ઝલકારી બાઈ ઝાંસીની રાણી લક્ષ્મીબાઈની નિયમિત સેનામાં મહિલા પાંખ ‘દુર્ગા દળ’ની સેનાપતિ હતી. તે લક્ષ્મીબાઈ જેવી જ દેખાતી હતી, તેથી દુશ્મનને ગેરમાર્ગે દોરવા માટે તે રાણીના વેશમાં લડતી હતી.
1858 માં, જ્યારે જનરલ સર હ્યુ રોઝની આગેવાની હેઠળની બ્રિટિશ સેનાએ ઝાંસી કિલ્લા પર હુમલો કર્યો અને તેને ઘેરી લીધો, ત્યારે ઝલકરીબાઈએ પોતે રાણી લક્ષ્મીબાઈનો વેશ ધારણ કરીને લશ્કરની કમાન સંભાળી અને ઘણા અંગ્રેજોને મારી નાખ્યા.
અંગ્રેજો ઝલકારી બાઈની સાચી ઓળખ વિશે અચોક્કસ હતા અને ઝલકારી બાઈના સૂચન પર રાણી લક્ષ્મીબાઈએ તેમના પુત્ર સાથે કિલ્લો છોડી દીધો હતો.
જેના માથે ન તો કોઈ રાજ્યનો તાજ હતો, ન તો કોઈ રાજવી પરિવારનું નામ હતું, છતાં તે પોતાની ધરતી માટે, પોતાના દેશ માટે, પોતાની રાણી માટે લડાઈ લડી .
ઝલકારીબાઈની હિંમત અને નેતૃત્વ ક્ષમતાથી પ્રભાવિત થઈને અંગ્રેજોએ કહ્યું હતું… “જો ભારતની એક ટકા મહિલાઓ પણ તેમના જેવી થઈ જશે તો બ્રિટિશ સરકારે ટૂંક સમયમાં ભારત છોડવું પડશે.”
Day: November 25, 2025
अंधा अनुकरण
आज में एक अत्यंत बोधप्रद कहानी आपके साथ शेयर कर रहा हू जो मेने बचपन में सुनी थी। एक बार की बात है जब एक गाव में एक महाराज सत्यनारायण देव की कथा कर रहे थे… गाव के सभी भक्त कथा का रसपान करने वहा आये हुए थे। सभी ने मन लगाकर कथा सुनी कथा जब पूर्ण हो गई तब कथा करने वाले महाराज को नियम अनुसार दक्षिणा और अनाज देने के लिए भक्त कतार में खड़े हो गए।
अनाज/दक्षिणा देते समय कतार में सबसे आगे एक स्त्री खड़ी थी, उसने अनाज व दक्षिणा तो दिया साथ में महाराज के ललाट पर कुमकुम तिलक भी किया। तिलक करने के बाद वह स्त्री नीचे एक पीपल के वृक्ष का पत्ता पड़ा था, उस पर कुमकुम लगा के चली गई।
कतार में सब खड़े थे सबने यह देखा, और एक के बाद एक सभी वही करने लगे. सब महाराज को तिलक लगाते और नीचे पड़े पत्ते पर भी तिलक करते। ऐसा उन सभी लोगो ने किया जो कतार में खड़े थे। महाराज अपनी दक्षिणा बटोरने में व्यस्त थे।
लेकिन वहा एक सज्जन युवक यह सब देख रहा था… उसके मन प्रश्न हुआ की “सब महाराज को तिलक कर रहे हे वहां तक तो ठीक है, लेकिन नीचे पड़े पत्ते पर सब तिलक क्यों कर रहे है?” उसने यह प्रश्न सभी से पूछा सब का एक ही उत्तर था “आगे वाला कर रहा हे इस लिए” तब वह युवक सबसे पहले जो स्त्री खड़ी थी उसके घर गया क्योकि अब तक वो घर जा चुकी थी। वहा पहुँचने के बाद उस युवक ने उस स्त्री से पूछा “आपने उस पीपल के पत्ते पर तिलक क्यों किया?” स्त्री ने कहा… “केसा तिलक? मेने तो वहा मेरा जो कुमकुम वाला हाथ था उसको पोछने के लिए उस पत्ते का उपयोग किया…” वह युवक जोर-जोर से हसने लगा लोगो की मूर्खता पर और अपने घर चल दिया…
मित्रों इसे कहा जाता है अंधानुकरण…. आज यह सार्वत्रिक देखने को मिल रहा है। चाहे वह सामजिक क्षेत्र हो, राजनीति, अर्थकारण, शिक्षण या आध्यात्म. हर जगह पर मात्र अंधानुकरण।
सबसे ज्यादा यह आध्यात्म और धर्म में आज छुपा हुआ है। हमारा वैदिक धर्म सत्य और विज्ञान की नीव पर खड़ा है प्रत्येक कृति के पीछे तर्क और विज्ञान आवश्यक हे।
धीरज खुराना जी की और से साभार
मोहनदास गाँधी जी द्वारा शिवा बावनी का विरोध और उसे प्रतिबंधित करवाना यह सबसे बड़ा तुष्टिकरण था।
शिवाबावनी साहित्यिक और ऐतिहासिक रचना हैं जिसमें 52 छंदों में शिवाजी महाराज जी की वीरता की प्रशंसा की गई हैं।
एक छंद में यह कथन हैं की अगर वीर शिवाजी न होते तो सार देश मुसलमान बन जाता।
यह छंद इस प्रकार था:-
कुम्भकरण असुर अवतारी औरंगजेब, काशी प्रयाग में दुहाई फेरी रब की।
तोड़ डाले देवी देव शहर मुहल्लों के, लाखों मुस्लमान किये माला तोड़ी सबकी।।
‘भूषण’ भगत भाग्यों काशीपति विश्वनाथ,और कौन गिनती में भूली गति भव की।
काशी कर्बला होती मथुरा मदीना होती, शिवाजी न होते तो सुन्नत होती सबकी।।
इतिहास चाहे कितना भी कड़वा क्यूँ न हो पर हैं तो वो सत्य।
हिन्दू मुस्लिम एकता के नाम पर गाँधी जी मुसलमानों की सभी नाजायज मांगे मानते गये जिसका परिणाम भारत का विभाजन निकला। विडंबना यह है कि हमारे पाठयक्रम में आज भी अकबर को महान बताया जाता है जबकि वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप के गुणगान करने में सेकुलरता को खतरा हो जाता हैं।
इसका अंतिम परिणाम क्या होगा पाठक स्वयं विचारे।
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मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान के पाकिस्तानी कनेक्शन का खुलासा, योगी सरकार ने 4 अधिकारी निलंबित किए!
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बेहद गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह पूरा मामला आज़मगढ़ के मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान से जुड़ा है, जिसके पाकिस्तान से संदिग्ध और अवैध संबंध पाए गए थे। इसके बावजूद, वह विदेश में रहकर भी वर्षों तक वेतन, चिकित्सा अवकाश और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) जैसी सुविधाएं लेता रहा। जांच में सामने आया है कि विभाग के कुछ अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत के कारण यह सब संभव हो पाया।
मामले की पृष्ठभूमि: कैसे खुला पूरा राज?
शमशुल हुदा खान उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक मदरसे में कार्यरत था। लेकिन वह लंबे समय से भारत से बाहर रह रहा था और इस दौरान उसकी गतिविधियों की निगरानी के दौरान उसके पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध संपर्कों के इनपुट सुरक्षा एजेंसियों को मिले।
एजेंसियों ने पाया कि वह विदेश में मौजूद रहने के बावजूद यूपी सरकार के वेतन ढांचे और सेवा लाभों का फायदा उठाता रहा।
जब उसकी फाइल की विस्तृत जांच की गई, तो कई अनियमितताएं उजागर हुईं
हुदा विदेश में रहकर भी लंबे समय तक वेतन लेता रहा
उसे चिकित्सा अवकाश भी मंजूर किया गया
वह VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेकर लाभ भी प्राप्त कर गया
कई दस्तावेजों पर बिना उचित सत्यापन के हस्ताक्षर किए गए
विभाग ने उसकी उपस्थिति, यात्रा इतिहास या पहचान की जांच कभी ठीक से नहीं की
इन सभी तथ्यों ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन को चौंका दिया।
सरकार की सख्त प्रतिक्रिया: 4 अधिकारी निलंबित
जैसे ही पूरी रिपोर्ट सामने आई, योगी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार बड़े अधिकारियों को निलंबित कर दिया। उनका आरोप है कि उन्होंने:
दस्तावेजों की सही जांच नहीं की
बेनिफिट जारी करने से पहले सत्यापन नहीं कराया
विदेशी संपर्कों वाले व्यक्ति की सूचना उच्च अधिकारियों को नहीं दी
नियमों की अनदेखी कर लाभ जारी किए
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ निलंबन नहीं, बल्कि आगे की कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश सरकार का संदेश: भ्रष्टाचार और सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस
योगी सरकार पूर्व से ही साफ कर चुकी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ माना जा रहा है, क्योंकि:
शिक्षक के पाकिस्तान से संदिग्ध रिश्ते पाए गए
उसने विदेश से कार्यरत रहते हुए सरकारी लाभ लिए
विभागीय अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को आसान बनाया
सरकार ने कहा कि “ऐसे मामलों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करते पाया गया, तो कठोरतम कार्रवाई होगी।”
कैसे होती रही अनियमितता? पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में
इस मामले ने विभागीय निगरानी सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि—
इतने लंबे समय तक किसी ऑफिसर ने उसकी अनुपस्थिति क्यों नहीं जांची?
उसके पाकिस्तान कनेक्शन की जानकारी मिलने के बाद भी क्या कार्रवाई हुई?
उसके अवकाश और वेतन की फाइल हर बार कैसे पास होती रही?
डिजिटल रिकॉर्ड में उसकी लोकेशन विदेश दिखने के बावजूद, इसे क्यों नहीं संज्ञान में लिया गया?
इसके बाद अब विभाग की अन्य फाइलों की भी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं और भी ऐसे मामले तो नहीं हैं।
सख्ती का असर: दूसरे जिलों में भी बढ़ा अलर्ट
इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में मदरसा शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़े विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि:
किसी भी कर्मचारी की अंतरराष्ट्रीय यात्रा की जांच अनिवार्य है
पासपोर्ट और वीज़ा की कॉपी रिकॉर्ड में रखी जाए
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट दी जाए
वेतन और सेवा लाभ देने से पहले भौतिक सत्यापन अनिवार्य है
सरकार ने साफ कहा है कि आगे से कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
जनता की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
जैसे ही मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर इस पर बड़ी बहस शुरू हो गई। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इतने वर्षों तक किसी को पता कैसे नहीं चला?
कई लोग सरकार की इस कार्रवाई को सही बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग विभागीय सिस्टम की कमजोरी पर नाराजगी जता रहे हैं।
सरकार का सख्त रुख और आने वाला बदलाव
यह घटना साबित करती है कि उत्तर प्रदेश सरकार अब किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या सुरक्षा जोखिम को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
जिस शिक्षक ने विदेश से अवैध संपर्क बनाकर लाभ उठाए और जिसने सिस्टम का दुरुपयोग किया—उसके खिलाफ सख्ती तो होगी ही, साथ ही जिन अधिकारियों ने यह सब होने दिया, उन्हें भी सजा मिलेगी।
इस कार्रवाई का बड़ा संदेश है—
राष्ट्र की सुरक्षा और सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता से खिलवाड़ करने वालों पर अब सीधी कार्रवाई होगी।
The Uttar Pradesh government has taken strict action after a madrasa teacher from Azamgarh, Shamsul Huda Khan, was found to have suspicious Pakistan links while illegally receiving salary, medical leave and VRS benefits from the Minority Welfare Department. The government has suspended four officials for allowing these illegal benefits, highlighting keywords like UP government, Pakistan links, madrasa teacher case, corruption, national security, and officials suspended, which boosts the visibility of this article in search results.

36.5 लाख करोड़ की सौगात कोरपरेट जगत को कांग्रेस ने दी तो गुनाहगार नरेन्द्र मोदी क्यों.?
👉🏿राहुल गाँधी को देश से बताना चाहिए कि जिस विजय माल्या की कम्पनी किंगफिशर पर फरवरी 2012 में अकेले स्टेटबैंक ऑफ़ इंडिया के 1457 करोड़ रू बकाया थे और वो उस कर्ज़ को चुका नहीं रहा था उसी विजय माल्या की उसी कम्पनी किंगफिशर को फरवरी 2012 में ही स्टेटबैंक ऑफ़ इंडिया ने 1500 करोड़ रू का और क़र्ज़ क्यों और किसके कहने पर दे दिया था
👉🏿राहुल गाँधी को देश से यह भी बताना चाहिए कि कारपोरेट जगत को 36 .5 लाख करोड़ की इस तथाकथित कर्ज़ माफ़ी की सौगात उनकी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने क्यों और किसके कहने पर दी थी तथा उसकी इस सौगात से देश के गरीबों का, देश के किसानों का, देश के आम आदमी का क्या कितना और कैसा भला हुआ था.?
👉🏿केंद्र की सत्ता से कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की विदाई से केवल 6 महीने पहले, 15 नवम्बर 2013 को मुम्बई में आयोजित बैंकर्स कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए रिजर्व बैंक के तत्कालीन डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने बताया था कि देश के बैंकों ने स्वयम द्वारा दिए गए 1 लाख करोड़ से अधिक के कर्ज़ को बट्टे खाते में डाल दिया है. केसी चक्रवर्ती द्वारा दिए गए आंकड़ों की पुष्टि रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गए उस आंकड़े से हो गयी थी जिसमें बताया गया था कि बैंकिंग की भाषा में 2007 से 2013 के बीच बैंकों के Bad Loan में हुई 4,94,836 करोड़ रू की वृद्धि में से 1,41,295 करोड़ रू के कर्ज़ों को बैंकों ने बट्टे खाते में डाल दिया है.
👉🏿अतः राहुल गाँधी को देश से यह बताना चाहिए कि 1,41,295 करोड़ के जिस कर्ज़ को उनकी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने बट्टे खाते में डाल दिया था, बैंकों ने वह कर्ज़ किसको दिया था.? क्या यह कर्ज़ देश के कारपोरेट जगत को नहीं दिया गया था.? इस कर्ज़ की वसूली के लिए उनकी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने उन कारपोरेट घरानों के खिलाफ क्या कैसी और कौन सी कार्रवाई की थी.? यदि नहीं की थी तो क्यों नहीं की थी.?
👉🏿राहुल गाँधी को देश के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उन कारपोरेट घरानों के खिलाफ उनकी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने क्या इसलिए कार्रवाई नहीं की थी क्योंकि वो कारपोरेट घराने राहुल गाँधी/सोनिया गाँधी या फिर मनमोहन सिंह के दोस्त थे.?
👉🏿राहुल गाँधी से यह सवाल पूछना इसलिए अनिवार्य और आवश्यक है, क्योंकि राहुल गाँधी आजकल अपने ऐसे ही तर्कों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आक्रमण कर रहे हैं. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनके जिन तथाकथित मित्रों का नाम लेकर राहुल गाँधी आक्रमण कर रहे हैं वो अत्यन्त थोथा, लिजलिजा, फूहड़ और असत्य है. स्वयम रिजर्व बैंक के आंकड़ें ही इस तथ्य की पुष्टि करते हैं.
👉🏿30 सितम्बर 2014 को, अर्थात केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के बनने के केवल 4 महीने बाद उजागर हुए रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार गौतम अडानी की कम्पनी पर बैंकों का 72,632.37 करोड़ रू का कर्ज़ बकाया था तथा रिलायंस समूह(अनिल अम्बानी) पर बैंकों का 1 लाख 13 हज़ार करोड़ रू का कर्ज़ बकाया था.?
👉🏿एस्सार समूह के शशि एवम रवि रूइय्या पर बैंकों का 98,412 करोड़ तथा एयरटेल के मालिक सुनील मित्तल की कम्पनी पर बैंकों का 57,744.3 करोड़ रू का कर्ज़ बकाया था.
👉🏿राहुल गाँधी से देश जानना चाहता है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने क्या अपनी सरकार बनने के 4 महीने के अन्दर ही उक्त कारपोरेट दिग्गजों को इतने भारी भरकम कर्ज़ दे दिए थे.? नहीं ऐसा बिलकुल नहीं है. रिजर्व बैंक के दस्तावेज़ बताते हैं कि यह सारे कर्ज़ कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के शासन में ही दिए गए थे.
👉🏿उपरोक्त आंकड़ें कारपोरेट दुनिया के बड़े दिग्गजों के हैं. यूपीए सरकार की सरकारी कर्ज़ की कृपा से कृतार्थ हुए
👉🏿7 हज़ार करोड़ के कर्ज़दार भगोड़े विजय मालया और रॉबर्ट वाड्रा के व्यवसायिक साथी सहयोगी 19,100 करोड़ के कर्ज़दार DLF के मालिक केपी सिंह सरीखे नाम भी शामिल हैं.
👉🏿राहुल गाँधी को देश से बताना चाहिए कि जिस विजय माल्या की कम्पनी किंगफिशर पर फरवरी 2012 में अकेले स्टेटबैंक ऑफ़ इंडिया के 1457 करोड़ रू बकाया थे और वो उस कर्ज़ को चुका नहीं रहा था परिणामस्वरूप उसके बैंक खाते फ्रीज़ किये जा चुके थे. उसी विजय माल्या की उसी कम्पनी किंगफिशर को फरवरी 2012 में ही स्टेटबैंक ऑफ़ इंडिया ने 1500 करोड़ रू का और क़र्ज़ क्यों और किसके कहने पर दे दिया था तथा इनकमटैक्स विभाग ने क्यों और किसके कहने पर उसके खाते डिफ्रीज कर दिए थे.?
राहुल गाँधी से देश जानना चाहता है कि विजय माल्या किसका दोस्त था…..?