प्रियंका वाड्रा का रहस्यमय इतिहास, जो अबतक किसी को नहीं पता…😱😱
प्रियंका वाड्रा राजीव और सोनिया गाँधी की दूसरी सन्तान है, जिसका जन्म 12 जनवरी 1972 को हुआ था। वह राहुल गाँधी से लगभग डेढ़ साल छोटी है। उसका मूल नाम बियांका है। उसकी शिक्षा दिल्ली के स्कूलों में और घर पर हुयी थी।
छुट्टियों के दिनों में जब वह इटली के मिलान शहर में अपनी नानी के यहाँ थी, तो उसकी मुलाकात रावलपिंडी (पाकिस्तान) के मूल निवासीे मुशबीर हसन ज़ैदी से हुयी। शीघ्र ही दोनों में ‘प्यार’ हो गया और इसके कुछ समय बाद ही दोनों ने मिलान के ही बेसलिका सैन लोरेंजो मगलोर चर्च में शादी कर ली। यह बियांका का पहली शादी थी। उसने चर्च में अपना नाम बियांका एम्मा मार्टिना सोनियारो लिखवाया था। इस विवाह के लिये जैदी ने अपना धर्म कैथोलिक ईसाई बताया था। लेकिन विवाह के कुछ समय बाद ही ज़ैदी की संदिग्ध हालत में मौत हो गयी।
उस समय तक प्रियंका गर्भवती हो चुकी थी। जैदी की मौत के कुछ दिनों बाद प्रियंका की बेटी ग्रेटा कोमारो पिस्कोपिया का जन्म हुआ। लेकिन शीघ्र ही उसकी भी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गयी। इस प्रकार उसकी पहली शादी का दुःखद अन्त हो गया और वह भारत लौट आयी। प्रियंका की दूसरी शादी रॉबर्ट बढेड़ा से सन् 1997 में हुआ था। जब दिल्ली में यह खबर फैली कि प्रियंका गाँधी की शादी रॉबर्ट से होने जा रही है, तो सुनकर हर कोई सन्न रह गया।
रॉबर्ट बढेड़ा के पिता का नाम राजेन्द्र बढेड़ा था, जो मुरादाबाद के एक मामूली बर्तन व्यापारी थे। उनका जन्म मुल्तान (वर्तमान में पाकिस्तान) में हुआ था और देश विभाजन के बाद वे मुरादाबाद चले आये थे। उनका पूरा परिवार संघी था, परन्तु उनका विवाह स्कॉटलैण्ड के मूल की एक ब्रिटिश महिला मौरीन मैकडोना के साथ हुआ। यह विवाह किन परिस्थितियों में हुआ था, इस बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन यह सत्य है कि इस विवाह के लिये राजेन्द्र बढ़ेरा ने ईसाई सम्प्रदाय अपना लिया था।
मौरीन से राजेन्द्र बढ़ेरा की तीन सन्तानें हुयीं- दो पुत्र रॉबर्ट तथा रिचर्ड और एक पुत्री मिशेल। राजेन्द्र का व्यापार अच्छा नहीं चलता था, इसलिये उनकी पत्नी दिल्ली के एक प्ले स्कूल में पढ़ाती थीं। किन्हीं अज्ञात सूत्रों के कारण उनके बच्चों का प्रवेश दिल्ली के ब्रिटिश स्कूल में हो गया था। मिशेल और प्रियंका एक ही कक्षा में पढ़़ती थीं। मिशेल ने ही प्रियंका की फ्रेण्डशिप अपने भाई रॉबर्ट से करायी थी। सुरक्षा कारणों से गाँधी परिवार के बच्चों के फ्रेण्ड्स बहुत कम थे, इसलिये मिशेल और रॉबर्ट दोनों सोनिया के निवास ‘10, जनपथ’ आने-जाने लगे थे। धीरे-धीरे रॉबर्ट की फ्रेण्डशिप राहुल से भी हो गयी थी। सोनिया निश्चिन्त थीं कि प्रियंका की सहेली मिशेल और राहुल के फ्रेण्ड रॉबर्ट हैं। उस समय तक राजीव गाँधी की हत्या हो चुकी थी।
अपनी पहली असफल शादी के बाद हताश होकर जब प्रियंका भारत लौटी, तो उसे अपनी पुरानी सहेली मिशेल और दोस्त रॉबर्ट की याद आयी। एक दिन वह अनाथाश्रम के बच्चों की सेवा के बहाने घर से निकली और किसी को बताये बिना रॉबर्ट के घर मुरादाबाद पहुँच गयी। इधर दिल्ली में उसकी खोज शुरू हुयी। जब वह अपने-आप लौट आयी, तो पूछताछ हुयी।
जासूसों ने सोनिया को ख़बर दी कि आपकी बेटी रॉबर्ट से इश्क लड़ा रही है। यह जानकर सोनिया बहुत परेशान हुयीं। उन्होंने प्रियंका को ऊँच-नीच समझाने की ज़िम्मेदारी कांग्रेस नेताओं अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी और मोतीलाल वोरा को दी। सबने प्रियंका को बहुत समझाया और उसके राजनैतिक भविष्य की भी दुहायी दी, परन्तु प्रियंका पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। इधर प्रियंका अड़ गयी, तो उधर सोनिया टस-से-मस नहीं हुयी। वैसे भी राजेन्द्र बढेड़ा का परिवार पुराना संघी था।
कशमकश चल ही रही थी कि रॉबर्ट बढेड़ा की माँ मौरीन मैकडोना ने अपने रोमन कैथोलिक होने का न जाने क्या जादू चलाया कि सोनिया अचानक मान गयीं। वास्तव में सोनिया ने रॉबर्ट से प्रियंका की शादी अपनी पोल खुलने के डर से की थी, क्योंकि जिस समय सोनिया इंग्लैण्ड में एक कैन्टीन के बार में काम करती थी, उसी समय उसी जगह रॉबर्ट की माँ मौरीन भी यही काम करती थी। मौरीन को सोनिया और माधव राव सिन्धिया की रास लीला की बात भी पता थी और सोनिया के नये पुराने सभी यारों के बारे में भी सब पता था। मौरीन यह भी जानती थी कि किन-किन लोगों के साथ सोनिया के अवैध सम्बन्ध थे।
रॉबर्ट-प्रियंका की शादी इस शर्त पर तय हुयी थी कि राजेंन्द्र बढेड़ा का परिवार गाँधी परिवार से किसी तरह का कोई मेलजोल या रिश्तेदारी नहीं रखेगा और इनकी राजनैतिक साख का लाभ उठाने का कोई प्रयास नहीं करेगा। अन्ततः फरवरी 1997 में प्रियंका गाँधी की शादी हिन्दू विधि से रॉबर्ट बढेड़ा से हो गयी, जबकि दोनों ईसाई हैं। सोनिया गाँधी को इस ‘बढेड़ा’ सरनेम से बहुत चिढ थी और राजनैतिक दृष्टि से भी यह नाम इन्हें सूट नहीं करता था। इसलिये सबसे पहले उन्होंने इसे ‘बढेड़ा’ से बदलकर ‘वाड्रा’ कर दिया, ठीक वैसे ही जैसे कभी फिरोज घैंडी का कुलनाम बदलकर ‘गाँधी’ कर दिया गया था।
रॉबर्ट वाड्रा को देखने पर आश्चर्य होता है कि इस मामूली शक्ल-सूरत के कुछ हद तक कुरूप आदमी की शादी प्रियंका गाँधी जैसी लड़की से कैसे हुयी होगी, जो अपनी दादी जैसी नाक के कारण आकर्षक लगती है। परन्तु ‘होइ है सोइ जो राम रचि राखा’। सोशल मीडिया में जैसे राहुल गाँधी का नाम ‘पप्पू’ प्रसिद्ध हो गया है, वैसे ही प्रियंका गाँधी वाड्रा को ‘पिंकी डार्लिंग’ कहकर पुकारा जाता है।
(चित्र में- रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका वाड्रा विवाह के समय)
😐😐😐😑😑😑🤨🤨🤨🤔🤔🤔
बहुत लोचा 😏😏
