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ચાચાની ભૂલોનો કોઈ અંત નથી…
દરરોજ એક નવો ખુલાસો આપણને આંચકો આપે છે. આ ક્યારેય ન સમાપ્ત થતી યાદીમાં નવીનતમ ઘટસ્ફોટ “વંદે માતરમ” છે.

એવું લાગે છે કે આપણા મહાન “ચાચા” એ ઝીણા અને તેમના પ્રિય “ભાઈઓને” ખુશ કરવા માટે બંકિમચંદ્ર ચેટર્જીના વંદે માતરમનું વિભાજન (કાપી નાખેલું) કર્યું.

ભોળા ચાચાએ પોતાની અનંત મૂર્ખતામાં વિચાર્યું કે તેઓ દેશભક્તિ ગીત “ભાગલા” ગાઈને ઝીણાને રાજી કરી શકશે અને ભારતના “ભાગલા”ને રોકી શકશે…

બાકીની વાત ઇતિહાસ છે…

વધુ ચોંકાવનારી વાત એ છે કે સ્વતંત્રતા અને ભાગલા પછી પણ ગીત કાપવામાં આવતું રહ્યું! શા માટે? ભાઈજાનોના ટોળાને શાંત કરવા – જેઓ ભવિષ્યમાં વધુ ભાગલા પાડવાની આશા સાથે ભારતમાં રહ્યા હતા.

“સિંધુ સંધિ” દ્વારા આપણા પાણી આપવાથી લઈને, કાશ્મીર અને લદ્દાખમાં ચીનમાં પાકિસ્તાનને જમીન આપવાથી લઈને, એક નકલી ધર્મનિરપેક્ષ કાનૂની વ્યવસ્થા દ્વારા ન્યાય (આપણા મંદિરોને મુક્ત કરવાનો) આપણો અધિકાર છીનવી લેવાથી – ચાચાએ ભારતના હિન્દુઓને નુકસાન પહોંચાડવા માટે શક્ય તેટલું બધું કર્યું છે.

ઇતિહાસનું પુનર્મૂલ્યાંકન કરવાનો અને ફરીથી લખવાનો અને આ ખલનાયક ચાચાઓને ઇતિહાસના કચરાપેટીમાં નાખવાનો સમય આવી ગયો છે જેના તેઓ યોગ્ય રીતે લાયક હતા…

(અયાન ચૌધરી)

Posted in खान्ग्रेस

हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने बाकायदा नियम कानून और संविधान में संशोधन करके फरीदाबाद की बेशकीमती 60 एकड़ जमीन को मात्र ₹100 में एक ठग और फ्रॉड जवाद अहमद सिद्दीकी जो मध्य प्रदेश में फ्रॉड करके भागा था उसे  दे दिया और

इतना ही नहीं हरियाणा की काँग्रेस  सरकार ने माइनॉरिटी विकास योजना के अंतर्गत यहां इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए 60 करोड रुपए भी अलॉट किए

सोचिए जो कांग्रेस अदानी को जमीन देने पर छाती कुटती है वहीं कांग्रेस किस तरह से आतंक के अड्डे बनाने के लिए एक-दो नहीं बल्कि पूरे 60 एकड़ जमीन देती है

इस अलफलाह यूनिवर्सिटी के अंदर एक विशाल मस्जिद बनी है और उसे मस्जिद के इमाम के घर पर ही आतंकी मुजम्मिल शकील रहता था

पुलिस ने मस्जिद के इमाम को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है

मुजम्मिल शकील के परिवार वाले कह रहे हैं कि मेरे डॉक्टर बेटे को उसे इमाम ने ही ब्रेनवॉश  करके आतंकी बनाया होगा

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अकबर की शादी “जोधा बाई” से नहीँ “मरियम-उल-जमानी” से हुयी थी जो कि आमेर के राजा भारमल के विवाह के दहेज में आई परसीयन दासी की पुत्री थी।
वैसे तो बहुत प्रयास किए गये हिँदुओँ को अपमानित करने के लिये लेकिन एक सच ये भी है।। 1 – अकबरनामा (Akbarnama) में जोधा का कहीं कोई उल्लेख या प्रचलन नही है।।(There is no any name of Jodha found in the book “Akbarnama” written by Abul Fazal) 2- तुजुक-ए-जहांगिरी /Tuzuk-E-Jahangiri (जहांगीर की आत्मकथा /BIOGRAPHY of Jahangir) में भी जोधा का कहीं कोई उल्लेख नही है। (There is no any name of “JODHA Bai” Found in Tujuk -E- Jahangiri ) जब की एतिहासिक दावे और झूठे सीरियल यह कहते हैं की जोधा बाई अकबर की पत्नि व जहांगीर की माँ थी जब की हकीकत यह है की “जोधा बाई” का पूरे इतिहास में कहीं कोइ नाम नहीं है, जोधा का असली नाम {मरियम- उल-जमानी}( Mariam uz-Zamani ) था जो कि आमेर के राजा भारमल के विवाह के दहेज में आई परसीयन दासी की पुत्री थी उसका लालन पालन राजपुताना में हुआ था इसलिए वह राजपूती रीती रिवाजों को भली भाँती जान्ती थी और राजपूतों में उसे हीरा कुँवरनी (हरका) कहते थे, यह राजा भारमल की कूटनीतिक चाल थी, राजा भारमल जान्ते थे की अकबर की सेना जनसंख्या में उनकी सेना से बड़ी है तो राजा भारमल ने हवसी अकबर को बेवकूफ बनाकर उससे संधि करना ठीक समझा, इससे पूर्व में अकबर ने एक बार राजा भारमल की पुत्री से विवाह करने का प्रस्ताव रखा था जिस पर भारमल ने कड़े शब्दों में क्रोधित होकर प्रस्ताव ठुकरा दिया था, परंतु बाद में राजा के दिमाग में युक्ती सूझी, उन्होने अकबर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और परसियन दासी को हरका बाइ बनाकर उसका विवाह रचा दिया, क्योँकी राजा भारमल ने उसका कन्यादान किया था इसलिये वह राजा भारमल की धर्म पुत्री थी लेकिन वह कचछ्वाहा राजकुमारी नही थी।। उन्होंने यह प्रस्ताव (को एक AGREEMENT) की तरह या राजपूती भाषा में कहें तो हल्दी-चन्दन किया था ।। 3- अरब में बहुत सी किताबों में लिखा है written in parsi ( “ونحن في شك حول أكبر أو جعل الزواج راجبوت الأميرة في هندوستان آرياس كذبة لمجلس”) हम यकीन नहीं करते इस निकाह पर हमें संदेह है ।। 4- ईरान के मल्लिक नेशनल संग्रहालय एन्ड लाइब्रेरी में रखी किताबों में इन्डियन मुघलों का विवाह एक परसियन दासी से करवाए जाने की बात लिखी है ।। 5- अकबर-ए-महुरियत में यह साफ-साफ लिखा है कि (written in persian “ہم راجپوت شہزادی یا اکبر کے بارے میں شک میں ہیں” (we dont have trust in this Rajput marriage because at the time of mariage there was not even a single tear in any one’s eye even then the Hindu’s God Bharai Rasam was also not Happened ) “हमें इस हिन्दू निकाह पर संदेह है क्यौकी निकाह के वक्त राजभवन में किसी की आखों में आँसू नही थे और ना ही हिन्दू गोद भरई की रस्म हुई थी ।। 6- सिक्ख धर्म के गुरू अर्जुन और गुरू गोविन्द सिंह ने इस विवाह के समय यह बात स्वीकारी थी कि (written in Punjabi font – “ਰਾਜਪੁਤਾਨਾ ਆਬ ਤਲਵਾਰੋ ਓਰ ਦਿਮਾਗ ਦੋਨੋ ਸੇ ਕਾਮ ਲੇਨੇ ਲਾਗਹ ਗਯਾ ਹੈ “ ) कि क्षत्रीय , ने अब तलवारों और बुद्धी दोनो का इस्तेमाल करना सीख लिया है , मत्लब राजपुताना अब तलवारों के साथ-साथ बुद्धी का भी काम लेने लगा है ।। ( At the time of this fake mariage the Guru of Sikh Religion ” Arjun Dev and Guru Govind Singh” also admited that now Kshatriya Rajputs have learned to use the swords with brain also !! ) ै ै7- 17वी सदी में जब परसि भारत भ्रमन के लिये आये तब उन्होंने अपनी रचना (Book) ” परसी तित्ता/PersiTitta ” में यह लिखा है की “यह भारतीय राजा एक परसियन वैश्या को सही हरम में भेज रहा है , अत: हमारे देव (अहुरा मझदा) इस राजा को स्वर्ग दें ” ( In 17 th centuary when the Persian came to India So they wrote in there book (Persi Titta) that ” This Indian King is sending a Persian prostitude to her right And deservable place and May our God (Ahura Mazda) give Heaven to this Indian King . ं 8- हमारे इतिहास में राव और भट्ट होते हैं , जो हमारा ईतिहास लिखते हैं !! उन्होंने साफ साफ लिखा है की ” गढ़ आमेर आयी तुरकान फौज , ले ग्याली पसवान कुमारी ,राण राज्या राजपूता लेली इतिहासा पहली बार ले बिन लड़िया जीत (1563 AD )।” मत्लब आमेर किले में मुघल फौज आती है और एक दासी की पुत्री को ब्याह कर ले जाती है, हे रण के लिये पैदा हुए राजपूतों तुमने इतिहास में ले ली बिना लड़े पहली जीत 1563 AD (In our Rajputana History our History writers were “Raos and Bhatts ” They clearly wrote “Garh Amer ayi Turkaan Fauj Le gyali Paswaan Kumari , Ran Rajya Rajputa leli itihasa Pehlibar le bin ladiya jeet !! This means that when Mughal army came at Amer fort their Emperor got married with persian female servant of Rajputs The Rajputs who born for war And in history this was the first time that the Rajput has got a victory without any violence 9-यह वो अकबर महान था जिसके समय मे लाखों राजपुतानी अपनी इज्जत बचाने के लिये जोहर की आग में कूद गई ( अगनी कुन्ड में ) कूद गई ताकी मुघल सेना उन्हे छू भी ना सके , क्या उनका बलिदान व्यर्थ हे जो हम उस जलाल उद्दीन मोहोम्मद अकबर को अकबर महान कहते हे सिर्फ महसूर कर माफ कर देने के कारण भारतीय व्यापारीयों ने उसे अकबर महान का दर्जा दिया !!अब ये बात बताईये की क्या हिन्दूस्तान में हिन्दूओं पर तीर्थ यात्रा पर से कोई टेक्स हटा देना कौन सी बड़ी महानता है , यह तो वैसे भी हमारा हक था और बेवकूफ व्यापारीयों ने एक कायर को अकबर महान का दर्जा दि (हिन्दूस्तान पर राज करने के लिये अकबर ने अपने दरबार में नौ लोगों को नवरत्न बनाया जिसमेँ 4 हिन्दू थे । राजा मान सिंह जो कि अकबर के समकालीन थे और अकबर के नवरत्नो में से एक थे उन्होंने अकबर से हिन्दूओं पर से तीर्थ यात्रा(महसूर)कर माफ करने की मांग उठाई सत्ता के लालची अकबर को डर था क्यौ कि उसके 4 रत्न हिन्दू थे और अगर वह मान सिंह की मांग को खारिज कर देता तो बाकी के हिन्दू रत्न उसके लिये काम छोड़ सक्ते थे क्यों की अकबर की झूटी सेक्यूलर छवी का असली चहरा सामने आजाता (और सच्चाई भी यही थी की वह एक कट्टरवादी और डरपोक(फट्टू) किस्म का शासक था उसको यह बात पता थी कि हिन्द पर कट्टर छवी के बदोलत राज नही किया जा सक्ता यही वजह थी की उसके पूर्वज हिन्द पर राज ना कर सके थे इस बात को समझते हुए अकबर ने हिन्दू राजाओं में फूट डालने का राजनितिक तरीका अपनाया ) और उसका हिन्दुस्थान पर शासन का सपना अधूरा रह सक्ता था इस बात के भय से उसने तीर्थ यात्रा कर(टेक्स) हटा दिया ।। यह वो समय था जब राणा प्रताप, राणा उदय सिंह,दुर्गा दास, जयमल और फत्ता(फतेह सिंह) जैसे वीर सपूत हुए , यह वही समय था जब रानी दुर्गावती रानी भानूमती रानी रूप मती जैसी वीर राजपुतानीयो ने अकबर से युद्घ लड़ा !! 10- मुघलों ने जब चित्तौड़ किले पर आक्रमण किया तब मात्र 5,000 से 10,000 राजपूत किले पर मैजूद थे जिन से अकबर ने 50,000 से 80,000 मुघलों को लड़वाया , मत्लब साफ है की अकबर राजपुताना से बराबरी से लड़ने की दम नहीं रखता था , इस युद्ध में जयमल सिंह राठौढ़ मेड़तिया और फतेह सिंह सिसौदिया ने अकबर के दांत खट्टे कर दिये थे । उस युद्ध में अकबर की आधी से ज्यादा सेना को राजपूतों ने मौत के घाट उतार दिया था और भारी मात्रा में नुकसान पहुंचाया था इस नुकसान को देखकर खिस्याए अकबर ने चित्तौड़ के लगभग 25,000 गैर इस्लामिक परिवारों को मौत के घाट उतरवा दिया था ।। लाखों मासूमों के सर कटवा दिये , लाखों औरतो को अपने हरम का शिकार बनाया इस युद्ध के दौराम 8,000 राजपुतानीयाँ जैहर कुण्ड में प्राण त्याग जिन्दा जल गईं ।। नोट- अकबर ने राजपूतों के आपसी मन मुटाव का फाएदा उठाया क्यो की वह जान्ता था कि आपसी फूट डालकर ही क्षत्रीय से लड़ा जा सक्ता हे ।। ं ु11 .- 1947 की आजादी के बाद पं नेहरू को यह डर था कि जम्म् -कश्मीर के राजा हरी सींह ने जिस तरह अपने क्षेत्र पर अपना अधिपथ्य और राज पाठ त्यागने से मना कर दिया था उसी तरह कहीं बाकी की क्षत्रीय रियासतें फिरसे अपना रूतबा कायम कर देश पर अपना अधिपथ्य स्थापित ना कर लें इसलिए भारतीय इतिहास में से राजपूताना , मराठा , जाट व अन्य हिन्दू जातीयों के गौरवशाली इतिहास को हटा कर मुघलों का झूटा इतिहास ठूस(भर) दिया ताकी क्षत्रीय जातीयों का मनोबल हमेशा इस झूटे इतिहास को पड़ के गिरता रहे , लेकिन कुछ बहादुर वीरों के कारनामे छुपाए भी नही छुप सके जैसै राणा प्रताप , क्षत्रपती शिवाजी व जाट् सामराज्य। अगर मुघल कभी राजपूतों से जीत पाए थे तो सिर्फ मेवाड़ के राणा प्रताप से हल्दी घाटी युद्घ में अकबर की इतनी बड़ी सेना क्यों नही जीत पाई जब की उस वक्त राणा जी मेवाड़ भी खो चुके थे अत: उनकी आधी सेना मुघलों के चितौड़ आक्रमण में ही समाप्त हो चुकी थी बावजूद इसके नपुंसक व हवसी अकबर क्यों नही जीत पाया ।। अत: क्यों अकबर ने कभी राणा प्रताप का सामना नही किया !! क्योकी जो राणा का मात्र भाला ही 75 किलो का हो जो राणा रणभूमी में 250 किलो से अधिक वजन के अश्त्र शश्त्र लेके पूरा दिन रणभूमी में एसे लड़ता हो जैसे खेल रहा हो उसका सामना करना मौत का सामना करने के बराबर हे और यह बात अकबर को तब पता चली जब राणा प्रताप ने अकबर के सबसे ताकतवर सेनापती व सेना नायक बहलोल खाँ को अपने भाले के प्रथम प्रहार में नाभी से गरदन तक के धड़ को सीध में फाड़ दिया था ।। इस घटना की खबर सुनकर अकबर इतना डर गया की वह स्वयम कभी राणा प्रताप से नही लड़ा अब जरा यह सोचिए की सिर्फ कुछ वीरों ने अकबर की सेना को इस तरह नुकसान पहुचाया तो क्या किसी भी तुर्क मुघलिया, अफगानी या कोइ अन्य नपुंसक किन्नर फौज में इतना दम था कि पूरे राजपूताना , पूरा मराठा व सम्पूर्ण जाटों से लड़ पाते !! ना तो इनमें इतना साहस था ना ही शौर्य इन्का साहस तो गंदे राजनितिक कीड़ो ने झूटी किताबों में लिखवाया है !! 12 – प्रथवीराज रासो जो कि चंद्रबरदाई (प्रथवी राज के दरबार में मंत्री) द्वार की गई रचनात्मक किताब को राजनितिक तरिके से पहले उसके साक्षों को नष्ट करवा दिया गया बाद में एतिहासिक दर्जे से हटा कर मात्र पौराणिक कहानी सिद्ध करवा दिया । नोट – भारतीय इतिहास मे लिखित तौर पर सिर्फ उन वंशों का भारी जिक्र हे जिनके वंश और रियासत पूर्ण रूप से समाप्त हो चुकीं है मत्लब इनके गौरवशाली इतिहास से पंडित नेहरू की सत्ता को कोइ भी क्षती नही पहुचनी थी क्यों की राजपूत , मराठा और जाट इत्यादी यह वो ताकतवर रियासतें हें जिनका अस्तित्व आज भी जीवित है ।। े 13 – मात्र बुंदेला राजपूतों ने मराठों के साथ मिलकर अपने सामराज्य से अकबर के पुत्र एवं उत्तराधिकारी जहांगीर ( कच्छवाहा राजपूतों की परसियन दासी मरियम-उज्-जवानी का पुत्र था ) को अपने राज्य क्षेत्र से खदेढ़ दिया था ।। 14- जहांगीर की माँ व अकबर की बेगम मरियम उज्जवानी(जोधा) अगर राजपूत होती तो अपने पुत्र जहांगीर को बुंदेला राजपूत व मराठों से कभी लड़ने ना देती !! और वैसे भी किसी तुर्की का विवाह किसी असली राजपूत से कर दिया जाए तो वह या तो क्रोध से मर जाएगा या फिर अपने रहते उस तुर्क को जिंन्दा नहीं रहने देगा ।। 15 – अब सवाल यह उठता है की अजकल के यह मन घड़ित नाटक(सीरियल) क्यों चलाए जाते है यह इसलिए क्यों की यह इतिहास के किसी भी पन्ने में दर्ज नही है कि मरियम जिसे हम जोधा बोलते हैं वह राजपूत थी दूसरी बात ये की यह एक विवादित मुद्दा है। जिसका राजपूत समुदाय कड़ा विरोध करता है इसलिये यह विवादों में आ जाता है और इस झूटे सीरियल को फ्री की प्बलिसिटी मिल जाती है जिसका लाभ प्रोड्यूसर(एकता कपूर) को मिल जाता है !! और कुछ मासूस हिन्दू लड़कियाँ इस झूठी लव स्टोरी वाले सीरियल को देखकर अकबर के प्रती इम्प्रेस हो जाती है जो की एक कायर और एक अत्याचारी व क्रूर शासक था जिसने लाखों औरतों को अपने हरम का जबरन शिकार बनाया उनकी मजबूरियों का फाएदा उठाकर ।।और आजकल की मोर्डन लड़कियाँ बड़े आसानी से लव जिहाद (इसका मतलब धर्म को बड़ाना ज्यादा से ज्यादा लोगों को मुसलमान बनाना मार के जबरन या प्यार से भी ) का शिकार बन जातीं है और किसी बी मुसलमान लड़के के झूटे प्यार में फस जातीं है , बाद में जों होता है उसे में यहाँ लिख नही सक्ता लेकिन इन सब के पीछे इस्लामिक कट्टरता और धार्मिक राजनीति होति है जिसमें वर्षो से कान्ग्रेस का हाथ रहा है लिकिन हकीकत तो यही ह मित्रों की अकबर एक क्रूर व अत्याचारी शासक था !! जिसने अपना झूटा इतिहास लिखवाया और मरियम(जोधा) जो कि खुद एक दासी होकर भी अकबर की बेगम नहीं बनना नही चाहती थी ।। ँ 16- अकबर की अकबरनामा जिसे कुछ मूर्ख अकबर की आत्मकथा कहते है वह उसकी आत्मकथा नहीं कहला सक्ती क्योकी आत्म कथा एक मनुष्य खुद लिखता है और अकबर एक अनपढ़ शाषक था अकबर नामा के रचनाकार मोहोम्मद अबुल फजल थे जो की अकबर के उत्तीर्ण दर्जे ( उच्च कोटी ) के चाटुकार थे अब अगर वो उसमें ये भी लिख देते की अकबर आसमान के तारे गिनने की क्षमता रखता था तो आप आज एक्झाम में इस प्रश्न को भी पढ़ रहे होते ।। 17 क्षत्रपती शिवाजी ने ओरंगजेब के कई बार दांत खट्टे किये और उससे कई महत्वपूर्ण राज्य छीन लिए और अपने राज्य को स्वतंत्र राज्य बनाया ।। मालुम हो कि शिवाजी ने अपना सामराज्य का जमीनी स्तर से विस्तार किया था जब की औरंगजेब को सत्ता विरासत में मिली थी और शिवाजी ने अपने सामराज्य को इस कदर ताकतवर बनाया कि मुघल आँख उठाकर देखने की भी चेष्ठा ना करें बाद में ओरंगजेब ने संधी करने के लिए शिवाजी को आगरा बुलाया और छल पूर्वक शिवाजी को बंधी बना लिया और आगरा किले में कैद कर लिया और शिवाजी के सभी राज्यों को हड़प लिया अंत: शिवाजी काराग्रह से भाग गए और अपने सभी राज्य ओरंगजेब से छीन लिए ।। 18- औरंगजेब को जब अकबर का विवाह दासी की पुत्री से होने वाली बात पता चली तो उसने अकबर के द्वारा हटाए गए जिजया कर(tax for non muslims) और महसूर कर(tax for hindus for doing tirath तीर्थ) को दोबारा चलवाया इसके साथ – साथ उसने इस्लामिक कट्टरवाद को बड़ावा दिया जो कि मुघलिया सल्तनत के पतन का कारण बनी अंत: राजपूतों , मराठों , जाटों ने मिलकर मुघलों को खत्म कर डाला और यह थी इतिहास की पहली क्रांती इसके बाद अंग्रेजों का विस्तार हुआ जिन्हें मुघलों ने ही निमंत्रण दिया था ।। 19- नेशनल जियोग्रेफिक(National Geographic Channel) चैनल पर (डेड्लीलीएस्ट वारीयर/Deadliest warrior) नाम के कार्यक्रम में बहुत से विदेशी इतिहासकारों ने दावा किया है की हल्दीघाटी त्रतीय युद्घ में राणा प्रताप की 20,000 की जन संख्या वाली सेना जिसमे ब्राहमण वैश्य शूद्र व सभी जाती के लोग अकबर की 60,000 की आबादी वाली सेना से लड़े थे जिसमें युद्ध का कोई परिणाम नही निकला या ये कहलो की अकबर की सेना को रण भूमी छोड़ भागना पड़ गया ।। े याद रहे विक्कीपेडिया पर लिखी हर बात सच नहीं होती आप खुद भी उसमे मेनिपुलेशन (Manipulation)कर सक्ते हैं !! क्षत्रीयों का इतिहास क्षत्रीय बता सक्ते है और मुघलों का इतिहास कोन्ग्रेस ।। ऊपर लिखी गई सभी बातें सच हैं यदी अपने वीर पूर्वजों का सम्मान करते हो तो इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर कीजीये और पोस्ट पर अपनी राय जरूर दीजिए अगर आप एसा नहीं करते तो आप यह सिद्ध करते है कि हमारे पूर्वजों का बलिदान व्यर्थ है !! अन्त में बस यही कहना चाहुंगा की कुछ लोग हार के भी जीत जातेहैं, कुछ लोग जीत के भी हार जाते हैं… नहीं दिखते अकबर के बुत कहीं , राणा और क्षत्रपती के घोड़े हर चौराहे पे नजर आते हैं..

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આ કાશ્મીરની ખીણોમાં ડૉ. આદિલનો વૈભવી બંગલો છે.

બંગલાની સામે આશરે 8 એકર અને પાછળ 12 એકર જમીન છે.

ડૉ. આદિલ MBBS MD, ચીફ મેડિકલ ઓફિસર હતા અને VRS લીધા પછી, સહારનપુર મેડિકલ કોલેજમાં પ્રોફેસર હતા.

હવે વિચાર  કરો કે તેમની પાસે શું અભાવ હતો કે તેઓ માત્ર એક ભયાનક આતંકવાદી બન્યા સાથે  તેમણે ચાર વધુ ડૉક્ટરોને આતંકવાદી બનાવ્યા.

અને તેમનું લક્ષ્ય 500 કિલોગ્રામ RDX એકત્રિત કરવાનું હતું જેથી તેઓ આખી દિલ્હીને ઉડાવી શકે.

પુલવામા હુમલામાં 30 થી 40 કિલોગ્રામ RDXનો ઉપયોગ કરવામાં આવ્યો હતો.

અને આ 30 થી 40 કિલોગ્રામ RDX એટલું ઘાતક હતું કે તેમાં આપણા 60 થી વધુ સૈનિકો શહીદ થયા.

આજ સુધી, કોંગ્રેસના …રા વારંવાર પૂછે છે કે પુલવામા હુમલા માટે RDX ક્યાંથી આવ્યું.

તમે કોંગ્રેસી ઓ, ડૉ. આદિલે ફરીદાબાદ મેડિકલ કોલેજના લોકરમાં ૩૦૦ કિલોગ્રામ RDX છુપાવી રાખ્યો હતો.

મને આ ખબર છે. એવું કહેવામાં આવી રહ્યું છે કે તે કાશ્મીરથી RDX લાવ્યો હતો.

કારણ કે તે એક ડૉક્ટર હતો, તેની કાર પર ડૉક્ટરનું સ્ટીકર હતું. જ્યારે પણ તેની કાર તપાસ માટે રોકાતી ત્યારે તે પોતાનું ઓળખપત્ર બતાવતો. તે એક મેડિકલ કોલેજમાં પ્રોફેસર હતો અને કાશ્મીર મેડિકલ સર્વિસમાંથી નિવૃત્ત થયો હતો, તેથી સુરક્ષા એજન્ટોને તેના પર શંકા નહોતી.

અને આ રીતે તેણે ૩૦૦ કિલોગ્રામ RDX એકત્ર કર્યું.

જો આ ૩૦૦ કિલોગ્રામ RDX ફૂટ્યો હોત, તો આખું ફરીદાબાદ શહેર ઉડીને ખાખ થઈ ગયું હોત.

હવે કોંગ્રેસના ….ઓને પુલવામા હુમલા માટે RDX ક્યાંથી આવ્યો તેનો જવાબ મળી ગયો હશે.

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

નવેમ્બર 10, 1659  – અફઝલ ખાન નો વધ:-
અફઝલ ખાનને બીજાપુર તરફ થી  છત્રપતિ શિવાજી મહારાજ સામે મોકલવામાં આવ્યો હતો.  અફઝલખાન 10 હજારની ફોજ સાથે રવાના થયો.  અફઝલ ખાને શપથ લીધા કે “હું શિવાજીને ઘોડા પર બેસાડીને બાંધીને લાવીશ”.

શિવાજી મહારાજ અને અફઝલ ખાન વચ્ચે પત્રવ્યવહાર થયો હતો, જે અંતર્ગત બંને સમાધાન કરવા માટે સંમત થયા હતા.  શિવાજી મહારાજે પેશ્વા અને સેનાપતિ નેતાજી પાલકરના નેતૃત્વમાં બે મોટી સેનાઓને પ્રતાપગઢના જંગલોમાં છુપાઈ જવાનો આદેશ આપ્યો.  કૃષ્ણજી ભાસ્કરે પહેલેથી જ શિવાજી મહારાજને અફઝલ ખાનની યોજનાની જાણ કરી દીધી હતી.

અફઝલખાનના છાવણીની નજીક ગયા પછી, શિવાજી મહારાજે સંદેશો મોકલ્યો કે “સૈયદ બંદાને સભા સ્થળેથી હટાવવા પડશે.”  પછી એવું જ કરવામાં આવ્યું.  શિવાજી મહારાજ અંદર ગયા, જ્યાં બંને બાજુ 4-4 લોકો હતા.   પોતે, 2-2 અંગરક્ષકો અને 1-1 બ્રાહ્મણ સંદેશવાહક.

જ્યારે બંને પક્ષો મળ્યા ત્યારે શિવાજી મહારાજ નિઃશસ્ત્ર દેખાયા, પરંતુ અફઝલ ખાન તેની તલવાર લટકાવી હતી.  અફઝલખાન તંબુની વચ્ચે પ્લેટફોર્મ પર બેઠો હતો.  શિવાજી મહારાજ પ્લેટફોર્મ પર ચઢ્યા.  શિવાજી મહારાજની ઊંચાઈ માત્ર અફઝલ ખાનના ખભા સુધી પહોંચી હતી.

જ્યારે ગળે મળવાનો સમય આવ્યો ત્યારે અફઝલ ખાને પોતાના ડાબા હાથથી શિવાજી મહારાજનું ગળું દબાવી દીધું અને જમણા હાથથી ખંજર કાઢીને શિવાજી મહારાજની ડાબી બગલમાં ભોંકી દીધું, પરંતુ શિવાજી મહારાજે પહેલેથી અંદર બખ્તર પહેરેલું હતું, જેના કારણે અફઝલ ખાનનો હુમલો નિરર્થક ગયો.

શિવાજી મહારાજે વાઘ નખ   થી  અફઝલખાંન ના આંતરડાં ફાડી નાખ્યાં અને બીજા હાથ વડે ખંજર કાઢીને અફઝલખાનની બગલમાં ઘા માર્યો.  અફઝલખાન રડ્યો અને બૂમો પાડવા લાગ્યો, “મને મારી નાખ્યો, મારી નાખ્યો, મને દગો આપીને મારી નાખ્યો.”

શિવાજી મહારાજ સ્ટેજ પરથી કૂદીને પોતાના માણસો તરફ દોડ્યા.  ત્યારે સૈયદ બંદાએ હુમલો કરીને શિવાજી મહારાજની પાઘડી ના બે ટુકડા કરી નાખ્યા.  શિવાજી મહારાજે પહેલેથી જ તેમની પાઘડીની અંદર લોખંડની ટોપી પહેરેલી હતી, તેથી માથામાં ઘા થયો ન હતો.  દરમિયાન જીવ મહાલાએ સૈયદ બંદાનો એક હાથ કાપી નાખ્યો અને બીજા હુમલામાં સૈયદ બંદાનું મોત થયું.

અફઝલખાનના માણસોએ ઘાયલ અફઝલખાનને પાલખીમાં બેસાડ્યો અને તેને લઈ જવા લાગ્યો, પરંતુ શંભુજી કાવજીએ અનુયાયીઓનાં પગમાં અથડાવીને પાલખીને પડી ગઈ અને અફઝલખાનનું માથું કાપી નાખ્યા પછી તેણે પોતાને શિવાજી મહારાજ સમક્ષ રજૂ કર્યો.  શિવાજી મહારાજે પ્રતાપગઢ કિલ્લામાં જઈને પોતાના સૈનિકોને તોપ ચલાવીને સંકેત આપ્યો, જેના કારણે મોરો ત્ર્યંબક અને નેતાજી પાલકરે હજારોની સેના સાથે બીજાપુરની સેનાને ઘેરી લીધી.

બીજાપુરી સેનાના ઘણા ઊંટ, હાથી અને 3000 સૈનિકો માર્યા ગયા.  શિવાજી મહારાજની સેનાએ 65 હાથી, 4000 ઘોડા, ઘણા ઊંટ, 2000 કપડાના બંડલ, રૂપિયા અને 10 લાખની કિંમતના ઘરેણાં છીનવી લીધા.  અફઝલ ખાનના બે પુત્રો, બે મદદગાર મરાઠા જમીનદારો અને ઉચ્ચ કક્ષાના કમાન્ડરને કેદ કરવામાં આવ્યા હતા.

અફઝલ ખાનની સ્ત્રીઓ અને તેનો મોટો દીકરો ફઝલ ખાન ભાગવામાં સફળ રહ્યા.  શિવાજી મહારાજની આજ સુધીની આ સૌથી મોટી જીત હતી અને આ જીતે આખા ભારતમાં શિવાજી મહારાજનો જય જય કાર થયો હતો.  તેમણે વિજેતાઓ અને શહીદ થયેલા લોકોના પરિવારજનોને પૈસા, ઈનામ વગેરે આપ્યા.

આપણી સંસ્કૃતિ આપણો વારસો

#છત્રપતિસંભાજીમહારાજ
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राहुल गांधी किसके एजेंट हैं  ?

भारत विरोधी कांग्रेस का अत्यंत घातक होता स्वरूप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सनसनीखेज खुलासे से कांग्रेस और उसके सर्वोपरि नेता राहुल गाँधी कठघरे में खड़ी हो गये है. दूसरी बार राष्ट्रपति निर्वाचित होने वाले डोनाल्ड ट्रंप “अमेरिका फर्स्ट” की नीति पर चलने वाले व्यक्ति हैं, जो अपने बिना लाग लपेट वाले बयानों के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने कहा है कि अमेरिका की पूर्ववर्ती जो बाइडेन सरकार भारत की चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करके नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल कर किसी और को जितना चाहती थी, जिसके लिए यूनाइटेड स्टेटस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) के अंतर्गत ₹182 करोड़ खर्च किए गए. तमाम घटनाक्रमों की कड़ियां जोड़ने से पता चलता है ये नेता राहुल गाँधी और राजनीतिक दल कांग्रेस है जिसे सत्ता में लाने की तैयारी की गई थी.

ऐसा नहीं है कि इसकी भनक केंद्र सरकार को नहीं थी क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कम से कम चार जनसभाओं में स्पष्ट रूप से कहा था कि दुनिया की कई शक्तियां भारत के चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहीं हैं लेकिन भारत के मतदाता काफी परिपक्व है, इसलिये ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे. एक टीवी चैनल से साक्षात्कार में भी मोदी ने यही बात दोहराई थी लेकिन उनकी बात को केवल राजनीतिक बयानबाजी समझा गया और शायद इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जितना लिया जाना चाहिए था. भारत के चुनाव प्रभावित हुए भी और इसलिए भाजपा की मोदी सरकार को तीसरे कार्यकाल के लिए पूर्ण बहुमत नहीं मिला और उसके सांसदों की संख्या घटकर 240 रह गई यद्यपि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की सहायता से भाजपा सरकार बनाने में सफल हो गई. इस तरह विदेशी शक्तियों का नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल करने का प्रयास सफल नहीं हो सका. डोनाल्ड ट्रंप की यह बात भारत के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है कि रूस द्वारा अमेरिका के चुनावों को प्रभावित करने के लिए केवल ₹1.73 लाख का इंटरनेट विज्ञापन अमेरिका में मुद्दा बन गया और इसे बड़ी साजिश करार दिया गया लेकिन भारत के चुनाव में चुनाव प्रभावित करने के लिए ₹182 करोड़ खर्च करना मुद्दा बनना तो दूर इस पर चर्चा तक नहीं हुई. ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत सरकार को इस मामले पर पूरी जानकारी लेनी चाहिए और इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए.

डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ लेने के तुरंत बाद एक सरकारी दक्षता विभाग की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य सरकारी खर्चों में कमी करना है. इस विभाग की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि बांग्लादेश में राजनैतिक स्थिति मजबूत करने के लिए 29 मिलियन डॉलर खर्च किए गए जिस कारण शेख हसीना को सत्ता से पदच्युत होकर देश छोड़कर भागना पड़ा. इसके बाद भारत में कई कांग्रेसी और विपक्षी नेताओं ने भारत में भी बांग्लादेश जैसे हालात होने भविष्यवाणी कर दी थी. इसलिए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है. हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए भारत को दी जाने वाली 21 बिलियन डॉलर की यूएसएड फंडिंग को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि भारत संपन्न लोकतंत्र है और उसे मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विदेशी धन की आवश्यकता नहीं है जो बिलकुल सही है.

यूएसएआईडी का धन भारत में कंसोर्टियम फॉर इलेक्शंस एंड पॉलिटिकल प्रोसेस स्ट्रेंथनिंग (सीईपीपीएस) के माध्यम से पहुंचा जिसके तीन गैर सरकारी संगठन भारत में काम करते हैं  जो क्रमशः आईईएफएस- चुनाव जागरूकता के लिए, एनडीआई-लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए और आईआरआई-भागीदारी बढ़ाने के लिए काम करते हैं. इस धन से रैलियां, डोर-टु-डोर कैंपेन और वर्कशॉप चलाए गए। कुछ विशेष क्षेत्रों  में मतदान को बढ़ाने के लिए भी खर्च किया गया। मीडिया प्रचार और केंद्र सरकार के खिलाफ विमर्श बढ़ाने के लिए प्रचार किया गया। इन संगठनों के माध्यम से यह धन गैर सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटी समूहों, राजनीतिक पार्टियों सहित पत्रकारों, यूट्यूबरों सोशल मीडिया इन्फ्लूएन्सर्स को दिया गया था  
भारत में यूएसएआईडी से मिली मदद का इस्तेमाल जिस संस्था के जरिए हुआ उसका जॉर्ज सोरोस से संबंध है, जो कई देशों में सत्ता परिवर्तन करके वहां की अर्थव्यवस्था चौपट करने के लिए कुख्यात हैं और वह कई बार भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार को हटाने के लिए मुहिम चलाने की खुली घोषणा करते रहे हैं. जॉर्ज सोरोस की संस्थाओं को भी यूएसएआईडी से सहायता मिलती रही है जो ओवरसीज कांग्रेस तथा राजीव गाँधी फाउंडेशन को भी फंडिंग करती हैं. इस तरह कांग्रेस और जार्ज अब सोरोस के बीच सम्बन्ध स्पष्ट प्रमाणित होते हैं. सबसे बड़ी बात ये है कि भारत में मतदान बढ़ाने के नाम पर जिस एनजीओ को पैसा मिला, उसने एक शोध पत्र प्रकाशित कर दावा किया था कि भारत में दलित और पिछड़े वर्ग के वोटर्स वोटिंग में कम हिस्सा लेते हैं, इसलिए उन तक पहुंचने और उन्हें मतदान के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है, जिसके लिए इस धन का इस्तमाल किया जा रहा है, जिससे भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा. प्रश्न यह उठता है कि कोई विदेशी संस्था भारत के दलितों और पिछड़ों की इतनी चिंता क्यों करेगी और भारत का लोकतंत्र मजबूत करने के लिए काम क्यों करेगी. राहुल गाँधी ने इसके तुरंत बाद जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया और कहाँ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाएगी. विदेशों में जाकर ज़ोर शोर से मुद्दा उठाया कि भारत में लोकतंत्र समाप्त की ओर है और भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सभी संस्थाओं पर बलात कब्जा कर लिया है. राहुल ने यूरोप और अमेरिका से अपील की थी कि वे चुप न बैठें बल्कि भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस की सहायता करें.

राहुल गाँधी अपने विदेश दौरे में भारत विरोधी विवादित व्यक्तियों से मिलते रहे हैं और उनकी सभाओं का प्रबंधन भी ऐसे संगठन और व्यक्ति करते थे जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारत विरोध के लिए जाने जाते हैं. विदेशों में राहुल ने भारत की जितनी छवि खराब की उसका अन्य कोई राजनीतिक उदाहरण नहीं मिलता. उनके भाषणों और बयानों का सार संछेप यहीं रहता था कि दुनिया के सभी लोग चाहे वह भारत विरोधी हो आतंकवादी हो या कोई भी हो मोदी सरकार को हटाने के लिए उनकी सहायता करें. राहुल गाँधी की भारत जोड़ों यात्रा में जॉर्ज सोरोस के संगठनों की प्रत्यक्ष भूमिका रही है और उनके संगठनों के अधिकारी और कर्मचारियों राहुल गाँधी के साथ यात्रा में चलते देखे गए हैं. इस यात्रा पर पैसा पानी की तरह बहाया गया. विदेशों में राहुल गाँधी ने ऐसे सभी संगठनों से सहायता प्राप्त करने की कोशिश की जो न केवल भाजपा बल्कि भारत और हिंदुत्व के विरोधी जाने जाते हैं. जिसमें वामपंथी संगठनों सहित कई इस्लामिक कट्टरपंथी और आतंकवादी संगठन भी शामिल रहे हैं. वायनाड में चुनाव लड़ते समय भी उन्होंने भारत और हिंदू विरोधी संगठनों की सहायता ली थी. अपने चुनावी भाषणों में भी जातिगत जनगणना के अलावा हिन्दुत्व को भी कटघरे में खड़ा करते रहे हैं.

ये समझना मुश्किल है कि पिछले 10 सालों से काम कर रही मोदी सरकार इन संस्थाओं और इनको मिलने वाले धन पर अंकुश क्यों नहीं लगा पाई विशेषकर तब जबकि सरकार को भारत और स्वयं मोदी सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र रचे जाने की पूरी जानकारी थी. इसमें कोई दो राय नहीं कि मोदी और सरकार विरोधी विमर्श बनने से कांग्रेस को बहुत फायदा हुआ और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी सदस्य संख्या बढ़कर 99 हो गई जो 2019 की तुलना में दोगुनी है, वही इसका नुकसान भाजपा को हुआ जिसकी सदस्य संख्या घटकर 240 रह गई. मोदी सत्ता से बाहर होते होते बाल बाल बच गए लेकिन इसके बाद भी कई अमेरिकी अधिकारी चंद्रबाबू नायडू, ओवैसी सहित कई विपक्षी नेताओं से मिले, जो सामान्य घटनाक्रम नहीं है और यह सरकार गिराने की कोशिश हो सकती है.

ट्रंप की जीत के बाद अमेरिका के डीप स्टेट का मनोबल टूट गया है और हिंडन वर्ग जैसी विमर्स बनाने वाली संस्थाएँ बंद भी हो गयी है, लेकिन भारत विरोध का अंतर्राष्ट्रीय सिलसिला अभी रुका नहीं है. इस देश को कांग्रेस से कोई बहुत उम्मीद नहीं रखनी चाहिए क्योंकि नेहरू कार्यकाल से ही गाँधी परिवार और कांग्रेस की नीतियों का राष्ट्र हित से कोई लेना देना नहीं रहा हैं. कांग्रेस की जो स्थिति आज हैं, उसमें वह अपने स्वार्थ के लिए भारत को औने पौने बेच सकती है. राहुल का कद बढ़ाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी बहुत बड़ा हाथ है. कोई नहीं समझ पा रहा कि यंग इंडिया घोटाले का मामला क्यों बंद पड़ा है, राहुल की राष्ट्रीयता के मुददे पर क्यों कोई कार्रवाई नहीं हुई. देश की राष्ट्रभक्ति जनता को न केवल सरकार पर पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लेकर नीर छीर विवेचन के लिए दबाव डालना चाहिए बल्कि राष्ट्र के लिए कांग्रेस जैसी घातक होती जा रही संस्था से सावधान भी रहना चाहिये।

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૧૯૫૨ ની પહેલી સામાન્ય ચૂંટણી. લોકસભા માટે પડેલા મતપત્રો અલગ અલગ બોક્સમાં મૂકવામાં આવ્યા હતા, જેમાં દરેક ઉમેદવારોના નામ હતા. પક્ષોને નંબર આપવામાં આવ્યા હતા, અને કોંગ્રેસ પક્ષ સૌથી મોટો હતો. કલેક્ટર રિટર્નિંગ ઓફિસર હતા. ચૂંટણી પછી, બોક્સ ખાલી કરવામાં આવ્યા હતા અને મતદાન મથકની બહાર મતોની ગણતરી કરવામાં આવી હતી. બધા ખાતા જિલ્લા સ્તરે લાવવામાં આવ્યા હતા, અને પરિણામો જાહેર કરવામાં આવ્યા હતા.
કોંગ્રેસ બધે જીતી રહી હતી. જવાહરલાલ નેહરુ તીન મૂર્તિ ભવનમાં બેઠા હતા, ભારતના દરેક ક્ષેત્રના સમાચાર પર નજર રાખી રહ્યા હતા. પછી સમાચાર આવ્યા કે મૌલાના અબુલ કલામ આઝાદ ઉત્તર પ્રદેશના રામપુરથી ચૂંટણી હારી ગયા છે. નેહરુ પોતાની ખુરશી પરથી ઉભા થયા અને કહ્યું, “આ અશક્ય છે. હું મૌલાના વિના સરકાર બનાવવાની કલ્પના પણ કરી શકતો નથી.” તરત જ, ઉત્તર પ્રદેશના મુખ્યમંત્રી ગોવિંદ વલ્લભ પંતને ફોન કરવામાં આવ્યો. પંતે કહ્યું કે મૌલાના ૨૦,૦૦૦ મતોથી હારી ગયા છે. નેહરુએ કહ્યું, “હું કંઈ સાંભળવા માંગતો નથી. મૌલાના ને ગમે તે સંજોગો મા જીતાડો, ભલે ગમે તે કરો.” અને જો મૌલાના  નહીં જીતે , તો તમે મુખ્યમંત્રી નહીં રહો.
કોઈ શું કરી શકે? તરત જ ડીએમને ફોન કરવામાં આવ્યો. ડીએમએ કહ્યું, “સાહેબ, મેં વંશ નારાયણ દાસને પણ પ્રમાણપત્ર આપી દીધું છે.” તેમને પણ નેહરુ જેવી જ ધમકી આપવામાં આવી હતી કે જો તેઓ ડીએમ રહેવા માંગતા હોય તો મૌલાના સાહેબ ને જીતાડો.”
કલેક્ટરે વંશ નારાયણ દાસ પાસેથી પ્રમાણપત્ર પાછું લઈ લીધું. તેમણે મૌલાનાના ડબ્બામાં પડેલા મતો મેળવીને તેમને વિજયનું પ્રમાણપત્ર આપ્યું. પાછળથી, આ જ મૌલાના શિક્ષણ પ્રધાન બન્યા.
તો, બીજી મત ચોરી નહેરુ દ્વારા કરવામાં આવી.
સૌ પ્રથમ,  પટેલના પક્ષમાં મત હોવા છતાં નહેરુને પીએમ બનાવવાનું દુઃસાહસ કોણે કર્યું હતું?

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एक जिम्मेदार विपक्ष क्या होता है आपको इस तस्वीर से पता चलेगा

यह तस्वीर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट का है

तस्वीर में तीन प्रमुख लोग हैं इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थी शेख मुजीबुर रहमान और उस वक्त भारत में विपक्षी दल जनसंघ के प्रमुख केदारनाथ साहनी

यह तस्वीर तब की है जब ईरान के शाह के दखल से बांग्लादेश बनने के बाद पाकिस्तान ने शेख मुजीबुर रहमान को रिहा किया और उन्हें ईरान के एक विमान से दिल्ली भेजा गया

अब यह सोचिए कि उस वक्त विपक्ष कितना जिम्मेदार हुआ करता था

विपक्ष दल। जनसंघ के नेता केदारनाथ साहनी इंदिरा गांधी के साथ शेख मुजीबुर रहमान को रिसीव करने पालम एयरपोर्ट पर गए थे

बांग्लादेश बनने से भारत का कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि भारत ने अपने 40 लड़ाकू विमान खो दिए दो युद्धपोत और चार पनडुब्बी खो दिए एक विशाल युद्धपोत INS खुखरी  पर एडमिरल महेंद्र नाथ मुल्ला 176 नौसैनिकों और 18 नौसैनिक अधिकारियों अपने युद्धपोत के साथ  यह कह कर जल समाधि ले लिए कि मैं अपने युद्धपोत को पर तब जब तक नहीं छोडूंगा जब तक हर एक सैनिक बचा नहीं लिया जाता

पाकिस्तान की टारपीडो ने आईएनएस खुखरी। पर हमला किया और इसमें सिर्फ 44 भारतीय नौ सैनिक ही बचाए जा सके 200 से ज्यादा नौसेना के जवान और  अधिकारी मारे गए जिसमें इसके मुख्य एडमिरल महेंद्र नाथ मुला भी थे

पाकिस्तान की कैद में 40 भारतीय सैनिक अधिकारी थे जिसमें से पांच पाकिस्तान को चकमा देकर भाग निकलने में कामयाब हो गए थे

मैं कभी फ्लाइंग लेफ्टिनेंट कंवलजीत मेहरा की कहानी लिखूंगा जिनके हंटर विमान पर पाकिस्तानियों ने भारी गोलीबारी करके गिरा दिया था कंवलजीत मेहरा इज्जेक्ट  कर गए और  1 महीने कितनी नरक झेले उनके दोनों पैर टूट गए थे कंधा टूट गया था फिर भी वह कितनी मुश्किल सहकर भारतीय सीमा में आए यहां तक कि भारतीय सैनिक उन्हें पहचान नहीं रहे थे

बांग्लादेश बनने में भारत सरकार के खजाने से उस जमाने में 4000 करोड़ रुपए खर्च हुए थे यहां तक कि भारत सरकार ने भारतीयों पर शरणार्थी टैक्स लगा दिया था क्योंकि बांग्लादेश के 3 करोड़  लोग भारत में शरण लिए थे

भारत के डेढ़ हजार अधिकारी और 5000 सैनिक शहीद हुए थे उसके बावजूद भी उस वक्त विपक्ष के नेता चाहे वह अटल बिहारी वाजपेई हो या जनसंघ के अध्यक्ष केदारनाथ साहनी हो एक जिम्मेदार विपक्ष के तौर पर भारत सरकार का साथ दिया उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि ये  भारत के पैसे की बर्बादी हो रही है

अब आप कल्पना करिए की क्या कांग्रेस विपक्ष में होती तो इतनी जिम्मेदारी का परिचय देता

हम सब ने ऑपरेशन सिंदूर के समय देख लिया कि कांग्रेस ना तो सत्ता में सही है न  विपक्ष की भूमिका में सही है

कांग्रेसी गद्दार है कांग्रेस देशद्रोही है कांग्रेस भ्रष्टाचारी है

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*” સવાયા ગુજરાતી: ફાધર વાલેસ. “*

           એક એવી વ્યક્તિ વિશેષ, જેનો જન્મ સ્પેન માં થયો છે, અભ્યાસ અને ઉછેર પણ ત્યાં જ થયો છે. ૧૯૪૯ માં ભારત આવે છે. ૧૯૫૦ માં મદ્રાસ માં ગણિત ની એમ. એ. ની ડિગ્રી લઈ ને ગુજરાત આવે છે. ગુજરાતી ભાષા શીખવા ના દ્રઢ નિર્ધાર સાથે આવે છે. અને પછી વલ્લભવિદ્યાનગર માં રહી ને ગુજરાતી ભાષા શીખે છે. પછી અમદાવાદ ની સેન્ટ ઝેવિયર્સ કોલેજ માં અધ્યાપક તરીકે જોડાય છે. અને ત્યાં થી તેમનું ગુજરાતી સાહિત્ય સર્જન શરૂ થાય છે.
       હા, આપણે વાત કરીએ છીએ ફાધર વાલેસ ની. જેમની ઓળખ સવાયા ગુજરાતી ની છે. ગુજરાતી ભાષા અને સાહિત્યને સમૃદ્ધ બનાવવા માં તેમનો સિંહફાળો રહ્યો છે. ૧૯૬૬ માં તેમને કુમાર ચંદ્રક મળ્યો, જે મેળવનાર તેઓ પહેલા ગુજરાતી હતા. તેમણે ૭૦ થી વધુ પુસ્તકો લખ્યા, ફાધર વાલેસ લેખ સંચય, ૨૪ અંગેજી પુસ્તકો અને ૪૨ સ્પેનિશ પુસ્તકો લખ્યા છે.
      ફાધર વાલેસે ગુજરાત માં ૪૦ થી વધુ વર્ષો વિતાવ્યા. સ્પેન ના લા ગ્રોનીઓ માં ૧૯૨૫ ની ૪ નવેમ્બરે જન્મેલ ફાધર વાલેસ નું અવસાન ૯ મી નવેમ્બર, ૨૦૨૦ ના દિને સ્પેન ના મેડ્રિડ માં થયું. આજે તેમની પાંચમી પુણ્યતિથિ છે. નિવૃતિ બાદ તેઓ સ્પેન સ્થાયી થયા હતા. ગુજરાતી સાહિત્ય અને શિક્ષણ માં અમૂલ્ય યોગદાન માટે તેમને ૨૦૨૧ માં પદ્મશ્રી (મરણોતર) થી સન્માનિત કરવા માં આવ્યા હતા. અમદાવાદ સહિત સમગ્ર ગુજરાત માં તેમના ચાહકો તેમને પ્રેમ થી ફાધર વ્હાલેશ કહેતા. આવા અનોખા એવા ચિંતક, લેખક, નિબંધકાર અને ગણિત ના અધ્યાપક એવા ફાધર વાલેસ ની પાંચમી પુણ્યતિથિ એ ભાવભરી શ્રદ્ધાંજલિ.

              – પારસ મકીમ
              ફ્રી લાન્સ કોલમ લેખક
              જામનગર.
              ૯૪૨૮૬ ૭૦૫૫૫.

લખ્યા તા. ૦૯/૧૧/૨૦૨૫.

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एक वायरल और मज़ेदार व सच्ची पोस्ट! 😳

कुछ दिन पहले मैंने Google पर सर्च किया कि
“हेलीकॉप्टर की कीमत कितनी होती है ? “

तब से मेरी ज़िंदगी तबाह हो गई।
“चाहे  कहीं भी जाऊँ,
YouTube, Facebook, Instagram हर जगह से मुझ पर लग्जरी विज्ञापनों की बौछार होना शुरू हो गई, जैसे कि –
बुर्ज खलीफा में अपनी छुट्टियाँ बिताएँ।
अपनी पत्नी को हीरे का हार उपहार में दें।
मिस्र के पिरामिड आपका इंतज़ार कर रहे हैं।
अभी iPhone 17 की प्री-बुकिंग करें।
कनाडा में अपने सपनों का घर खरीदें।
हमारे पास आपके लिए चाँद पर 5 एकड़ की बेहतरीन ज़मीन है।

फिर इस झंझट से बाहर निकलने के लिए कल रात मैंने सर्च किया, –
फटे हुए जूते कैसे ठीक करें ?

बस, समस्या हल हो गई।
अब विज्ञापन बदल के आना शुरू हो गए।
आज सुबह से ही Facebook, YouTube और Instagram पर मुझे इस तरह के विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं।
सिर्फ़ ₹370 में 2 जोड़ी सैंडल खरीदें
और ₹20 कैशबैक पाएँ
वाशिंग पाउडर फलाना सिर्फ ₹100 में
2 किलो के साथ में मग्गा फ्री।
आधा किलो सोन पापड़ी पर
पूरे 100 ग्राम नमकीन मुफ्त।
फटे जूते सस्ते दामों पर रिपेयर  करायें!
अब जिंदगी फिर से आसान लग रही है.!
🙄