Posted in PM Narendra Modi

मोदी जी है तो क्या मुमकिन नहीं है!!
गृह मंत्री की बेटी को अगवा करने वाला 35 साल बाद गिरफ्तार

1989 में तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद को किडनैपिंग केस में 35 साल से भगोड़े घोषित शफात अहमद सांगलू को CBI ने श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया है.

शांगलू ने आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट चीफ यासीन मलिक और अन्य के साथ मिलकर इस किडनैपिंग को अंजाम दिया था.

रुबैया की रिहाई के बदले भारत सरकार को मजबूरन 5 आतंकियों को छोड़ना पड़ा था. और ये घटना कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के क्रम में मिल का पत्थर साबित हुआ….इसके बाद आतंकवाद ने जोर पकड़ लिया.

दशकों पुराने अपराधियों को भी मोदी सरकार में पकड़ा जा रहा है….कोई है तो…

Posted in PM Narendra Modi

मोदी जी है तो क्या मुमकिन नहीं है!!
गृह मंत्री की बेटी को अगवा करने वाला 35 साल बाद गिरफ्तार

1989 में तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद को किडनैपिंग केस में 35 साल से भगोड़े घोषित शफात अहमद सांगलू को CBI ने श्रीनगर से गिरफ्तार कर लिया है.

शांगलू ने आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट चीफ यासीन मलिक और अन्य के साथ मिलकर इस किडनैपिंग को अंजाम दिया था.

रुबैया की रिहाई के बदले भारत सरकार को मजबूरन 5 आतंकियों को छोड़ना पड़ा था. और ये घटना कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के क्रम में मिल का पत्थर साबित हुआ….इसके बाद आतंकवाद ने जोर पकड़ लिया.

दशकों पुराने अपराधियों को भी मोदी सरकार में पकड़ा जा रहा है….कोई है तो…

Posted in नहेरु परिवार - Nehru Family

जवाहरलाल नेहरू अपने प्यारे दोस्त इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट सुकर्णो के बहुत करीब थे।

लेकिन क्या आप जानते हैं, 1965 की लड़ाई के दौरान, भारत के अच्छे “दोस्त” सुकर्णो ने पाकिस्तान के सपोर्ट में निकोबार आइलैंड पर हमला करने के लिए सबमरीन भेजी थीं!

Posted in हिन्दू पतन

महबूबा मुफ्ती की बहन के अपहरण का आरोपी गिरफ्तार:35 साल बाद पकड़ाया; तब वीपी सिंह सरकार ने रिहाई के बदले 5 आतंकी छोड़े थे।

रुबैया की रिहाई के लिए जेकेएलएफ ने जेल में बंद अपने 7 साथियों शेख हामिद, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, जावेद जगरार, अल्ताफ बट, मकबूल भट के भाई गुलाम नबी भट और अहद वाज की रिहाई की शर्त रखी थी। लेकिन इनमें से 5 को ही छोड़ा गया।

एक और दावा- मुफ्ती नहीं चाहते थे बेटी जल्द रिहा हो।

जुलाई 2012 में नेशनल सिक्योरिटी ग्रुप (NSG) के पूर्व मेजर जनरल ओपी कौशिक ने रुबैया सईद अपहरण मामले में सनसनीखेज दावा किया था। उन्होंने कहा था कि रुबैया के पिता और तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी जल्द रिहा हो। उन्होंने बताया कि अपहरण की सूचना मिलने के पांच मिनट के भीतर ही NSG ने पता लगा लिया था कि रुबैया को कहां रखा गया है।

कौशिक ने खुद गृहमंत्री को बताया कि रुबैया को कुछ देर में ही सुरक्षित रिहा करा लिया जाएगा। लेकिन गृहमंत्री ने उनकी बात को अनसुना कर निर्देश दिए कि वे तत्काल मीटिंग से बाहर जाकर NSG को पीछे हटाएं। इसके बाद रुबिया को छुड़ाने के लिए पांच खूंखार आतंकियों को छोड़ दिया।

Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

1955 मे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के कामराज एक बच्चे को मजदूरी करते हुए देख लेते है, बच्चे से पूछते है कि स्कूल क्यों नहीं जाता तो बच्चे ने कहा “खाना क्या आप दोगे?”

कामराज चेन्नई लौटते है और यही से मिड डे मिल की शुरुआत होती है जो आज गेम चेंजर बन गयी है। कामराज उस जमाने के चंद्रबाबू नायडू थे, उनकी वज़ह से उस जमाने मे तमिलनाडु के गाँवों मे टीवी पहुँचा और सड़के बनी। खुद तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई नहीं कर सके क्योंकि पिता का देहांत हो चुका था।

ऐसे दौर से निकले कामराज कभी स्वतंत्रता संग्राम मे लड़े तो कभी कांग्रेस के एक ऐसे नेता बने जिन्हे आजाद भारत का पहला चाणक्य कहा जा सकता है। या सच कहु तो अमित शाह के बाद दूसरा नाम इन्ही का है।

1954 से 1963 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे, महत्वाकांक्षी बहुत थे मगऱ एक पैसे का घोटाला नहीं किया बस राजनीति और जनकल्याण मे लगे रहे। 1963 मे ज़ब देखा कि कांग्रेस मे गुटबाजी हो रही है तो इस्तीफा देकर संगठन मे लग गए।

नेहरू ने यही निष्ठा देख चेन्नई से दिल्ली बुला लिया और पूरे देश मे कामराज प्लान लागू कर दिया, कांग्रेस के जिन मुख्यमंत्रियों या नेताओं के 10 साल पूरे हो चुके थे उन्हें संगठन के काम मे लगा दिया। नेहरू इंदिरा गाँधी के लिए सड़क बना रहे थे और कामराज उनका साथ दें रहे थे।

नेहरू की मृत्यु हुई तो कामराज कांग्रेस के अध्यक्ष थे उन्होंने मोरारजी देसाई से दुश्मनी लेकर लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनवाया और ज़ब शास्त्री की मृत्यु हुई तो इंदिरा गाँधी को। लेकिन यही कुछ ऐसा हुआ जिसकी वजह से मैंने इन्हे चाणक्य की पदवी मे अमित शाह के बाद रखा है।

1967 मे इंदिरा गाँधी ने मन बना लिया कि वो इस बुजुर्ग मंडली की ऊँगली पर नहीं नाचेगी, 1967 मे चुनाव भी थे। कांग्रेस को 283 सीटें मिली, ये बहुत कम थी क्योंकि उन दिनों विपक्ष बहुत कमजोर था। जनसंघ ने 35 सीटें जीत ली थी, कामराज ने जनसंघ को भविष्य का खतरा बताया था।

कितने सटीक थे कामराज क्योंकि जनसंघ ही बीजेपी का पुराना नाम है, खैर इंदिरा गाँधी ने राष्ट्रपति चुनाव मे पहली बार कामराज को शिकस्त दी। 1969 मे कामराज ने नीलम संजीवा रेड्डी को राष्ट्रपति पद पर बुलाया मगर इंदिरा ने वी वी गिरी को आगे कर दिया, रेड्डी हार गए और इस तरह इंदिरा गाँधी को पार्टी विरोध करने के चलते कांग्रेस से बाहर कर दिया गया।

इंदिरा गाँधी ने अलग पार्टी कांग्रेस R बनाई और कामराज के धुरविरोधी करुणानिधि का समर्थन किया। इंदिरा गाँधी मन बना चुकी थी कि कामराज को उनके घर मे घेरकर हरायेगी, इसे ऐसे समझिये कि 1971 के चुनाव मे तमिलनाडु मे कामराज को हराने के लिए इंदिरा ने अपना उम्मीदवार ही नहीं उतारा।

कामराज बुरी तरह हारे और उनकी स्थिति बिना दाँत के बाघ जैसी हो गयी, 1975 मे कामराज का निधन हुआ और उन्हें भारत रत्न भी मिला। इंदिरा गाँधी आपको शायद विलेन लगे लेकिन अच्छा ही किया, इंदिरा ने उस कांग्रेस की नींव रखी जो सिर्फ गाँधी परिवार पऱ केंद्रित हो और उसी का फायदा आज बीजेपी का मिल रहा है।

वो बीजेपी जिसने तब महज 35 सीटें जीती थी, कामराज को याद कीजिये इसलिए नहीं कि वे देश के एक बड़े नेता थे या दिल्ली चेन्नई मे उनके नाम से सड़के है बल्कि इसलिए क्योंकि वे विकसित तमिलनाडु के शिल्पकार है।

वो बच्चा जो पिता के गुजर जाने के कारण पढ़ लिख नहीं सका, आर्थिक तंगी भी देखी। बुरे दौर से निकलकर खुद को इतना सक्षम बनाया कि करोड़ो जीवन को संवारा और दिल्ली मे दो दो प्रधानमंत्री बनाये।

ऐसी ही पृष्ठभूमि से आये लालू मुलायम ने करोड़ो की सम्पत्ति बनवाई, मायावती ने मूर्तियां बनवाई, ठाकरे ने मातोश्री बनवाया मगर एक बार के कामराज के घर के फोटो गूगल पर देखिये। अब तो म्यूजियम बन गया है मगर असल घर एकदम साधारण था। कामराज यदि एक बार प्रधानमंत्री बने होते तो आज भारत की तस्वीर बहुत अलग होती।

✍️परख सक्सेना✍️

Posted in खान्ग्रेस

नरेंदर सरेंडर”

“नरेंद्र तू घुटने टेकेगा और नरेंदर ने घुटने टेक दिए”

“नरेंद्र मोदी अंबानी की शादी में गया, मैं नहीं गया”

“मोदी, अंबानी-अडानी का गुलाम है”

“नरेंद्र मोदी डरपोक है”

“नरेंद्र मोदी कायर है”

“नरेंद्र मोदी को जनता एक दिन डंडे मारकर भगाएगी”

“ट्रम्प के सामने मोदी ने घुटने टेक दिए”

“कौन मोदी,वो वोटचोर मोदी”

“वोटचोर गद्दी छोड़”

भाषा और शब्दों को देखिये किस निम्न स्तर के शब्दों का उपयोग राहुल ने किया है…?

राहुल गांधी,  क्या लगता है जनता को ये सब सुनकर गुस्सा नहीं आता ?.. या जनता के मन को ठेस नहीं पहुँचती..आज मोदीजी मात्र एक नेता नहीं बल्कि लोगो के दिलो पर राज करने वाला एक महापुरुष बन चुके है उनके लिए ये शब्द हर जनमानस को तकलीफ देते है। लोग आपका कुछ कर तो नहीं सकते पर अपना गुस्से का इजहार आपको हरा कर तो दिखा ही सकते है…. स्मरण रहे आसमान पर थूकने का हश्र है ये ही होता है ..

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

यह कहानी 1978 की है। रूस के एक युवा भौतिक वैज्ञानिक अनातोली बुगोर्स्की इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एनर्जी फिजिक्स की एक साधारण सी दिखने वाली लैब में काम कर रहे थे, जहाँ ब्रह्मांड की अदृश्य ताकतों को समझने की कोशिश की जाती थी। वह 36 साल के थे, बहुत तेज, महत्वाकांक्षी, और सोवियत यूनियन के सबसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सेलेरेटर U70 सिंक्रोट्रॉन पर शोध कर रहे थे।

एक दिन मशीन में एक छोटी सी खराबी आ गई। बुगोर्स्की झुककर अंदर देखने लगे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि ठीक उसी पल मशीन दोबारा चालू होने वाली है। और फिर असंभव हुआ। लगभग प्रकाश की गति से चल रहा प्रोटॉन बीम सीधे उनके सिर के आर पार चला गया। बीम उनके बाएँ कान के पीछे से भीतर दाखिल हुआ, दिमाग में एक बेहद पतली सुरंग बनाता हुआ, और नाक के पास से बाहर निकल गया।

बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें एक ऐसी चमक दिखाई दी जो हजार सूर्यों से भी ज्यादा तेज थी। उन्हें कोई दर्द नहीं हुआ, सिर्फ एक भारी सी खामोशी महसूस हुई। डॉक्टरों को पूरा यकीन था कि वह बच नहीं पाएँगे। इतनी भारी रेडिएशन लगभग दो लाख रैड आमतौर पर इंसान के शरीर को कुछ ही मिनटों में खत्म कर देने के लिए काफी होती है। किसी इंसान को पार्टिकल एक्सेलेरेटर की सीधी किरण लगकर कभी बचना पाया ही नहीं गया था।

लेकिन अनातोली बुगोर्स्की नहीं मरे। उनका चेहरा भयानक रूप से सूज गया। त्वचा परत दर परत उतरने लगी। हफ्तों तक डॉक्टरों को समझ नहीं आया कि वह बचेंगे या नहीं। जब सूजन कम हुई तो बीम का रास्ता उनके चेहरे पर हमेशा के लिए छप चुका था। चेहरे का एक हिस्सा हमेशा के लिए सुन्न और जड़ हो गया। नसें जल चुकी थीं, मांसपेशियाँ हमेशा के लिए बंद। चेहरा आधा जिंदा और आधा ठहरा हुआ लगने लगा। एक कान से सुनना बंद हो गया। कुछ साल बाद उन्हें मिर्गी के दौरे भी पड़ने लगे।

फिर भी उनका दिमाग बिल्कुल तेज रहा। उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की। दोबारा रिसर्च में लौट आए और शांत, बिना शोर शराबे के अपना काम करते रहे। सोवियत सरकार ने यह घटना सालों तक छिपाए रखी, क्योंकि यह मेडिकल इतिहास की सबसे अजीब चमत्कार जैसी घटनाओं में से एक थी। वह ऐसी चीज से बच गए थे जिससे बचना संभव ही नहीं माना जाता।

वह अपनी आधी जमी हुई मुस्कान और आधे उम्र के उस निशान के साथ जिंदगी जीते रहे, जैसे चलता फिरता सबूत कि इंसान का शरीर कभी कभी प्रकृति के नियमों को भी चुनौती दे देता है। वह कोई मशहूर वैज्ञानिक नहीं बने और न ही किसी शोहरत के पीछे भागे। बस चुपचाप आगे बढ़ते रहे, एक ऐसा आदमी जिसने इंसान द्वारा देखी गई सबसे चमकीली रोशनी को देखा था और फिर भी सामान्य जिंदगी में लौट आया।

कुछ कहानियाँ जीत के बारे में होती हैं। उनकी कहानी हिम्मत और टिके रहने के बारे में है, वह जिद जो कभी कभी भौतिकी के नियमों को भी चुनौती दे देती है।

Posted in PM Narendra Modi

ये चचा रोज मोदी का चरित्रहनन करते हैं। इनको वित्तमंत्री बनना था। चचा चिचियाते रह गए लेकिन इनके चाल-चरित्र को मोदी जान रहे थे, इसलिए इन्हे राज्यसभा की सांसदी के अलावा कुछ मिला नहीं। मोदी को पता था कि इस व्यक्ति का चरित्र बिल्कुल अस्थिर है और यह एक नम्बर का ब्लैकमेलर है। इसकी वकालत, इसकी राजनीति ब्लैकमेलिंग से ही चलती है।

अब ये बता रहे हैं कि मोदी मुख्यमंत्री थे तो ऐश करने चीन जाते थे और जयशंकर उसकी सारी व्यवस्था करते थे, इसलिए उन्हें इनाम के तौर पर विदेशमंत्री बनाया गया।

तो भाई! जब तुम मोदी के चरित्र के बारे में इतना जानते थे तो २०१४ में प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन क्यों किये थे, बल्कि अपनी पार्टी का विलय तक भाजपा में कर दिया था।

सुब्रमण्यम स्वामी, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा आदि की मंशा खुद चापलूसी वाली थी। इनको लगता था कि मोदी इससे खुश होकर इन्हे बड़े-बड़े पद दे देंगे।

लाभ न मिलते देख सबकी भृकुटि तन गयी।

मोदी की आदमी पहचानने कला ने ही उन्हें यहाँ तक लाया है।

Posted in हिन्दू पतन

મોરબીમાં મણિ મંદિરની બાજુમાં બાંધવામાં આવેલ એક ગેરકાયદેસર દરગાહ   તોડી પાડવામાં આવી , છ કબરો સંપૂર્ણપણે સમતળ કરવામાં આવી હતી, અને એક પણ હાડકું કે માનવ અવશેષ મળ્યા નથી.

આ ગેરકાયદેસર દરગાહ  થોડા વર્ષો પહેલા જ અચાનક બનાવવામાં આવી હતી.

આ ગેરકાયદેસર દરઘાહ  બનાવનાર વ્યક્તિની ધરપકડ કરવામાં આવી છે અને તેણે પોલીસ અને કોર્ટ સમક્ષ જણાવ્યું છે કે તેણે ફક્ત મણિ મંદિર કબજે કરવા માટે જ તે બનાવ્યું હતું.

અહીં કોઈ પીર બાબાને દફનાવવામાં આવ્યા નથી.

Posted in हिन्दू पतन

क्या वास्तव में मक्का मदीना में कोई शिवलिंग स्थापित है? आप भी जानिए :-

[नोट – इस पोस्ट का उद्देश्य केवल पाठकों को उन बिन्दुओं पर तर्क वितर्क करने के लिए किया जा रहा है जो अभी भी इन बातों से अनभिज्ञ हैं। प्रस्तुत लेख का आधार विभिन्न माध्यमों और सामग्रियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिया जा रहा है किसी व्यक्ति विशेष एवं समुदाय को ठेस पहुंचाना का कोई उद्देश्य नहीं है]

इस्लाम के आने से पहले,
अरब शब्द संस्कृत के अर्व का अपभ्रंश है जो पहले अरव फिर और फिर अरब हो गया अर्व का मतलब घोड़ा होता है सर्वविदित है कि अरब के घोड़े प्रसिद्ध हैं
अरब में जिस देवता की पूजा की जाती थी,
उसका नाम था हुबल।
यहाँ आपको गौर करना पड़ेगा, कि हुबल के सर पर चंद्रमा है, जो हिंदुओं के आराध्य देवो के देव महादेव के सर पर भी विराजमान है।

600 AD से पूर्व वहाँ 3 देवियों की भी पूजा की जाती थी, जिनको वहाँ की लोकल भाषा में अल अज़ा, अल लत, और मीनत कहा जाता था।

इन 3 देवियों के हाथ आशीर्वाद मुद्रा में उठे हुए हैं…
और शेर नीचे विद्यमान है।
अब जरा हमारी सनातनी देवियों को देखिए।

आपने गौर किया होगा, कि मेक्का, जहाँ काबा स्थित है, वहाँ दुनिया भर के मुसलमान एक काले पत्थर के इर्द गिर्द चक्कर लगाने जाते हैं।

कोई मुझे बताए, कि ये शिवलिंग के इर्द गिर्द चक्कर लगाने से कैसे अलग है?

काबा के पत्थर और शिवलिंग में कई समानताएं हैं।
हमारे यहाँ साष्टांग प्रणाम की रीति है, तो इस्लाम में भी सजदे की रीति है।

हज़रत मुहम्मद का जन्म उसी कबीले में हुआ था, जहाँ हुबल को भगवान के रूप में पूजा जाता था।
कबीले के सरदार से मुहम्मद साहब का झगड़ा हो गया, जिसका परिणाम हुआ युद्ध , और मुहम्मद और उसके अनुयायियों ने कबीले के सरदार को मार डाला, और सारी मूर्तियाँ क्षत विक्षत कर दी।

लेकिन लड़ाई कर के आप कबीले के सरदार तो बन सकते हो, पर लोगों के दिलों दिमाग से वो हज़ारों वर्ष पुरानी पूजा पद्धति को कैसे नष्ट करोगे?

बहुत कोशिशों के बाद भी इस्लाम में कई ऐसी चीज़ें हैं, जो गवाही देती हैं, कि ये सनातन धर्म से ही उत्पन्न हुआ है।
अब वो अलग बात है कि इस्लाम ये बात ना माने, क्योंकि यदि आप किसी को दबाने के लिए पिछले 1400 साल से लगे हुए हों…

आज नहीं तो कल ये मानना ही पड़ेगा, कि उनके पूर्वज मक्का में भी शिव की ही आराधना करते थे…
और वो सब भी आज भी, जिस पत्थर को पूजते हैं, वो शिवलिंग ही है।

मुसलमानों के सर्वोच्च तीर्थ मक्का के बारे में कहते हैं कि वह मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहाँ काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहाँ है।
हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत अर्थात काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं।
इसके बारे में प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 #पीएनओक ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में बहुत विस्तार से लिखा है।

अरब देशों में इस्लाम से पहले शैव मत ही प्रचलित था।
इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद के चाचा उम्र बिन हश्शाम द्वारा रचित शिव स्तुतियाँ श्री लक्ष्मीनारायण (बिड़ला) मंदिर, दिल्ली की ‘गीता वाटिका’ में दीवारों पर उत्कीर्ण हैं।।

यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है इसका उल्लेख श्रीमद्भागवत में मिलता है श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस के विनाश किया था यह यमन राज्य उसी द्वीप पर स्थित है।

भगवान शिव के जितने रूप और उपासना के जितने विधान संसार भर में प्रचलित रहे हैं, वे अवर्णनीय हैं।
हमारे देश में ही नहीं, भगवान शिव की प्रतिष्ठा पूरे संसार में ही फैली हुई है।
उनके विविध रूपों को पूजने का सदा से ही प्रचलन रहा है।

शिव के मंदिर अफगानिस्तान के हेमकुट पर्वत से लेकर मिस्र, ब्राजील, तुर्किस्तान के बेबीलोन, स्कॉटलैंड के ग्लासगो, अमेरिका, चीन, जापान, कम्बोडिया, जावा, सुमात्रा तक हर जगह पाए गए हैं।
अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व शिवलिंग को ‘लात’ कहा जाता था।
मक्का के कावा में संग अवसाद के यप में जिस काले पत्थर की उपासना की जाती रही है, भविष्य पुराण में उसका उल्लेख मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से पहले इजराइल और अन्य यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं।
ऐसे प्रमाण भी मिले हैं कि हिरोपोलिस में वीनस मंदिर के सामने दो सौ फीट ऊँचा प्रस्तर लिंग था।
यूरोपियन फणिश और इबरानी जाति के पूर्वज बालेश्वर लिङ्ग के पूजक थे।
बाईबिल में इसका शिउन के रूप में उल्लेख हुआ है।

काबा से जुड़ी एक और हिन्दू संस्कृति परम्परा है “पवित्र गंगा” की अवधारणा।
जैसा कि सभी जानते हैं भारतीय संस्कृति में शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के रिश्ते को कभी अलग नहीं किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित ही मौजूद होती है।

काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है, इसका पानी भी पवित्र माना जाता है, क्योंकि इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे ज़म-ज़म) ही माना जाता था।

आज भी मुस्लिम श्रद्धालु हज के दौरान इस आबे ज़मज़म को अपने साथ बोतल में भरकर ले जाते हैं।
ऐसा क्यों है कि कुम्भ में शामिल होने वाले हिन्दुओं द्वारा गंगाजल को पवित्र मानने और उसे बोतलों में भरकर घरों में ले जाने, तथा इसी प्रकार हज की इस परम्परा में इतनी समानता है? इसके पीछे क्या कारण है।

किसी मुस्लिम ने मुझे बताया कि ज़म” -ज़म झरना नही है…वो एक कुआँ है जनाब “

18×14 फ़ीट और 18 मीटर गहरा है.

4000 साल पुराना है…ना कभी सूखा…ना कभी स्वाद बदला…

आज तक कभी भी कुऐं में ना कोई काई जमी और ना ही कोई पेड़ उगा…ना आज तक उस पानी में कोई बैक्टिरिया मिले…

युरोपियन लैबोरेट्री में चेक हो चुका है उन्होने इसे पीने लायक घोषित कर दिया है।

ये छोटा सा कुआँ लाखों लोगो को पानी देता है…
8000 लीटर प्रति सेकेण्ड पानी की ताकत वाली मोटर 24 घण्टे चलती है.
और सिर्फ़ 11 मिनट बाद पानी का लेवल बराबर हो जाता है

ये वाण गंगा है जम जम का जल ..👍#