा दोस्त आ रहा है, मैं ख़ुद जाऊँगा लेने!” और गए! हग किया, गले लगाया… वो सीन देखकर तो लंदन-वाशिंगटन वाले ज़ोर से चिल्लाए होंगे, “ये क्या हो रहा है रे बाबा!”

अब असली मज़ा तो काफिले में था… 
पुतिन साहब को ले जाने के लिए ना कोई मर्सिडीज़, ना बीएमडब्ल्यू, ना कैडिलैक… सीधा देसी-जापानी टोयोटा फॉर्च्यूनर! 😂😂 

यानी यूरोप-अमेरिका की गाड़ियाँ घर बैठी रो रही हैं। “हम तो प्रेस्टीजियस हैं भाई!” 

मोदी जी बोले, “अबे प्रेस्टीज तो हमारी दोस्ती में है, तुम्हारी गाड़ियों में थोड़े ना!”

फिर जो बैनर लगे ना पूरे रास्ते… एक भी अंग्रेजी में नहीं! 

सिर्फ़ हिंदी और रूसी! 

हिंदी में लिखा था – “स्वागत है मित्र पुतिन का” 
रूसी में लिखा था – “डोब्राई पाद्डी, द्रुग मोदी!” 
अंग्रेजी? वो तो कहीं दिखी ही नहीं! 
यानी मैसेज साफ़ है – “हमारी बातचीत हमारी भाषा में होगी, तुम्हारी भाषा की गुलामी अब नहीं!”

और तो और… पुतिन जी का इंटरव्यू भी सिर्फ़ दो भाषाओं में – हिंदी और रूसी! 

इंग्लिश मीडिया वाले बैठे मुंह ताकते रह गए। “अरे हमारा क्या होगा?” 

होगा वही जो 1947 के बाद होना चाहिए था… तुम्हारा ज़माना गया भाई!

ये सिर्फ़ एक स्वागत नहीं था… 
ये था एक संदेश… पूरी दुनिया को! 
कि भारत अब किसी के दबाव में नहीं आएगा। 
नहीं अमेरिका के, नहीं यूरोप के। 
रूस हमारा पुराना दोस्त है, सच्चा दोस्त है। 
जब पूरी दुनिया ने पीठ फेर ली थी, तब रूस ने हथियार दिए, टेक्नोलॉजी दी, साथ खड़ा रहा। 
और आज जब पुतिन पर सैंकड़ों प्रतिबंध हैं, तब भी भारत ने कहा – “तेरा माल खरीदेंगे, तेरा तेल खरीदेंगे, तेरे साथ खड़े रहेंगे!”

ये है नया भारत! 
जो ना झुकता है, ना डरता है, ना किसी की भाषा बोलेगा, ना किसी की गुलामी करेगा!

जय हिंद

और हाँ… जो लोग जल रहे हैं ना, उन्हें ठंडा पानी पिलाओ… बहुत जल रहे हैं वो!