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कांग्रेस द्वारा गुलामी का इतिहास पढ़ाने का दुष्परिणाम——-

बाबर का बेटा ?
हुमांयू

हुमांयू का बेटा ?
अकबर

अकबर का बेटा ?
जहाँगीर

जहाँगीर का बेटा ?
शाहजहाँ

शाहजहाँ का बेटा ?
औरंगजेब

महाराज शिवाजी के पिता का नाम – पता नहीं
महारानी लक्ष्मीबाई के पिता का नाम – पता नहीं
महाराणा प्रताप के पिता का नाम  – पता नहीं
गुरुगोविंद सिंह के पिता का नाम क्या – पता नहीं

स्वामी विवेकानंद जी के पिता का नाम – पता नहीं
स्वामी दयालनंद सरस्वती जी के पिता का नाम – पता नहीं

अशफाक उल्ला खान के पिता का नाम – पता नहीं

सुभाष चंद्र  बोस के पिता का नाम – पता नहीं
सरदार भगत सिंह के पिता का नाम – पता नहीं
चंद्रशेखर आजाद के पिता जी का नाम – पता नहीं

बटुकेश्वर दत्त के पिता का नाम – पता नहीं
मंगल पांडे के पिता जी का नाम – पता नहीं

अफसोस हममे से अधिकांश को नही पता है ।
मुझे भी नहीं पता.

पता भी कैसा रहेगा ।।

जब कांग्रेस ने हमें इतिहास में ये  पढ़ाया ही नहीं गया, हमें तो मुगल आक्रांता बाबर, औरंगजेब, अकबर  को महान  पढ़ाया गया।

इतिहास का सत्य आधारित पुनर्लेखन अपरिहार्य।

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હિન્દુઓમાં કેટલા જયચંદ છે? 😢

આ અભિનેતા અમોલ પાલેકર છે.

મોદી સત્તામાં આવ્યા પછી, તે INDEPENDENT AND PUBLIC-SPIRITED MEDIA FOUNDATION નામનું સંગઠન ચલાવે છે.

આ સંગઠન કુલ 45 મોદી વિરોધી, રાષ્ટ્ર વિરોધી અને હિન્દુ વિરોધી પોર્ટલ અને યુટ્યુબર્સને ભંડોળ પૂરું પાડે છે, જેમાં ધ વાયર, મુકનાયક, ધ પ્રિન્ટ, વિનોદ દુઆનું HW, બરખા દત્તનું મોજો, જન જ્વાર, એક પોર્ટલ જે આદિવાસીઓ અને દલિતોને ઉશ્કેરે છે, સ્વરાજ્ય, કારવાં અને જેહાદી ઝુબેરનું Alt Newsનો સમાવેશ થાય છે.

અમોલ પાલેકર પોતાના ફાઉન્ડેશન માટે વિશ્વભરમાંથી પૈસા એકઠા કરે છે અને મોદી સરકારને ઉથલાવી પાડવા અને દેશમાં અરાજકતા ફેલાવવા માટે હિન્દુ વિરોધી, રાષ્ટ્ર વિરોધી પોર્ટલ અને યુટ્યુબ ચેનલોને દાન કરે છે.
જ્યારે અમોલ પાલેકર રાહુલ ગાંધીની કૂચમાં જોડાયા, ત્યારે સ્પષ્ટ થઈ ગયું કે અમોલ પાલેકર પાછળ કોણ હતું. 😢

જ્યારે હું તેમની ફિલ્મો જોતો હતો, ત્યારે મને તે ખૂબ ગમતી હતી, પણ મને ખબર નહોતી કે તે આટલો મોટો સામ્યવાદી છે.

આ વ્યક્તિ ખૂબ જ ખતરનાક છે. 😘

સંજય દ્વિવેદી 💐

જય શ્રી રામ 💐

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રાહુલ ગાંધીની હાલત જુઓ.

તેમને તો ખબર પણ નથી કે બિહારમાં તેમના કેટલા ધારાસભ્યો જીત્યા.

બિહારમાં કારમી હાર પછી, જ્યારે બિહાર પ્રદેશ પ્રમુખે મલ્લિકાર્જુન ખડગેને રાજીનામું આપ્યું, ત્યારે મલ્લિકાર્જુન ખડગેએ કહ્યું, “ભાઈ, હું ફક્ત એક રબર સ્ટેમ્પ છું. તમારે રાહુલ ગાંધીને રાજીનામું આપવું જોઈએ.”

પછી, જ્યારે તેઓ રાહુલ ગાંધીને રાજીનામું આપવા ગયા, ત્યારે રાહુલ ગાંધીએ કહ્યું, “પહેલા બિહારમાં જીતેલા અમારા બધા ધારાસભ્યોને બોલાવો. હમણાં રાજીનામું ન આપો.”

ત્યારબાદ રાહુલ ગાંધી હોલમાં પ્રવેશ્યા, જ્યાં બિહારના છ કોંગ્રેસના ધારાસભ્યો સોફા પર બેઠા હતા.

રાહુલ ગાંધીએ પછી પૂછ્યું, “બીજા ક્યાં છે? બધાને અંદર બોલાવો.”

રાજેશ રામે પછી કહ્યું, “સાહેબ, બિહારમાં અમારા ફક્ત છ ધારાસભ્યો જીત્યા.” રાહુલ ગાંધીને વિશ્વાસ ન હતો. “કલ્પના કરો કે આ મૂર્ખને ખબર પણ નથી કે તેણે બિહારમાં કેટલા ધારાસભ્યો જીત્યા છે.”

અને પછી રાહુલ ગાંધીને એમ કહીને શાંત કરવામાં આવ્યા કે, “સાહેબ, ૨૦૧૦ થી અમારા પ્રદર્શનમાં નોંધપાત્ર સુધારો થયો છે. ૨૦૧૦ માં, અમારા ફક્ત ચાર ધારાસભ્યો જીત્યા હતા, પરંતુ આ વખતે અમારા છ છે.” તે પછી, રાહુલ ગાંધી ખૂબ જ ખુશ થઈ ગયા.

😂😂😂😂😂

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आजम खान के बेटे के फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट का रोचक  किस्सा :-
उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री थे आजम खान। खुद को सुपर चीफ मिनिस्टर समझते थे। अभी इन दिनों वे अपने साहबजादे यानी पुत्र अब्दुल्ला आजम खान के साथ जेल में बंद है। वैसे तो आजम खान के अपराधों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। पर आज उनके साहबजादे अब्दुल्ला आजम खान के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का यह रोचक किस्सा जानिए।

अब्दुल्ला आजम के पहले birth certificate के अनुसार 1 जनवरी, 1993 को रामपुर में पैदा हुए थे। फिर वो स्कूल गए, वहां उनके अम्मी -अब्बू ने उनकी birth date यही लिखवाई, फिर वो हाईस्कूल में पहुंच गए, अम्मी-अब्बू ने हाईस्कूल के फार्म में फिर से वही birth date लिखाई।

अब्दुल्ला आजम खान “educationist” आजम खान के साहबजादे हैं तो पढ़ाई में होनहार होने ही थे. तो उनका एडमिशन भारत की Harvard मानी जाने वाली Galgotia University में हो गया। करते-करते M.Tech. कर लिए, पर हर जगह birth date 1 जनवरी,1993 ही रही। पासपोर्ट बनवाया तो भी birth date 1 जनवरी,1993 ही बताई।

फिर 2015 में राजनीति में आ गए और आते ही उनका विधायक बनने का मन किया। पर उसके लिए उम्र 25 साल होनी चाहिए जो किसी हिसाब से बैठ नहीं पा रही थी. पर अम्मी-अब्बू अपने लाडले की विधायक बनने की जिद कैसे ना पूरी करते? तो अब birth date बदलनी थी।

तो मैडम ने लखनऊ के नगर निगम को बताया कि उन्हें बहुत जरूरी काम के चलते याद आया है कि उन्होंने अपने बेटे को जन्म 1993 में रामपुर में नहीं बल्कि लखनऊ के Queen Mary Hospital में 1990 में दिया था और नया birth certificate दिया जाए। सपा सरकार थी तो हुक्म की तामील हुई और 3 दिन में नया birth certificate जारी हो गया।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वयं को अचंभित पाया। बहरहाल Date of birth भी बदल गई और Place of Birth भी। पर साथ ही पहला birth certificate खत्म होना जरूरी था। तो 8 मई 2015 को नगरपालिका रामपुर के आफिस में आग लग गई और birth certificate जल कर खाक हो गया। सभी को एक दिन खाक होना है. Birth certificate भी हो गया। इससे सेक्यूलर पत्रकारों का यह दावा सही सिद्ध होता है कि आजम साहब पूरी तरह सेक्यूलर हैं। Birth certificate का विधिवत अंतिम संस्कार कराया गया। चाहते तो कहीं सरकारी फाइलों में दफन भी किया जा सकता था। पर गंगा-जमुनी तहजीब की खातिर दाह संस्कार हुआ।

खैर जो नया birth certificate लखनऊ से जारी हुआ वो duplicate था. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने पाया कि उसका original ना तो हाॅस्पिटल के पास था और ना ही लखनऊ नगर निगम के पास. सुप्रीम कोर्ट हैरान था कि जिसका original नहीं था उसका clone कैसे बन गया?

अब आप क्या जानें जज साहब! अगर फासीवादी सरकार ने आजम साहब की जौहर यूनिवर्सिटी पर ताला ना लगाया होता तो ऐसे बहुत से साइंसदानी करिश्मे देखने को मिल रहे होते. बहरहाल अब्दुल्ला की birth date को लेकर आजम परिवार में चर्चा होती रही थी…मां ने कोर्ट को बताया कि उनके बेटे ने उन्हें बताया कि वो 1993 में नहीं 1990 में पैदा हुआ है….😂

ये बदमाश वकील भी! पता नहीं क्या-क्या उगलवा साॅरी I mean to say admit करा लेते हैं मासूम अल्पसंख्यकों से! खैर Queen Mary Hospital के रजिस्टर के जिस पेज संख्या 174 पर अब्दुल्ला आजम फिर से अवतरित हुए थे उस पर overwriting पाई गई. Hospital की मोहर भी गायब थी. Pregnancy period का झोल अलग था…🤷‍♂️

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम का रजिस्टर खंगाला तो पता चला कि वहां भी एक entry घुसा दी गई थी. इस सब गोलमाल के आधार पर पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम कि विधायकी छीन ली. फर्जी birth certificate बनवाने के लिए फर्जीवाड़ा करने के चलते आजम खान, उनकी पत्नी और बेटे को सजा हो गई. अब इस Fake birth certificate को लगाकर अब्दुल्ला आजम ने एक दूसरा PAN Card भी बनवा लिया था. पूरा परिवार संविधान में विश्वास रखता था तो income tax भी देता था.

मासूम अल्पसंख्यक Income tax पुरानी birth date वाले PAN Card से ही भरता रहा. चुनाव का फार्म भरने पर bank details देनी पड़ती हैं तो याद आया कि ये तो गड़बड़ी हो गई. तो Bank Pass book में बिना Bank की परमिशन के PAN Number बदल दिया. मंत्री का बेटा इतना तो कर ही सकता है. जमानत पर बाहर आए चंद दिन और 55 इंटरव्यू ही हुए थे कि फर्जी कागज दिखाकर दो-दो  PAN Card बनवाने के मामले में फिर से जेल जाना पड़ा है.

पर आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के छात्र पत्रकार साइंस की तरह ही लाॅ में भी कमाल हैं. उनका कहना है कि एक ही अपराध में दो बार सजा दी गई है. सही बात है, किसी ने तमंचा खरीदा. एक मर्डर किया, फिर दूसरा मर्डर किया… पहले मर्डर में सजा हो गई, तो क्या बेचारे अल्पसंख्यक का दूसरा मर्डर माफ नहीं होगा?

एक फर्जी कागज बनाओ, पांच जगह fraud करो…पर सजा एक ही fraud की मिलनी चाहिए…खैर हमारा तो कहना है कि अब्दुल्ला आजम M.Tech. तक पढ़े विद्वान हैं और दो बार जन्मे हैं. इसलिए उन्हें द्विज श्रेष्ठ का दर्जा दिया जाए.

सादर/साभार – सुधांशु टांक

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